लेखन: हिंदी व्याकरण में प्रभावी लेखन के नियम और तरीके

 

लेखन (WRITING)

सारांश-लेखन

हिन्दी भाषा में किसी अवतरण अथवा किसी गद्य या पद्य के उद्धृत भाग में निहित मूल भाव को जब अति संक्षिप्त शैली में प्रस्तुत किया जाता है, तब यह सारांश कहलाता है और यह विधा सारांश - लेखन कहलाती है। इसके लेखन में किसी शीर्षक का होना अनिवार्य नहीं होता, केवल महत्त्वपूर्ण तथ्यों को अपनी भाषा में प्रस्तुत करना होता है । 

सारांश-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश निम्नलिखित हैं
1. सारांश-लेखन हेतु प्रस्तुत अवतरण या गद्यांश को बार-बार पढ़ें और लेखक के विचार को समझें ।
2. महत्त्वपूर्ण तथ्यों को मस्तिष्क में अथवा कागज पर एकत्र करें । 
3. पात्रों की बातचीत को संक्षिप्त रूप में अपनी ओर से प्रस्तुत करें । 
4. व्याकरण की दृष्टि से अति साधारण भाषा का प्रयोग करें, अर्थात् — लम्बे मुहावरों, लोकोक्तियों एवं अलंकारों से बचें।
5. मूल उद्धरण के बड़े-बड़े शब्दों को यथासंभव संधि-समास में लिखें। 
6. वाक्यों को छोटा-छोटा रखें और अपनी ओर से कुछ भी न जोड़ें। 
7. मूल कथन से बिलकुल छेड़छाड़ न करें ।

उदाहरण के लिए कुछ कहानियाँ और उनके सारांश प्रस्तुत हैं

(क) कहानी— प्राचीनकाल में एक अत्यन्त ही लालची राजा रहता था। उसे सोने एवं चाँदी की अमिट भूख थी। एक बार उसने कई वर्षों तक अपने आराध्य देव को नित्य आराधना द्वारा खुश किया। भगवान् उसके सम्मुख प्रकट हुए और बोले, “प्रिय वत्स ! मैं तुम्हारी भक्ति से अति प्रसन्न हूँ। बोलो, तुम्हें क्या चाहिए ?"

राजा बोला, “प्रभु! आपके दर्शन-मात्र से मैं धन्य हो गया ।"
प्रभु ने कहा, “फिर भी एक वरदान माँग लो।”

राजा ने हाथ जोड़कर कहा, “यदि आप सचमुच मुझे कुछ देना चाहते हैं तो मुझे यह वरदान दें कि कोई भी वस्तु मेरे स्पर्श मात्र से सोना बन जाए ।"

प्रभु ने कहा, "ऐसा ही हो !"

भगवान् के अंतर्धान होते ही राजा जो कुछ भी छूता, वह सोने में परिवर्तित हो जाता। अब वह कुछ खा भी नहीं पाता था क्योंकि भोज्यपदार्थ भी उसके छूते ही सोना बन जाते थे । एक दिन उसका एकमात्र पुत्र उसकी गोद में आ बैठा, वह भी उसके स्पर्श से सोने का पुतला-जैसा बन गया ।

वह राजा अपने लालच और मूर्खता के कारण बहुत ही दुःखी हुआ । 

सारांश— एक बार एक राजा ने कठिन तपस्या के बल पर ईश्वर से यह वर प्राप्त किया कि वह जो कुछ भी छूएगा, सोने का बन जाएगा । परन्तु यह उसके लिए अभिशाप सिद्ध हुआ, क्योंकि वह अब कुछ खा भी नहीं सकता था । उसका इकलौता भी उसके स्पर्श से सोने में बदल गया । वह राजा अपने लालची स्वभाव के कारण बहुत दुःखी हुआ ।

(ख) कहानी— एक नदी के किनारे घना जंगल था । रामा नाम का एक लकड़हारा रोज वहाँ आता और लकड़ियाँ काटकर ले जाता था। उन्हें बेचकर वह अपना और अपने परिवार का पेट भरता था । एक दिन वह नदी के किनारे खड़ा होकर लकड़ी काट रहा था। अचानक उसकी कुल्हाड़ी हाथ से छूटकर नदी में जा गिरी। वह फूट-फूटकर रोने लगा। वरुणदेव उसकी सहायता के लिए उपस्थित हुए ।

उन्होंने पूछा, “हे मानव! तुम क्यों रो रहे हो ?”

