शब्द रूप (शब्द-भंडार): हिंदी व्याकरण के नियम और उदाहरण

 

शब्द रूप (शब्द-भंडार) (WORD STOCK)

विभिन्न शब्दों की जानकारी एवं उनके शुद्ध प्रयोग से भाषा का विकास होता है। अतः इस अध्याय में पर्यायवाची शब्द, श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द, विपरीतार्थक शब्द आदि की संक्षिप्त सूची दी जा रही है ।

पर्यायवाची शब्द

किसी शब्द के समान अर्थवाले अन्य शब्दों को पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं, जैसे— 'आँख' के बदले 'नेत्र, नयन, लोचन' आदि शब्द पर्यायवाची शब्द कहे जाते हैं। ऐसे शब्दों की सूची नीचे प्रस्तुत है—

अनुचर : अनुयायी, आज्ञाकारी, नौकर, सेवक, सहायक, खादिम । 
अपमान : अनादर, अवज्ञा, अवमान, अवहेलना, तिरस्कार । 
अभिमान : अहं, अहंकार, गर्व, घमंड, दर्प, दंभ, मद ।
अमृत : अमिय, अमी, पीयूष, मधु, सुधा, सोम ।
असुर : दैत्य, दनुज, दानव, राक्षस, निशिचर, निशाचर, रजनीचर । 
आँख : अक्षि, चक्षु, दृक्, दृष्टि, नयन, नेत्र, लोचन, विलोचन । 
आकाश : अम्बर, अंतरिक्ष, अनंत, गगन, तारापथ, नभ, व्योम।
आग : अग्नि, अनल, ज्वलन, दहन, पावक, शुष्मा ।
आनंद : उल्लास, खुशी, प्रसन्नता, सुख, मोद, प्रमोद, आमोद, हर्ष । 
इच्छा : अभिलाषा, आकांक्षा, कामना, चाह, मनोरथ ।
इन्द्र : देवराज, पुरंदर, महेन्द्र, वजी, शचीपति, सुरपति ।
कमल : अंबुज, अरविन्द, पंकज, पुष्कर, राजीव, जलज । 
कामदेव : काम, पंचशर, प्रद्युम्न (प्रद्युम्न), मदन, रतिपति । 
कुत्ता : कुकुर, कुक्कुर, श्वान, सारमेय, सोनहा । 
कुबेर : एकपिंग, धनद, धनाधिप, नरवाहन, यक्षराज ।
कोयल : काकलीरव, कोकिल, परभृत, पिक, वनप्रिय ।
क्रोध : कोप, रोष, आक्रोश, रुषा, क्षोभ, खीझ, गुस्सा ।
खोज : अन्वेषण, अनुसंधान, छानबीन, जाँच, पूछताछ, शोध । 
गंगा : जाह्नवी (जाह्नवी), देवनदी, भागीरथी, मंदाकिनी ।
गणेश : एकदंत, गजवदन, गजानन, गणपति, मूषकवाहन, लंबोदर ।
गदहा : खर, गर्दभ, वैशाखनंदन, शीतलावाहन, धूसर, रासभ ।
गाय : गऊ, गैया, गौ, गौरी, गऊमाता, गोमाता, धेनु, सुरभि ।
घर : आलय, गृह, निकेत, निकेतन, भवन, वास, शाला, सदन ।
घोड़ा : अश्व, आशु, गंधर्व, घोटक, तुरग, तुरंगम ।
चन्द्रमा : इंदु, कलानिधि, चन्द्र, चाँद, चंदा, रजनीपति, जयंत, तमोहर ।
चिड़िया : अंडज, खग, पक्षी, पतंग, पंछी, परिंदा ।
जंगल : अरण्य, कांतार, कानन, वन, विपिन ।
तालाब : जलाशय, तड़ाग, सर, सरसी, सरोवर ।
दाँत : खरु, दंत, दशन, द्विज, रद ।
दुःख : क्लेश, कष्ट, खेद, पीड़ा, यातना, वेदना, व्यथा, संकट ।
दुर्गा : कल्याणी, कामाक्षी, कालिका, कुमारी, चंडिका, चामुंडा ।
देवता : अमर, अमर्त्य, आदितेय, आदित्य, देव, वसु, सुर ।
नगर : कटक, नगरी, पट्टन, पत्तन, पुर, पुरी, शहर ।
नदी : तटी, तटिनी, तरंगिणी, दरिया, निर्झरिणी, सरित्, सरिता ।
नरक : जहन्नुम, यमपुर, यमलोक, यमसदन, यमालय, रसातल।
पंडित : कोविद, द्विज, ब्राह्मण, विप्र, मनीषी, विद्वान्, सुधी ।
पति : प्राणप्रिय, प्राणेश, पिया, बालम, सनम, साजन, स्वामी ।
पत्नी : गृहिणी, जाया, दयिता, दारा, भार्या, वधू, सहधर्मिणी ।
पर्याप्त : अति, अतिशय, अतीव, अत्यधिक, बहुत, भरपूर, काफी।
पर्वत : अग, अचल, कूट, गिरि, पहाड़, भूधर, भूमिधर, शैल।
पानी : अमृत, अंबु, अंभ, क्षीर, जल, जीवन, नीर, वारि ।
पार्वती : अपर्णा, गिरिजा, गौरी, उमा, कुमारी, दुर्गा, दक्षसुता, सती ।
पुत्र : आत्मज, तनय, नंदन, पूत, बेटा, लड़का, सुत।
पुत्री : कन्या, तनया, आत्मजा, नंदिनी, बेटी, लड़की, सुता ।
पुरुष : आदमी, नर, मर्द, मनुज, मनुष्य, मानव, मानुष ।
पृथ्वी : धरती, धरणी, धरा, धरित्री, भू, भूमि, वसुधा, वसुंधरा ।
प्रकाश : उजाला, चमक, चाँदनी, ज्योति, प्रभा, रोशनी ।
प्रतिष्ठा : आदर, आबरू, इज्जत, सम्मान, मान, गौरव ।
फूल : कुसुम, पुष्प, प्रसून, सारंग, सुमन।
बादल : घन, जलद, जलधर, धाराधर, नीरद, मेघ ।
बिजली : चंचला, चपला, तड़ित, दामिनी, बिजुरी, विद्युत् ।
ब्रह्मा : चतुरानन, पितामह, लोकेश, विधि, विधाता ।
ब्राह्मण : विप्र, अग्रजन्मा, गुरु, द्विज, द्विजन्मा ।
भौंरा : अलि, भँवरा, 'भाँवरा, भ्रमर, मधुकर I
मछली : मत्स्य, मीन, सफरी (शफरी) ।
मनुष्य : द्विपद, पुरुष, नर, मानव, मानुष, मनुज ।
महादेव : गिरीश, त्रिलोचन, भूतेश, शंकर, शंभु, शिव, महेश्वर ।
माता : माँ, मैया, अम्माँ, जननी, धात्री ।
माला : गुणांतिका, गुणिका, माल्य, मालिका, हार ।
मित्र : तात, दोस्त, मीत, संगी, साथी, सखा, स्नेही ।
मुनि : संत, संन्यासी, साधु, महात्मा, भिक्षु, यति, वैरागी ।
मृत्यु : काशीवास, गंगालाभ, निधन, मरण, मौत, स्वर्गवास ।
यमुना : रवितनया, रविसुता, सूर्यतनया, सूर्यसुता, जमुना ।
राजा : नृप, नृपति, भूप, भूपति, नरेंद्र, नरेश, सम्राट् ।
रात : निशा, निशि, यामिनी, रजनी, विभावरी, रात्रि, रैन ।
रावण : दशकंठ, दशमुख, दशकंध, दशकंधर, दशानन, राक्षसेन्द्र।
लक्ष्मी : इंदिरा, कमला, पद्मा, माँ, रमा, लोकमाता, श्री ।
वसंत : ऋतुपति, ऋतुराज, कुसुमकुमार, बहार, मधु-ऋतु, माधव।
विवाह : दारकर्म, निकाह, पाणिग्रहण, ब्याह, शादी ।
विष्णु : चक्रपाणि, चतुर्भुज, नारायण, पीतांबर, पुरुषोत्तम ।
वृक्ष : तरु, दरख्त, पेड़, पादप, विटप, बूटा, द्रुम ।
शत्रु : अरि, दुश्मन, रिपु, विपक्षी, विरोधी, बैरी ।
संकीर्ण : अनुदार, संकुचित, कमीना, क्षुद्र, छोटा, सँकरा।
संसार : जगत्, जगती, दुनिया, भुवन, लोक, विश्व।
समुद्र : अंबुधि, अंबुनाथ, अंबुनिधि, अंबुपति, अब्धि, सागर, सिंधु । 
समूह : जत्था, झुंड, टोली, दल, मंडली, वृंद, समुदाय । 
सरस्वती : भारती, महाश्वेता, विद्यादेवी, वीणापाणि, शारदा ।
साँप : कुंडली, फणधर, भुजग, भुजंग, विषधर, सरीसृप।
सिंह : केसरी, पंचानन, पंचास्य, मृगराज, मृगेंद्र ।
सीता : जनकदुलारी, जनकनंदिनी, जानकी, मैथिली, वैदेही ।
सुन्दर : कमनीय, मनोहर, रमणीक, रुचिर, ललित, सुहावना ।
सूर्य : दिनकर, दिवाकर, आदित्य, भास्कर, भानु, रवि ।
स्त्री : अंगना, औरत, कामिनी, नारी, महिला, ललना, वनिता ।
स्वर्ग : अमरपुर, अमरलोक, मंदर, देवलोक, स्वर्, सुरलोक ।
हनुमान् : अंजनीपुत्र, पवनकुमार, पवनसुत, बजरंगी, बजरंगबली । 
हवा : अनिल, नभप्राण, पवन, मारुत, वात, वायु, समीर ।
हाथी : गज, गजेंद्र, कुंजर, मतंग, दंतावल, दंती, सारंग, हस्ती ।
हृदय : उर, छाती, दिल, वक्ष, वक्षस्थल।

अभ्यास

1. पर्यायवाची शब्द की परिभाषा उदाहरण देकर स्पष्ट करें ।

2. इन शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखें—
आँख, इन्द्र, गंगा, पार्वती, राजा, सूर्य, विष्णु, लक्ष्मी, फूल, ब्रह्मा, मित्र । 

3. कोष्ठकों में दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनें और रिक्त स्थानों की पूर्ति करें—
(क) उसने उसकी ....... की ।    (अनादर, अवहेलना)
(ख) एक ही दाँत होने के कारण गणेशजी को ...... कहते हैं ।    (लंबोदर, एकदंत)
(ग) प्यासे को ........ देना धर्म है ।    (पानी, मेघपुष्प)
(घ) जिसके दस मुख हैं उसे ...... कहते हैं ।    (राक्षसेन्द्र, दशानन)
(ङ) ईश्वर मेरे ......... में निवास करते हैं।    (उर, हृदय)

4. रिक्त स्थानों की पूर्ति उपयुक्त पर्यायवाची शब्दों से करें—
(क) आँख या चक्षु को ......... भी कहते हैं ।
(ख) इन्द्र या देवराज को ......... भी कहते हैं ।
(ग) चन्द्रमा या चन्द्र का दूसरा नाम ........ भी है ।
(घ) माता या मैया को प्यार से ....... भी कहते हैं ।
(ङ) पार्वती या उमा का दूसरा नाम है ....... ।

5. सही जोड़े बनाएँ—

6. 'सिंह' का पर्यायवाची क्या होगा ?
(i) केसरी
(ii) रवि
(iii) नाग
(iv) इनमें कोई नहीं

7. इनमें से कौन 'पक्षी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है ?
(i) खग
(ii) विहग
(iii) चिड़िया
(iv) अनल

