वाक्य-विचार एवं पदबंध: हिंदी व्याकरण के नियम और उदाहरण
वाक्य-विचार एवं पदबंध (SYNTAX AND PHRASE)
वाक्य— सार्थक शब्दों का क्रमबद्ध समूह जिससे कोई भाव स्पष्ट हो, वाक्य कहलाता है, जैसे—
श्याम पुस्तक पढ़ता है।
इस वाक्य से एक भाव स्पष्ट हो जाता है कि “श्याम पुस्तक पढ़ता है ।" उपर्युक्त वाक्य के सभी शब्द सार्थक ही नहीं, वरन् क्रमबद्ध रूप में सजे हुए भी हैं । यदि सभी पद (शब्द) क्रमबद्ध रूप में न हों, तो वाक्य अशुद्ध हो जाएगा, साथ ही अर्थ भी समझ में नहीं आएगा, जैसे—
पढ़ता पुस्तक है श्याम ।
या, है पुस्तक पढ़ता श्याम ।
या, श्याम पुस्तक है पढ़ता ।
वाक्य के भेद
सामान्यतः वाक्यों का वर्गीकरण दो आधारों पर किया जाता है—
(क) रचना के आधार पर
(ख) अर्थ के आधार पर
(क) रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद हैं—
(1) सरल वाक्य, (2) मिश्र वाक्य तथा (3) संयुक्त वाक्य।
(1) सरल वाक्य— जिस वाक्य में एक कर्ता होता है और एक क्रिया होती है उसे सरल वाक्य कहते हैं। दूसरे शब्दों में— जिसमें एक उद्देश्य और एक विधेय रहता है उसे सरल वाक्य कहते हैं, जैसे—
वह पढ़ता है।
बिल्ली दूध पीती है ।
(2) मिश्र वाक्य— जिस वाक्य में एक सरल वाक्य के अतिरिक्त एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य हों उसे मिश्र वाक्य कहते हैं, जैसे—
यह वही घर है जहाँ मैं रहता था ।
(3) संयुक्त वाक्य— जिस वाक्य में दो या दो से अधिक सरल या मिश्र वाक्य किसी अव्यय द्वारा जुड़े हों उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं, जैसे—
शाम हुई और तारे टिमटिमाने लगे । (और—अव्यय)
घनश्याम धनी है, लेकिन बहुत घमंडी है । (लेकिन—अव्यय)
(ख) अर्थ के आधार पर वाक्य के मुख्यतः आठ भेद हैं—
(1) विधिवाचक (Affirmative or Assertive)
(2) निषेधवाचक (Negative)
(3) प्रश्नवाचक (Interrogative)
(4) आज्ञावाचक (Imperative)
(5) इच्छावाचक (Optative)
(6) संदेहवाचक (Suspective)
(7) विस्मयादिबोधक (Exclamatory)
(8) संकेतवाचक (Indicative)
(1) विधिवाचक वाक्य— जिस वाक्य से किसी बात के होने का बोध हो उसे विधिवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
मैं दौड़ता हूँ ।
हवा बह रही है ।
(2) निषेधवाचक वाक्य— जिस वाक्य से किसी बात के न होने का बोध हो उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
मैं नहीं दौड़ता हूँ ।
हवा नहीं बह रही है ।
(3) प्रश्नवाचक वाक्य— जिस वाक्य से किसी प्रकार के प्रश्न किए जाने का बोध हो उसे प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
क्या वह खेलता है ?
वह कैसे खेलता है ?
(4) आज्ञावाचक वाक्य— जिस वाक्य से आज्ञा, आदेश, अनुरोध आदि के भाव प्रकट हों उसे आज्ञावाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
वहाँ मत खेलो।
सदा सच बोलो ।
(5) इच्छावाचक वाक्य— जिस वाक्य से इच्छा या शुभकामना का भाव प्रकट हो उसे इच्छावाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
ईश्वर आपकी मदद करें ।
तुम्हें सफलता मिले ।
(6) संदेहवाचक वाक्य— जिस वाक्य से किसी प्रकार के संदेह का भाव प्रकट हो उसे संदेहवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
पिताजी आए होंगे ।
सोहन खेल रहा होगा ।
(7) विस्मयादिबोधक वाक्य— जिस वाक्य से सुख / दुःख/ आश्चर्य का तीव्र भाव प्रकट हो उसे विस्मयादिबोधक वाक्य कहते हैं, जैसे—
वाह! हम जीते !
