कारक: हिंदी व्याकरण में कारक के भेद, नियम और उदाहरण

 

कारक (CASE)

कारक—संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो वाक्य के अन्य शब्दों, खासकर क्रिया से अपना संबंध प्रकट करता है, कारक कहलाता है, जैसे—
राम ने रावण को मारा ।                उसने उसको पढ़ाया ।

प्रथम वाक्य में दो संज्ञा-शब्द (राम और रावण) और एक क्रिया - शब्द (मारा) हैं। दोनों संज्ञा - शब्दों का आपस में तो संबंध है ही, मुख्य रूप से इनका संबंध क्रिया (मारा) से भी है, जैसे—
रावण को किसने मारा?        राम ने 
राम ने किसको मारा?           रावण को । 

यहाँ मारने की क्रिया राम करते हैं, अतः राम ने = कर्ताकारक और मारने (क्रिया) का फल रावण पर पड़ता है, अतः रावण को = कर्मकारक। 

स्पष्ट है कि करनेवाला कर्ताकारक हुआ, इसका चिह्न 'ने' है और जिसपर फल पड़ा वह कर्मकारक हुआ, जिसका चिह्न 'को' है। 

कारक के विभिन्न भेदों के अध्ययन से बातें और स्पष्ट हो जाएँगी ।

कारक के भेद

कारक के आठ भेद निम्नलिखित हैं

विभक्ति         कारक         कारक-चिह्न
प्रथमा              कर्ता              ने, 0 
द्वितीया            कर्म               को, 0
तृतीया             करण             से, द्वारा
चतुर्थी             संप्रदान           को, के लिए
पंचमी             अपादान          से 
षष्ठी                संबंध              का, के, की
सप्तमी            अधिकरण        में, पर
अष्टमी             संबोधन           हे, अरे आदि । 

आगे प्रत्येक की संक्षिप्त चर्चा की गई है

कारक-भेद : अर्थ एवं प्रयोग

1. कर्ताकारक— जो काम (क्रिया) करता है उसे कर्ता कहते हैं । संस्कृत में कर्ता को ही कर्ताकारक कहते हैं। इसका चिह्न अर्थात् इसकी विभक्ति 'ने' है, जैसे—
सोहन खाता है ।            (0 विभक्ति)
सोहन ने खाया।             (नेविभक्ति)

दोनों वाक्यों से स्पष्ट है कि खाने का काम (क्रिया) सोहन ही करता है। जहाँ पहले वाक्य में 'ने' चिह्न लुप्त या छिपा हुआ है, वहीं दूसरे वाक्य में यह चिह्न स्पष्ट है ।

2. कर्मकारककर्ता द्वारा संपादित क्रिया का प्रभाव जिस व्यक्ति या वस्तु पर पड़े उसे कर्मकारक कहते हैं । इसका चिह्न 'को' है, जैसे— 
मोहन आम खाता है ।                (0 विभक्ति)
मोहन सोहन को पीटता है ।        (को—विभक्ति)

यहाँ खाना (क्रिया) का फल 'आम' पर और पीटना (क्रिया) का फल 'सोहन' पर पड़ता है, अतः 'आम' और 'सोहन को' कर्मकारक हैं। 'आम' के साथ 'को' चिह्न छिपा है, लेकिन सोहन के साथ 'को' चिह्न स्पष्ट है।

3. करणकारक जो वस्तु क्रिया के संपादन में साधन का काम करे उसे करणकारक कहते हैं । इसके चिह्न हैं— 'से' और 'द्वारा', जैसे—
मैं कलम से लिखता हूँ ।                 (कलमलिखने का साधन ) 
उसकी उँगली चाकू द्वारा कट गई।   (चाकूकाटने का साधन ) 

यहाँ ‘कलम से’' और 'चाकू द्वारा'  करणकारक हैं, क्योंकि ये वस्तुएँ क्रिया-संपादन में साधन के रूप में प्रयुक्त हैं ।

