विशेषण: हिंदी व्याकरण में विशेषण के भेद और प्रयोग जानें

 

विशेषण (ADJECTIVE)

विशेषण जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिमाण, रंग, आकार, दशा आदि) बतलाए उसे विशेषण कहते हैं, जैसे—

सुंदर, कुरूप, लंबा, नाटा, अच्छा, बुरा, हलका, भारी, चतुर, मूर्ख, लाल, पीला, कुछ, थोड़ा, दो, चार, गोल, चौड़ा, दुबला, पतला आदि ।

रीता / वह सुंदर है।            (गुण)
नीता / वह कुरूप है ।        (दोष)
पाँच लड़के पढ़ रहे हैं।       (संख्या)
थोड़ा पानी पी लो।             (परिमाण)
यह/कलम लाल है।            (रंग)

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त शब्द — सुंदर, कुरूप, पाँच, थोड़ा तथा लाल संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं, अतः ये विशेषण हैं।

विशेषण के कार्य

विशेषण के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं— 
(1) यह संज्ञा और सर्वनाम के गुण-दोष को बतलाता है, जैसे— 
राधा पढ़ने में तेज है ।     (गुण का बोध) 
लेकिन, वह डरपोक है।   (दोष का बोध)

(2) यह संज्ञा और सर्वनाम की निश्चित संख्या या परिमाण बतलाता है, जैसे—
दो लड़के आए थे ।     (निश्चित संख्या का बोध) 
दो लिटर दूध दो ।       (निश्चित परिमाण का बोध) 

(3) यह संज्ञा और सर्वनाम की अनिश्चित संख्या या परिमाण बतलाता है, जैसे—
कुछ लड़कियाँ आईं हैं I      (अनिश्चित संख्या का बोध) 
अधिक भोजन मत करो ।    (अनिश्चित परिमाण का बोध) 

(4) यह संज्ञा और सर्वनाम के क्षेत्र को सीमित करता है, जैसे— 
लाल रूमाल लाओ ।     (सिर्फ लाल—काला, पीला नहीं) 
उस कुत्ते को खिलाओ । (किसी खास कुत्ते को, दूसरे को नहीं)

(5) यह संज्ञा और सर्वनाम की दशा, अवस्था आदि बतलाता है, जैसे
तुम बीमार हो ।     (दशा का बोध) 
मैं जवान हूँ।          (अवस्था का बोध)

विशेषण के भेद

विशेषण के मुख्यतः चार भेद हैं—
(1) संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective) 
(2) परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective) 
(3) गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective)
(4) सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective)

1. संख्यावाचक विशेषण — जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या (निश्चित या अनिश्चित) का बोध हो उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं, जैसे—

दो, चार, पहला, चौथा, दोहरा, चौगुना, आधा, कुछ, कई, बहुत, सैकड़ों, असंख्य आदि ।

चार लड़के आ रहे हैं ।     (चार लड़के—निश्चित संख्या)
कुछ लड़के जा रहे हैं।      (कुछ लड़के—अनिश्चित संख्या)

2. परिमाणवाचक विशेषण — जो विशेषण वस्तु के परिमाण या मात्रा (निश्चित या अनिश्चित) का बोध कराए उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं, जैसे—

दो लिटर, तीन मीटर, थोड़ा, बहुत, कुछ, कम, सारा, पूरा, इतना, उतना, जितना, कितना आदि ।

दो लिटर दूध दें।             (दो लिटर — निश्चित परिमाण)
तीन मीटर कपड़ा दें ।      (तीन मीटर — निश्चित परिमाण)
थोड़ा दूध चाहिए ।           (थोड़ा दूध — अनिश्चित परिमाण)
बहुत कपड़े चाहिए ।        (बहुत कपड़े —अनिश्चित परिमाण)

3. गुणवाचक विशेषण — जिस विशेषण से गुण, दोष, रंग, आकार, स्वभाव, दशा, अवस्था आदि का बोध हो उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं, जैसे—

अच्छा, बुरा, सच्चा, झूठा, नेक, भला, सुन्दर, कुरूप, आकर्षक, सीधा, टेढ़ा, लाल, पीला, हरा, नीला, लंबा, चौड़ा, छोटा, बड़ा, दयालु, कठोर, सूखा, गीला, दुबला, पतला, नया, पुराना, आधुनिक, प्राचीन, बनारसी, मुरादाबादी आदि ।