आह ! ऐसा दुःख !
(8) संकेतवाचक वाक्य— जिस वाक्य से किसी संकेत या शर्त का बोध हो उसे संकेतवाचक वाक्य कहते हैं, जैसे—
यदि वह परिश्रम करता, तो अवश्य सफल होता ।
तुम पढ़ोगे, तो पास करोगे ।
उपवाक्य
उपवाक्य— जिन क्रियायुक्त पदों से आंशिक भाव व्यक्त हो उन्हें उपवाक्य या वाक्यखंड कहते हैं, जैसे—
यदि वह पढ़ता, यद्यपि वे बीमार थे, तो अवश्य सफल होगा, तथापि मुझसे मिलने आए आदि ।
उपवाक्य के भेद
उपवाक्य या वाक्खंड के दो भेद हैं—
(1) प्रधान उपवाक्य या वाक्यखंड (Principal Clause)
(2) आश्रित उपवाक्य या वाक्यखंड (Subordinate Clause)
(1) प्रधान उपवाक्य— प्रधान उपवाक्य वाक्य का वह हिस्सा है जो स्वतंत्र रूप से अर्थ दे सकता है और दूसरे उपवाक्य पर आश्रित भी नहीं रहता।
(2) आश्रित उपवाक्य— आश्रित उपवाक्य वाक्य का वह हिस्सा है जो स्वतंत्र रूप से न तो लिखा जाता है और न अर्थ दे सकता है। यह आसानी से पहचाना भी जा सकता है। ऐसा वाक्य — कि, क्योंकि, जोकि, ताकि, तो, चूँकि, ज्यों, ज्यों ही, यदि, यद्यपि, जब, जब तक, जहाँ, जहाँ तक, चाहे, मानों, जितना भी, कितना भी आदि शब्दों से आरंभ होता है । निम्नांकित उदाहरणों से ये बातें और स्पष्ट हो जाती हैं—
(i) आप नहीं जानते कि वह कैसा लड़का है । —वाक्य
(क) आप नहीं जानते —प्रधान उपवाक्य(ख) कि वह कैसा लड़का है —आश्रित उपवाक्य
(ii) यदि वह आए, तो मैं जाऊँ। —वाक्य
(क) यदि वह आए —आश्रित उपवाक्य(ख) तो मैं जाऊँ —प्रधान उपवाक्य
वाक्य-संरचना
जिस प्रकार शब्द-रचना के कुछ नियम होते हैं, उसी प्रकार वाक्यसंरचना के भी कुछ अपने नियम हैं । यदि वाक्य संरचना में नियमों का खयाल न रखा जाए, तो वाक्य अशुद्ध हो जाएँगे और उनसे निकलनेवाले भाव भी पूर्णतः स्पष्ट नहीं होंगे । अतः वाक्य संरचना के नियमों की जानकारी आवश्यक है। इसमें मुख्यतः दो बातों पर ध्यान देना जरूरी है—
(1) पदक्रम और (2) अन्वय ।
पदक्रम
आप जानते हैं कि जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होता है, तब वह पद कहलाता है। वाक्य में कर्ता, कर्म, क्रिया, क्रियाविशेषण आदि शब्द (पद) प्रयुक्त होते हैं । किस पद के बाद कौन-सा पद रखा जाए— यह विचार 'पदक्रम' कहलाता है ।