8. 'अनुसंधान' के समानार्थी शब्द का चयन करें—
(i) आविष्कार
(ii) खोज
(iii) विज्ञान
(iv) प्रयोग

9. 'सरस्वती' का पर्यायवाची शब्द है—
(i) शारदा
(ii) चंचला 
(iii) इला
(iv) रजनी

श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द

हिन्दी में कुछ युग्म शब्द ऐसे होते हैं जो सुनने में लगभग एक समान लगते हैं, सिर्फ एक-आध अक्षर या मात्रा का अंतर होता है, लेकिन उनके अर्थ में बहुत अधिक अंतर पाया जाता है। ऐसे शब्दों को श्रुतिसम (सुनने में समान) भिन्नार्थक (भिन्न अर्थ रखनेवाले) शब्द या युग्म शब्द कहते हैं । ऐसे शब्दों की एक सूची प्रस्तुत है—

शब्द            अर्थ 
अंगना          स्त्री 
अँगना          घर का आँगन
अंत             समाप्ति
अंत्य            अंत का, अंतिम
अंश            भाग, खंड  
अंस             कंधा  
अन्न             अनाज  
अन्य            दूसरा  
अपेक्षा          इच्छा  
उपेक्षा          तिरस्कार 
अभिराम       सुंदर 
अविराम       लगातार  
अमित         अत्यधिक  
अमीत         शत्रु  
अर्घ             मूल्य  
अर्घ्य            पूजनीय  
अलि            भौंरा  
आली           सखी  
अवधि          समय 
अवधी          अवध देश की भाषा  
अस्र            आँस  
अस्त्र           हथियार  
आदि           आरंभ  
आदी           अभ्यस्त, अदरक 
आहुत          यज्ञ  
आहूत          निमंत्रित  
उपाधि         पद, खिताब 
उपाधी         उपद्रवी 
एतबार         विश्वास, प्रीति
एतवार         रविवार
कंकाल        अस्थिपंजर
कंगाल         भिखारी
कर्म             कार्य
क्रम             सिलसिला 
कलि            कलियुग 
कली            बिना खिला फूल
काश            खाँसी
कास            एक प्रकार की घास
कुच             छाती, स्तन
कूच             प्रस्थान
कुटि            देह, वृक्ष
कुटी            झोंपड़ी
कुल             सब, वंश 
कूल             किनारा, तट
कृत             किया हुआ
क्रीत            खरीदा हुआ
कोस            दूरी की माप
कोष            खजाना
क्षात्र             क्षत्रिय-संबंधी
छात्र             विद्यार्थी
क्षुरी             नाई, खुरवाला पशु
छुरी             चाकू
जगत            कुएँ का उभरा घेरा
जगत्            संसार, वायु
जबान           जीभ, बात
जवान           युवा, वीर
जिला            इलाका
जीला            पतला
जोश            आवेश, उफान
जोष              सुख
टुक              थोड़ा
टूक              टुकड़ा
ताड़              एक पेड़
तार               टेलिग्राम
तुला              तराजू
तूला              कपास
दरद             पीड़ा
दरद्             पर्वत, किनारा
दाँत              मुँह के दाँत
दांत              दबाया हुआ
दाब              दबाव
दाव              जंगल की आग
दारु              काठ, देवदार
दारू             शराब
दिन              दिवस, समय
दीन              गरीब
दिवा             दिन
दीवा             दीपक
दौड़             दौड़ने की क्रिया
दौर              चक्कर, समय
द्रव               गीला, तरल
द्रव्य              धन
द्विप              हाथी
द्वीप              टापू
नाड़ी             नब्ज, धमनी
नारी              स्त्री, औरत
नित              प्रतिदिन, रोज
नीत              लाया हुआ
निहत            मारा हुआ
निहित           छिपा हुआ, रखा हुआ
नीड़              घोंसला
नीर               जल, पानी
पत्ति              पैदल सिपाही, प्यादा
पत्ती              छोटा पत्ता
परिक्षा           कीचड़
परीक्षा           इम्तहान
परिणाम         फल, नतीजा
परिमाण         मात्रा, नाप
परुष             कठोर, सख्त
पुरुष             मर्द, मनुष्य
पाणि             हाथ
पानी             जल
पुर                नगर, कसबा
पूर                आधिक्य, बाढ़
प्रवार             वस्त्र
प्रवाल             मूँगा
प्रसाद             कृपा, अनुग्रह
प्रासाद            महल
फण               साँप का फन
फ़न                कला, गुण
फुट               अकेला
फूट                वैर, मतभेद
बगुला             एक पक्षी
बगूला             बवंडर, वातचक्र
बदन              शरीर
वदन              मुख, मुँह
बल                ताकत
वल                मेघ, एक असुर
बलि               आहुति, बलिदान
बली               शक्तिशाली
बहन              बहिन
वहन              ढोना, बेड़ा
बहु                बहुत, अधिक
बहू                पुत्रवधू
बाण               तीर
बान               आदत, रस्सी
बात               वाणी, वचन
वात               हवा
बार               समय, घेरा
वार               दिन, हमला
बारिश           वर्षा
वारीश           समुद्र
बाला             बहुत छोटी लड़की
वाला             एक प्रत्यय
बास              गंध, बू
वास              निवास, गृह
बिस्तर           बिछावन
विस्तर           अधिक, विस्तृत
बुरा               खराब
बूरा               शक्कर, महीन चूर्ण
मणि              एक बहुमूल्य रत्न
मणी              सर्प
माष               उड़द, माशा
मास               महीना
लाश              शव
लास्य             एक स्त्रैण नृत्य
वरद्              वर देनेवाला
विरद             यश
वर्ण               रंग, अक्षर, जाति
व्रण               घाव
विष              जहर
विस              कमल का डंठल
व्यंग              मेढक, विकलांग
व्यंग्य             ताना, चुटकी
शंकर            शिव, कबूतर
संकर             मिश्रित, दोगला
शब               रात, निशा
सब               संपूर्ण, पूरा, कुल
शम               शांति
सम               बराबर
शय्या             बिछावन
सज्जा             सजावट
शर                बाण, दूध, चिता
सर                 तालाब, सिर
शहर              नगर
सहर              सवेरा
शाला              घर, मकान
साला              पत्नी का भाई
शीशा              काँच, दर्पण
सीसा              एक धातु
शुक               सुग्गा, कपड़ा
शूक               जौ, एक प्रकार का कीड़ा
श्याम             श्रीकृष्ण, काला
स्याम              एक देश का नाम
श्रवण              सुनना, कान
स्रवण              टपकना, चू पड़ना
श्वजन              कुत्ते
स्वजन             अपना आदमी
सपत्नी             सौत
सपत्नीक          पत्नी सहित
सन                 पटुआ
सन्                 साल, ईसवी
सुत                 पुत्र, पार्थिव
सूत                 सारथि, तागा
सूचि                सूई, केवड़ा, सेना 
सूची                तालिका, चर, खल
सेब                 एक फल
सेव                 बेसन का एक पकवान
स्वक्ष                सुंदर आँखोंवाला
स्वच्छ              साफ
हँसी                हँसने की क्रिया
हंसी                हंस की मादा
हरि                 विष्णु, चंद्रमा
हरी                 हरे रंग की, सब्ज
हाड़                हड्डी
हार                 पराजय, माला

अभ्यास

1. श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द की परिभाषा लिखें और उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें । 

2. इन शब्दों का अर्थ लिखें—
(क) कलि, कली
(ख) अंश, अंस
(ग) जबान, जवान
(घ) टुक, टूक
(ङ) दिवा, दीवा
(च) बलि, बली

3. दिए गए शब्दों का अलग-अलग वाक्य में प्रयोग करें—
क्रम, कर्म, अंत, अंत्य; दिन, दीन; आली, अलि; कलि, कली; द्रव, द्रव्य । 

4. कोष्ठकों में दिए गए शब्दों से उपयुक्त शब्द चुनकर वाक्यों को पूरा करें—
(क) भोजन के लिए ......... की आवश्यकता होती है।     (अन्य, अन्न)
(ख) सोनू ...... खाने का अभ्यस्त है ।     (आदी, आदि)
(ग) राम को श्याम पर ...... नहीं है।     (एतवार, एतबार)
(घ) उस ...... की ....... चल रही है।     (नाड़ी, नारी)
(ङ) पाँच ......... पैदल चलना आसान नहीं है ।    (कोस, कोष) 
(च) ...... समाज का महत्त्वपूर्ण अंग है ।    (छुरी, क्षुरी)
(छ) किसने ....... का पेड़ काटा ?    (तार, ताड़) 
(ज) जो ....... हैं, उनकी हमेशा सहायता करो।     (दीन, दिन)
 
5. इन शब्दों का अर्थ लिखें और वाक्य में प्रयोग करें— 
(क) अपेक्षा, उपेक्षा 
(ख) कंगाल, कंकाल 
(ग) जगत्, जगत
(घ) तुला, तूला
(ङ) नारी, नाड़ी
(च) पूर, पुर
(छ) बल, वल
(ज) माष, मास
(झ) शहर, सहर

विलोमार्थक शब्द

किसी शब्द का विलोम या विपरीत अर्थ बतलानेवाले शब्द को विलोमार्थक या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं। ऐसे शब्दों की एक संक्षिप्त सूची नीचे प्रस्तुत है—