वह भला/अच्छा आदमी है।     (भला/अच्छा — गुणबोधक) 
मोहन बुरा / दुष्ट लड़का है ।    (बुरा / दुष्ट — अवगुणबोधक)
कपड़ा लाल/पीला है ।            (लाल / पीला — रंगबोधक)
भाला नुकीला / लंबा है ।         (नुकीला / लंबा आकारबोधक) 
मोहन दुबला / मोटा है ।          (दुबला / मोटा — दशाबोधक) 

4. सार्वनामिक विशेषण — जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त हो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं, जैसे

यह, वह, कौन, क्या, कोई, कुछ आदि ।

उपर्युक्त शब्द सर्वनाम और विशेषण दोनों हैं । यदि ये क्रिया के पहले प्रयुक्त हों, तो सर्वनाम और संज्ञा के पहले प्रयुक्त हों, तो सार्वनामिक विशेषण, जैसे—

यह देखो ।           (क्रिया के पहले—यह = सर्वनाम) 
यह फूल देखो।     (संज्ञा के पहलेयह = सार्वनामिक विशेषण) 
वह खेलेगा।         (क्रिया के पहलेवह = सर्वनाम)
वह लड़का खेलेगा । (संज्ञा के पहले—वह = सार्वनामिक विशेषण) 

उपर्युक्त बातों से स्पष्ट हो जाता है कि— 'यह' और 'वह' शब्द सर्वनाम भी हैं और विशेषण भी । यह आप पर निर्भर करता है कि इनका प्रयोग आप किस रूप में करते हैं । अतः इन शब्दों के प्रयोग में सावधानी रखें।

प्रविशेषण

प्रविशेषण विशेषण की विशेषता बतलानेवाले विशेषण को 'प्रविशेषण' कहते हैं । प्रविशेषण सामान्यतः विशेषण के गुणों में वृद्धि लाता है, जैसे—

थोड़ा, बहुत, अति, अत्यंत, अधिक, अत्यधिक, बड़ा, बेहद, महा, घोर, ठीक, बिलकुल, लगभग आदि ।

दूध मीठा है।              (मीठा — संज्ञा की विशेषता = विशेषण)
दूध थोड़ा मीठा है।      (थोड़ा  विशेषण की विशेषता = प्रविशेषण)  
वे दो बजे गए ।           (दो  संज्ञा की विशेषता = विशेषण) 
वे ठीक दो बजे आए।   (ठीक — विशेषण की विशेषता = प्रविशेषण) 

स्पष्ट है कि उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त 'थोड़ा' एवं 'ठीक' शब्द प्रविशेषण हैं, क्योंकि ये विशेषण की विशेषता बतलाते हैं । 

विशेष्य और विशेषण

विशेष्य जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाई जाती है, उस संज्ञा या सर्वनाम को 'विशेष्य' कहते हैं, जैसे—

लड़का लम्बा है ।    (लड़का  विशेष्य)
वह लम्बा है।           (वह — विशेष्य)
कलम लाल है।        (कलम — विशेष्य)
यह लाल है।            (यह — विशेष्य)

विशेष्य-विशेषण और विधेय-विशेषण

प्रयोग की दृष्टि से विशेषण के दो भेद हैं—
(i) विशेष्य-विशेषण और (ii) विधेय-विशेषण ।

विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम) के पहले आए विशेषण को विशेष्य- विशेषण तथा विशेष्य के बाद आए विशेषण को विधेय- विशेषण कहते हैं, जैसे—

वह लम्बा लड़का है।     (लम्बा — विशेष्य-विशेषण)
वह लड़का लम्बा है ।    (लम्बा — विधेय-विशेषण)

नोट— यहाँ दो बातें ध्यान देने योग्य हैं—

(1) विशेषण के लिंग एवं वचन विशेष्य के लिंग एवं वचन के अनुसार होते हैं, चाहे विशेषण विशेष्य के पहले आए या बाद में, जैसे—

वह अच्छा लड़का है।     (अच्छा, लड़का — दोनों एकवचन, पुंलिंग)
वह लड़का अच्छा है।     (लड़का, अच्छा — दोनों एकवचन, पुंलिंग)
वह अच्छी लड़की है।     (अच्छी, लड़की — दोनों एकवचन, स्त्रीलिंग)
वे अच्छे लड़के हैं।         (अच्छे, लड़के — दोनों बहुवचन, पुंलिंग) 

स्पष्ट है कि विशेषण के लिंग एवं वचन, विशेष्य के लिंग एवं वचन के अनुसार आए हैं ।

(2) अगर एक ही विशेषण के अनेक विशेष्य हों, तो विशेषण के लिंग और वचन प्रथम विशेष्य के लिंग और वचन के अनुसार होंगे, जैसे—