वाक्य-संरचना में पदक्रम के निम्नलिखित नियम हैं—
1. वाक्य में प्रायः कर्ता का स्थान प्रथम और क्रिया का अंतिम होता है, जैसे—
राम खाता है।
लेकिन, जब कर्ता पर ज्यादा बल देना हो, तब यह क्रम उलट जाता है, जैसे—
खाता है राम और नाम लगता है मेरा ।
2. कर्म का स्थान प्रायः कर्ता के बाद और क्रिया के पहले आता है, जैसे—
राम आम खा रहा है । (आम—कर्म)
लेकिन, कर्म पर ज्यादा जोर देना हो, तो 'कर्म' क्रिया के बाद रखें, जैसे—
राम खा रहा है आम और कह रहा है इमली ।
3. वाक्य में यदि दो कर्म हों, तो गौण कर्म पहले आता है और मुख्य कर्म बाद में, जैसे—
मैं सोहन को हिन्दी पढ़ाता हूँ । (सोहन को — गौण कर्म; हिन्दी — मुख्य कर्म)
लेकिन, गौण कर्म पर ज्यादा जोर देना हो, तो उसका क्रम (स्थान) मुख्य कर्म के बाद रखें, जैसे—
मैं हिन्दी सोहन को पढ़ाता हूँ, राम और श्याम को नहीं ।
4. करणकारक का प्रयोग कर्ता के बाद, लेकिन कर्म के पहले होता है, जैसे—
मजदूर हथौड़े से पत्थर तोड़ते हैं। (हथौड़े से—करणकारक)
लेकिन, करणकारक पर ज्यादा जोर देना हो, तो इसका प्रयोग कर्मकारक के बाद करें, जैसे—
मजदूर पत्थर तोड़ते हैं हथौड़े से, हाथ से नहीं ।
5. संप्रदानकारक का प्रयोग कर्ता के बाद, लेकिन कर्म या करण के पहले करें, जैसे—
मैं तुम्हारे लिए आसमान से तारे तोड़ लाऊँगा ।
यदि संप्रदान पर ज्यादा जोर देना हो, तो इसका प्रयोग कर्म या करण के बाद करें, जैसे—
मैं आसमान से तारे तुम्हारे लिए तोड़ लाऊँगा, दूसरे के लिए नहीं ।
6. अपादानकारक का प्रयोग कर्ता के बाद, लेकिन कर्म के पहले करें, जैसे—
छात्र कमरे से बाहर चले गए ।
यदि अपादान पर ज्यादा जोर देना हो, तो कर्ता के पहले इसका प्रयोग करें, जैसे—
कमरे से छात्र बाहर चले गए ।
7. अधिकरणकारक का प्रयोग कर्ता के पहले या बाद, किन्तु कर्म के पहले करें, जैसे—
तुम मैदान में क्रिकेट खेला करो।
या, मैदान में तुम क्रिकेट खेला करो ।
8. यद्यपि संबोधनकारक आठवें स्थान पर रहता है, तथापि इसका प्रयोग हमेशा प्रथम स्थान पर होता है, जैसे—
अरे दोस्त ! जरा इधर आओ । हे सीते! आप क्या चाहती हैं ?
9. विस्मयादिबोधक पद/पदों का प्रयोग वाक्य के शुरू में करें, जैसे—
अहा! कितना सुन्दर दृश्य !
वाह! वाह! अच्छा किया!
