सर्वनाम: हिंदी व्याकरण में सर्वनाम के भेद, नियम और उदाहरण

 

सर्वनाम (PRONOUN)

सर्वनामसंज्ञा के बदले जिन शब्दों का प्रयोग होता है उन्हें सर्वनाम कहते हैं, जैसे—
वह, उसे, उसने, मैं, मेरा, मेरे, वे, हम, हमलोग आदि । 

उदाहरण:
श्याम एक लड़का है।
वह पढ़ने में तेज है ।
उसने कड़ी मेहनत की है ।
उसे अवश्य सफलता मिलेगी ।

मोटे अक्षरवाले शब्द सर्वनाम हैं, क्योंकि ये श्याम (संज्ञा) के बदले आए हैं। यदि सर्वनाम का प्रयोग न किया जाए, तो उपर्युक्त वाक्य भद्दे लगेंगे, जैसे—
श्याम एक लड़का है।
श्याम पढ़ने में तेज है।
श्याम ने कड़ी मेहनत की है।
श्याम को अवश्य सफलता मिलेगी।

स्पष्ट है कि वाक्य की सुन्दरता को बनाए रखने के लिए या संज्ञा की पुनरुक्ति न हो, इसलिए सर्वनाम का प्रयोग आवश्यक है।

हिन्दी में कुल 11 मूल सर्वनाम हैं— मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, क्या, कुछ और कौन । इन्हीं मूल सर्वनामों से विभिन्न प्रकार के सर्वनामों की रचना हुई है।

सर्वनाम के कार्य

सर्वनाम के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं—

(1) संज्ञा जहाँ उसी वस्तु का बोध कराती है जिसका वह नाम है, वहाँ सर्वनाम किसी भी वस्तु का बोध कराता है, यदि पहले संज्ञा आ गई हो, जैसे—
मोहन अच्छा लड़का है । — वह मेरा मित्र है ।
गीता अच्छी लड़की है। — वह मेरी बहन है ।

(2) सर्वनाम नामों (संज्ञाओं) की पुनरावृत्ति रोकता है, जैसे—
जावेद अच्छा लड़का है। जावेद पढ़ने में तेज है । जावेद के दो भाई हैं। जावेद की माँ लेखिका हैं । जावेद के पिताजी शिक्षक हैं । 

उपर्युक्त वाक्यों में पुनरुक्ति दोष है । सर्वनाम के प्रयोग से इस दोष से बचा जा सकता है, जैसे—

जावेद अच्छा लड़का है । वह पढ़ने में तेज है। उसके दो भाई हैं। उसकी माँ लेखिका हैं। उसके पिताजी शिक्षक हैं ।

(3) यह (सर्वनाम) आदर-अनादर या छोटे-बड़े का बोध कराता है, जैसे—
आप मेरे भाई हैं । — आदर या बड़े का बोध
तू मेरा नौकर है। — अनादर या छोटे का बोध 

(4) यह निकटता और दूरी का बोध कराता है, जैसे— 
यह लड़का है। — निकटता का बोध
वह लड़का है। — दूरी का बोध

(5) यह निश्चय-अनिश्चय का बोध कराता है, जैसे— 
उसे खिलाओ । — निश्चित का बोध 
किसी को खिलाओ । — अनिश्चित का बोध 

(6) इससे जिज्ञासा की अभिव्यक्ति होती है, जैसे- 
कौन आया है ? — तुम्हें क्या चाहिए ?

(7) यह प्रधान और आश्रित वाक्यों में संबंध भी जोड़ता है, जैसे— 
जहाँ न जाए रवि, वहाँ जाए कवि ।

सर्वनाम के भेद

सर्वनाम के छह भेद हैं—
(1) पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun)
(2) निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun) 
(3) अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun) 
(4) सम्बन्धवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)
(5) निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun) 
(6) प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)

1. पुरुषवाचक सर्वनाम जिस सर्वनाम से बोलनेवाले, सुननेवाले या जिसके बारे में कहा जाए उसका बोध हो, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं, जैसे
मैं, मैंने, हमलोग, वह, आप, आपको, उसका, उसकी आदि ।

उदाहरण :
"मैंने कल आपको उसकी घड़ी दी थी । " 
मैंने —बोलनेवाले के लिए । 
आपको सुननेवाले के लिए ।
उसकी जिसके बारे में चर्चा हो रही है ।

इस बात का खयाल रखें कि पुरुषवाचक सर्वनाम का प्रयोग स्त्री-पुरुष, सजीव-निर्जीव सभी के लिए किया जाता है ।

पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद हैं
(i) उत्तमपुरुष (First Person), (ii) मध्यमपुरुष (Second Person) और (iii) अन्यपुरुष (Third Person)।

(i) उत्तमपुरुष— मैं, मैंने, हम, हमने, मेरा, मेरी, हमारा, हमारी आदि को उत्तमपुरुष कहते हैं। बोलनेवाला इनका प्रयोग सिर्फ अपने लिए करता जैसे—
मैं आम खाता हूँ ।    (मैं उत्तमपुरुष, एकवचन)
हम भारतवासी हैं ।  (हम  उत्तमपुरुष, बहुवचन)

(ii) मध्यमपुरुष— तू, तुम, आप, तुमलोग, आपलोग, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे, आपका, आपकी, आपके आदि को मध्यमपुरुष कहते हैं। इनका प्रयोग सुननेवाले के लिए किया जाता है, जैसे
तू अच्छा है।        (तू मध्यमपुरुष, एकवचन)
तुम अच्छे हो।      (तुम मध्यमपुरुष, बहुवचन)

(iii) अन्यपुरुष— उत्तमपुरुष और मध्यमपुरुष के अलावा सारे पुरुषयह, वह, ये, वे, उसका, उसकी, उनका, उनकी आदि को अन्यपुरुष कहते हैं। दूसरे शब्दों में—वक्ता श्रोता से जिसकी चर्चा करता है उसे अन्यपुरुष कहते हैं, जैसे
वह मोहन था ।               (वह — अन्यपुरुष, एकवचन)
वे चले गए।                    (वे  अन्यपुरुष, बहुवचन)
उसका भाई आया है।      (उसका अन्यपुरुष, एकवचन)
उनका भाई आया है ।      (उनका — अन्यपुरुष, बहुवचन)

2. निश्चयवाचक सर्वनाम— यह, वह, ये और वे निश्चयवाचक सर्वनाम हैं। इनसे किसी संज्ञा का निश्चित ज्ञान, दूरी या निकटता का बोध होता है, जैसे—
यह पुस्तक है।     (निश्चित रूप से पुस्तक है और निकट भी है ।) 
ये लड़के हैं।        (निश्चित रूप से लड़के हैं और निकट भी हैं ।) 
वह हाथी है।        (निश्चित रूप से हाथी है, लेकिन दूरी का बोध ।) 
वे कलमें हैं।         (निश्चित रूप से कलमें हैं; लेकिन दूरी का बोध ।)

नोट— निश्चयवाचक सर्वनाम और पुरुषवाचक सर्वनाम में अन्तर है इन्हें समझने की कोशिश करें
राम अच्छा लड़का है। वह अभी पढ़ रहा होगा ।
यहाँ राम अभी उपस्थित नहीं है, सिर्फ उसकी चर्चा हो रही है, इसलिए वह—पुरुषवाचक सर्वनाम ।
उसका नाम राम है। देखो, वह पढ़ रहा है।
राम कुछ दूरी पर है । उसकी ओर इशारा किया जा रहा है, इसलिए वह—निश्चयवाचक सर्वनाम ।
तुम्हें प्रतिदिन दूध पीना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है I 
यहाँ दूध अभी रखा हुआ नहीं है । सिर्फ चर्चा हो रही है, इसलिए यह — पुरुषवाचक सर्वनाम ।
इस दूध को क्यों नहीं पी रहे हो? यह बहुत मीठा है।
दूध का गिलास निकट है । उसकी ओर इशारा किया जा रहा है, इसलिए यह—निश्चयवाचक सर्वनाम |

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम अनिश्चयवाचक सर्वनाम सिर्फ दो हैं'कुछ' और 'कोई' (किसी) । 'किसी', 'कोई' का ही रूप है। इससे व्यक्ति, वस्तु या भाव के अनिश्चय का बोध होता है, जैसे—
नदी में कोई तैर रहा है ।    (अनिश्चित व्यक्ति)
नदी में कुछ तैर रहा है।     (अनिश्चित वस्तु या कोई जीव-जंतु)
किसी को खिला दो ।         (अनिश्चित व्यक्ति)
कुछ खिला दो ।                (अनिश्चित वस्तु)

4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम— जो सर्वनाम प्रधान वाक्य और आश्रित वाक्यों में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम से संबंध जोड़ता है उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं, जैसे—
जो .... सो, जिसकी .... उसकी, जहाँ .... वहाँ, जैसा .... वैसा, .... आदि ।