(i) उजला कुरता, टोपी और जूते लाओ।
    (प्रथम विशेष्य कुरतापुंलिंग, अतः—उजला)

(ii) उजली टोपी, कुरता और जूते लाओ ।
    (प्रथम विशेष्य टोपी—स्त्रीलिंग, अतःउजली)

(iii) उजले जूते, कुरता और टोपी लाओ ।
    (प्रथम विशेष्य जूते — एकारांत पुंलिंग, अतः —उजले) 

स्पष्ट है कि यहाँ एक विशेषण के अनेक विशेष्य हैं, लेकिन विशेषण के लिंग एवं वचन प्रथम विशेष्य के लिंग एवं वचन के अनुसार ही आए हैं।

सरल वाक्यों में विशेषण का स्थान

सरल वाक्यों में विशेषण का स्थान निम्नलिखित हो सकता है 

(1) सरल वाक्यों में विशेषण प्रायः संज्ञा के पहले आता है, जैसे— 
वह अच्छा लड़का है।     (संज्ञा के पहले विशेषण)
वह अच्छी लड़की है।     (संज्ञा के पहले विशेषण) 

(2) सार्वनामिक विशेषण भी संज्ञा के पहले आता है, जैसे— 
यह फूल देखो।            (यह — सार्वनामिक विशेषण) 
वह लड़का आया है ।   (वह — सार्वनामिक विशेषण)

(3) सरल वाक्यों में संज्ञा या सर्वनाम के बाद भी विशेषण आता है । जैसे—
सोहन नटखट है।                (संज्ञा के बाद विशेषण)
वह बदमाश भाग गया ?       (सर्वनाम के बाद विशेषण)

विशेषणों की रचना

हिन्दी में कुछ विशेषण ऐसे हैं जो मौलिक होते हैं, जिन्हें किसी शब्द या प्रत्यय के सहयोग से नहीं बनाया जाता। ऐसे विशेषणों को मूल विशेषण कहा जाता है, जैसे—

अच्छा, बुरा, काला, उजला, मोटा, पतला, अमीर, गरीब, छोटा, बड़ा, बूढ़ा, जवान, नया, पुराना, निम्न, उच्च, सुंदर, हलका आदि ।

इसके विपरीत अधिकतर विशेषण किसी-न-किसी शब्दांश, उपसर्ग या प्रत्यय के जुड़ने से बनते हैं । जैसे—

(1) शब्दांश लगाकर विशेषणों की रचना

शब्दांश           शब्दांश से बने विशेषण
कर            — हितकर, लाभकर, सुखकर, प्रीतिकर
प्रद            — लाभप्रद, सुखप्रद, संतोषप्रद

ऐसे शब्दांश हैं— आत्मक, जनक, परक, दायक, मग्न, पूर्वक, शाली, शील आदि ।

(2) उपसर्ग लगाकर विशेषणों की रचना

उपसर्ग            उपसर्ग से बने विशेषण
अ             — अक्षम, अगाध, अपढ़, अमेल
            — आपात, आगमन, आचरण
अध           — अधजला, अधपका, अधखिला

ऐसे उपसर्ग हैं— अन, अति, आ, उत्, दुर्, निर्, प्र, भर, बिन, बद, दुस्, परि आदि । खुश,

(3) कुछ विशेषण अव्ययों में — ई, ऊनी, वाला आदि प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं, जैसे—
बाहर—बाहरी          ऊपर—ऊपरी
भीतरभीतरी         अंदरअंदरूनी
करीबकरीबी        सामनेसामनेवाला

(4) कुछ विशेषण दो विशेषणों के मेल से बनते हैं, जैसे—
अच्छा + बुरा = अच्छा-बुरा
बुरा + भला = बुरा-भला
लम्बा + चौड़ा = लम्बा-चौड़ा 
छोटा + बड़ा = छोटा-बड़ा। 

(5) कभी-कभी विशेषण के द्वित्व से भी नए-नए विशेषण बनते हैं, जैसे—
मोटा-मोटा
पतला-पतला
नीले-नीले
पीले-पीले ।

(6) कुछ विशेषण क्रिया में — इयल, अंकू, ईला, आऊ, वैया, आड़ी, अक्कड़, वाँ, आलू, आक, ओड़ा, आकू आदि प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं, जैसे—