10. समुच्चयबोधक पद का प्रयोग उन दोनों पदों के बीच करें जिन्हें जोड़ना हो, जैसे—
राम और सीता आए ।
राम या सीता आई ।
अन्वय
अन्वय का अर्थ होता है— मेल । कर्ता या कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष हों, तभी सही मेल होगा। उसी प्रकार विशेष्य और विशेषण का मेल हो, तभी वाक्य शुद्ध होगा । यहाँ संक्षेप में उपर्युक्त बातों की चर्चा की जा रही है ।
कर्ता और क्रिया का अन्वय
1. कर्म कुछ भी हो, यदि कर्ता में 'ने' चिह्न न हो, तो क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होंगे, जैसे—
लड़का अंडा / अंडे / रोटी / रोटियाँ खाता है ।
लड़की अंडा / अंडे / रोटी / रोटियाँ खाती है।
2. आदरसूचक संज्ञा या सर्वनाम (आप) रहने पर क्रिया सदा बहुवचन में प्रयुक्त होती है, जैसे—
पिताजी आए हैं। आप खाते हैं ।
माताजी आई हैं । आप खाती हैं ।
3. आँसू, प्राण, दर्शन, अक्षत, होश, दाम, बाल, हस्ताक्षर, ओंठ आदि के साथ पुंलिंग और बहुवचन का प्रयोग करें—
उनके आँसू गिरे। आपके हस्ताक्षर हुए।
उनके प्राण निकले । मेरे होश उड़ गए।
4. भिन्न लिंग के दो एकवचनवाले कर्ता यदि चिह्नरहित हों, तो क्रिया सदा बहुवचन और पुंलिंग होती है, जैसे—
माता-पिता आए । वहाँ के नर-नारी अच्छे थे I
राजा-रानी गए। मेरे भाई-बहन लम्बे हैं ।
5. यदि भिन्न लिंग और वचन के अनेक कर्ता विभक्तिरहित हों, तो क्रिया बहुवचन होगी, लेकिन लिंग का निर्धारण अंतिम कर्ता के अनुसार होगा, जैसे—
दो लड़के, तीन औरतें और एक लड़की पढ़ रही हैं ।
तीन औरतें, दो लड़के और एक बालक पढ़ रहे हैं।
6. यदि दो कर्ताओं के बीच विभाजक 'या / अथवा / वा' हो, तो क्रिया का लिंग और वचन अंतिम कर्ता के अनुसार होगा, जैसे—
श्याम अथवा गीता खाती है।
गीता अथवा श्याम खाता है ।
दो लड़कियाँ या एक लड़का खाएगा ।
एक लड़का या दो लड़कियाँ खाएँगी ।
7. उद्देश्य के अनुसार क्रिया दें, विधेय का खयाल न रखें, जैसे—
मर्द औरत बन गया ।
औरत मर्द बन गई ।
राधा कृष्ण बन गईं ।
कृष्ण राधा बन गए ।
8. यदि एक ही वाक्य में तीनों पुरुष कर्ता के रूप में हों, तो उनका क्रम 231 (मैं, हम—1; तू, तुम—2; वह, वे—3) के नियम के अनुसार रखें, जैसे—
तू, वह और मैं अच्छा हूँ । (तू—2; वह—3; मैं - 1) —231
तुम, वे और हम अच्छे हैं। (तुम—2; वे—3; हम—1) —231
9. कई एकवचन कर्ता यदि एक ही अर्थ प्रकट करें, तो क्रिया एकवचन में होगी, जैसे—
मुझे दुःख और अफसोस हुआ ।
आपको श्रद्धा और भक्ति है ।
कर्म और क्रिया का अन्वय
1. किसी वाक्य में कर्ता का 'ने' चिह्न हो, लेकिन कर्म का 'को' चिह्न न हो, तो क्रिया का लिंग, वचन और पुरुष कर्म के अनुसार होगा, जैसे—
राम ने रोटी खाई ।
सीता ने भात खाया ।
गीता ने संतरे खाए ।
2. अब उपर्युक्त परिस्थिति में कर्म के साथ यदि 'को' चिह्न हो, तो क्रिया एकवचन, पुंलिंग और अन्यपुरुष में होगी, जैसे—