शब्द             विलोम शब्द 
अंत                आदि 
अंधकार          प्रकाश
अकाल            सुकाल
अगला            पिछला
अग्नि               जल
अग्रज             अनुज
अति              अल्प
अतिवृष्टि         अनावृष्टि
अत्यधिक        अत्यल्प
अधम             उत्तम 
अधिक            कम 
अधिकतम       न्यूनतम 
अनाथ            सनाथ 
अनुकूल          प्रतिकूल 
अपना             पराया 
अपमान          सम्मान 
अपेक्षा            उपेक्षा 
अभ्यास          अनभ्यास 
अमावस्या        पूर्णिमा 
अमृत             विष 
अर्थ               अनर्थ 
अल्प              बहु 
अल्पज्ञ            बहुज्ञ 
अल्पायु           दीर्घायु 
अवकाश         अनवकाश 
अवनति           उन्नति 
अवरोध           अनवरोध 
अस्त               उदय  
अस्वस्थ           स्वस्थ  
आकाश           पाताल  
आगामी           विगत 
आगे               पीछे 
आजाद            गुलाम 
आज्ञा              अवज्ञा 
आत्मा             परमात्मा 
आदान            प्रदान 
आधार             लम्ब, अनाधार 
आधुनिक         प्राचीन 
आना               जाना 
आम (साधारण)   खास 
आय                 व्यय 
आयात             निर्यात 
आरंभ              अंत 
आवश्यक         अनावश्यक 
आशा               निराशा 
आश्रित             अनाश्रित 
आस्तिक           नास्तिक 
आस्था              अनास्था 
इकट्ठा              अलग 
इच्छा               अनिच्छा 
ईद                  मुहर्रम 
उचित              अनुचित 
उच्च                निम्न 
उतार               चढ़ाव
उत्कृष्ट             निकृष्ट
उत्तीर्ण             अनुत्तीर्ण
उत्थान             पतन
उत्साह             निरुत्साह
उदार              अनुदार
उधार              नकद
उपकार           अपकार
उपयुक्त          अनुपयुक्त
उपयोग           दुरुपयोग
उपसर्ग            प्रत्यय
उपस्थिति        अनुपस्थिति
ऊँचा              नीचा
एकता            अनेकता
एड़ी               चोटी
ऐतिहासिक      अनैतिहासिक
औचित्य          अनौचित्य
कटु                मधु
कठिन             सरल
कठोर             दयालु
कड़वा             मीठा
कपट              निष्कपट
कपूत              सपूत
करुण             निष्करुण
कर्म                अकर्म
कल                आज
कायर              निडर
कीर्ति              अपकीर्ति
कुप्रबंध            सुप्रबंध
कुमार्ग             सुमार्ग
कुरूप             सुंदर
कृतघ्न              कृतज्ञ
कोमल             कठोर
क्रय                 विक्रय
क्रूर                 अक्रूर
क्रेता                विक्रेता
क्षमा                दंड
क्षुद्र                 महान्
खरीद              बिक्री
खाद्य               अखाद्य
खिलना            मुरझाना
खीजना            रीझना
खेद                 प्रसन्न
गमन               आगमन
गरल                सुधा
गरीब               अमीर
गहरा               छिछला
गीला                सूखा
गुण                  दोष
गुप्त                 प्रकट
ग्राम्य                नागर
घटना               बढ़ना
घर                   बाहर
घरेलू                बनैला, जंगली
घात                 प्रतिघात
घृणा                 प्रेम
चंचल               अचंचल
चढ़ाव               उतार
चल                 अचल
चिर                 नवीन
चेतन               अचेतन
चोर                 साधु
छाँह                 धूप 
छूत                 अछूत
जटिल              सरल
जड़                 चेतन
जन्म                मरण
जय                 पराजय
जल्द               देर
जवानी             बुढ़ापा
जाड़ा               गरमी
जात                अजात
जीवन              मृत्यु
जीवित             मृत
जोड़ना             घटाना
ज्वार               भाटा
ज्ञान                अज्ञान
झूठ                 सच
झोंपड़ी             महल
तरल               अतरल
तारीफ             शिकायत
तीव्र                 मंद
तुच्छ                महान्
थोक                खुदरा
थोड़ा                बहुत
दिन                 रात
दुराचारी            सदाचारी
दुर्जन                सज्जन
दुर्बल                सबल
दुर्लभ                सुलभ
दृश्य                 अदृश्य
देव                   दानव
दोष                  गुण
धनी                  निर्धन
धर्म                  अधर्म
धार्मिक             अधार्मिक
नकली              असली
नख                  शिख
नगर                 ग्राम
नया                  पुराना
नर                   नारी
नवीन                प्राचीन
नश्वर                 अनश्वर
नागरिक            ग्रामीण
निकट               दूर 
निगलना            उगलना
निद्रा                 अनिद्रा
निन्दा                प्रशंसा
निरक्षर              साक्षर
निरर्थक             सार्थक
निरामिष            सामिष
निर्जीव              सजीव
निर्दय                सदय
निर्मल               अनिर्मल
निर्माण              ध्वंस
नूतन                 पुरातन
नेकी                  बदी
न्याय                 अन्याय
पंडित                मूर्ख
पक्ष                   विपक्ष
परतंत्र               स्वतंत्र
पराजय             विजय
परिमित            अपरिमित
पवित्र                अपवित्र
पानी                 आग
पाप                  पुण्य
पुरस्कार             दंड
पुष्ट                   अपुष्ट
पूर्णता               अपूर्णता
पूर्णिमा              अमावस्या
पूर्व                    पश्चिम
प्रकट                अप्रकट
प्रधान                 गौण
प्रशंसा               निन्दा
प्राकृतिक          अप्राकृतिक
प्रारंभिक           अंतिम
फायदा             नुकसान
बच्चा                बूढ़ा
बढ़िया              घटिया
बलवान्            बलहीन
बहिष्कार          स्वीकार
बाढ़                 सूखा
बुरा                 भला
बृहत्                लघु
भारी                हलका
भूत                 भविष्य
भोगी               अभोगी
मंगल              अमंगल
मनुज              दनुज
महात्मा            दुरात्मा
माँ                   बाप
माता               पिता
मान               अपमान
मानव             दानव
मालिक           नौकर
मिलन             विरह
मुख्य              गौण
मुनाफा           नुकसान
मृत                जीवित
मृदुल             कठोर
मेहनती          आलसी
यश               अपयश
योग               वियोग
योगी              वियोगी
रंगीन             रंगहीन
रक्षक             भक्षक
राग                विराग, द्वेष
राजा               रंक
राम                रावण
रिक्त              पूर्ण
लघु                 गुरु
लाभ               हानि
लिखित           अलिखित
लेन                देन
लौकिक          अलौकिक
वसंत              पतझड़
वाद                प्रतिवाद
विजय             पराजय
विधवा             सधवा
विपन्न              सम्पन्न
वियोग             संयोग
विरह               मिलन
विशालकाय      लघुकाय
विशेष              सामान्य
विस्तार             संक्षेप
विस्तृत             संक्षिप्त
वीर                 कायर
वैमनस्य           सौमनस्य
व्यावहारिक      अव्यावहारिक
शकुन              अपशकुन
शत्रु                  मित्र
शांत                अशांत
शीत                उष्ण
शुभ                 अशुभ
शोक                हर्ष
शोषक             पोषक
शोषण              पोषण
श्रव्य                अश्रव्य
श्रद्धा                अश्रद्धा
श्रीगणेश            इतिश्री
श्वेत                  श्याम
संगत               असंगत
संतोष              असंतोष
संधि                 विग्रह
संन्यासी             गृहस्थ
सकर्मक           अकर्मक
सक्षम               अक्षम
सखा                 शत्रु
सगुण                निर्गुण
सच्चरित्र             दुश्चरित्र
सदय                 निर्दय
सदाचार             दुराचार
सफल                विफल, असफल
सबल                 निर्बल
सभ्य                  असभ्य
सम                   विषम
सरस                 नीरस
सहज                 कठिन
सहयोगी             असहयोगी, प्रतियोगी 
साकार               निराकार
साक्षर                 निरक्षर
साधु                   असाधु
सापेक्ष                 निरपेक्ष
सामान्य              असामान्य
सामिष                निरामिष
सार                    निःसार
सार्थक                निरर्थक
साला                  बहनोई
साहस                 भय
सुकर                  दुष्कर
सुकर्म                 दुष्कर्म
सुकाल                दुष्काल
सुख                    दुःख
सुगंध                  दुर्गंध
सुगम                  दुर्गम
सुधा                    गरल
सुनाम                 दुर्नाम
सुन्दर                  कुरूप
सुपात्र                  कुपात्र
सुबह                   शाम
सुबुद्धि                 कुबुद्धि
सुमार्ग                  कुमार्ग
सुर                     असुर
सुलभ                  दुर्लभ
सूखा                   गीला
सोना                   जागना
सौभाग्य               दुर्भाग्य
स्थिर                  अस्थिर
स्पष्ट                  अस्पष्ट
स्वतंत्रता             परतंत्रता
स्वदेशी               परदेशी
स्वर्ग                   नरक
स्वाधीन               पराधीन
स्वामी                 सेवक
स्वार्थ                  परार्थ
स्वीकृत              अस्वीकृत
हँसना                 रोना
हर्ष                     विषाद
हार                    जीत
हिंसा                  अहिंसा
हित                   अहित
ह्रस्व                   दीर्घ
ह्रास                   वृद्धि

अभ्यास

1. विलोमार्थक शब्द का क्या अर्थ होता है ? इसे उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें । 

2. इनका विलोमार्थक शब्द लिखें
अग्रज, अस्त, आय, इच्छा, ईद, कटु, ज्वार, नख, पुष्ट, उदय, ऊँचा, एड़ी, कल, ज्ञान, छूत, थोक, दृश्य, पक्ष, भूत, मान, योग, विजय, शत्रु। 

3. निम्नांकित शब्दों के दो-दो विपरीतार्थक शब्द दिए गए हैं, इनमें से उपयुक्त शब्द चुनकर लिखें
(क) अति — अल्प, थोड़ा
(ख) उचित — गलत, अनुचित
(ग) कटु — मधु, मीठा
(घ) खेद — प्रसन्न, खुशी
(ङ) जन्म — मौत, मृत्यु
(च) दुर्बल — सबल, मजबूत
(छ) नर — औरत, नारी
(ज) नूतन पुरातन, पुराना
(झ) मनुज — दानव, दनुज
(ञ) शत्रु — मित्र, दोस्त

4. निम्नलिखित वाक्यों में जो रेखांकित शब्द दिए गए हैं, उनका विलोम शब्द खाली जगहों में लिखकर वाक्य पूरा करें
(क) अतिवृष्टि हो या ....... लोगों को कष्ट उठाना ही पड़ता है।
(ख) बोलने के पहले उचित- ......... का खयाल रखें ।
(ग) जवानी के बाद ......... का आना निश्चित है ।
(घ) यहाँ हर चीज थोक बेची जाती है, ....... नहीं ।
(ङ) व्यक्ति के रूप-रंग, श्वेत- ........ को मत देखो, उसके गुण- ......... को देखो ।

5. निम्नांकित युग्म शब्दों से अलग-अलग वाक्य बनाएँ
हार-जीत, सुबह-शाम, वीर-कायर, वसंत- पतझड़, माता-पिता, प्रशंसा निन्दा, विजय-पराजय, आगे-पीछे, कल- आज, ऊँच-नीच। 
संकेत : हार-जीत जीवन में लगी रहती है ।

6. 'दुर्बल' का विलोम क्या होगा ?
(i) सर्वत्र
(ii) शुक्ल
(iii) सबल
(iv) मधुर

7. 'उपकार' शब्द का विलोम होगा
(i) प्रतिकार 
(ii) अपकार
(iii) परोपकार
(iv) इनमें कोई नहीं

8. 'हर्ष' का विलोम शब्द क्या है ?
(i) खुशी
(ii) निंदा
(iii) विषाद
(iv) निर्धन

9. 'कोमल' शब्द का विलोम शब्द है
(i) निष्ठुर
(ii) कठोर
(iii) सख्त
(iv) ठोस

10. 'अमावस्या का विपरीतार्थक शब्द है
(i) पूर्णिमा
(ii) कालिमा
(iii) श्वेतिमा
(iv) सर्वग्रास

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

'अनेक शब्दों के लिए एक शब्द' के प्रयोग से समय और श्रम की बचत होती है। इसके लिए विशेषतः संधि- समास, विशेष्य-विशेषण, उपसर्ग-प्रत्यय आदि की जानकारी आवश्यक है, तभी आप ऐसे शब्द बना सकते हैं। ऐसे शब्दों की एक सूची नीचे प्रस्तुत है