क्रिया               विशेषण
अड़-ना            अड़ियल
सड़-ना             सड़ियल
मर-ना              मरियल
उड़-ना             उड़ंकू
कट-ना             कटीला
कमा-ना            कमाऊ
चल-ना             चलाऊ
जड़-ना             जड़ाऊ
टिक-ना            टिकाऊ
बिक-ना            बिकाऊ
झगड़-ना           झगड़ालू
लड़-ना             लड़ाकू
कर-ना             करवैया
खे-ना               खेवैया
गा-ना               गवैया
पढ़-ना             पढ़वैया
खेल-ना            खिलाड़ी
घूम-ना             घुमक्कड़
पी-ना               पियक्कड़
जुड़-ना             जुड़वाँ
तैर-ना              तैराक
भाग-ना            भगोड़ा

(7) लेकिन, अधिकतर विशेषणों की रचना संज्ञा में प्रत्यय लगाकर की जाती है। दूसरी बात, प्रायः संज्ञा ही विशेष्य के रूप में प्रयुक्त होती है। अतः यहाँ विशेष्य-विशेषण की एक संक्षिप्त सूची आगे दी जा रही है

सूची (विशेष्य-विशेषण)

विशेष्य (संज्ञा)         विशेषण
अंक                      अंकित
अँकुड़ी                   अँकुड़ीदार
अंकुर                     अंकुरित
अँगरेज                   अँगरेजी
अंडा                       अंडैल
अंत                        अंतिम, अंत्य
अंतर                       आंतरिक
अधर्म                      अधर्मी
अनिच्छा                  अनिच्छित
अनुभव                    अनुभवी
अनुमान                   अनुमानित
अनुशासन                अनुशासित
अन्याय                    अन्यायी
अपराध                    अपराधी
अपहरण                  अपहृत
अपेक्षा                     अपेक्षित
अभिमान                  अभिमानी
अभियोग                  अभियोगी
अभिशाप                 अभिशप्त
अभ्यास                   अभ्यासी
अर्थ                        अर्थी, आर्थिक
अलंकार                  अलंकृत
अवज्ञा                     अवज्ञात 
अवरोध                   अवरुद्ध
अशक्ति                  अशक्त
अशांति                    अशांत
अश्रद्धा                    अश्रद्धेय
असंतोष                  असंतोषी
अहंकार                  अहंकारी
आकर्षण                 आकर्षित
आकलन                 आकलित
आकांक्षा                 आकांक्षी
आक्रमण                 आक्रांत
आचरण                  आचरित
आडंबर                  आडंबरी
आत्मा                     आत्मीय
आदर                     आदरणीय
आदेश                    आदेशक
आनंद                    आनंदित, आनंदी
आभूषण                 आभूषित
आमंत्रण                 आमंत्रित
आयुर्वेद                  आयुर्वेदिक
आयोजन                 आयोजित
आराधना                 आराध्य
आलिंगन                 आलिंगित
आलोचना                आलोचित
आवरण                   आवृत
आविष्कार               आविष्कृत
आवेदन                   आवेदित
आशंका                  आशंकित
आश्चर्य                     आश्चर्यित
आश्रय                     आश्रित
आश्वासन                 आश्वासित
आसकत                 आसकती
आसमान                 आसमानी
इच्छा                      इच्छित, ऐच्छिक
इतिहास                   ऐतिहासिक
इसलाम                   इसलामी
ईरान                       ईरानी
ईर्षा                         ईर्षित
ईर्ष्या                       ईर्ष्या, ईर्ष्यालु
उच्चरण                   उच्चरित
उत्तेजना                   उत्तेजित 
उत्पत्ति                     उत्पन्न 
उत्पादन                   उत्पादित 
उत्पीड़न                   उत्पीड़ित 
उत्साह                     उत्साहित, उत्साही
उद्घाटन                  उद्घाटित 
उद्देश                       उद्देश्य 
उद्धरण                    उद्धृत, उद्धरणीय
उद्धार                      उद्धारक 
उद्यम                       उद्यमी 
उद्योग                      उद्योगी 
उन्माद                     उन्मादी 
उपकार                    उपकृत 
उपचार                     उपचारित 
उपदेश                     उपदिष्ट 
उपद्रव                     उपद्रवी 
उपभोग                    उपभोगी 
उपमा                      उपमेय 
उपयोग                    उपयोगी 
उपाय                       उपायी 
उपार्जन                    उपार्जित 
उपासना                   उपास्य 
उपेक्षा                      उपेक्षित, उपेक्षणीय
उल्लेख                     उल्लेखनीय
ऋण                         ऋणी 
ऋषि                         ऋषु/आर्षेय/आर्ष 
कंकड़                       कंकड़ीला 
कंठ                          कंठ्य 
कंधार                        कंधारी 
कथन                        कथित, कथनीय
कदाचार                    कदाचारी 
कपट                        कपटी
कपाल                       कपाली 
कपास                       कपासी 
कमानी                      कमानीदार 
करतब                      करतबी 
कलंक                       कलंकित 
कल्पना                      काल्पनिक 
कसरत                      कसरती  
काँटा                         कँटीला 
कागज                       कागजी 
कानून                        कानूनी 
काबुल                       काबुली 
काम                          कामी, कामुक 
किताब                       किताबी 
कीमत                        कीमती 
कुत्सा                         कुत्सित 