4. संप्रदानकारक जिसके लिए कोई क्रिया (काम) की जाए उसे संप्रदानकारक कहते हैं । इसके दो चिह्न हैं- 'को' और 'के लिए', जैसे— 
राम ने श्याम को पुस्तक दी ।
राम ने श्याम के लिए पुस्तक खरीदी ।

यहाँ देने और खरीदने की क्रिया श्याम के लिए है । अतः 'श्याम को ' एवं 'श्याम के लिए' संप्रदानकारक हैं ।

5. अपादानकारक अगर क्रिया के संपादन में कोई वस्तु अलग हो जाए, तो उसे अपादानकारक कहते हैं । इसका चिह्न 'से' है, जैसे—
पेड़ से पत्ते गिरते हैं।              (पत्ते का अलगाव — पेड़ से)
छात्र कमरे से बाहर गया ।      (छात्र का अलगाव — कमरे से )

यहाँ 'पेड़ से' और 'कमरे से' अपादानकारक हैं, क्योंकि गिरते समय पत्ते पेड़ से और जाते समय छात्र कमरे से अलग हो गए । 

6. संबंधकारक जिस संज्ञा या सर्वनाम से किसी वस्तु का संबंध जान पड़े उसे संबंधकारक कहते हैं। इसके चिह्न हैं— 'का', 'के' और 'की', जैसे—
चंदन का घोड़ा दौड़ता है ।      उस का घोड़ा दौड़ता है।
चंदन के घोड़े दौड़ते हैं ।         उसके घोड़े दौड़ते हैं ।
चंदन की घोड़ी दौड़ती है।       उसकी घोड़ी दौड़ती है।

यहाँ चंदन का/के/की या उस का/के/की संबंधकारक हैं, क्योंकि 'का घोड़ा', ‘के घोड़े', 'की घोड़ी' का संबंध चंदन (संज्ञा) या उस (सर्वनाम) से है। यही एक कारक है जिसका संबंध क्रिया से न होकर व्यक्ति वस्तु से रहता है।

7. अधिकरणकारक जिससे क्रिया के आधार का ज्ञान प्राप्त हो उसे अधिकरणकारक कहते हैं । इसके चिह्न हैं— 'में' और 'पर' । जैसे—
शिक्षक वर्ग में पढ़ा रहे हैं। रमेश छत पर बैठा है । 

यहाँ 'वर्ग में' और 'छत पर' अधिकरणकारक हैं, क्योंकि इनसे पढ़ाने और बैठने की क्रिया के आधार का ज्ञान होता है।

8. संबोधनकारक जिस संज्ञा से किसी के पुकारने या संबोधन का बोध हो उसे संबोधनकारक कहते हैं । इसके चिह्न हैं—हे, अरे, अजी, ऐ, ओ, आदि। जैसे—
हे ईश्वर, मेरी सहायता करो। अरे दोस्त, जरा इधर आओ ।
यहाँ 'हे ईश्वर' और 'अरे दोस्त' संबोधनकारक हैं।

कारकों को संक्षेप में इस प्रकार याद रखें:

1. कर्ता ने; कर्म को; करण से, द्वारा; संप्रदान को, के लिए; अपादान से; संबंध का, के, की; अधिकरण में, पर; संबोधन हे, अरे आदि । 

2. हे भरत! राम ने रावण को, धनुष से, सीता के लिए, रथ से उतरकर, बाणों की बौछार कर, धरती पर मार गिराया।

'ने' चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है

1. जब क्रिया सकर्मक हो, तब सामान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, संदिग्ध भूत और हेतुहेतुमद्भूत में इस चिह्न का प्रयोग होता है, जैसे— 
सामान्य भूत — उसने रोटी खाई ।
आसन्न भूत — उसने रोटी खाई है ।
पूर्ण भूत — उसने रोटी खाई थी ।
संदिग्ध भूत — उसने रोटी खाई होगी ।
हेतुहेतुमद्भूत  अगर उसने रोटी खाई होती, तो पेट भरा होता । 