अंडे से जनमनेवाला                                               अंडज
जो पिंड से जनमता है                                             पिंडज
पंक से जन्म लेनेवाला                                              पंकज
जल में जनमनेवाला                                                जलज
जो सरों में जनमता है                                              सरसिज
जो धरती फोड़कर जनमता है                                  उद्भिज
जो स्वेद (पसीने) से जनमता है                                 स्वेदज
जो जरायु (गर्भ की थैली) से जनमता हो                     जरायुज
जो स्वयं उत्पन्न हुआ हो                                          स्वयंभू
समान (एक ही) उदर से जन्म लेनेवाला                     सहोदर
समान वयवाला                                                    समवयस्क
दो बार जन्म लेनेवाला                                            द्विज
जिसका जन्म अग्र (पहले) हुआ हो                            अग्रज
जिसका जन्म अनु (पीछे) हुआ हो                            अनुज
जिसका जन्म उच्च कुल में हुआ हो                          अभिजात, कुलीन
जिसका जन्म अंत्य (निम्न) जाति में हुआ हो                अंत्यज
नव (अभी-अभी) जनमा हुआ                                  नवजात
जो नया आया हुआ हो                                           नवागन्तुक
जिसके आने की तिथि मालूम न हो                          अतिथि
जिसके कुल का पता ज्ञात न हो                              अज्ञातकुल
जो जन्म से अन्धा है                                              जन्मान्ध
जन्म लेते ही गिर या मर जाना                                आदंडपात
नहीं मरनेवाला                                                    अमर
मरने की इच्छा                                                    मुमूर्षा
जीने की इच्छा                                                    जिजीविषा
मरण तक                                                          आमरण 
जीवन-भर                                                         आजीवन 
आदि से अन्त तक                                              आद्योपान्त
पाद (पैर) से मस्तक (सिर) तक                             आपादमस्तक
सेतुबंध रामेश्वरम् से हिमालय पहाड़ तक                 आसेतुहिमालय
बालक से वृद्ध तक                                              आबालवृद्ध
अग्नि से उत्पन्न, अग्नि-सा, अग्नि से संबंद्ध                   आग्नेय 
आग से झुलसा हुआ                                            अनलदग्ध 
दाव (जंगल) का अनल (आग)                                दावानल 
जठर (पेट) की अग्नि                                             जठराग्नि 
वाडव (सागर) का अनल                                       वाडवानल 
वे बातें जो पुस्तक के आरंभ में लिखी या कही जायँ     भूमिका / प्राक्कथन 
जो सरलता से बोध (समझने योग्य) हो                      सुबोध 
जो मुश्किल से बोध हो                                           दुर्बोध 
जिसे सरलता से पढ़ा जा सके                                  सुपाठ्य 
जिसे पढ़ा न जा सके                                             अपाठ्य 
जो विषय विचार में आ सकता है                              विचारगम्य 
पढ़ने योग्य                                                           पठनीय, पाठ्य 
मनन करने योग्य                                                  मननीय
जो अनुकरण करने योग्य है                                    अनुकरणीय 
जो पूछने योग्य है                                                  प्रष्टव्य 
जो देखने (दर्शन) योग्य है                                       द्रष्टव्य, दर्शनीय 
तर्क के द्वारा जो सम्मत ( माना जा चुका) है                तर्कसम्मत 
जो प्रमाण द्वारा सिद्ध न हो सके                               अप्रमेय
जिसका अनुभव किया गया हो                                अनुभूत
जिसका प्रयोजन सिद्ध हो चुका है                            कृतार्थ
जहाँ तक सध सके                                               यथासाध्य 
जो साधा (ठीक किया) न जा सके                           असाध्य 
अतिशय या अति (बढ़ा-चढ़ाकर ) कहना                 अतिशयोक्ति, अत्युक्ति
पुनः पुनः (बार-बार ) कही गई उक्ति (बात)              पुनरुक्ति
जो कहने योग्य है                                                कथ्य, कथनीय
जो कहा गया है                                                  कथित 
जो कहा या बोला न जा सके                                 अकथनीय 
जिसकी चिन्ता नहीं हो सकती                               अचिन्तनीय, अचिन्त्य 
आलोचना करनेवाला                                          आलोचक 
आलोचना के योग्य                                              आलोच्य 
जो स्मरण रखने योग्य है                                        स्मरणीय 
जो वचन (वाणी) से प्रकट करने के योग्य न हो          अनिर्वचनीय
जो वचन से परे हो                                               वचनातीत
जो (बात) वर्णन से अतीत ( परे, अधिक) है               वर्णनातीत
आशा से अतीत ( परे, अधिक)                               आशातीत 
जिसकी आशा न की जाए                                     अप्रत्याशित 
आँखों के सामने                                                    प्रत्यक्ष
आँखों से परे                                                          परोक्ष
इन्द्रियों को जीतनेवाला                                           जितेन्द्रिय
जिसका ज्ञान इंद्रियों के द्वारा न हो                             अगोचर, अतीन्द्रिय
जो इंद्रियों के ज्ञान के बाहर है                                   गोतीत, इंद्रियातीत
एक स्थान से दूसरे स्थान को हटाया हुआ                    स्थानान्तरित
जो दूसरे के स्थान पर अस्थाई रूप से काम करे            स्थानापन्न
अल्प (कम) वेतन भोगनेवाला (पानेवाला)                    अल्पवेतनभोगी
बिना वेतन काम करनेवाला                                       अवैतनिक
जो हमेशा रहनेवाला है                                             शाश्वत
जो नष्ट होनेवाला है                                                   नश्वर
क्षण भर में भंग (नष्ट) होनेवाला                                   क्षणभंगुर 
जिसका आकार न हो                                                निराकार
जिसे या जिसका मूल नहीं है                                        निर्मूल
जो सर्वशक्ति-संपन्न है                                                सर्वशक्तिमान्
जो सब में व्याप्त है                                                    सर्वव्यापी
पूजने योग्य                                                              पूजनीय, पूज्य
जो विश्वभर का बंधु है                                                 विश्वबंधु
जो विश्व का हित चाहता है                                           विश्वहितैषी
जो धर्माचरण करता है                                                धर्मात्मा
स्वयं (की इच्छा से) दूसरों की सेवा करनेवाला                 स्वयंसेवक
मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा                                           मुमुक्षा
जो मोक्ष चाहता है                                                       मुमुक्षु
जो ईश्वर में विश्वास रखता है/ ईश्वर में आस्था रखनेवाला      आस्तिक
जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखता है                                    नास्तिक
अपने उच्च आचारों से ही जो पूत (पवित्र) है                      आचारपूत
जो प्रशंसा के योग्य है                                                    प्रशंसनीय
जिसमें कलंक नहीं है                                                    निष्कलंक
जिसमें पाप नहीं है                                                        निष्पाप
पाप करनेवाला                                                            पापी
जो किए गए उपकारों को मानता हो                                 कृतज्ञ
जो किए गए उपकारों को नहीं मानता है/ जो कृतज्ञ न हो        कृतघ्न
जो केवल स्वयं का अर्थ (हित) चाहता है                              स्वार्थी
जो परायों का अर्थ (हित) चाहता है                                     परार्थी
जिसका दूसरा उपाय नहीं है                                             अनन्योपाय
जिसकी कल्पना न की जा सके                                         अकल्पनीय
जिसकी उपमा नहीं है                                                     अनुपम
जिसकी उपमा दी जाय                                                    उपमेय
जिससे उपमा दी जाय                                                     उपमान 
जिसके समान द्वितीय नहीं है                                            अद्वितीय
जिसकी समानता प्रकट न की जा सके                               असमान
जो नहीं हो सकता                                                          असम्भव
अवश्य होनेवाला                                                            अवश्यम्भावी
भविष्य में होनेवाला                                                         भावी
जो लोक में संभव न हो                                                    अलौकिक
लोक का                                                                       लौकिक
परलोक का                                                                   पारलौकिक
जो पहले कभी नहीं हुआ                                                  अभूतपूर्व
जो पूर्व में था या हुआ पर अभी नहीं है                                 भूतपूर्व
बीता हुआ                                                                      अतीत
एक ही समय में वर्तमान                                                    समसामयिक
दिन पर दिन                                                                   दिनानुदिन
रात और संध्या के बीच की वेला                                          गोधूलि
साल (वर्ष) में एक बार होनेवाला                                          सालाना (वार्षिक)
जिसने बहुत-कुछ सुना है                                                   बहुश्रुत
जो पहले कभी नहीं सुना गया                                             अश्रुतपूर्व
जो सुनने में मधुर हो                                                          श्रुतिमधुर
जो सुनने में या कान को कटु लगे                                         श्रुतिकटु, कर्णकटु
सुनने योग्य                                                                      श्रवणीय, श्रव्य
जो बिलकुल बहरा है                                                          वज्रबधिर 
जो पहले कभी नहीं देखा गया                                              अदृष्टपूर्व
जो मन को हर ले                                                               मनोहर
जो देखने में प्रिय लगता है                                                    प्रियदर्शी
जो सबको एक समान देखता है                                            समदर्शी
सबसे प्रिय                                                                        प्रियतम
बिना पलक या निमिष गिराए                                                निर्निमेष, अपलक, एकटक
देखने की इच्छा                                                                 दिदृक्षा
जिसके पार देखा जा सके                                                    पारदर्शी, पारदर्शक 
जिसके पार न देखा जा सके                                                 अपारदर्शी, अपारदर्शक
जो देखा नहीं जा सकता है                                                   अदृश्य
जिसने बहुत-कुछ देखा है                                                    बहुदर्शी
दूर तक देखनेवाला                                                             दूरदर्शी
तीनों कालों को देखनेवाला                                                   त्रिकालदर्शी
जिसका विश्वास किया जा सके                                              विश्वसनीय
जिसपर विश्वास किया गया है                                                विश्वस्त
झूठ बोलनेवाला                                                                 झूठा
जो किसी का प्रतिनिधित्व (किसी की जगह काम) करता है         प्रतिनिधि
जो एक को छोड़ किसी अन्य (दूसरा) का नहीं है                      अनन्य
जो दूसरों के अधीन है                                                         पराधीन
जो इच्छा के अधीन है                                                          इच्छाधीन, ऐच्छिक
बिना अंकुश का                                                                 निरंकुश
करने योग्य                                                                        करणीय, कर्तव्य
करने की इच्छा                                                                  चिकीर्षा
कार्य करनेवाला                                                                 कार्यकर्ता
जो कर्तव्य से च्युत हो गया है                                                कर्तव्यच्युत
गिरा हुआ                                                                         पतित
जो क्षमा पाने लायक है                                                        क्षम्य
जो सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों से परे हो                              त्रिगुणातीत
जिसका कोई नाथ न हो                                                       अनाथ 
जिसके पास कुछ नहीं है                                                      अकिंचन
जिसके पास धन न हो                                                          निर्धन
जहाँ औषधि दानस्वरूप मिलती है                                         दातव्य-औषधालय
जहाँ खाना सदा मुफ्त में बँटता है                                           सदाव्रत
जो सब-कुछ भक्षण करनेवाला (खानेवाला) है                            सर्वभक्षी
मांस आहार या भोजन करनेवाला                                           मांसाहारी, मांसभोजी
जो आमिष (मांस) नहीं खाता                                                 निरामिष
शाक आहार करनेवाला                                                        शाकाहारी
फल आहार करनेवाला                                                         फलाहारी
जो दिन में एक बार भोजन करता है                                        एकाहारी
जिसका स्वास्थ्य अच्छा न हो                                                  अस्वस्थ
क्षुधा से आतुर                                                                     क्षुधातुर
खाने की इच्छा                                                                    बुभुक्षा
पीने की इच्छा                                                                     पिपासा
खाने योग्य                                                                         खाद्य
नहीं खाने योग्य                                                                   अखाद्य
जो पीने योग्य हो                                                                  पेय
जो कठिनाइयों से पचता है                                                    दुष्पाच्य, गुरुपाक
जो आसानी से पच जाता है                                                    सुपाच्य, लघुपाक
जो आसानी से लब्ध ( प्राप्त) हो सके                                        सुलभ 
जो मुश्किल से लब्ध या प्राप्त हो                                              दुर्लभ, दुष्प्राप्य 
जो अति (बहुत) लघु (छोटा) नहीं है                                          नातिलघु
जो अति (बहुत) दीर्घ (बड़ा) नहीं है                                          नातिदीर्घ
जो अत्यंत कष्ट से निवारित किया जा सके                                  दुर्निवार
जिसका निवारण नहीं किया जा सके                                        अनिवार्य
बिना आयास (परिश्रम) के                                                      अनायास
जो कष्ट सहन कर सके                                                          कष्टसहिष्णु
सहन करना जिसका स्वभाव है                                                सहनशील
किसी के पास रखी हुई दूसरे की वस्तु                                       धरोहर, थाती, अमानत
जो कोई वस्तु वहन करता है                                                    वाहक
जो यान जल में चलता है                                                         जलयान
जो पोत (जहाज) युद्ध का है                                                     युद्धपोत
द्रुत गमन करनेवाला                                                               द्रुतगामी 
शीघ्र चलनेवाला                                                                     शीघ्रगामी
जो मुकदमा लड़ता रहता है                                                     मुकदमेबाज
जो मुकदमा दायर करता है                                                     वादी, मुद्दई
जो दायर मुकदमे का प्रतिवाद (बचाव या काट) करे                     प्रतिवादी
जिसपर मुकदमा किया गया हो                                                प्रतिवादी, मुद्दालेह
याचना करनेवाला                                                                  याचक
विधि (कानून) द्वारा प्रदत्त ( प्राप्त)                                             विधिप्रदत्त
जो विधि या कानून के विरुद्ध है                                               अवैध, गैरकानूनी
बोलने की इच्छा                                                                    विवक्षा
जो बहुत बोलता है                                                                 वाचाल
जो अल्प (कम) बोलनेवाला है                                                  अल्पभाषी
मित (कम) बोलनेवाला                                                           मितभाषी
मिष्ट या मधुर भाषण करनेवाला                                                मिष्टभाषी, मधुरभाषी
प्रिय बोलनेवाली स्त्री                                                              प्रियंवदा
जो भू को धारण करता है                                                        भूधर
जिसका कारण पृथ्वी है या जो पृथ्वी से सम्बद्ध है                         पार्थिव
प्रकृति से सम्बद्ध                                                                   प्राकृतिक
जो इतिहास से सम्बद्ध है                                                         ऐतिहासिक
जो इतिहास के पहले का है                                                      प्रागैतिहासिक
साहित्य-रचना या साहित्य सेवा से सम्बद्ध                                    साहित्यिक
जो स्त्री कविता रचती है                                                          कवयित्री 
जो पुरुष कविता लिखता है                                                      कवि
ज्ञान देनेवाला                                                                        ज्ञानद
अध्ययन (पढ़ना) प्राप्त करानेवाला                                            अध्यापक
प्रकृष्ट (किसी महाविद्यालय आदि का) अध्यापक                          प्राध्यापक
जो किसी काम का नहीं                                                          बेकार, बेकाम
जो उपकार करता हो                                                             उपकारक