रामा ने कहा, “भगवन् मेरे पास एक ही कुल्हाड़ी थी, वह नदी में गिरकर खो गई है । मैं उसके बिना भूखा मर जाऊँगा । कृपया मेरी मदद करें ।"

वरुणदेव ने नदी में डुबकी लगाई। कुछ क्षण बाद जब वे ऊपर आए, तो उनके हाथ में सोने की एक कुल्हाड़ी थी ।

उन्होंने पूछा, "क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है ?"

रामा ने ध्यान से देखकर कहा, “नहीं भगवन् ! यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है।”

वरुणदेव ने एक बार फिर नदी में डुबकी लगाई और चाँदी की कुल्हाड़ी के साथ वापस आए ।

रामा ने फिर कहा, "महाराज ! यह भी मेरी नहीं है ।"

तीसरी बार वरुणदेव नदी के अंदर से लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आए । उन्होंने रामा से पूछा, "क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है ?" 

रामा ने प्रसन्न होकर कहा, “जी  भगवन्!”

वरुणदेव उसकी ईमानदारी से अत्यंत खुश हुए और उसे तीनों कुल्हाड़ियाँ पुरस्कार के रूप में दे दीं।

सारांश— रामा नामक लकड़हारा जंगल से लकड़ियाँ काटकर अपनी आजीविका चलाता था । एक दिन लकड़ी काटते समय उसकी लोहेवाली कुल्हाड़ी नदी में गिर पड़ी। उसकी रोने की आवाज सुनकर वरुणदेव उसकी मदद के लिए आए। उन्होंने उसे बारी-बारी से सोने, चाँदी और लोहे की कुल्हाड़ियाँ दिखाईं। रामा ने उनमें से लोहे की कुल्हाड़ी को अपना कहकर ले लिया। वरुणदेव ने प्रसन्न होकर उसे सभी कुल्हाड़ियाँ पुरस्कार स्वरूप दे दीं।

अभ्यास

निम्नलिखित अवतरण का सारांश लिखें—

एक बार एक मुनि अपनी कुटिया के बाहर बैठे थे। तभी आकाश में उड़ते हुए किसी पक्षी के मुँह से निकलकर एक चुहिया वहाँ गिर पड़ी। मुनि ने उसे प्यार से उठाकर अपने साथ रख लिया । समय बीतता गया; चुहिया मुनिवर को अपनी संतान-जैसी प्यारी हो गई और वह भी उनसे उतना ही स्नेह करने लगी ।

एक दिन जब चुहिया इधर-उधर कूद रही थी, तभी एक बिल्ली ने उसे दबोचना चाहा । चुहिया दौड़कर मुनिवर के पास पहुँची । उसकी घबराहट को देखकर मुनि ने पूछा, "क्या बात है ? तुम इतनी परेशान क्यों हो ?”

चुहिए ने कहा, "मैं बहुत कमजोर हूँ । मुझे बिल्ली से बहुत भय लगता है । कृपया आप मुझे बिल्ली बना दें ।”

मुनिराज ने कहा, "ऐसा ही हो !”

उनके इतना कहते ही वह चुहिया बिल्ली बन गई और निडर होकर रहने लगी। एक दिन किसी कुत्ते ने उसे डरा दिया, तो वह फिर डरकर मुनि के पास दुबक गई ।

मुनि ने पूछा, “अब तुम्हें किस बात का डर है ? तुम यहाँ क्यों छिपी हो ?” उसने कहा, "महामुने! आज मुझे एक कुत्ते ने डरा दिया । आप मुझे कुत्ता बना दीजिए । "

मुनि ने हँसकर कहा, "ठीक है, तुम कुत्ता बन जाओ ।”

कुत्ता बनकर वह चुहिया आराम से रहने लगी। एक दिन वह जंगल में चली गई तो शेर ने गुर्राकर उसे दबोचना चाहा। किसी तरह वह भागी भागी मुनि के पास पहुँची और रोने लगी । मुनिवर ने पूछा, "बोलो, अब तुम्हें क्या कष्ट है ?” 