उदाहरण:
जो सोता है, सो खोता है
जहाँ न जाए रवि, वहाँ जाए कवि ।

5. निजवाचक सर्वनाम 'आप' निजवाचक सर्वनाम है । इससे निज या स्वयं का बोध होता है, जैसे—
मैं आप ही चला जाऊँगा = मैं स्वयं (खुद) चला जाऊँगा।  
वे अपना काम आप ही करते हैं = वे अपना काम स्वयं करते हैं।

पुरुषवाचक सर्वनाम 'आप' और निजवाचक सर्वनाम 'आप' में अन्तर है। इन्हें समझें

पुरुषवाचक सर्वनाम (आप) का प्रयोग आदर के लिए होता है । एकवचन में 'आप' और बहुवचन में 'आपलोग ' होता है, लेकिन निजवाचक 'आप' का रूप एकवचन और बहुवचन में समान होता है, जैसे— 
आप क्या कर रहे हैं ?                       (आप  पुरुषवाचक, एकवचन)
आपलोग क्या कर रहे हैं ?                 (आपलोग — पुरुषवाचक, बहुवचन) 
वह आप ही चला गया।                      (आप — निजवाचक सर्वनाम) 
समाज के लोग आप ही उठ खड़े होंगे।  (आप — निजवाचक सर्वनाम) 

6. प्रश्नवाचक सर्वनाम— 'कौन' (किस) और 'क्या' यही दो प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं । इनसे प्रश्न का बोध होता है, जैसे— 
कौन दौड़ रहा है ?     (कौन—प्रश्नवाचक सर्वनाम )
क्या पढ़ रहे हो ?        (क्या—प्रश्नवाचक सर्वनाम) 

'कौन' और 'क्या' प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं, लेकिन दोनों के प्रयोग में थोड़ा अंतर है

(i) जहाँ 'कौन' का प्रयोग प्रायः मनुष्य के लिए आता है, वहाँ 'क्या' का प्रयोग प्रायः पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों और निर्जीव वस्तुओं के लिए । जैसे—
वहाँ कौन खड़ा है ?     (पुरुष / लड़का हो सकता है ।) 
वहाँ कौन खड़ी है ?     (स्त्री / लड़की हो सकती है ।) 
वहाँ क्या खड़ा है ?      (पशु-पक्षी या वस्तु हो सकती है ।) 

(ii) लेकिन, 'कौन' के साथ सा, सी, जोड़कर निर्जीव वस्तु के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। जैसे— 
कौन-सा पेड़ कट गया ?                 कौन-सी कलम अच्छी है ?

सर्वनाम का रूपांतर

सर्वनाम का रूपांतर वचन, पुरुष और कारक के अनुसार होता है। इसपर लिंग का प्रभाव नहीं पड़ता, जैसे—

(1) लिंग के अनुसार :

मैं (राम) खाता हूँ ।            वह (लड़का) पढ़ता है ।
मैं (सीता) खाती हूँ ।           वह (लड़की) पढ़ती है ।

स्पष्ट है कि सर्वनाम ( मैं, वह) पर लिंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ा ।

(2) वचन और पुरुष के अनुसार :

संज्ञा की तरह सर्वनाम के भी दो वचन होते हैं— एकवचन और बहुवचन। वचन के आधार पर इनके रूपों में अंतर आता है, जैसे—

पुरुष             एकवचन           बहुवचन
उत्तमपुरुष       मैं                      हम
मध्यमपुरुष      तू                      तुम
अन्यपुरुष        यह, वह              ये, वे

(3) कारक के अनुसार :

संज्ञा की तरह सर्वनाम पर भी कारक का प्रभाव पड़ता है । इसके रूपांतर को समझने के लिए इसकी कारक - रचना को समझें । कुछ सर्वनामों की कारकरचना (रूप-रचना) दोनों वचनों और सातों कारकों में नीचे दी गई है—

सर्वनाम की कारक-रचना

मैं (उत्तमपुरुष)

कारक         एकवचन                        बहुवचन
कर्ता             मैं, मैंने                           हम, हमने, हमलोग, हमलोगों ने
कर्म              मुझे, मुझको                    हमें, हमको, हमलोगों को
करण            मुझसे, मेरे द्वारा                हमसे, हमारे द्वारा, हमलोगों से
संप्रदान         मुझे, मुझको, मेरे लिए        हमें, हमको, हमारे लिए
अपादान        मुझसे                             हमसे, हमलोगों से
संबंध            मेरा, मेरी, मेरे                   हमारा, हमारी, हमारे
अधिकरण      मुझमें, मुझपर                  हममें, हमपर