राम ने रोटी को खाया ।
सीता ने भात को खाया ।
गीता ने संतरे को खाया ।
3. विभक्तिसहित कर्तावाले वाक्य में भिन्न लिंग के अनेक कर्म चिह्नरहित हों, तो क्रिया पुंलिंग और बहुवचन में होगी, जैसे—
राम ने रोटी और भात खाए ।
राम ने भात और रोटी खाए ।
सीता ने रोटी और भात खाए ।
सीता ने भात और रोटी खाए ।
4. किसी वाक्य में कर्ता विभक्तिसहित हो और कर्म न हो या उसके बदले कोई क्रियार्थक संज्ञा हो, तो क्रिया सदा एकवचन, पुंलिंग और अन्यपुरुष में होगी, जैसे—
(गणेश) मुझे पढ़ना नहीं आता ।
(गीता) मुझे पढ़ना नहीं आता ।
संज्ञा और सर्वनाम का अन्वय
1. संज्ञा के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार सर्वनाम रखें, जैसे—
मोहन अच्छा लड़का है; वह मेरा भाई है।
गणेश और गोपी छात्र हैं; वे मेरे दोस्त हैं ।
टेबुल पर चार कलमें हैं; ये सभी मेरी हैं ।
2. आदर भाव व्यक्त करने के लिए एकवचन संज्ञा के लिए सर्वनाम का बहुवचन रूप प्रयुक्त होता है, जैसे—
श्री मधुकर सिन्हा मेरे चाचा हैं; वे एक शिक्षक हैं।
विशेष्य और विशेषण का अन्वय
1. विशेषण विशेष्य के पहले आए या बाद में, यह सदा विशेष्य के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार आता है, जैसे—
वह अच्छा लड़का है। वे अच्छे लड़के हैं।
वह लड़का अच्छा है । वे लड़के अच्छे हैं।
2. अगर एक ही विशेषण के अनेक विशेष्य हों, तो विशेषण का लिंग, वचन और पुरुष प्रथम विशेष्य के अनुसार आता है, जैसे—
उजला कुरता, टोपी और जूते लाओ।
उजली टोपी, कुरता और जूते लाओ।
उजले जूते, टोपी और कुरता लाओ ।
वाक्य के अंग (घटक)
वाक्य के मुख्यतः दो अंग होते हैं—
(1) उद्देश्य (Subject)
(2) विधेय (Predicate)
(1) उद्देश्य— वाक्य के अन्तर्गत जिसके बारे में कुछ कहा जाए, उसे उद्देश्य कहते हैं, जैसे—
शुभम् पुस्तक पढ़ता है।
उपर्युक्त वाक्य से स्पष्ट है कि यहाँ 'शुभम्' के बारे में कुछ कहा गया है, अतः 'शुभम्' उद्देश्य हुआ ।
किसी वाक्य में उद्देश्य मुख्यतः संज्ञा/ सर्वनाम / विशेषण/ क्रियाविशेषण आदि के रूप में प्रयुक्त होता है, जैसे—
(क) संज्ञा के रूप में— शुभम् पढ़ता है । (शुभम् — उद्देश्य)
(ख) सर्वनाम के रूप में— मैं पढ़ता हूँ । (मैं — उद्देश्य)
(ग) विशेषण के रूप में— मेहनती छात्र पढ़ता है। (मेहनती छात्र — उद्देश्य)
(घ) क्रियाविशेषण के रूप में—धीरे-धीरे पढ़ो। (धीरे-धीरे — उद्देश्य)
(ङ) क्रियार्थक संज्ञा के रूप में— पढ़ना जरूरी है । (पढ़ना — उद्देश्य)
(2) विधेय— उद्देश्य के संबंध में जो कुछ कहा जाए उसे विधेय कहते हैं, जैसे—
नूपुर आम खाती है। (आम खाती है—विधेय)
यहाँ ‘आम खाती है' विधेय है, क्योंकि यह उद्देश्य (नूपुर) के बारे में कुछ कह रहा है ।
किसी वाक्य में विधेय मुख्यतः संज्ञा/विशेषण/ क्रियाविशेषण आदि के रूप में प्रयुक्त होता है, जैसे—