उसने कहा, "मुझे शेर से बहुत डर लगता है । वह मुझे खा जाना चाहता है । आप मुझे शेर बना दीजिए ताकि मुझे किसी का भय न रहे।”

मुनि ने कहा, "ऐसा ही हो ! तुम शीघ्र ही शेर बन जाओ ।"

शेर बनकर उसे अब किसी भी प्राणी का भय नहीं था । वह शान के साथ अपनी इच्छानुसार रहने लगी। एक दिन जब वह बहुत भूखी थी और उसके पास खाने को कुछ भी नहीं था तो उसने मुनिवर को देखकर कहा, "आज मैं तुम्हें ही खाकर अपनी भूख मिटाऊँगी।"

मुनिवर को उसपर दया के साथ-साथ गुस्सा हो आया और उन्होंने उसे फिर से चुहिया बना दिया ।

भावार्थ-लेखन

किसी दिए गए अवतरण को समझना तथा उसके अन्दर छिपे हुए मुख्य भाव को संक्षेप में लिखना भावार्थ-लेखन कहलाता है। इसे लिखते समय न तो प्रत्येक शब्द का अर्थ लिखना पड़ता है और न ही लच्छेदार साहित्यिक भाषा की जरूरत पड़ती है।

भावार्थ-लेखन हेतु आवश्यक निर्देश
1. दिए गए अवतरण को ध्यान से पढ़ें और उसमें छिपे भाव को समझने की कोशिश करें ।
2. फिर उस भाव का अति संक्षिप्त रूप अपने शब्दों में लिख जाएँ ।
3. इसमें अनावश्यक शब्दों या बातों का प्रयोग न करें ।
4. इसकी भाषा अलंकार-रहित, स्पष्ट एवं सरल रखें।
5. इसमें लंबी-चौड़ी भूमिका की कोई आवश्यकता नहीं होती । 
6. भावार्थ को मूल अवतरण से छोटा रखें।
7. ध्यान रहे, इसमें मूल भाव का कोई भी अंश छूटने न पाए । 

भावार्थ-लेखन के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं

अवतरण आज की कॉन्वेन्टी शिक्षा-पद्धति में बच्चों को तीन वर्ष की उम्र से स्कूल भेजा जाता है । क्या यह कदम उचित और विकासोन्मुख है ? उन्हें सुबह-सुबह तैयार कर बड़े-से थैले के साथ विद्यालय भेज दिया जाता है। जिस उम्र में उन्हें स्नेहपूर्ण व्यवहार की आशा रहती है, उसमें उन्हें कुछ निर्दय शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं से पाला पड़ जाता है। ये बच्चे पढ़ेंगे क्या, उन्हें तो ठीक से चड्डी पहनने का भी होश नहीं रहता। तर्क यह है कि बच्चे कच्ची उम्र से ही शिक्षा का महत्त्व समझने लगेंगे। पर क्या, उनका मानसिक स्तर ऐसी बातों को समझने लायक होता है ?

भावार्थ कच्ची उम्र में बच्चों को परिवार के स्नेह की जरूरत होती है, न कि पुस्तकों से भरे थैले के साथ विद्यालय जाकर माथा-पच्ची करने की। कम उम्र में विद्यालय भेजा जाना बच्चों की विकास-प्रक्रिया में बाधक भी हो सकता है।

अभ्यास

निम्नांकित अवतरण का भावार्थ लिखें—

अवतरण— कोई प्रदेश कितना विकसित हो सकता है, इसे आँकने के लिए वहाँ की प्राकृतिक बनावट, जलवायु और पर्यावरण पर ध्यान देना होता है। विकास के लिए वहाँ के उपलब्ध कच्चे माल, श्रमशक्ति एवं अन्य साधनों का पूरा-पूरा उपयोग करना आवश्यक होता है। यदि निर्मित माल की खपत के लिए बाजार नजदीक हो, तो यह 'सोने में सुहागा' कहावत को चरितार्थ करता है। अच्छी सड़कें एवं समुचित यातायात व्यवस्था भी विकास की आवश्यक शर्तें हैं I