तू (मध्यमपुरुष)

कारक         एकवचन                        बहुवचन
कर्ता             तू, तूने                            तुम, तुमने, तुमलोगों ने 
कर्म              तुझे, तुझको                     तुम्हें, तुमको, तुमलोगों को
करण            तुझसे, तेरे द्वारा                तुमसे, तुम्हारे द्वारा, तुमलोगों से 
संप्रदान         तुझे, तुझको, तेरे लिए         तुम्हें, तुमको, तुम्हारे लिए
अपादान        तुझसे                              तुमसे, तुमलोगों से
संबंध            तेरा, तेरी, तेरे                    तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे
अधिकरण      तुझमें, तुझपर                   तुम (में, पर ), तुमलोगों (में, पर)

वह (अन्यपुरुष)

कारक         एकवचन                        बहुवचन
कर्ता            वह, उसने                        वे, उन्होंने, उनने, उनलोगों ने
कर्म            उसे, उसको                      उन्हें, उनको, उनलोगों को 
करण          उससे, उसके द्वारा              उनसे, उनके द्वारा
संप्रदान        उसे, उसको, उसके लिए     उन्हें, उनको, उनके लिए
अपादान       उससे                              उनसे, उनलोगों से
संबंध            उसका, उसकी, उसके       उन, उनलोगों (का, की, के)
अधिकरण     उसमें, उसपर                   उन, उनलोगों (में, पर) 

आप (पुरुषवाचक/आदरसूचक)

कारक         एकवचन                        बहुवचन
कर्ता            आप, आपने                     आपलोग, आपलोगों ने
कर्म             आपको                           आपलोगों को
करण           आपसे, आपके द्वारा           आपलोगों से, आपलोगों के द्वारा
संप्रदान         आपको, आपके लिए         आपलोगों को, आपलोगों के लिए 
अपादान       आपसे                             आपलोगों से
संबंध            आपका, आपकी, आपके    आपलोगों (का, की, के)
अधिकरण     आपमें, आपपर                 आपलोगों में, आपलोगों पर

यह (निश्चयवाचक)

कारक         एकवचन                        बहुवचन
कर्ता            यह, इसने                        ये, इन्होंने, इनने 
कर्म             इसे इसको                       इन्हें, इनको 
करण           इससे, इसके द्वारा             इनसे, इनके द्वारा 
संप्रदान         इसे, इसको, इसके लिए     इन्हें, इनको, इनके लिए 
अपादान        इससे                             इनसे 
संबंध            इसका, इसकी, इसके       इनका, इनकी, इनके 
अधिकरण      इसमें, इसपर                  इनमें, इनपर 

नोट : 'वह' (निश्चयवाचक सर्वनाम) शब्द का रूप भी 'यह' की तरह चलता है। जहाँ 'यह' में 'य' का परिवर्तन 'इ' में होता है, जैसा कि ऊपर आप देख रहे हैं, वहाँ 'वह' में 'व' का 'उ' में होता है ।

अभ्यास

1. सर्वनाम किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।

2. वाक्यों में यदि सर्वनाम का प्रयोग न हो, तो क्या होगा ?

3. सर्वनाम के प्रमुख कार्यों को संक्षेप में लिखें ।

4. निजवाचक सर्वनाम (आप) और आदरसूचक / पुरुषवाचक सर्वनाम (आप) में क्या अंतर है ? इन्हें वाक्य प्रयोग द्वारा स्पष्ट करें ।

5. सर्वनाम के कितने भेद हैं ? मूल सर्वनाम कौन-कौन-से हैं ?

6. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम में क्या अंतर है ? 

7. इन सर्वनामों में से उत्तमपुरुष, मध्यमपुरुष और अन्यपुरुष को चुनकर लिखें
हम, तू, तुम, आप, मेरा, मेरी, मेरे, हमारा, हमारी, हमारे, तुझे, तुझको, तुम्हें, तुमको, आपका, आपकी, आपलोगों का, उसका, उसकी, वह, वे  

8. पुरुषवाचक सर्वनाम किसे कहते हैं ? इसके भेदों को सोदाहरण स्पष्ट करें। 

9. पुरुषवाचक सर्वनाम 'वह' और निश्चयवाचक सर्वनाम 'वह' में अंतर करें । 

10. प्रश्नवाचक सर्वनाम और संबंधवाचक सर्वनाम किसे कहते हैं ?