2. अकर्मक क्रिया में कर्ता के 'ने' चिह्न का प्रयोग प्रायः नहीं होता है, लेकिन—नहाना, खाँसना, छींकना, थूकना, भूँकना आदि अकर्मक क्रियाओं में इस चिह्न का प्रयोग उपर्युक्त भूतकालों में होता है, जैसे
राम ने नहाया ।         
उसने खाँसा है।        
उसने छींका था। 
मैंने थूका होगा।

3. जब अकर्मक क्रिया सकर्मक बन जाती है, तब इस चिह्न का प्रयोग उपर्युक्त भूतकालों में होता है, जैसे—
उसने बच्चे को रुलाया ।
माँ ने बच्चे को हँसाया।
मैंने कुत्ते को जगाया था।
उसने बच्चे को सुलाया होगा ।

4. यदि अकर्मक क्रिया के साथ कोई सजातीय कर्म आ जाए, तो उपर्युक्त भूतकालिक प्रयोगों में यह चिह्न प्रयुक्त होगा, जैसे—
उसने तीखी बोलियाँ बोली ।        (बोली बोलना)
उसने टेढ़ी चाल चली है।            (चाल चलना)
उसने कई लड़ाइयाँ लड़ी थी।      (लड़ाई लड़ना)

5. यदि संयुक्त क्रिया का अंतिम खंड सकर्मक हो, तो उपर्युक्त भूतकालों में इस चिह्न का प्रयोग होगा, जैसे—
उसने जी भरकर टहल लिया। उसने जी भरकर टहल लिया है । 
मैंने दिल खोलकर हँस लिया था । उसने दिल खोलकर रो लिया होगा । 
यदि उसने दिल खोलकर रो लिया होता, तो मन शांत हो जाता। 

6. ‘देना’ या ‘डालना' क्रिया के पहले यदि कोई अकर्मक क्रिया भी हो, तो अपूर्ण भूत और हेतुहेतुमद्भूत को छोड़कर सभी भूतकालों में इस चिह्न का प्रयोग होगा, जैसे—
सामान्य भूत — उसने घंटों सो डाला ।
आसन्न भूत — उसने घंटों सो डाला है। 
पूर्ण भूत — उसने घंटों सो डाला था ।
संदिग्ध भूत — उसने घंटों सो डाला होगा।

'ने' चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ नहीं होता

1. वर्तमानकाल और भविष्यत् काल के सभी भेदों तथा मात्र अपूर्ण भूतकाल में इस चिह्न का प्रयोग नहीं होता, जैसे—
वह खाता है।                वे खेलेंगे।
वह खा रहा है ।            वे खेलते रहेंगे ।
वह खा रहा था ।           मैं पढ़ चुकूँगा ।

2. सिर्फ अपूर्ण भूतकाल को छोड़कर सभी भूतकालों में, सकर्मक क्रिया रहने पर 'ने' चिह्न का प्रयोग होता है, लेकिन पूर्वकालिक क्रिया रहने पर इस चिह्न का प्रयोग नहीं होता, जैसे—
वह आकर पढ़ा ।
वह बैठकर गया है ।
मैं नहाकर खाया था ।
वह सोकर लिखा होगा ।

3. सकर्मक क्रिया रहने पर भूतकालिक प्रयोग में 'ने' चिह्न लगता है, लेकिन कुछ सकर्मक क्रियाओं—बकना, बोलना, भूलना, समझना आदि के रहने पर इस चिह्न का प्रयोग न करें, जैसे— 
वह मुझसे बोली। 
श्याम गाली बका है
तुम नहीं समझे थे ।
वह मुझे भूल गया होगा ।