कहानी-लेखन

हमें जीवन में नित्य ही नई घटनाओं एवं अनुभूतियों से रूबरू होना पड़ता है। इन्हीं घटनाओं और अनुभवों का लिखित रूप कहानी कहलाती है और इस विधा को कहानी-लेखन कहते हैं । कुछ कहानियों के लिखने का आधार बपचन में दादी-नानी द्वारा सुनाई गई कहानियाँ भी होती हैं। अतः हमारे अन्दर की संवेदनाओं की आकर्षक प्रस्तुति ही कहानी-लेखन है। 

कहानियाँ मुख्यतः कल्पना, सच्ची घटना, चित्र या शब्द-संकेतों के आधार पर लिखी जाती हैं I

कहानी-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश
(1) सर्वप्रथम कहानी का प्रारूप मन में बना लें। 
(2) फिर उसे शब्दों से भरकर साकार रूप दें । 
(3) कहानी का उचित एवं आकर्षक शीर्षक दें । 
(4) कहानी लिखने में अपने विचारों को न थोपें । 
(5) स्पष्ट, सहज एवं शुद्ध भाषा का प्रयोग करें ।
(6) कहानी के अन्त में नैतिक या वैज्ञानिक सीख अवश्य दें। 

यहाँ शब्द-संकेतों के आधार पर कहानी-लेखन के कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं—

संकेत (1) : एक नदी — साधु का स्नान करना — पानी में बिच्छू का होना— साधु द्वारा बचाने का प्रयास करना — बिच्छू द्वारा डंक मारना  साधु द्वारा फिर उठाना — बिच्छू द्वारा फिर से डंक मारना — साधु का उसे पानी से निकालना — बिच्छू की जान बचना । 

कहानी :

प्राणी का स्वभाव

एक दिन एक साधु नदी में स्नान कर रहे थे। अचानक उन्हें पानी में एक बिच्छू दिखाई पड़ा जो अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। साधु दयालु थे । उन्होंने उसे अपने हाथ में उठा लिया। पर, दुष्ट बिच्छू ने उन्हें डंक मार दिया। साधु का हाथ हिल जाने से वह फिर से पानी में गिर गया । साधु ने फिर से उसे उठाया, परन्तु उसने फिर उनके हाथ पर डंक मार दिया। ऐसा कई बार हुआ। अंततः, साधु ने बिच्छू को नदी के बाहर लाकर जमीन पर छोड़ दिया, जिससे वह मरने से बच गया ।

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि प्रत्येक प्राणी अपने स्वभाव के अनुसार कार्य करता है और उसी में उसे आनंद का अनुभव होता है। 

संकेत (2) : एक ब्राह्मण— एक बूढ़ा बाघ — उसके हाथ में सोने का कंगन होना— बाघ द्वारा ब्राह्मण को लालच देना —– लालच में आकर ब्राह्मण का कीचड़ में फँस जाना  बाघ द्वारा उसे खा जाना ।

कहानी :

लालच का फल

एक ब्राह्मण ने एक बूढ़े बाघ के हाथ में सोने का कंगन देखा । बाघ ने उसे पुकारा तो वह उसके नजदीक डरते हुए पहुँचा। बाघ ने कहा कि वह जवानी में किए गए पापों का प्रायश्चित करने के लिए यह सोने का कंगन दान करनेवाला है । यह सुनकर ब्राह्मण के मन में लालच आ गया और उसने उस कंगन को प्राप्त करना चाहा । बाघ ने कहा कि उसे सामने के पोखर से स्नान करके आना होगा, तभी उसे वह कंगन मिलेगा । ब्राह्मण जैसे ही पोखर के नजदीक गया, वह दलदल में फँस गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा । बाघ धीरे-धीरे उसके नजदीक पहुँचा और उसे मारकर खा गया ।