अभ्यास

1. इन प्रश्नों के उत्तर दें
(क) 'जहाँ खाना सदा मुफ्त बँटता है' के लिए एक शब्द होगा : 
(i) गुप्तदान 
(ii) सदाव्रत 
(iii) मुफ्त भोजन 
(iv) परोपकार

(ख) 'जो बहुत बोलता है' का एक शब्द है :
(i) बोलनेवाला
(ii) वाचाल
(iii) बात करनेवाला
(iv) इनमें कोई नहीं

(ग) 'जिसके हाथ में चक्र है' का एक शब्द क्या होगा ?
(i) पाणिग्रहण
(ii) चक्रपाणि
(iii) उपशामक
(iv) चक्रधारी

(घ) 'सिर से लेकर पैरों तक' का एक शब्द क्या होगा ?
(i) आद्योपांत
(ii) आपादमस्तक
(iii) नतमस्तक
(iv) इनमें कोई नहीं

(ङ) 'जिसके आर-पार देखा जा सके' का एक शब्द कौन-सा होगा ?
(i) दूरदर्शी
(ii) सूक्ष्मदर्शी
(iii) पारदर्शी
(iv) अतलदर्शी

(च) 'जो फल का आहार करता है' के लिए एक शब्द होगा :
(i) मांसाहारी 
(ii) शाकाहारी 
(iii) सर्वभक्षी 
(iv) फलाहारी 

(छ) 'जिसका जन्म न हुआ हो' का एक शब्द लिखें : 
(i) जन्महीन 
(ii) जन्मरहित 
(iii) अजर
(iv) अजन्मा

मुहावरे और कहावतें/लोकोक्तियाँ

मुहावरे को अँगरेजी में ' Idiom' या 'Phrase ' कहा जाता है। यह एक प्रकार का ऐसा वाक्यांश है जिसके प्रयोग से भाषा में जान आ जाती है। इसके सटीक प्रयोग से व्यक्ति का भाषा - ज्ञान परिलक्षित होता है । यहाँ कुछ मुहावरे प्रस्तुत हैं

मुहावरे

अंग टूटना (जम्हाई के साथ आलस्य से अंगों का फैलाया जाना / अँगड़ाई आना) — सुबह से काम करते-करते अब मेरे अंग टूटने लगे हैं । 

अंग तोड़ना (पूर्णतः शिथिल कर देना/अँगड़ाई लेना) — इस कठिन चढ़ाई ने मेरे अंगों को तोड़ दिया है।

अँगूठा चूमना (खुशामद करना / अधीन होना) — लाख अँगूठे चूमो, लेकिन वह तुम्हारा काम नहीं करेगा।

अँगूठा दिखाना (अस्वीकार करना/अवज्ञा करना) — जरूरत पड़ने पर उसने मुझे अँगूठा दिखा दिया ।

अँगूठे पर मारना (तुच्छ समझना / परवाह न करना) — हट! मैं तुम्हारे - जैसे धोखेबाज दोस्त को अँगूठे पर मारता हूँ । 

अँचरा पसारना ( विनती करना / दीनता दिखाना / माँगना) भगवान् भास्कर के सामने छठ के मौके पर सभी अँचरा पसारना चाहते हैं ।

अंधा बनना (जान-बूझकर किसी बात पर ध्यान न देना) अपने बेटे की गलतियों पर ध्यान दो, अंधा बनने से काम नहीं चलेगा ।

अंधा बनाना (बेवकूफ बनाना / धोखा देना) तुम मुझे अंधा नहीं बना सकते, मैं सब समझता हूँ ।

अंधे को लकड़ी या लाठी (एकमात्र सहारा) —अब तो मेरा पुत्र ही मुझ अंधे की लाठी है।

अचार करना या डालना (व्यर्थ रखना)  आपकी पुस्तकें तो बिकती नहीं, और अधिक लेकर क्या मैं अचार डालूँगा ।

अपनी खिचड़ी अलग पकाना (सबसे पृथक् कार्य या विचार रखना) परिवार में रहो, अपनी खिचड़ी अलग पकाना अच्छा नहीं ।

अपने पाँव पर खड़े होना (स्वावलंबी होना) एम. ए. करने के बाद भी तुम अब तक अपने पाँव पर खड़े न हो सके ।

अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना (अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनने से काम नहीं चलेगा।

अब-तब करना (हीला-हवाला करना) मेरे सारे रुपए वापस कर दो, अब-तब करने से काम नहीं चलेगा।

अब-तब होना (मरने का समय निकट होना) जिस समय वैद्यजी आए, उस समय उसका अब-तब हो रहा था ।

अपना उल्लू सीधा करना (किसी को मूर्ख बनाकर अपना कार्य निकालना/ स्वार्थ सिद्ध करना)  अपना उल्लू सीधा करना कोई तुमसे सीखे। 

आँख का तारा (प्रियतम व्यक्ति) मेरा बेटा मेरी आँख का तारा है । 

आँख गड़ाना (टकटकी बाँधना/प्राप्ति की इच्छा करना) मेरी नई गाड़ी पर क्यों आँख गड़ाए बैठे हो ?

आँख मारना (आँखों से इशारा करना) — वह सभी बातें सत्य-सत्य बता रहा था, पर रवि ने उसकी तरफ आँख मार दी जिससे वह चुप हो गया । 

आँख में गड़ना (बुरा लगना / मन में बसना / पसन्द आना) मारुति कार मेरी आँख में गड़ गई है, इसे मैं जरूर खरीदूँगा ।

आँख से ओझल होना ( नजर से दूर होना) — गाड़ी की गति इतनी तेज थी कि देखते-ही-देखते वह आँख से ओझल हो गई ।

आँखें खुलना (जागना / सजग होना) — तुम्हारी आहट पाते ही मेरी आँखें खुल गईं / पश्चिमीय शिक्षा से देशवासियों की आँखें खुल गईं । 

आँखें चुराना (कतराना/ध्यान न देना) — वह जिस दिन से रुपए ले गया है, आँखें चुराता फिरता है।

आँखें बिछाना (तन्मयता से देखना / प्रेमपूर्वक प्रतीक्षा करना) राधा का पति वर्षों बाद घर आ रहा है, अतः वह सुबह से ही आँखें बिछाए बैठी है। 

आँखें बैठना (आँखों की रोशनी समाप्त हो जाना) उचित चिकित्सा के अभाव में उनकी आँखें बैठ गईं ।

आँसू पोंछना (ढाढ़स बँधाना/ आश्वासन देना) — उसका घर ऐसा बरबाद हुआ कि कोई आँसू पोंछनेवाला भी न रहा।

आग-बबूला होना (बहुत गुस्सा करना) — आग-बबूला होने से ही इस समस्या का समाधान नहीं होगा ।

आटे-दाल का भाव मालूम होना (व्यावहारिक ज्ञान होना) — शादी होने के बाद ही उसे आटे-दाल का भाव मालूम हुआ ।

आसमान टूट पड़ना (अचानक आफत आना)  पिता की अचानक मौत हो जाने से उसपर आसमान ही टूट पड़ा ।

आसमान से बातें करना (आसमान छूना / बहुत ऊँचा होना) मुम्बई की अधिकतर इमारतें आसमान से बातें करती हैं।

आस्तीन का साँप (कपटी / विश्वासघाती मित्र) तुम उसे अपना मित्र समझते हो, परंतु वह तो आस्तीन का साँप है ।

इज्जत उतारना (बेइज्जत करना / अपमानित करना) — एक छोटी-सी बात के लिए उसने उसकी इज्जत उतार ली ।

ईंट से ईंट बजना (किसी नगर या घर का ढह जाना या ध्वस्त होना / तबाह होना) — यहाँ कभी सुन्दर नगर था, आज ईंट से ईंट बज रही है। 

ईंट से ईंट बजाना (किसी नगर या घर को ध्वस्त करना/समूल नष्ट करना) — आतंकवादियों ने ट्विन टावर की ईंट से ईंट बजा दी थी।

ईद या दूज का चाँद होना (बहुत दिनों के बाद मुलाकात होना)—आजकल तुम ईद का चाँद हो गए हो, कहाँ रहते हो ?

ईमान बेचना ( अपने कर्तव्य से हट जाना)—लाख कोशिशों के बावजूद मुंशीजी ने अपना ईमान नहीं बेचा।

उँगली उठाना ( लांछित करना/ दोषी बताना)—चाहे गलती किसी की भी हो, पर लोग तो तुम्हारी ओर ही उँगली उठा रहे हैं ।

उँगली रखना ( दोष दिखाना या बताना)— किसी में सामर्थ्य नहीं है कि प्रेमचंद की रचनाओं पर उँगली रख दे।

उल्लू बनना (बहस आदि में हारकर निरुत्तर होना) सोहन आज भाषण प्रतियोगिता में उल्लू बन गया।

उल्लू बनाना (बेवकूफ बनाना / ठगना) — देखो! अब तुम मुझे और उल्लू नहीं बना सकते ।

एक न चलना या एक नहीं चल पाना (कोई युक्ति सफल न होना) — मेरे सामने उसकी एक न चली।

कमर कसना (किसी काम को करने के लिए तैयार होना / उद्यत होना/ संकल्प करना) — सफलता चाहते हो, तो पढ़ाई के लिए कमर कस लो। 

कमर टूटना (उत्साह का न रहना/निराश होना) — उसकी नौकरी क्या छूटी, उसकी तो कमर ही टूट गई ।

कलम तोड़ना (लिखने की हद कर देना/ अनूठी उक्ति कहना) बिहारी ने क्या खूब दोहे लिखे हैं, कलम ही तोड़ डाली।

कलेजा काढ़ना (अत्यंत दुःख पहुँचाना/ किसी की अत्यंत प्रिय वस्तु ले लेना/दिल निकालना) — किसी का कलेजा काढ़ना निष्ठुर कार्य है ।

कलेजा टूक-टूक होना (शोक से हृदय विदीर्ण होना) श्रीमती गाँधी की हत्या का समाचार सुनकर मेरा कलेजा टूक-टूक हो गया था। 