4. अकर्मक क्रियाओं के भूतकालिक प्रयोग में इस चिह्न का प्रयोग न करें, जैसे—
वह आया ।
तुम नहीं गए ?
राम दौड़ा।
वह सो गया था।

5. चुकना, जाना और सकना के भूतकालिक प्रयोग में इस चिह्न का प्रयोग न करें, जैसे—
वह लिख चुका ।
तुम खा गए ?
राम बोल न सका ।
तू गा न सका ।

'को' चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है

'को' कर्मकारक का चिह्न है । इसका प्रयोग कर्मकारक के अतिरिक्त कुछ दूसरे कारकों में भी होता है, जैसे—

1. कर्मकारक के रूप में—
राम ने रावण को मारा ।        (रावण को — कर्मकारक)

2. कर्मकारक के रूप में, प्रेरणार्थक क्रिया के गौण कर्म में—
शिक्षक छात्र को हिन्दी पढ़ाते हैं।    (छात्र को — गौण कर्म)
माँ बच्चे को खाना खिलाती है।        (बच्चे को — गौण कर्म)

3. यदि अस्तित्व के अर्थ में 'होना' क्रिया का प्रयोग हो, तो कर्मकारक के 'को' का रूपांतर 'के' में हो जाता है । जैसे—
सोहन के पुत्र हुआ है ।        ('को' के बदले  'के')
उसके दो पत्नियाँ हैं ।          ('को' के बदले 'के') 

4. कर्ताकारक के रूप में, क्रिया की अनिवार्यता प्रकट करने के लिए 
राम को पटना जाना होगा ।     (राम को — कर्ताकारक) 
मोहन को पत्र लिखना है ।       (मोहन को — कर्ताकारक)

5. कर्ताकारक के रूप में, कै, दस्त आदि शारीरिक आवेगों की अभिव्यक्ति हेतु—
रोगी को बिछावन पर टट्टी हो गई ।  (रोगी को — कर्ताकारक)
श्याम को कै हो गई ।                    (श्याम को — कर्ताकारक)

6. कर्ताकारक के रूप में, मानसिक आवेगों की अभिव्यक्ति के लिए 
सीता को चिंता सता रही है।             गीता को दुःख हुआ ।

7. कर्ताकारक में, यदि 'दे' सहायक क्रिया के रूप में प्रयुक्त हो— 
सोहन को आम खाने दो ।         (सोहन को—कर्ताकारक)
मोहन को किताब पढ़ने दो।       (मोहन को — कर्ताकारक)

8. संप्रदानकारक के रूप में— 
राम ने श्याम को पुस्तक दी ।        (श्याम को — संप्रदानकारक)
बच्चे ने शिक्षक को छड़ी दी।         (शिक्षक को — संप्रदानकारक)

9. इच्छासूचक के रूप में, यदि मन, जी आदि का प्रयोग हो—
भगवद्गीता पढ़ने को मन करता है ।     (पढ़ने को — संप्रदानकारक) 
रामायण सुनने को जी करता है।         (सुनने को — संप्रदानकारक) 

10. अधिकरण के रूप में, समयसूचक शब्दों के साथ
वह प्रतिदिन रात को आता है।         (रात को — अधिकरणकारक)
वह चार बजे सुबह को जाता है।       (सुबह को — अधिकरणकारक)

'से' का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है

1. अपादान और करण दोनों कारकों का चिह्न 'से' है, लेकिन दोनों में अर्थ की दृष्टि से बहुत अंतर है । जहाँ करण का 'से' साधन का अर्थ सूचित करता है, वहाँ अपादान का 'से' अलगाव का, जैसे—
मैं कलम से लिखता हूँ ।        (कलम से — करणकारक)
पेड़ से पत्ते गिरते हैं।             (पेड़ से — अपादानकारक)

2. करण का प्रयोग 'हेतु' के अर्थ में—
वह किसी काम से आया है।        (काम से = काम हेतु)

3. करण का प्रयोग कारण बतलाने के अर्थ में—
वह प्लेग से मर गया ।            (मरने का कारण — प्लेग)