कुमार्ग                        कुमार्गी 
कृपा                           कृपालु 
कृषि                           कृष्य 
कैद                            कैदी 
कोढ़                           कोढ़ी 
कोप                           कुपित 
कौरव                         कौरवी 
क्रय                            क्रीत, क्रेय 
क्षण                            क्षणिक 
क्षुधा                            क्षुधित 
क्षोभ                            क्षुब्ध 
खंडन                          खंडित 
खतरा                          खतरनाक 
खयाल                         खयाली 
खर्च                             खर्चीला 
खानदान                       खानदानी
खेद                             खिन्न
खैरात                          खैराती 
खौफ                          खौफनाक 
ख्याति                         ख्यात 
गणन                          गणित, गण्य 
गर्व                             गर्वित
गाँठ                            गठीला 
गाँव                            गँवार
गाभ                            गाभिन 
गुजरात                        गुजराती 
गुण                             गुणी, गुणवान्
गुणा                            गुणित 
गुलाब                         गुलाबी 
गुस्सा                          गुस्सैल 
गृह                             गृही
ग्राम                            ग्रामीण, ग्राम्य 
ग्रास                            ग्रस्त
ग्लानि                          ग्लान 
घर                              घराऊ, घरेलू 
घास                            घसियारा 
घिन                            घिनौना 
घृणा                            घृणित 
चक्षु                             चाक्षुष 
चटक                          चटकदार 
चन्द्र                            चान्द्र 
चमत्कार                      चमत्कृत 
चरित्र                           चारित्रिक
चर्वण                           चर्वित चर्वणीय 
चिंतन                          चिंतित, चिंत्य
चित्र                             चित्रित
चिह्न                             चिह्नित 
चीनी                            चीनीदार
छिद्र                            छिद्रित
जंगल                           जंगली, जांगल 
जटा                            जटिल 
जबान                          जबानी 
जरूरत                        जरूरी 
जल                             जलीय 
जवाब                          जवाबी  
जागरण                       जागरित 
जिद                            जिद्दी 
जीवन                          जीवित  
झंझट                          झंझटिया 
झगड़ा                         झगड़ालू 
टंकण                         टंकित 
टकसाल                      टकसाली  
ठंड                            ठंडा 
ठसक                         ठसकदार 
डंडी                           डंडीमार 
डायरी                         डायरीनुमा 
डोरा                           डोरिया 
ढाल                           ढलवाँ, ढालू 
ढोंग                            ढोंगी 
तंत्र                             तांत्रिक 
तंद्रा                            तंद्रिल 
तत्त्व                            तात्त्विक 
तारक                         तारकित 
तालु                            तालव्य 
तिरस्कार                     तिरस्कृत 
तिरहुत                        तिरहुतिया 
तुष्टि                             तुष्ट 
तृप्ति                            तृप्त 
तेज                             तेजस्वी  
तेजाब                          तेजाबी
त्याग                           त्याज्य, त्यागी
थकान                         थका
दक्खिन                       दक्खिनी
दगा                            दगाबाज
दनु                             दानवी
दन्त                            दन्त्य, दन्ती
दम्पति                        दाम्पत्य
दया                            दयालु, दयनीय 
दरबार                         दरबारी
दशरथ                         दाशरथ
दाग                             दागी
दाह                             दग्ध
दिन                             दैनिक
दूध                             दूधिया/दुधिया
देहात                          देहाती
धन                             धनी
धर्म                             धार्मिक
धुंध                             धुँधला
धूम                             धूमिल
धैर्य                             धीर
नमक                         नमकीन
नरक                          नारकीय
नाम                            नामी
निमंत्रण                       निमंत्रित
निराशा                        निराश
निरीक्षण                      निरीक्षित
निर्माण                        निर्मित
निष्कासन                    निष्कासित
नोक                           नुकीला
न्याय                          न्यायिक/नैयायिक 
पंक                           पंकिल
पंजाब                         पंजाबी
पक्ष                            पाक्षिक
पठन                          पठित, पठनीय
पतन                          पतित
पत्थर                         पथरीला
परदा                         परदानशीं