11. निम्नलिखित वाक्यों में से सर्वनाम शब्दों को चुनकर लिखें— 
(क) आप मेरे गुरु हैं । आपके ही आशीर्वाद से मुझे सफलता मिली। 
(ख) मैं अपने वर्ग में पढ़ता हूँ । हम भारतवासी हैं।
(ग) तू बहुत लम्बा है । तुझे क्या चाहिए ?
(घ) आप विद्वान् हैं । आपकी विद्वता का मैं कायल हूँ।
(ङ) यह एक फूल है । वह एक साड़ी है। ये पेंसिलें मेरी हैं ।
(च) कौन खेल रहा है ? क्या लिख रहे थे ? जो सोता है, सो खोता है 

12. कोष्ठकों में से उपयुक्त सर्वनाम चुनकर खाली जगहों को भरें— 
(क) ......  ........ वर्ग का प्रथम छात्र हूँ । (हम, मैं, अपना, अपने) 
(ख) ....... भारत में रहते हैं, ....... राजधानी नई दिल्ली है। (मैं, हम, इनकी, इसकी
(ग) ....... तेज है। क्या ........ पुस्तकें ....... हैं ? (तू, तुम, यह, ये, तुम्हारी, किसकी) 
(घ) ......... भाई के शिक्षक हैं । (वह, वे, मेरा, मेरे)
(ङ) ......... दौड़ रहा है ? (क्या, कौन, किसे)
(च) ........ सोता है, ........ खोता है । (जो, जिस, सो, वही) 
(छ) ....... न जाय रवि, ....... जाय कवि । (जहाँ, वहाँ, यहाँ, कहाँ) 

13. निम्नलिखित सर्वनामों से एक-एक वाक्य बनाएँ :
हम, तुम, आप, यह, ये, वे, मैंने, तुमको, उनसे, आपको, आपलोगों को, इससे, इनसे, जो ...... सो, जिसकी ....... उसकी, जहाँ ....... वहाँ ।

14. निम्नांकित वाक्यों में पुनरुक्ति दोष है । इन दोषों से मुक्त कर वाक्यों को पुनः लिखें—
श्याम एक अच्छा लड़का है। श्याम मेरा भाई है । श्याम पढ़ने में तेज है । 
श्याम को अवश्य सफलता मिलेगी। हमलोग श्याम ने कड़ी मेहनत की है।
श्याम की इज्जत करते हैं । श्याम ने श्याम के पिताजी से कहा ।

15. नीचे दिए गए सर्वनामों के रूप उनके सामने अंकित कारकों में दोनों वचनों में लिखें—
सर्वनाम              कारक             एकवचन        बहुवचन
मैं                       सम्प्रदान            ............        ............
तू                        संबंध                ............        ............
वह (अन्यपुरुष)     अधिकरण          ............        ............

16. उत्तमपुरुष (तू) की कारक- रचना सातों कारकों एवं दोनों वचनों में करें । 

17. निम्नांकित वाक्यों को शुद्ध करें—
(क) तू क्या करते हो ? उसके भाई आया है।
(ख)यह पुस्तकें अच्छी है। वे कॉपी पुरानी है ।
(ग) नदी में कोई तैर रहे हैं। आप मेरा पिताजी हैं ।
(घ) कोई एक लड़का आया है। किसी एक गाय को खिलाओ ।
(ङ) कौन लड़कियाँ पढ़ रही हैं ? कौन पुस्तक अच्छी है ?

18. इन रेखांकित शब्दों के बहुवचन रूप देकर वाक्यों को पुनः लिखें— 
संकेतइस लड़के ने उस लड़के से कहा । 
उत्तर— इन लड़कों ने उन लड़कों से कहा । 
(क) मैंने तुमसे उसके संबंध में कहा था । 
(ख) यह बालक उस कवि को पहचानता है।
(ग) मुझसे तेरी गलती देखी नहीं जाती है।
(घ) तेरा-मेरा का अंतर आपने उसके कहने पर किया है।
(ङ) कृपया आप मुझे मेरे हाल पर छोड़ दें।

19. 'तुम' कौन-सा सर्वनाम है ?
(i) निश्चयवाचक
(ii) अनिश्चयवाचक
(iii) प्रश्नवाचक
(iv) पुरुषवाचक 

20. निम्नलिखित में कौन-सा शब्द सर्वनाम है ?  
(i) मैं
(ii) राम
(iii) सुंदर 
(iv) लंबा 

21. इनमें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कौन-सा है ?
(i) कौन   
(ii) जो
(iii) कोई 
(iv) वह  

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