4. करण का प्रयोग प्रेरणार्थक क्रिया में
जेलर कैदी से काम करवाता है ।             (कर्ता जेलर है, कैदी नहीं) 
संपादक लेखक से किताब लिखवाता है।   (कर्ता संपादक है, लेखक नहीं)

5. अपादान का प्रयोग दिशा-बोध कराने में—
बिहार झारखंड से उत्तर है ।

6. अपादान का प्रयोग तुलना के अर्थ में—
सीता गीता से सुन्दर है ।
मोहन सोहन से लंबा है ।

7. अपादान का प्रयोग समय-बोध कराने में—
मैं सुबह से पढ़ रहा हूँ ।
वह दो वर्षों से तबला सीख रहा है । 

8. कर्ताकारक के रूप में, जब अशक्ति प्रकट करनी हो—
राम से रोटी खाई नहीं जाती ।           (कर्मवाच्य)
सीता से चला नहीं जाता ।                (भाववाच्य)

9. कर्मकारक के रूप में, जब क्रिया द्विकर्मक रहती है—
छात्र गुरु से हिन्दी सीख रहा है । 
सीता गीता से वीणा सीख रही है।

10. जाति, स्वभाव, प्रकृति, लक्षण आदि प्रकट करने में— 
राम जाति से क्षत्रिय थे ।  
वे स्वभाव से दयालु हैं ।

'में' और 'पर' का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है

'में' और 'पर' अधिकरणकारक के चिह्न हैं । इनका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है

(क) 'में' का प्रयोग :
1. अधिकरणकारक के रूप में, वस्तु, स्थान आदि के भीतर की स्थिति बतलाने में—
छात्र कमरे में है ।
पानी में मछली है ।

2. अधिकरणकारक के रूप में, प्रेम, घृणा, दोस्ती, दुश्मनी आदि भावों को प्रकट करने में—
मोहन और सोहन में मित्रता है । 
आपमें शराफत कूट-कूटकर भरी है । 
दोनों में बहुत प्रेम है ।

3. अधिकरणकारक के रूप में, समय का बोध कराने हेतु— 
मैं सुबह में व्यायाम करता हूँ ।

4. अधिकरणकारक के रूप में, वस्त्र या पोशाक का भाव प्रकट करने में
औरतें साड़ी में अच्छी लगती हैं। 
आप धोती में अच्छे लगते हैं

5. अधिकरणकारक के रूप में, जगह, स्थान आदि बतलाने में— 
वह मुम्बई रहता है ।                (में — लुप्त है) 
मैं अब दिल्ली नहीं रहता हूँ।      (में — लुप्त है) 

6. करणकारक के रूप में, किसी वस्तु का मूल्य बतलाने हेतु—
यह पुस्तक चालीस रुपए में मिलती है।
वह वस्त्र कितने रुपए में है ?

(ख) 'पर' का प्रयोग अधिकरणकारक में निम्नलिखित स्थितियों में होता है : 
1. ऊपर का बोध कराने के लिए—
वह छत पर बैठा है।            (छत के ऊपर)

2. समय, दूरी तथा अवधि का बोध कराने के लिए—
वह दस बजकर पाँच मिनट पर स्कूल गया ।     (समय)
राँची यहाँ से दस मील पर है ।                        (दूरी) 
वह पाँच दिनों पर लौटा।                               (अवधि)

3. संप्रदानकारक के रूप में, मूल्य बताने के लिए—
आपका ईमान पैसे पर बिक गया।
वह एक हजार रुपए मासिक पर काम नहीं करेगा ।