पराक्रम                      पराक्रमी
पराजय                       पराजित, पराजेय
परित्याग                     परित्यागी
परिमार्जन                   परिमार्जित
परिवर्तन                     परिवर्तनीय
परीक्षण/परीक्षा             परीक्षित
पाकिस्तान                  पाकिस्तानी
पान                           पेय
पानी                          पानीदार
पुरस्कार                     पुरस्कृत
पुराण                         पौराणिक
पुलक                         पुलकित
पुष्प                            पुष्पित
पुस्तक                        पुस्तकीय
पूजन, पूजा                  पूजनीय, पूज्य
पोषण                         पोषित, पोषणीय
प्रकृति                         प्राकृतिक
प्रतिबंध                       प्रतिबद्ध, प्रतिबंधित
प्रतिबिंब                      प्रतिबिंबित
प्रतिष्ठा                        प्रतिष्ठित
प्रतीक्षा                        प्रतीक्षित, प्रतीक्ष्य
प्रयोजन                       प्रयोजनीय
प्रवर्तन                        प्रवर्तित
प्रशंसा                         प्रशंसित
प्रसारण                       प्रसारित
प्रस्तावना                     प्रस्तावित
प्रांत                            प्रांतीय
प्राची                           प्राच्य
प्रोत्साहन                     प्रोत्साहित
फूफा                         फुफेरा
फेन                           फेनिल
बहिष्कार                    बहिष्कृत
बाजार                        बाजारू
बुद्धि                          बौद्धिक
भीख                          भिखारी
भूगोल                        भौगोलिक
भूत                            भौतिक
भूमि                           भौम
भ्रम                           भ्रान्त, भ्रामक
मखमल                      मखमली
मगध                         मागध, मागधी
मजा                          मजेदार
मन                            मनस्वी, मानसिक 
मनु                            मानव
मनोरंजन                    मनोरंजक
मनोवांछा                    मनोवांछित
मर्द                            मर्दाना
मर्म                           मार्मिक
मसीहा                       मसीही
मांस                          मांसल
माता                          मातृक
मात्रा                          मात्रिक
मान                           मान्य
मानव                         मानवीय
मामा                          ममेरा
माल                          मालदार
मिथ्याचार                   मिथ्यावादी
मिश्रण                        मिश्रित
मूल                           मौलिक
मृत्यु                          मर्त्य
मौसा                         मौसेरा, मौसेरी
मौसी                         मौसेरा/मौसीयाउत
यज्ञ                           यज्ञीय/याज्ञिय
यश                           यशस्वी
रक्त                          रक्तिम
राज                          राजकीय
राजद्रोह                     राजद्रोही
राजनीति                    राजनीतिक
राष्ट्र                           राष्ट्रीय
राष्ट्रवाद                      राष्ट्रवादी
रुचि                           रुचित
रुद्र                             रौद्र
रूप                           रूपवान्
रोग                           रोगी, रुग्ण
रोब                           रोबीला
रोष                            रुष्ट
लक्षण                        लाक्षणिक
लज्जा                        लज्जित, लज्जाशील
लय                           लयबद्ध
लालच                       लालची
लेखन                        लेखनीय
लोक                         लौकिक
लोहा                         लौह
वंदन                         वंदनीय
वचन                         वाचनिक
वत्स                          वत्सल
वन                           वन्य
वर्णन                        वर्णित, वर्णनीय
वर्ष                           वार्षिक
वसंत                        वसंती, वासंतिक
वस्तु                         वास्तव, वास्तविक
वायु                          वायव्य
विकार                      विकृत
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विदेश                      विदेशी
विधान                      वैधानिक
विधि                        वैध
विनाश                     विनाशक
विपत्ति                     विपन्न
विभाजन                  विभाजित
विरोध                      विरोधक
शक्ति                      शाक्त
शरत्                       शारदीय
शोषण                     शोषित
संकेत                     सांकेतिक
संचय                      संचयी
संपादन                  संपादकीय
संप्रदाय                  सांप्रदायिक
संरक्षण                   संरक्षित
समर्थन                   समर्थ्य
सम्पत्ति                   सम्पन्न
सम्मान                   सम्मानित
सरकार                  सरकारी
सरोकार                 सरोकारी
सोपान                   सोपानित
स्कूल                     स्कूली
स्वाभिमान              स्वाभिमानी
हँसी                      हँसोड़
हठ                       हठी, हठीला
हमला                    हमलावर
हिम                       हैम
हृदय                     हार्दिक