यह कहानी हमें बताती है कि लालच का फल सदा ही हानिकारक और अनिष्टकारी होता है ।

अभ्यास

1. कहानी-लेखन की आवश्यक शर्तों को लिखें ।

2. नीचे दिए गए शब्द-संकेतों के आधार पर कहानियाँ लिखें

(क) संकेत : एक रोटी के लिए दो बिल्लियों का झगड़ना — एक बन्दर का आना—तराजू पर बराबर-बराबर बाँटने की बात करना—बाँटने का नाटक करते हुए सारी रोटियाँ खा जाना —दोनों बिल्लियों का दुःखी होकर रह जाना।

(ख) संकेत : कुछ बन्दरों का वर्षा में भीगना — पेड़ पर बैठी चिड़ियों का हँसना—चिड़ियों द्वारा बंदरों को घर बनाकर रहने की सलाह देना—बंदरों को गुस्सा आना — वर्षा के बाद बन्दरों के द्वारा चिड़ियों के घोंसलों को नष्ट कर देना ।

(ग) संकेत : गरमी के दिन — भूखी लोमड़ी—बगीचे की दीवार पर लटकते अंगूर का होना—उछलना और नीचे गिर पड़ना - कितनी ही कोशिश करना, पर सफल न होना— अंत में कहना — 'अंगूर खट्टे हैं !'

(घ) संकेत : सिंह का गहरी नींद में होना - चुहिया का उसपर गिरना— सिंह का क्रुद्ध होना— चुहिया का गिड़गिड़ाना — सहायता का वचन देना — सिंह का हँसना—सिंह का जाल में फँसना — चुहिया द्वारा जाल काटना ।

(ङ) संकेत : एक किसान के चार लड़के— सभी का आपस में लड़नाकिसान का मरने के निकट होना— सभी लड़कों को पास बुलाना — लकड़ियों का गट्ठर तोड़ने को कहना – किसी से न टूटना — फिर एक-एक लकड़ी तोड़ने के लिए देना—सभी का तोड़ने में सक्षम होना – किसान द्वारा एकता की सीख देना ।

(च) संकेत : एक कछुआ और एक खरहा—दोनों में दौड़ की बाजी लगना—खरहे का हँसना — कछुए का मंद गति से चलना —खरहे का रास्ते में सो जाना—कछुए का उससे आगे निकल जाना —खरहे की हार होना ।

प्रतिवेदन-लेखन

प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह बच्चा हो या वयस्क, किसी-न-किसी शैक्षणिक, व्यावसायिक या राजनीतिक संगठन से अवश्य ही संबद्ध होता है। ऐसे में अपने संगठन से संबंधित गतिविधियों को जब जनसाधारण की जानकारी के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो वह प्रतिवेदन कहलाता है और लेखन की यह विधा प्रतिवेदन-लेखन कहलाती है । प्रतिवेदन साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक या वार्षिक हो सकता है ।

प्रतिवेदन - लेखन हेतु आवश्यक निर्देश
(1) सर्वप्रथम विषय और उसका शीर्षक लिखें ।
(2) प्रत्येक घटनाक्रम को क्रमबद्ध और संक्षिप्त रखें ।
(3) इसमें निष्पक्ष और सत्य बातें लिखें ।
(4) छोटे-छोटे, किन्तु आकर्षक वाक्यों का प्रयोग करें । 
(5) इसमें अपनी भावनाओं को प्रकट न करें ।
(6) सुन्दर एवं स्पष्ट लिखावट का प्रयोग करें ।
(7) अन्त में तारीख, अपना नाम और पता अवश्य लिखें ।

उदाहरण : गाँव में पंचायत चुनाव के लिए मतदान पर एक प्रतिवेदन |

पंचायत चुनाव : मतदान

हमारी प्रतिष्ठित ग्राम पंचायत के लिए पिछले सप्ताह चुनाव सम्पन्न हुए । शिक्षा नागरिकों को जागरूक बनाती है, यह तब सही साबित हुआ जब समूचे पंचायत की 85% वयस्क जनता ने सहर्ष मतदान किया। सभी ने अपनी समझ का प्रयोग किया और इसलिए योग्य, कुशल एवं कर्मठ उम्मीदवार ही चुनाव जीत सका । इस चुनाव की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है, क्योंकि अति संवेदनशील होने के बावजूद हमारा क्षेत्र शत-प्रतिशत शान्त एवं प्रजातांत्रिक मतदान का साक्षी बना। लोगों में खुशी की लहर व्याप्त है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी दबाव के मनचाही पंचायत चुनी है ।