कलेजा ठंडा होना (तृप्ति होना / संतोष होना / अभिलाषा पूरी होना)  सौत की मौत पर उसका कलेजा ठंडा हो गया ।

कलेजा थामकर रह जाना ( हतोत्साह होना, मन मसोसकर रह जाना)—मैं भी उन्हें बहुत कुछ कह सकता था, परन्तु उनके ओहदे का खयाल करके अपना कलेजा थामकर रह गया ।

कसम खाना (शपथ लेना / प्रतिज्ञा करना) — मैं आज कसम खाता हूँ कि कभी झूठ नहीं बोलूँगा ।

कसम खिलाना (बाध्य करना) — देखो! इस काम के लिए मुझे कसम मत खिलाओ ।

कागज काला करना (व्यर्थ कुछ लिखना) —प्रश्नोत्तर सही-सही लिखो, सिर्फ कागज काला करने से अच्छे अंक नहीं मिलेंगे ।

कागजी घोड़े दौड़ाना (खूब लिखा-पढ़ी करना / खूब चिट्ठी-पत्री भेजना/ परस्पर खूब पत्र-व्यवहार करना) पिता की मृत्यु के बाद उनके कार्यालय में सुनील कागजी घोड़े दौड़ाता रहा, पर नौकरी न मिली ।

कान ऐंठना या कान उमेठना (दंड देने हेतु किसी का कान मरोड़ देना/ कोई काम न करने की कड़ी प्रतिज्ञा करना) लो भाई, कान ऐंठता हूँ, अब ऐसा कभी नहीं करूँगा ।

कान का कच्चा (शीघ्र विश्वासी/बिना सोचे-समझे किसी की बात का विश्वास कर लेना) वह तो कान का बहुत ही कच्चा है, किसी की बात का तुरत विश्वास कर लेता है ।

कान का परदा फटना (बहुत शोरगुल होना) लाउडस्पीकरों की आवाज से कान के परदे फटने लगते हैं ।

(अपने) कान खड़े करना [ (आप) चौकन्ना होना / सचेत होना] —तुम बहुत कुछ खो चुके, अब तो कान खड़े करो ।

कान देना (ध्यान देना)—बड़ों की बातों पर कान देना चाहिए ।

कान पकड़ना (किसी बात को न करने की प्रतिज्ञा करना/ तौबा करना) अब हम किसी की जमानत लेने से कान पकड़ते हैं । 

कान भरना (गुपचुप निंदा करना / चुगली करना) — लोगों ने पहले से ही उनके कान भर दिए थे, इसलिए हमारा कहना-सुनना व्यर्थ हुआ ।

कानों पर जूँ न रेंगना (कुछ भी परवाह न होना / कुछ भी ध्यान न देना) शरारती बच्चों के कानों पर जल्दी जूँ नहीं रेंगती । 

कीचड़ उछालना ( निंदा करना / निरादर करना)  चुनाव में राजनीतिक दल एक-दूसरे के विरुद्ध कीचड़ उछालते रहते हैं।

कुआँ खोदना (दूसरे का अहित करने का प्रयत्न करना/जीविका के लिए परिश्रम करना)—दूसरों के लिए कुआँ खोदनेवाला स्वयं गड्ढे में गिरता है ।

कोल्हू का बैल होना ( बहुत कठिन परिश्रम करनेवाला/दिन-रात मेहनत करनेवाला)—कोल्हू का बैल बनने पर भी इस महँगाई में घर का खर्च पूरा नहीं हो पाता ।

खटाई में पड़ना (झमेले में पड़ना / काम में अड़चन होना)— बिजली की कमी के कारण कारखाने का काम खटाई में पड़ गया है।

खरी-खोटी सुनाना (कटु वचन कहना / भला-बुरा कहना) — खरी-खोटी सुनाने से क्या लाभ, समझौता कर लो ।

खलल डालना (विघ्न डालना) तुम इस शुभ कार्य में खलल मत डालो। 

खिलखिला पड़ना (खुश होना / खुलकर हँस पड़ना)—खिलौने को देखते ही बिटिया रानी खिलखिला पड़ी ।

खून उबलना या खौलना (क्रोध से शरीर लाल होना / गुस्सा चढ़ना)अपने दुश्मनों को देखकर सोहन का खून उबलने लगता है ।

खून के घूँट पीना (क्रोध सह जाना) जब भी मेरा दुश्मन मेरे सामने आता है, मैं खून के घूँट पीकर रह जाता हूँ । 

खून ठंढा होना (भयभीत होना) अचानक साँप को सामने देखकर मेरा खून ठंढा हो गया । 

गज भर की छाती होना या हाथ भर का कलेजा होना ( साहस बढ़ जाना) अपने पुत्र की अप्रत्याशित सफलता का समाचार पाकर उनका हाथ भर का कलेजा हो गया ।

गले का हार (अत्यंत प्रिय/चिर सहचर) वह दोस्त ही नहीं, मेरे गले का हार है।

गले मढ़ना (किसी की इच्छा के विरुद्ध उसे देना / दूसरे के न चाहने पर भी उसे कोई काम सौंपना) मुझे माफ करो, इसे मेरे गले मत मढ़ो ।

गागर में सागर भरना (छोटी जगह में बहुत अधिक का समावेश करना/ थोड़े शब्दों में अधिक कहना) बिहारी के दोहे गागर में सागर भरने के समान हैं।

गाल बजाना (डींगें मारना/ बढ़-बढ़कर बातें करना) औकात तो है नहीं, सिर्फ गाल बजाते हो ।

गुल खिलाना ( अनोखे काम करना ) ऐन मौके पर उसने ऐसा गुल खिलाया कि लोगों के होश गुम हो गए ।

गूलर का फूल होना (दुर्लभ होना / कभी देखने में न आना ) क्यों जी ! तुम आजकल गूलर के फूल हो गए हो, कभी दीखते नहीं ? 

घर बसाना (विवाह करना / गृहस्थी जमाना ) उसने हाल ही में अपना घर बसाया है ।

घाट-घाट या सात घाट का पानी पीना ( इधर-उधर मारे-मारे फिरना/ चारों ओर देश-देशांतर में घूमकर अनुभव प्राप्त करना) — वह घाट-घाट का पानी पी चुका है, उसे बेवकूफ नहीं बना सकते ।

घी के दीए जलाना ( आनंद- मंगल मनाना / सुख-संपत्ति का भोग करना/ बड़े सुख-चैन से रहना) आजकल नेता बनने का अर्थ है, घी के दीए जलाना। 

घुटने टेकना ( पराजित होना / पराजित होने से लज्जित होना / घुटनों के बल बैठना) भारत सरकार की गलत नीतियों के कारण ही चीनियों के सम्मुख भारतीय सेना को घुटने टेकने पड़े थे ।

घोड़ा या घोड़े बेचकर सोना (खूब निश्चित होकर सोना / गहरी नींद में सोना)—घोड़ा बेचकर सोओगे, तो चोर सामान चुरा ही लेगा न ! 

छठी का दूध याद आना (भारी संकट पड़ना / कठिनाई का अनुभव होना) पुलिस की पिटाई से उसे छठी का दूध याद आ गया । 

छाती ठंडी होना या छाती जुड़ाना (हृदय शीतल होना / चित्त शांत या प्रफुल्लित होना) अपने दुश्मन की मृत्यु का समाचार सुनकर उसकी छाती ठंडी हो गई ।

छाती पर मूँग या कोदो दलना (किसी को दिखा-दिखाकर ऐसा काम करना जिससे उसे क्रोध या संताप हो ) तुम ऐसा करके क्यों मेरी छाती पर मूँग दल रहे हो ?

छाती पीटना (दुःख या शोक से व्याकुल होकर छाती पर हाथ पटकना) पति की मृत्यु का समाचार सुनकर पत्नी छाती पीटने लगी। 

छींका टूटना (बिना प्रयास के कोई उद्देश्य सफल हो जाना) दो भाइयों की आपसी लड़ाई के कारण यह कीमती जमीन उन्हें सस्ते में मिल गई, मानों बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा ।

जबान खोलना (मुँह से बात निकालना / बोलना ) अब तुम भी मेरे सामने जबान खोलने लगे हो ?

जबान चलाना (तेजी से बोलना / बहस करना / विशेषतः मुँह से अनुचित शब्द निकालना) सुनो, मोहन ! अब मेरे सामने जबान चलाना बन्द करो । 

जबान देना या हारना (वचन देना/वादा करना/प्रतिज्ञा करना) मैं जबान देता हूँ कि मैं उसकी सहायता अवश्य करूँगा।

जबान पर होना (हरदम याद रहना / स्मरण रहना) यह प्रश्नोत्तर मेरी जबान पर है, जब चाहो पूछ लो ।

जले पर नमक छिड़कना (दुःखी को और दुःख देना) — उन्हें व्यापार में इतना बड़ा घाटा हुआ है और तुम उनसे कर्ज माँगकर जले पर नमक छिड़क रहे हो।

जान छुड़ाना (प्राण बचाना / संकट टालना/किसी कष्टदायक वस्तु को दूर करना) जान छुड़ाकर वह भागा, नहीं तो घोर संकट में पड़ जाता ।/ मैं उस गाड़ी से तंग हो चुका था, बेचकर जान छुड़ाया।

जान पर खेलना (प्राणों को भय में डालना/अपने आपको ऐसी स्थिति में डालना जिसमें प्राण तक जाने का भय हो)— क्यों जान पर खेल रहे हो, साँप से डर नहीं लगता ?

जान में जान आना ( तसल्ली होना / घबराहट दूर होना) अब मेरी जान में जान आई, बहुत बड़ा बोझ मेरे सिर पर से उतर गया। 

जी नहीं भरना (संतोष नहीं होना) धन चाहे जितना भी मिले, पर इससे किसी का जी नहीं भरता ।

टाँग या पाँव अड़ाना (बिना अधिकार के किसी काम में हस्तक्षेप करना/ अनधिकार चर्चा करना/फुजूल दखल देना/अड़ंगा लगाना) — इस काम में टाँग मत अड़ाओ, अच्छा नहीं होगा ।

टाँग पसारकर सोना (निश्चित होकर सोना / बिना किसी प्रकार के खटके के चैन से दिन बिताना) — टाँग पसारकर सोने का समय अब खत्म हुआ, परीक्षा की तैयारी करो ।

तलवे चाटना (बहुत अधिक खुशामद करना / अत्यंत सेवा-शुश्रूषा में लगा रहना)  तलवे चाटना कोई उससे सीखे ।

तलवों में आग लगना (आग-बबूला होना / अत्यंत क्रोध चढ़ना) — उसकी बात सुनकर मेरे तलवों में आग लग गई ।

तीन-पाँच करना (घुमाव-फिराव या हुज्जत की बात करना/बहानेबाजी करना) मेरे पैसे सीधी तरह दे दो, तीन- पाँच मत करो ।

तीन-तेरह करना (तितर-बितर करना/अलग-अलग करना) अँगरेजों ने हमारी एकता को तीन-तेरह कर दिया था ।

दम भरना ( यकीन करना / प्रशंसा करना)  तू तो बड़ा दम भरता था कि वह मेरा दोस्त है, लेकिन काम पड़ा तो वह पीछे हट गया । 

दाँत उखाड़ना (दाँत मसूढ़े से अलग करना/कठिन दंड देना)— यदि तुम शरारत करोगे, तो मैं तुम्हारे दाँत उखाड़ लूँगा ।

दाँत काटी रोटी होना (अत्यंत घनिष्ठ मित्रता / गहरी दोस्ती) कृष्ण और सुदामा के बीच दाँत काटी रोटी थी ।

दाँत जमाना (कुछ हड़पने के लिए दृढ़ होना) — इस मकान पर वह दाँत जमाए बैठा है, इसे लेकर ही दम लेगा ।

दाँत बजना (सर्दी से दाढ़ हिलने या काँपने के कारण दाँत पर दाँत पड़ना)  गत साल दिसम्बर माह में दाँत बजने की नौबत आ गई थी । 

दाँतों तले उँगली दबाना (अचरज में आना / खेद प्रकट करना) — उसके कारनामे देखकर लोग दाँतों तले उँगली दबाने लगे ।

दाल में कुछ काला होना (कुछ खटके या संदेह की बात होना/ किसी बुरी बात का लक्षण दिखाई देना) — लगता है, दाल में कुछ काला है, यहाँ से निकल चलो ।

दो दिनों का मेहमान (शीघ्र ही मरनेवाला/कहीं बाहर जानेवाला) दादाजी की बीमारी बहुत बढ़ गई है, अब तो वे दो दिनों के मेहमान हैं। 

धूप में बाल सफेद करना या चूड़ा सफेद करना (बूढ़ा हो जाना और कुछ जानकारी प्राप्त न करना) तुम मुझे क्या समझते हो, मैंने धूप में बाल सफेद किए हैं ?