(क) संज्ञा के रूप में — वह एक छात्र है । (एक छात्र है—विधेय)
(ख) विशेषण के रूप में — वह मेहनती है । (मेहनती है—विधेय)
(ग) क्रियाविशेषण के रूप में — वह कब गया ? (कब गया—विधेय)
लिंग, वचन और काल के अनुसार वाक्यों का रूपांतर
लिंग, वचन और काल के अनुसार वाक्यों का परिवर्तन सरल वाक्य में ही नहीं होता, वरन् संयुक्त और मिश्र वाक्यों में भी होता है, जैसे—
1. लिंग-भेद के कारण वाक्य रूपांतर :
पुंलिंग स्त्रीलिंग
सरल वाक्य — वह लिखता है। वह लिखती है।
मिश्र वाक्य — उसने कहा कि मैं लिखता हूँ । उसने कहा कि मैं लिखती हूँ।
संयुक्त वाक्य — मैं लिखता हूँ और तुम पढ़ते हो। मैं लिखती हूँ और तुम पढ़ती हो।
2. वचन-भेद के कारण वाक्य-रूपांतर :
एकवचन बहुवचन
सरल वाक्य — मैं पढ़ता हूँ। हमलोग पढ़ते हैं ।
मिश्र वाक्य — उसने कहा कि मैं लिखता हूँ। उनलोगों ने कहा कि हमलोग लिखते हैं।
संयुक्त वाक्य — वह लिखता है और तू पढ़ता है। वे लोग लिखते हैं और तुमलोग पढ़ते हो ।
3. काल-भेद के कारण वाक्य-रूपांतर :
वर्तमानकाल भूतकाल भविष्यत् काल
सरल वाक्य — राधा जाती है। राधा गई। राधा जाएगी।
मिश्र वाक्य — वह कहता है उसने कहा कि वह कहेगा कि मैं लिखूँगा ।
कि मैं लिखता हूँ। मैं लिखता था ।
संयुक्त वाक्य — वह लिखता है और उसने लिखा और वह लिखेगा और तुम पढ़ोगे ।
तुम पढ़ते हो। तुमने पढ़ा ।
अभ्यास
1. वाक्य की परिभाषा सोदाहरण स्पष्ट करें ।
2. रचना के आधार पर वाक्य के भेद उदाहरण के साथ लिखें ।
3. अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद उदाहरणसहित लिखें ।
4. उपवाक्य किसे कहते हैं ? इसके भेद सोदाहरण लिखें ।
5. उद्देश्य और विधेय से आप क्या समझते हैं ? इन्हें सोदाहरण स्पष्ट करें ।
6. मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य की परिभाषा सोदाहरण लिखें ।
7. लिंग, वचन और काल-भेद के अनुसार 'वह पढ़ता है' वाक्य का रूपांतर करें ।
8. निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित अंशों के नीचे प्रधान उपवाक्य और आश्रित उपवाक्य लिखें—
(क) यह वही घर है जहाँ मैं रहता था ।
(ख) जो सोता है, सो खोता है।
(ग) राम ने कहा कि मैं दिल्ली जाऊँगा।
(घ) रात हुई और चौकीदार पहरा देने लगा ।
9. निम्नलिखित वाक्य किस प्रकार के वाक्य (सरल, संयुक्त या मिश्र) हैं ? इन्हें सामने कोष्ठकों में लिखें—
(क) वह खाना खाकर सो गया । ( )
(ख) उसने कहा कि मैं बीमार हूँ। ( )
(ग) मैं पढ़ता हूँ और तुम खेलते हो। ( )
10. निम्नलिखित शब्दों से वाक्य-रचना करो—
(1) खुराक
(2) हरदम
(3) नाराज
(4) आसान
(5) प्रसन्नता
(6) आनंद
(7) आकर्षित
(8) स्वास्थ्य
(9) हँसता
11. निम्नलिखित में कौन-सा मिश्र वाक्य है ?
(1) मैं देखते ही चल दिया ।
(2) उसने कहा कि तुम ईमानदार हो।
(3) वह हँसते-हँसते रोने लगा ।
(4) वह रोने लगा ।
12. निम्नलिखित में कौन-सा संयुक्त वाक्य है ?