                                    हजारी पासवान
दिनांक :                         ग्रा० + पो० - मथुरा
                                    जिला - वैशाली

अभ्यास

1. प्रतिवेदन - लेखन से आप क्या समझते हैं ? 

2. विद्यालय में आयोजित 'बाल-दिवस' समारोह का प्रतिवेदन तैयार करें । 

3. शहर में आयोजित 'कवि-गोष्ठी' का प्रतिवेदन तैयार करें ।

पत्र-लेखन

पत्र द्वारा हृदय के विचारों का आदान-प्रदान होता है । यह दूर-दराज रहनेवाले अपने परिवार के सदस्यों, मित्रों या सहकर्मियों से संवाद बनाए रखने का सरल एवं सस्ता माध्यम है । इसमें प्रयुक्त भाषा और व्यक्त की गई भावना व्यक्ति के संबंध को मधुर बनाने के साथ-साथ कटु भी बना सकती है। अतः पत्र-व्यवहार में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही, इसकी भाषा संतुलित और स्पष्ट होनी चाहिए ।

पत्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं— (1) व्यक्तिगत पत्र, (2) व्यावसायिक पत्र और (3) आवेदन-पत्र ।

1. व्यक्तिगत पत्र जो पत्र अपने मित्रों, संबंधियों, किसी परिचित या अपरिचित व्यक्तियों को लिखे जाते हैं, व्यक्तिगत पत्र कहलाते हैं। ऐसे पत्रों में व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक समस्याओं या घटनाओं का उल्लेख करता है।

2. व्यावसायिक पत्र व्यापार और लेन-देन से संबंधित पत्र, व्यावसायिक पत्र कहलाते हैं । ऐसे पत्र मुख्यतः क्रेताओं-विक्रेताओं के बीच लिखे जाते हैं।

3. आवेदन पत्र सरकारी, गैर-सरकारी, शैक्षणिक और प्रशासनिक आदि संगठनों के प्रधान को लिखे जानेवाले पत्र, आवेदन-पत्र कहलाते हैं ।

पत्र-लेखन हेतु आवश्यक निर्देश

1. पत्र लिखते समय अपना पता, पत्र के ऊपर दाएँ कोने में लिखें और उसके ठीक नीचे पत्र लिखने की तारीख डालें ।

2. आप जिस व्यक्ति को पत्र लिख रहे हैं, उससे अपने संबंध के अनुसार अभिवादन और स्व-संबोधन का प्रयोग करें । इसके कुछ नमूने अगले पृष्ठ पर दिए गए हैं ।

3. अभिवादन के बाद अपनी बातों को संक्षेप में लिखें ।

4. पत्र की लिखावट सुन्दर एवं साफ-सुथरी होनी चाहिए, ताकि पढ़ने में कोई कठिनाई न हो ।

5. पत्र की भाषा सरल रखें ताकि पढ़नेवाले को समझने में कोई कठिनाई न हो । द्विअर्थक शब्दों का प्रयोग न करें ।

6. स्व-संबोधन के बाद पत्र पानेवाले का पूरा पता नीचे बाईं ओर लिखें ।

7. पोस्टकार्ड या लिफाफे के ऊपर पता साफ-साफ, पिनकोड के साथ लिखें ।

8. व्यावसायिक पत्रों को अति संक्षिप्त रखें और उसमें केवल मतलब की बातों का उल्लेख करें ।

9. आवेदन-पत्र लिखते समय भाषा एवं कथन की शैली को विनम्र एवं याचनापूर्ण रखें।

10. आवेदन-पत्र में हर आवश्यक पहलू का उल्लेख अवश्य करें । 

संबोधन, अभिवादन एवं स्वसंबोधन :

पत्र लिखने के कुछ नियम बतलाए गए हैं, लेकिन मात्र नियम समझ लेने से कोई अच्छा पत्र - लेखक नहीं बन सकता, क्योंकि पत्र लिखना एक कला है। इस कला में निपुणता तभी आ सकती है, जब हर बात से संबंधित पत्र लिखने का अभ्यास किया जाए। कहा भी गया है— “Practice makes a man perfect.”