नाक कटना (प्रतिष्ठा नष्ट होना / इज्जत जाना/मर्यादा नष्ट होना) अशिष्ट आचरण के कारण समाज में उसकी नाक कट गई ।

नाक काटना (प्रतिष्ठा नष्ट करना/ इज्जत बिगाड़ना) घर से चुपचाप भागना परिवार की नाक काटने के बराबर है।

(किसी को) नाक का बाल (सदा साथ रहनेवाला/घनिष्ठ मित्र)  वह मेरे कार्यालय का प्रबंधक ही नहीं, मेरी नाक का बाल है । 

नाक पर मक्खी न बैठने देना ( जरा-सा एहसान भी न उठाना / थोड़ा-सा भी दोष या त्रुटि न सह सकना) वह नाक पर मक्खी न बैठने देता है; कहने से क्या लाभ ?

नाक में दम करना/ नाक में दम लाना या नाकों दम करना (खूब तंग करना/ बहुत सताना ) अपनी शैतानियों से तो इसने नाकों दम कर दिया ।

नाक रगड़ना (बहुत गिड़गिड़ाना और विनती करना / मिन्नत करना) तुम लाख नाक रगड़ते रहो, तुम्हारी वह एक न सुनेगा ।

नाकों चने चबवाना (खूब तंग करना / हैरान करना) — इस लड़के ने तो मुझे नाकों चने चबवा दिया ।

नौ दो ग्यारह होना ( चलता होना / देखते-देखते भाग जाना) पाकेटमार पाकेट मारकर नौ दो ग्यारह हो गया ।

पगड़ी उछालना (बेइज्जती करना/ उपहास करना / हँसी उड़ाना) किसी की पगड़ी उछालना अच्छी बात नहीं ।

पगड़ी रखना (लाज रखना)  इस गरीब लड़की से शादी करके तुमने उसके परिवार की पगड़ी रख ली ।

पत्थर पर दूब जमना (अनहोनी बात या असंभव काम होना) दस साल के बाद उस औरत को बच्चा क्या हुआ, पत्थर पर दूब जम गया ।

पलक झपकते (अत्यंत कम समय में / तत्क्षण)पलक झपकते राकेट आँखों से ओझल हो गया। 

पलक पाँवड़े बिछाना (हार्दिक स्वागत करना) आज मेरे प्रिय लेखक आ रहे हैं; मैं तो उनके लिए पलक पाँवड़े बिछाऊँगा ।

पसीने-पसीने होना (पसीने से तर होना/भयभीत होना) वह इतना न दौड़ा कि पसीने-पसीने हो गया ।

पाँचों उँगलियाँ घी में होना (सब तरह का लाभ या आराम होना / खूब बन आना) नेताजी मंत्री क्या बने, उनकी पाँचों उँगलियाँ घी में हैं । 

पाँव उखड़ जाना (युद्ध में न ठहर सकना / विरोध के आगे न ठहर पाना) कुश्ती में उसके पाँव उखड़ गए।

पाँव खींचना ( व्यवधान डालना) — तुम हर काम में पाँव खींचते रहते हो । 

पाँव फिसलना (पैर का जमा न रहना/सरक जाना/रपटना ) ठीक से चलो, नहीं तो पाँव फिसल जाएँगे ।

पाँव फैलाना (लेट जाना या पसर जाना / अपने कार्य या व्यापार का क्षेत्र विस्तृत करना)इस लड़के ने तो मुंबई तक अपने पाँव फैला लिए। 

पाँव भारी होना (गर्भ रहना / पेट होना / हमल होना) — उस स्त्री के पाँव भारी हो गए हैं।

पाकेट या जेब गरम करना (घूस देना / घूस लेना)भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि बगैर पाकेट गरम किए कोई काम नहीं होता । 

पाकेट या जेब गरम होना ( पास में धन होना) उसका पाकेट आजकल गरम रहता है।

पापड़ बेलना (कठिनाई या दुःख से दिन काटना / कठोर परिश्रम करना) — बिना पापड़ बेले सफलता नहीं मिलती ।

पानी-पानी होना ( लज्जित होना / लज्जा के मारे पसीने-पसीने होना) चोरी पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया। 

पानी फेर देना (चौपट कर देना / नष्ट करना) सिर्फ एक भूल ने हमारे सारे परिश्रम पर पानी फेर दी । 

पिल पड़ना (जी-जान से लग जाना) परीक्षा में प्रथम स्थान पाने के लिए वह अपने अध्ययन में पिल पड़ा है । 

पीठ ठोंकना (कोई उत्तम कार्य करने के लिए शाबाशी देना / हिम्मत बढ़ाना)—इस काम की सफलता के लिए मैं तुम्हारी पीठ ठोंकता हूँ । 

पीठ दिखाना (युद्ध या मुकाबले से भाग जाना) चाहे कितने भी दुश्मन क्यों न हों, हमारी सेना कभी पीठ नहीं दिखा सकती ।

पीठ पर होना (सहायक होना /जन्मक्रम में अपने किसी भाई या बहन के पीछे होना) घबराओ नहीं, मैं तुम्हारे पीठ पर हूँ । / मेरी बेटी मेरे बेटे की पीठ पर है।

पीठ फेरना (विदा होना / मुँह फेर लेना) लगता है, उसने अब तुमसे पीठ फेर ली है।

पेट का पानी न पचना (कोई बात कहे या पूछे बिना रहा न जाना)— बिना सब हाल कहे तुम्हारे पेट का पानी न पचेगा।

पेट की आग बुझाना (भूख दूर करना/ पेट में भोजन पहुँचाना)—यदि पेट की आग बुझानी हो, तो जो देता हूँ खा लो।

पेट-पीठ एक हो जाना या पेट पीठ से लग जाना (बहुत दुबला हो जाना/ बहुत भूखे होना) पौष्टिक भोजन किया करो, नहीं तो पेट पीठ से लग जाएगा | / भूख से पेट-पीठ एक हो गया है ।

पेट में चूहे दौड़ना (बहुत भूख लगना) मम्मी ! कुछ खाने को दो, पेट में चूहे दौड़ रहे हैं। 

पौ बारह होना या पड़ना ( जीत का दाँव पड़ना / भाग्य खुलना/लाभ का खूब अवसर मिलना)  आजकल नेताओं के पौ-बारह हैं ।

प्राण हरना या प्राण लेना ( मार डालना / बहुत संताप या दुःख देना) — वह मुझसे इतना न काम करवाता है, मानों मेरे प्राण ले लेगा ।

प्राण हारना (हतोत्साह होना) — इस काम से मैं प्राण हार चुका हूँ । 

फूट पड़ना (सहसा रो पड़ना/ प्रस्फुटित होना / दबी हुई बात कह देना) दुःख का कारण पूछे जाने पर वह फूट पड़ी ।

फूले न समाना (बहुत प्रसन्न होना) अपनी सफलता की प्रशंसा में वह फूले नहीं समा रहा था ।

बात का धनी / पक्का या पूरा ( प्रतिज्ञा का पालन करनेवाला/वादे का पक्का)  सज्जन व्यक्ति अपनी बात के धनी होते हैं । 

बात चलाना (चर्चा छेड़ना/जिक्र करना) — इन दिनों मेरी बहन की शादी की बात चलाई जा रही है ।

बाल-बाल बचना (कोई आपत्ति पड़ने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कसर रह जाना) एक बड़ा-सा पत्थर गिरा, लेकिन वह बाल-बाल बच गया । 

बीड़ा उठाना (कोई काम करने का संकल्प करना/ उद्यत होना/मुस्तैद होना)— इस पुस्तक को पूरा करने का मैंने बीड़ा उठाया है । 

बेवक्त की शहनाई बजाना (बिना अवसर बात कहना) — पूजा के अवसर पर अश्लील गाने बजाना बेवक्त की शहनाई बजाना होता है।

भीगी बिल्ली बनना या होना (लाचार होना) परिस्थितिवश वह भीगी बिल्ली बना हुआ है ।

मन डोलना (मन का चंचल होना/लालच उत्पन्न होना/लोभ आना)—दूसरे की सम्पत्ति पर मन डोलना अच्छी बात नहीं ।

मुँह न देखना ( किसी से बहुत घृणा करना/न मिलना-जुलना)—मैं तो उसी दिन से उसका मुँह नहीं देखता हूँ।

मुँह फिर जाना (मुँह टेढ़ा या खराब हो जाना/सामना करने से हट जाना) — एक थप्पड़ दूँगा, मुँह फिर जाएगा ।

मुँह मारना (पशुओं आदि का किसी चीज पर मुँह लगाना/प्राप्ति के लिए अग्रसर होना) क्यों दूसरे की चीजों पर मुँह मारते फिरते हो?

मुँह में पानी भर आना (ललचना/लार टपकना) — रसगुल्ला देखकर हर किसी के मुँह में पानी भर आता है। 

मुँह में लगाम न होना (जो मुँह में आए सो कह देना/जबान पर अंकुश न होना)— मुँह में लगाम न होना बदतमीजी की निशानी है।

मुँह मोड़ना (विमुख होना) — सचाई से मुँह मोड़ना अच्छी बात नहीं है। 

मूँछ उखाड़ना (घमंड चूर करना) — ऐसा मत कहो, नहीं तो मैं तुम्हारी मूँछ उखाड़ लूँगा ।

मैदान मारना ( प्रतियोगिता, युद्ध आदि में विजय प्राप्त करना)—कुश्ती में तो उसने मैदान मार ली।

रंग बदलना (क्रुद्ध होना / नाराज होना) — आप तो नाहक ही हम पर रंग बदल रहे हैं।

रंग लाना (परिणाम या प्रभाव दिखाना) महात्मा गाँधी की अहिंसा का जादू ऐसा रंग लाया कि हम स्वतंत्र हो गए।

रोटी कमाना (जीविकोपार्जन करना) — वह रोटी कमाने दिल्ली गया है। 

लोहा लेना (मुकाबला करना) आज भारत से लोहा लेना शत्रु देश के वश में नहीं है।

लोहे के चने चबाना (बहुत कठिन कार्य करना)  माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना लोहे के चने चबाना है ।

वचन देना (वादा करना) — तुम वचन देकर मुकर तो नहीं जाओगे ?