(1) वह यहाँ आया था।
(2) मैंने देखा कि वह वहाँ नहीं है ।
(3) हम आए और वे चले गए।
(4) वह वहाँ है इसलिए मैं यहाँ हूँ।
13. निम्नलिखित शब्द-समूहों को क्रम से लिखकर अर्थपूर्ण वाक्य बनाइए—
(1) मैं / पास / जाऊँगा/अवश्य/हो
(2) राम/है/ खाता/आम
(3) बड़ा/मैं/जाएँगे / आगरा/भाई/ और
(4) काम/करो/जरूर/उसे / पूरा/जो/करो
(5) पाठ / नहीं/ अपना /मैंने/याद/किया
(6) पढ़ा / हमने / नहीं/ पाठ/अपना/आज
(7) सत्य/सदा/बोलेगा / ईमानदार
(8) मार्ग/होते / पहाड़ी / हैं / दुर्गम
(9) था/विश्वास/पर/ गहरा / उनकी / प्रतिभा / उन्हें
(10) होतीं / नहीं/सोना / वस्तुएँ / सभी चमकीली
(11) सबसे/महीना / का/छोटा/है/ वर्ष / फरवरी
(12) बहुत/चीज/है/ उपयोगी/छाता
(13) आकाश/भरता/ वायुयान/में/है/ उड़ान
(14) पर्यावरण/हमें / पेड़/ को/लगाकर / बचाना / चाहिए
(15) सर्वोच्च/विश्व/ का/है/ पर्वत/ हिमालय
(16) चक्कर/के/चारों ओर/लगाती/सूर्य/है/पृथ्वी
(17) हिंदुओं/है/पवित्र / के लिए / गंगा/ नदी/एक
(18) निश्चय / ही/पर/ करना/भरोसा / चाहिए / स्वयं
(19) हूँ/अपने/भाई/मैं/ स्कूल / साथ / के/जाती/प्रतिदिन
(20) फुरतीला/है/ सदा / और / स्वस्थ/रहता / जागनेवाला / सुबह
14. निर्देशानुसार वाक्यों को बदलकर लिखिए—
(1) श्याम प्रथम आया है । (विस्मयादिबोधक वाक्य में)
(2) प्रदेश में धान की औसत पैदावार हुई । (निषेधात्मक वाक्य में)
(3) शिक्षाकर्मियों ने पौध रोपण कार्यक्रम में भाग लिया। (एकवचन वाक्य में)
(4) क्या अनीता खा रही है ? (भूतकाल वाक्य में)
(5) स्कूल परिसर की सफाई प्रतिदिन होनी चाहिए । (प्रश्नवाचक वाक्य में)
(6) घड़े में पानी नहीं है । (प्रश्नवाचक वाक्य में)
(7) मेरा मित्र आ गया है। (निषेधवाचक वाक्य में)
(8) मूसलधार वर्षा हो रही है। (विस्मयादिबोधक वाक्य में)
(9) हम एक गीत गाते हैं । (भूतकाल वाक्य में)
(10) लड़कों ने कल हॉकी खेली। (भविष्यत् काल वाक्य में)
(11) लड़का खेल रहा है। (बहुवचन वाक्य में)
(12) कवि कहता है । (बहुवचन वाक्य में)
(13) मेरी बहन पढ़ रही है । (बहुवचन वाक्य में)
(14) उसने सारे प्रयत्न किए । (निषेधात्मक वाक्य में)
(15) मैंने हॉकी खेली। (भविष्यत् काल वाक्य में)
(16) तुम बस रुकने के स्थान पर चले जाओ। (मिश्र वाक्य में)
(17) अभिषेक गीत गा रहा है । (विस्मयादिबोधक वाक्य में)
पदबंध
पदबंध— वाक्य के उस अंश को जिसमें एक से अधिक पद परस्पर संबद्ध होकर पूर्ण अर्थ देते हैं, पदबंध कहते हैं, जैसे—
थोड़ा खानेवाला आज अधिक कैसे खाएगा ?