अब अगले पृष्ठ पर व्यक्तिगत, व्यावसायिक एवं आवेदन-पत्रों के कुछ नमूने दिए जा रहे हैं। आप इसी आधार पर विभिन्न पत्रों को लिखने का अभ्यास करें ।

व्यक्तिगत पत्र

1. पिता को पत्र— सहपाठियों के साथ यात्रा पर जाने के लिए अनुमति । 

पूज्य पिताजी,                                     हरमू कालोनी, राँची
    सादर प्रणाम।                                 तिथि ................

आशा करता हूँ कि मेरी तरह आपलोग भी सकुशल होंगे। वार्षिक परीक्षा के बाद मेरे विद्यालय में एक सप्ताह की छुट्टी होने जा रही है। इस बार विद्यालय की ओर से सभी छात्र-छात्राएँ शिक्षक के साथ दिल्ली घूमने जा रहे हैं। मैं भी इन लोगों के साथ जाना चाहता हूँ। यह भारत की राजधानी ही नहीं, एक प्राचीन ऐतिहासिक नगरी भी है । यहाँ कई दर्शनीय स्थल भी हैं। उन स्थलों के भ्रमण से मनोरंजन ही नहीं, ज्ञानवर्द्धन भी होगा ।

अतः आपसे अनुरोध है कि मुझे इस यात्रा पर जाने की अनुमति दें । 

पता :                                                             आपका लाड़ला
श्री विनय कुमार सिन्हा                                              विनीत
टिकिया टोली, महेन्द्र्
पटना - 800 006

2. मित्र को पत्र— विद्यालय में प्रथम दिन का अनुभव।

प्रिय अमित,                                                    साकची, जमशेदपुर
        नमस्ते ।                                                    तिथि .............

मैं अब तुमसे दूर एक नए विद्यालय में पढ़ रहा हूँ। इस विद्यालय में मेरा पहला दिन कैसा रहा, इसके संबंध में संक्षिप्त चर्चा कर रहा हूँ। 

दिनांक ........ को मैं नियत समय पर अपने विद्यालय पहुँचा। विद्यालय-भवन की भव्यता को देखकर मैं चकित था । प्रार्थना के बाद मैं अपने वर्ग में चला गया। मैं वहाँ चुपचाप अपनी सीट पर बैठा था। वहाँ सभी अपरिचित थे। अतः मुझे कुछ अजीब-सा लग रहा था। किसी तरह टिफिन होने तक वर्ग में बैठा पढ़ता रहा। टिफिन के समय संयोगवश मेरे वर्ग के कुछ छात्र मेरे निकट आए। उनसे कुछ बातें हुईं। उनके अच्छे व्यवहार से मेरा अकेलापन दूर हुआ। सभी शिक्षकों ने अपने-अपने विषयों को बहुत अच्छी तरह पढ़ाया। छुट्टी होने तक मेरी मायूसी खुशी में तब्दील हो गई । विशेष, अगले पत्र में ! I

पता :                                                                    तुम्हारा मित्र 
अमित कुमार                                                             अनिल
द्वारा : अजय प्रसाद
ग्राम + पो. : पातेपुर, समस्तीपुर

3. मित्र को पत्र सर्वप्रिय सहपाठी के विषय में ।

प्रिय मित्र,                                                        अलकापुरी, पटना 
        नमस्ते ।                                                     तिथि ...........