शेखी बघारना / मारना या हाँकना (बढ़-चढ़कर बातें करना/ डींगें मारना)  उसे तो शेखी बघारने की आदत है ।

साँप को दूध पिलाना (शत्रु को सहायता देना) — सोहन-जैसे व्यक्ति की सहायता करना साँप को दूध पिलाने के समान है । 

सिक्का जमाना या बैठाना ( रोब जमाना/अपना अधिकार बताना/प्रभुत्व स्थापित करना) आजकल अँगरेजी भाषा का सिक्का जमा हुआ है । 

सिर उठाना (आत्मसम्मान से रहना / विरोध में खड़े होना) पराजित होने के पश्चात् शत्रु देश ने फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया है । 

सिर ऊँचा होना (प्रतिष्ठा पाना) 'मंगलयान' के सफल प्रक्षेपण से भारत का सिर ऊँचा हुआ है ।

सिर गिराना (जान से मारना) दंगाइयों ने कई सिर गिरा डाले । 

सिर चढ़ाना (अनुचित महत्त्व देकर किसी को उद्दंड बना देना) — आपने उसे सिर चढ़ा लिया है, यह अच्छा नहीं है ।

सिर पड़ना ( जबरदस्ती भार या उत्तरदायित्व मिलना ) — उनकी अनुपस्थिति के कारण यह कार्य मेरे सिर पड़ गया है ।

सिर पर खेलना (किसी और के मत्थे कुछ करना) अपनी सामर्थ्य तो उन्हें है नहीं, सदैव मंत्रीजी के सिर पर ही खेलते हैं ।

सिर फिरना (पागल होना / बुद्धि नष्ट होना) किसी की इतनी प्रशंसा न करो कि उसका सिर ही फिर जाए ।

हवा हो जाना (गायब हो जाना) वह मेरे पैसे लेकर हवा हो गया। 

हाथ धोकर पीछे पड़ना (निरंतर तंग करना) — नौकरी पाने के लिए वह हाथ धोकर मंत्रीजी के पीछे पड़ गया है ।

हाथ का खिलौना (किसी के वश में रहना)  इस थाने के थानेदार मंत्रीजी के हाथ का खिलौना हैं ।

हाथ धोना (खो देना/ गँवा देना) जो कुछ उनके पास था, वे उससे भी हाथ धो बैठे।

हाथ फेरना (प्यार से शरीर सहलाना/ किसी वस्तु को उड़ा लेना) पराए माल पर हाथ फेरना अच्छी बात नहीं है ।

हिरन होना (गायब हो जाना) पुलिस को देखते ही उसका सारा नशा हिरन हो गया ।

हुलिया बिगाड़ देना या बिगाड़ना ( हालत खराब कर देना / दुर्दशा करना)  किसने तुम्हारा हुलिया बिगाड़ दिया ?

होश में आना (चेतना प्राप्त करना/ तमीज सीखना / आपे में आना) होश में आने के बाद ही मुझसे बातें करो ।

कहावतें/लोकोक्तियाँ

कहावत या लोकोक्ति ‘Proverb' कहलाती है । यह अपने आप में एक प्रकार का वाक्य है जिसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किसी उचित समय, घटना या अवसर पर किया जाता है। अधिकतर कहावतों या लोकोक्तियों के पीछे छोटी या बड़ी कोई-न-कोई घटना या कहानी होती है । यहाँ कुछ कहावतें प्रस्तुत हैं

अशर्फी की लूट कोयले पर छाप (अनुचित निर्णय) मंत्रीजी की आवभगत में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए, परन्तु कर्मचारियों को वेतन देने में कोताही बरती जा रही है। इसी को कहते हैं— 'अशर्फी की लूट कोयले पर छाप'।

उलटा चोर कोतवाल को डाँटे (दोषी ही दोष बतलानेवाले पर बिगड़े) एक तो तुम ठीक से काम करते नहीं, और कुछ कहने पर आँखें दिखाते हो। सही है—उलटा-चोर कोतवाल को डाँटे ।

ऊँची दुकान फोका पकवान (सिर्फ बाहरी चमक-दमक, भीतर खोखलापन)  हर नेता चुनाव के समय बड़ी-बड़ी बातें करता है, मतदाताओं को सुनहरे सपने दिखाता है, लेकिन चुनाव जीतते ही वह इन वादों को भूलकर जनता का धन लूटने में लग जाता है । इसी को कहते हैं 'ऊँची दुकान फीका पकवान' ।

ऊँट के मुँह में जीरा (आवश्यकता अधिक, लेकिन मिलना बहुत कम)  इस पेटू का पेट इन चार-पाँच रोटियों से भरेगा ? इसके लिए यह तो 'ऊँट के मुँह में जीरा' है ।

ऊधो का लेना न माधो का देना (लटपट से अपने-आपको दूर रखना) तुम तो हर समय किसी-न-किसी के चक्कर में पड़े रहते हो। हमारी तरह रहो कि 'ऊधो का लेना न माधो का देना' ।

एक अनार सौ बीमार (वस्तु कम, लेकिन माँग अधिक) बेरोजगारी के कारण किसी एक पद के लिए हजारों युवक उसे पाने की होड़ में लग जाते हैं, मतलब कि 'एक अनार सौ बीमार' ।

एक पंथ दो काज (एक ही उपाय से दो काम ) मैं अपने मित्र की बरात में दिल्ली जाऊँगा, तो वहाँ रह रहे अपने भाई से भी मुलाकात कर लूँगा । इस तरह ‘एक पंथ दो काज' हो जाएँगे ।

एक म्यान में दो तलवारें (सबल प्रतिद्वंद्वी एक साथ)—वे दोनों नेता एकदूसरे के प्रबल विरोधी हैं, भला एक दल में वे कैसे रह सकते हैं। 'एक म्यान में दो तलवारें' कभी नहीं हो सकतीं ।

काला अक्षर भैंस बराबर ( निरक्षर, अनपढ़ )—रामू पढ़ना-लिखना नहीं जानता। उसके लिए तो 'काला अक्षर भैंस बराबर' है ।

खोदा पहाड़ निकली चुहिया (प्रयत्न बड़ा, लेकिन लाभ छोटा ) धन मिलने की लालच में उसने उस बुजुर्ग की खूब सेवा की, परंतु उनके मरणोपरांत उसे उनके बक्से से थोड़े-से पैसे ही मिले। इसे ही कहते हैं— 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' ।

गाँव का जोगी जोगड़ा बाहर का जोगी सिद्ध या घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध (निकट के व्यक्ति का महत्त्व नहीं) गुजरात में स्वामी दयानंद को शायद ही कोई जानता था, जबकि पंजाब और हरियाणा में उन्हीं के नाम से आर्य समाज की प्रतिष्ठा हुई । सही कहा गया है— 'गाँव का जोगी जोगड़ा बाहर का जोगी सिद्ध' ।

घर का भेदिया लंकादाह (आपसी फूट से सर्वनाश हो जाना) विभीषण का राम से मिल जाना ही रावण के नाश का कारण बना। सही है 'घर का भेदिया लंकादाह' ।

चोर की दाढ़ी में तिनका (जिसके दिल में चोर होता है, वह दूसरों की हर बात से सशंकित रहता है) जब मैंने श्याम से अपने पर्स की चोरी के बारे में पूछा, तो राकेश भागने लगा और पकड़े जाने पर पर्स उसी के थैले से निकला । सही है 'चोर की दाढ़ी में तिनका' ।

चोर-चोर मौसेरे भाई (एक-सा काम करनेवालों में बंधुओं-सा प्रेम होता है) किरानी द्वारा घूस लेने की शिकायत बड़े बाबू से क्या करूँ, वे खुद ही घूसखोर हैं । अर्थात्, दोनों चोर-चोर मौसेरे भाई हैं।

छोटा मुँह बड़ी बात (अपनी योग्यता से अधिक बातें करना) मैं क्या कहूँ, छोटा मुँह बड़ी बात, परंतु मुझे लगता है कि इस लेख में त्रुटियाँ अधिक हैं। 

छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ बड़े मियाँ सुभान अल्लाह (छोटे की अपेक्षा बड़े में ही अधिक दोष होना) विद्यालय की ओर से मिली शिकायत पर अपने पुत्र को न समझाकर वे प्राचार्य से ही उलझ पड़े। यह तो वही बात हुई कि 'छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ बड़े मियाँ सुभान अल्लाह'।

जिस पत्तल में खाना उसी पत्तल में छेद करना (अपने आश्रयदाता को ही हानि पहुँचाना) रामू की दयनीय स्थिति को देखकर उन्होंने अपने यहाँ उसे नौकरी पर रख लिया, परंतु रामू ने उनके साथ ही विश्वासघात कर दिया । सही कहावत है— 'जिस पत्तल में खाना उसी पत्तल में छेद करना' । 

जैसा देश वैसा भेष (परिस्थिति के अनुसार कार्य करना) तुम रहते हो गाँव में और तुम्हारा चाल-चलन शहरवालों जैसा है, जो उचित नहीं है। किसी व्यक्ति को 'जैसा देश वैसा भेष' के अनुसार ही रहना चाहिए । 

ताड़ से गिरा तो खजूर पर अटका (एक संकट के बाद दूसरा संकट)—बाइक दुर्घटनाग्रस्त होने पर मैं थाने में रपट लिखाने गया, थानेदार ने हेलमेट के अभाव में मुझे ही आर्थिक दंड दे दिया। इसे ही कहते हैं— 'तार से गिरा तो खजूर पर अटका' ।

होनहार बिरवान के होत चिकने पात (महानता के लक्षण बचपन से दिखाई पड़ना)— मैथिलीशरण गुप्त छोटी-सी आयु में ही कविता लिखने लगे थे और आगे जाकर राष्ट्रकवि बने । सही कहा गया है 'होनहार बिरवान के होत चिकने पात' ।

अभ्यास

1. निम्नांकित मुहावरों के अर्थ लिखें—
(क) हाथ धोना
(ख) आँख गड़ाना
(ग) बीड़ा उठाना
(घ) कानों पर जूँ न रेंगना
(ङ) मूँछ उखाड़ना
(च) सिर ऊँचा होना ।

2. निम्नांकित मुहावरों का वाक्य प्रयोग द्वारा अर्थ स्पष्ट करें
(क) अँगूठा दिखाना
(ख) तीन तेरह करना
(ग) प्राण लेना
(घ) हुलिया बिगाड़ना
(ङ) हाथ का खिलौना ।

3. निम्नलिखित कहावतों के अर्थ लिखें—
ऊधो का लेना न माधो का देना, ऊँट के मुँह में जीरा, एक अनार सौ बीमार, छोटा मुँह बड़ी बात ।

4. निम्नलिखित कहावतों का वाक्य प्रयोग द्वारा अर्थ स्पष्ट करें
उलटा चोर कोतवाल को डाँटे, एक पंथ दो काज ।

5. इन मुहावरों के दो-दो अर्थ दिए गए हैं, इनमें सही पर () का निशान लगाएँ
(क) अंधा बनाना :
(i) आँख फोड़ना
(ii) बेवकूफ बनाना

(ख) साँप को दूध पिलाना :
(i) कटोरे में दूध रख देना 
(ii) शत्रु को सहायता देना

(ग) पाँव खींचना :
(i) व्यवधान डालना
(ii) पाँव को हाथ से खींचना

6. नीचे प्रत्येक मुहावरे से दो-दो वाक्य बनाए गए हैं । अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त वाक्य के सामने सही () का निशान लगाएँ— 
(क) कमर टूटना :
(i) सुरेश की नौकरी क्या छूटी, उसकी तो कमर ही टूट गई । 
(ii) डंडे से मत मारो, उसकी कमर टूट जाएगी । 

(ख) दाँत काटी रोटी :
(i) किसी की दाँत काटी रोटी मत खाओ ।
(ii) कृष्ण और सुदामा के बीच दाँत काटी रोटी थी ।

(ग) लोहे के चने चबाना :
(i) लोहे के चने चबाने से सारे दाँत टूट जाएँगे ।
(ii) माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना लोहे के चने चबाना है । 

7. 'होनहार बिरवान के होत चिकने पात' है एक प्रसिद्ध : 
(i) पदबंध 
(ii) लोकोक्ति 
(iii) गजल 
(iv) मुहावरा

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