इस वाक्य में ‘थोड़ा खानेवाला' पदबंध के रूप में प्रयुक्त है, अर्थात् यहाँ दो पदों का बंधन है । पदबंध की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं—
(क) इसमें एक से अधिक पद का होना आवश्यक है ।
(ख) पदबंध एक तरह से वाक्यांश होता है।
(ग) इसके सभी पद एक इकाई का अर्थ देते हैं।
पदबंध के भेद
पदबंध के मुख्यतः पाँच भेद हैं—
1. संज्ञा - पदबंध, 2. सर्वनाम - पदबंध, 3. विशेषण पदबंध, 4. क्रिया- पदबंध और 5. क्रियाविशेषण पदबंध ।
1. संज्ञा-पदबंध— संज्ञा के रूप में प्रयुक्त पद-समूह को संज्ञा-पदबंध कहते हैं, जैसे—
नेपाल के प्रधानमंत्री आज भारत-यात्रा पर हैं ।
इस वाक्य में ‘नेपाल के प्रधानमंत्री' संज्ञा-पदबंध है।
2. सर्वनाम-पदबंध— सर्वनाम के रूप में प्रयुक्त पद-समूह को सर्वनाम-पदबंध कहते हैं, जैसे—
सदा सत्य बोलनेवाले (आप) असत्य कैसे बोल रहे हैं ?
इस वाक्य में प्रयुक्त 'सदा सत्य बोलनेवाले (आप) ' सर्वनाम-पदबंध है ।
3. विशेषण-पदबंध— विशेषण के रूप में प्रयुक्त पद-समूह को विशेषण-पदबंध कहते हैं, जैसे—
तालाब में खिले हुए फूल देखो ।
यहाँ ‘तालाब में खिले हुए' विशेषण पदबंध है।
4. क्रिया-पदबंध— क्रिया के रूप प्रयुक्त पद-समूह को क्रिया-पदबंध कहते हैं, जैसे—
देखो, वह गिरता पड़ता आ रहा है।
इस वाक्य में 'गिरता पड़ता आ रहा है' क्रिया-पदबंध है।
5. क्रियाविशेषण पदबंध— क्रियाविशेषण के रूप में प्रयुक्त पद-समूह को क्रियाविशेषण-पदबंध कहते हैं, जैसे—
वह वर्ष के अंत तक आएगा ।
इस वाक्य में 'वर्ष के अंत तक' क्रियाविशेषण-पदबंध है ।
विभिन्न पदबंधों का शब्दक्रम
1. संज्ञा - पदबंध का शब्दक्रम — इसे वाक्य के आरंभ में रखा जाता जैसे—
दशरथ-पुत्र राम ने रावण को मार गिराया ।
2. सर्वनाम-पदबंध का शब्दक्रम — इसे लुप्त सर्वनाम के पहले रखा जाता है, जैसे—
मेहनत करनेवाला (वह) कैसे फेल हो गया ?
3. विशेषण पदबंध का शब्दक्रम — इसे वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम के पहले रखा जाता है, जैसे—
तालाब में खिले हुए फूल देखो ।
4. क्रिया-पदबंध का शब्दक्रम — इसे वाक्य की समापिका क्रिया (अंतिम क्रिया) के पहले रखा जाता है, जैसे—
वह आधी रात तक आया ।
अभ्यास
1. पदबधं की परिभाषा सोदाहरण लिखें ।
2. पदबंध के भेद उदाहरणसहित लिखें ।
3. विभिन्न पदबंधों का शब्दक्रम सोदाहरण लिखें ।
4. इन वाक्यों में प्रयुक्त पदबंधों को रेखांकित करें और इनके भेद लिखें—
(क) नेपाल के प्रधानमंत्री आज भारत-यात्रा पर हैं। ( )(ख) सोहन महीने के अंत तक जाएगा । ( )(ग) देखो, वह गिरता पड़ता आ रहा है । ( )(घ) आकाश में टिमटिमाते हुए तारे देखो । ( )(ङ) इतनी मेहनत करनेवाला (वह) असफल रहा। ( )
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