कुछ शब्दों के कारक-रूप यहाँ दिए जा रहे हैं—

संज्ञा की कारक-रचना

बालक

कारक             एकवचन                     बहुवचन 
कर्ता                बालक, बालक ने           बालक, बालकों ने 
कर्म                 बालक, बालक को         बालक, बालकों को 
करण               बालक (से, द्वारा)           बालकों (से, द्वारा) 
संप्रदान            बालक के लिए               बालकों के लिए 
अपादान           बालक से                      बालकों से 
संबंध               बालक (का, के, की)       बालकों (का, के, की) 
अधिकरण         बालक (में, पर)              बालकों (में, पर ) 
संबोधन            हे बालक                       हे बालको

लड़का

कारक             एकवचन                     बहुवचन 
कर्ता                लड़का, लड़के ने            लड़के, लड़कों ने
कर्म                 लड़का, लड़के को          लड़के, लड़कों को
करण               लड़के (से, द्वारा)             लड़कों (से, द्वारा)
संप्रदान            लड़के के लिए                लड़कों के लिए
अपादान           लड़के से                       लड़कों से
संबंध               लड़के (का, के, की)        लड़कों (का, के, की)
अधिकरण         लड़के (में, पर)              लड़कों (में, पर)
संबोधन            हे लड़के                        हे लड़को

नदी

कारक             एकवचन                     बहुवचन 
कर्ता                नदी, नदी ने                  नदियाँ, नदियों ने
कर्म                 नदी, नदी को                नदियाँ, नदियों को
करण               नदी (से, द्वारा)               नदियों (से, द्वारा)
संप्रदान            नदी के लिए                   नदियों के लिए
अपादान           नदी से                          नदियों से
संबंध               नदी (का, के, की)           नदियों (का, के, की)
अधिकरण         नदी (में, पर)                 नदियों (में, पर)
संबोधन            हे नदी                           हे नदियो

बन्धु

कारक             एकवचन                     बहुवचन 
कर्ता                बन्धु, बन्धु ने                  बन्धु, बन्धुओं ने
कर्म                 बन्धु, बन्धु को                बन्धु, बन्धुओं को
करण               बन्धु (से, द्वारा)               बन्धुओं (से, द्वारा)
संप्रदान            बन्धु के लिए                   बन्धुओं के लिए
अपादान           बन्धु से                          बन्धुओं से
संबंध               बन्धु (का, के, की)           बन्धुओं (का, के, की)
अधिकरण        बन्धु (में, पर)                  बन्धुओं (में, पर)
संबोधन            हे बन्धु                          हे बन्धुओ

अभ्यास

1. कारक किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।

2. कारक के कितने भेद हैं ? इनके नाम विभक्ति-चिह्नों के साथ लिखें

3. संप्रदानकारक और संबंधकारक को सोदाहरण स्पष्ट करें ।

4. अधिकरणकारक और संबोधनकारक को सोदाहरण स्पष्ट करें ।

5. कर्ताकारक और कर्मकारक किसे कहते हैं ? इन्हें सोदाहरण स्पष्ट करें । 

6. करणकारक और अपादानकारक में क्या अंतर है ? इन्हें सोदाहरण स्पष्ट करें । 

7. कर्ता के 'ने' चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है ? इससे संबंधित किन्हीं तीन अवस्थाओं या स्थितियों को बतलाएँ ।

8. कर्ता के 'ने' चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ नहीं होता है ? इससे संबंधित किन्हीं तीन परिस्थितियों की चर्चा करें ।

9. किन्हीं चार कारकों के सहयोग से एक वाक्य बनाएँ ।

10. एक ऐसा वाक्य बनाएँ जिसमें 'ने', 'को', 'से' तथा 'के लिए' या सप्तमी कारक का प्रयोग हो ।