विशेषणों का रूप-परिवर्तन (रूपांतर)

रूप-परिवर्तन या रूपांतर की दृष्टि से विशेषण के दो भेद हैं— 
(1) विकारी विशेषण और (2) अविकारी विशेषण ।

1. विकारी विशेषण विशेषण शब्दों में आकारांत विशेषण प्रायः विकारी होते हैं। अर्थात्, उनके रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहते हैं, जैसे—
अच्छा, बुरा, नीला, पीला, छोटा, बड़ा आदि । 

लिंग के अनुसार :
मोहन अच्छा / काला लड़का है । (पुंलिंग)
गीता अच्छी / काली लड़की है । (स्त्रीलिंग)

वचन और पुरुष के अनुसार :
मैं अच्छा/काला हूँ ।           (उत्तमपुरुष, एकवचन)
हमलोग अच्छे/काले हैं।      (उत्तमपुरुष, बहुवचन) 
तू अच्छा/काला है ।           (मध्यमपुरुष, एकवचन) 
तुमलोग अच्छे / काले हो ।  (मध्यमपुरुष, बहुवचन)

यदि विभक्ति का प्रयोग हो, तो कभी-कभी एकवचन में भी विशेषण का बहुवचन रूप प्रयुक्त होता है, जैसे—
इस/उस अच्छे लड़के ने कहा । (एकवचन)

2. अविकारी विशेषण— वैसे विशेषण जो अपना रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार कभी नहीं बदलते उन्हें अविकारी विशेषण कहते हैं, जैसे—
धनी, अमीर, भारी, सुन्दर, भीतरी, बाहरी, चतुर, टिकाऊ, आदि । 

मोहन धनी/सुन्दर है ।      (पुंलिंग)
गीता धनी/सुन्दर है ।       (स्त्रीलिंग) 
मैं धनी/सुन्दर हूँ ।           (उत्तमपुरुष, एकवचन)
तुमलोग धनी/सुन्दर हो ।  (मध्यमपुरुष, बहुवचन) 

स्पष्ट है कि इन विशेषण (धनी, सुन्दर) शब्दों पर लिंग, वचन और पुरुष का कोई प्रभाव नहीं पड़ा; हर स्थिति में उनका एक ही रूप है।

विशेषणों के प्रभावशाली प्रयोग

(1) तुलनाबोधक के रूप में : 
साधारण प्रयोग —उसने सबसे उच्च स्थान प्राप्त किया । 
प्रभावशाली प्रयोग —उसने उच्चतम स्थान प्राप्त किया।
साधारण प्रयोग —वह मेरे सबसे निकट का पड़ोसी है । 
प्रभावशाली प्रयोग  —वह मेरा निकटतम पड़ोसी है । 

(2) संख्याबोधक के रूप में : 
साधारण प्रयोग —तुमने पूरे पचास रुपए खर्च कर डाले ?
प्रभावशाली प्रयोग —तुमने पचास के पचास रुपए खर्च कर डाले ?
साधारण प्रयोग —सोहन ने कई दर्जन केले खाए ।
प्रभावशाली प्रयोग —सोहन ने दर्जनों केले खाए ।

(3) पुनरुक्ति के रूप में :
साधारण प्रयोग —मैदान में छोटे लड़के खेल रहे थे।
प्रभावशाली प्रयोग —मैदान में छोटे-छोटे लड़के खेल रहे थे।
साधारण प्रयोग —मोटे आदमियों से भगवान् बचाए ।
प्रभावशाली प्रयोग —मोटे-मोटे आदमियों से भगवान् बचाए। 

(4) विशेषण का प्रयोग संज्ञा के रूप में : 
साधारण प्रयोग —बड़े व्यक्तियों का कहना मानना चाहिए ।
प्रभावशाली प्रयोग —बड़ों का कहना मानना चाहिए ।
साधारण प्रयोग —गरीब लोगों की सहायता करनी चाहिए । 
प्रभावशाली प्रयोग —गरीबों की सहायता करनी चाहिए ।

अभ्यास

1. विशेषण किसे कहते हैं ? किन्हीं आठ विशेषण शब्दों को लिखें।

2. विशेषण के प्रमुख कार्यों को संक्षेप में लिखें।

3. विशेषण के कितने भेद हैं ? प्रत्येक के एक-एक उदाहरण दें।

4. प्रविशेषण से आप क्या समझते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें।