11. इन वाक्यों में प्रयुक्त कारकों एवं इनके चिह्नों के नाम कोष्ठकों में लिखें 
(क) सोहन ने सेब खाया ।                                 (सोहन ने — कर्ताकारक)
(ख) मैं कलम से लिखता हूँ ।                             (                                )
(ग) सोनू मोनू को पीटता है ।                             (                                )
(घ) रमेश छत पर बैठा है ।                               (                                )
(ङ) छात्र कमरे में बैठा है                                (                                )
(पेड़ से पत्ते गिरते हैं ।                                  (                                )
(छ) हे ईश्वर, मेरी सहायता करो।                         (                                )
(ज) सोहन का घोड़ा दौड़ता है।                           (                                )
(झ) रमेश ने महेश को पुस्तक दी ।                      (                                )
(ञ) राम ने श्याम के लिए पुस्तक खरीदी ।            (                                )

12. निम्नांकित वाक्यों में प्रयुक्त कारकों के नाम कोष्ठकों में लिखें—
(क) मोहन को दिल्ली जाना होगा ।            (मोहन को — कर्ताकारक)
(ख) नेपाल भारत से उत्तर है ।                  (भारत से —                  )
(ग) सीता गीता से सुन्दर है ।                     (गीता से —                   )
(घ) आप साड़ी में अच्छी लगती हैं ।            (साड़ी में —                  )
(ङ) सोहन को दुःख हुआ ।                      (सोहन को                 )
(च) सीता द्वारा रोटी खाई गई ।                 (सीता द्वारा                 )
(छ) वह पैसे पर बिक गया ।                     (पैसे पर                    )
(ज) राम और श्याम में मित्रता है।               (श्याम में —                  )
(झ) मोहन ने सोहन को पुस्तक दी।            (सोहन को                 )
(ञ) यह कपड़ा सौ रुपए में है ।                 (रुपए में                    )

13. कोष्ठक में दिए गए उपयुक्त कारक-चिह्नों से खाली जगहों को भरें—
(क) राम .......... रोटी खाई ।                            (को, ने)
(ख) ........ दोस्त, जरा इधर आओ ।                   (हे, अरे)
(ग) शिक्षक वर्ग ....... पढ़ा रहे हैं।                       (को, में)
(घ) मोहन ....... घोड़े दौड़ते हैं।                          (का, के, की)
(ङ) छात्र कमरे ........ बाहर गया ।                     (में, से, के लिए)
(च) वह चेचक ......... मर गया ।                         (में, पर, के लिए, से)
(छ) राम ......... रावण ....... मारा ।                     (ने, को, से, में, पर, की)
(ज) राम ......... श्याम ........ पुस्तक खरीदी |        (में, पर, ने, के, के लिए)

14. इन संज्ञाओं के रूप उनके सामने अंकित कारकों में दोनों वचनों में लिखें—

संज्ञा          कारक        एकवचन        बहुवचन
बालक        कर्ता            ............        ............
लड़का        कर्म            ............        ............
नदी            करण          ............        ............
बन्धु            संप्रदान       ............        ............

15. निम्नांकित वाक्यों को शुद्ध करें
(क) श्याम ने आम खाता है । राम आम खाया ।
(ख) मोहन किताब को पढ़ता है । मैं कलम में लिखता हूँ 
(ग) गीता ने सीता को लिए एक पुस्तक खरीदी है ।
(घ) छात्र कमरे में बाहर गया । सुरेश छत में बैठा है।
(ङ) वह बच्चे को रुलाया। उसने मुझसे बोली । मैंने नहाकर खाया था ।

16. 'पर' शब्द किस कारक का चिह्न है ?
(i) कर्म 
(ii) संप्रदान 
(iii) अधिकरण 
(iv) अपादान 

17. 'मुख्यमंत्री ने छात्राओं को साइकिल दी' में 'छात्राओं को' कौन-सा कारक है ?
(i) संप्रदान
(ii) कर्म
(iii) संबंध
(iv) अपादान

18. 'घर में कुत्ता भी शेर होता है' अथवा 'वह मनुष्यों में श्रेष्ठ है' वाक्यों में 'में' किस कारक की विभक्ति है ? 
(i) करण 
(ii) संप्रदान 
(iii) कर्ता 
(iv) अधिकरण

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