5. विशेष्य- विशेषण और विधेय- विशेषण के अंतर को सोदाहरण स्पष्ट करें ।

6. विशेषण शब्दों की रचना किन-किन शब्द-भेदों से होती है ? प्रत्येक के एक-एक उदाहरण दें ।

7. सरल वाक्यों में विशेषण के स्थान की चर्चा सोदाहरण करें ।

8. रूप-परिवर्तन या रूपांतर की दृष्टि से विशेषण के कितने भेद हैं ? इसे वाक्यप्रयोग द्वारा स्पष्ट करें ।

9. विशेषण के प्रभावशाली प्रयोग की चर्चा सोदाहरण करें ।

10. इनमें से संज्ञा और विशेषण शब्दों को चुनकर अलग-अलग लिखें
अंकुर, अंतिम, अवज्ञा, उपाय, उपमेय, कपास, कमानीदार, खानदानी, गुण, जंगली, तेजाब, दरबार, पूज्य, प्रांत, मरीज, लज्जा, वसंती, संचयी।

11. निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त विशेषणों को चुनकर लिखें।
वहाँ दो लड़के खेल रहे हैं। कुछ लड़के पढ़ रहे हैं। मुझे दो लिटर तेल दीजिए । मोहन बहुत मजबूत है। इस फूल को देखें ।

12. निम्नांकित शब्दों से विशेषण बनाकर वाक्य में प्रयोग करें
अंत, आदर, कीमत, गणन, नोक, पूजन ।

13. निम्नांकित शब्दों से विशेषण बनाएँ—
अर्थ, अहंकार, आक्रमण, आलिंगन, ईरान, उपार्जन, कृपा, गणन, गुण, चिंतन, जंगल, तिरस्कार, दाग, नाम, पत्थर, फेन, लज्जा, शोषण I

14. निम्नांकित वाक्यों के सामने कोष्ठकों में दिए गए शब्दों से विशेषण बनाकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
(क) विद्यार्थियों को ....... रहना चाहिए।             (अनुशासन)
(ख) रेडियो के ....... कौन थे ?                        (आविष्कार)
(ग) आपके कहने का क्या ........ है ?               (उद्देश)
(घ) मैं ........ जानता हूँ ।                                (गणन)
(ङ) ........ बहुत मेहनती होते हैं ।                    (पंजाब)

15. निम्नांकित वाक्यों में से प्रविशेषण चुनकर इनके सामने कोष्ठकों में लिखें
(क) वह बहुत अच्छा लड़का है ।    (            )
(ख) सीता अति सुन्दर है ।             (            )
(ग) रजिया अधिक चालाक है ।       (            )
(घ) चाय थोड़ी मीठी है ।                (            )
(ङ) मेरि बेहद शर्मीली है ।             (            )

16. उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
(क) जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाए उसे ....... कहते हैं।
(ख) जिस विशेषण से संज्ञा की संख्या का बोध हो उसे ....... विशेषण कहते हैं। 
(ग) जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त हो उसे ....... विशेषण कहते हैं । 
(घ) जिस विशेषण से गुण, दोष, आकार, रंग, स्वभाव, दशा आदि का बोध हो उसे ........ विशेषण कहते हैं।
(ङ) जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाई जाती है, उस संज्ञा या सर्वनाम को ........ कहते हैं ।
(च) 'लाल' ......... वाचक विशेषण है ।

17. निम्नांकित वाक्यों को शुद्ध करें
(क) वह बहुत अच्छे लड़के हैं।
(ख) उजली कुरता, टोपी और जूते लाओ ।
(ग) उसने सबसे उच्चतम स्थान प्राप्त किया ।
(घ) तुम्हें इस वस्तु की क्या जरूरी है ?
(ङ) यहाँ से तीसरे कोठी जज साहब की है ?

18. 'पाँच वृक्ष' कौन-से विशेषण के अंतर्गत आता है ? 
(i) गुणवाचक विशेषण 
(ii) संख्यावाचक विशेषण 
(iii) परिमाणवाचक विशेषण 
(iv) सार्वनामिक विशेषण

19. 'धन' शब्द का विशेषण कौन-सा होगा ? 
(i) धनी 
(ii) धन्य 
(iii) धानी
(iv) धन्यवाद

20. 'ऋषि' का विशेषण रूप है
(i) ऋषभ
(ii) आर्ष
(iii) ऋषिक
(iv) इनमें कोई नहीं

21. अनिता के अंकों से मेरे अंक ........ हैं ।
(i) श्रेष्ठ
(ii) बड़े
(iii) उत्तम
(iv) बढ़कर

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