आज तुम्हारा पत्र मिला । पत्र में अन्य बातों के अतिरिक्त तुम यह जानना चाहते हो कि मेरा सबसे अच्छा सहपाठी कौन है । मैं उसकी संक्षिप्त चर्चा कर रहा हूँ।

सुशील नाम का एक छात्र मेरे वर्ग में पढ़ता है । नाम के अनुरूप उसका व्यवहार अत्यंत प्रिय है । पढ़ने में भी वह बहुत तेज है । खेल-कूद हो या पढ़ाई-लिखाई, वह हमेशा मेरे साथ रहता है । उसमें बहुत सारे गुण हैं, जिनके कारण वह मेरा सबसे प्रिय सहपाठी है

पता :                                                                तुम्हारा मित्र 
अमरेश झा                                                             महेश
द्वारा : बटेश्वर झा 
ग्राम+पो. : हरलाखी, मधुबनी


4. बड़े भाई को पत्र— उनसे प्राप्त रुपयों के खर्च का ब्योरा ।

                                                                        स्टेशन रोड, सहरसा
आदरणीय भैया,                                                     तिथि ..............
        सादर प्रणाम ।

मैं सकुशल हूँ । आशा है, आप भी कुशल होंगे। आपने मुझे गत माह ₹ 500 दिए थे। मैंने उन रुपयों को कैसे खर्च किया, इस बात की जानकारी दे रहा हूँ।

मुझे कुछ किताबों और कॉपियों की आवश्यकता थी । इन्हें खरीदने में कुल ₹250 लगे। पैंट-शर्ट की कमी थी, अतः इनकी खरीद पर भी लगभग ₹ 200 लगे। मेरे पास कुछ और रुपए बचे हुए हैं। 

अंत में, माता-पिता को मेरा चरण-स्पर्श !

पता :                                                                    आपका प्रिय अनुज
श्री उपेन्द्र कुमार                                                              रवीन्द्र
सिविल लाइन्स, सासाराम

आवेदन-पत्र

1. प्रधानाध्यापक को प्रार्थनापत्र— पुस्तकें खरीदने हेतु निर्धन छात्र- कोष से सहायता के लिए ।

सेवा में,
        श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
        राजकीय उच्च विद्यालय, भागलपुर

विषय : निर्धन छात्र-कोष से सहायता हेतु दो सौ रुपए की माँग । 

महाशय,

    विनम्र निवेदन है कि मैं सातवें वर्ग का अत्यंत निर्धन छात्र हूँ । मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। पढ़ाई शुरू हो चुकी है, लेकिन पैसे के अभाव के कारण मेरे पास एक भी पुस्तक नहीं है । 

    अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि पुस्तकें खरीदने हेतु निर्धन छात्र-कोष से दो सौ रुपए दिलवाने की कृपा करें । इसके लिए मैं श्रीमान् का आभारी रहूँगा।

                                                                            आपका आज्ञाकारी छात्र
तिथि ............                                                                 विष्णुदेव राय
                                                                                   वर्ग : सप्तम 'अ' 
                                                                                                 क्रमांक : 2

2. नगरपालिका अध्यक्ष के नाम मुहल्ले की सफाई से संबंधित पत्र  

सेवा में,
        श्रीमान् अध्यक्ष महोदय,
        नगरपालिका, लहेरियासराय ।

विषय : मुहल्ले की सफाई के संबंध में ।

महाशय,

    मैं इस पत्र के द्वारा वार्ड न. 3 में फैली गंदगी से आपको अवगत कराना चाहता हूँ। इस वार्ड के लोग कूड़े-कचरों और मरे हुए जानवरों की दुर्गंध से परेशान हैं, लेकिन इस समस्या की ओर ध्यान देनेवाला कोई नहीं है। अगर यही स्थिति बनी रही तो यहाँ महामारी फैल सकती है।

    अतः श्रीमान् से अनुरोध है कि यथाशीघ्र इस वार्ड की सफाई की समुचित व्यवस्था करवाने की कृपा करें ।

                                                                                   विश्वासभाजन 
तिथि ............                                                           अखिलेश कुमार सिंह 
                                                                                     वार्ड नं. : 3

व्यावसायिक पत्र

1. पुस्तकें मँगवाने के लिए प्रबंधक के नाम आदेश-पत्र । 

सेवा में, 
        प्रबंधक महोदय, 
        गुड-मैन प्रकाशन, 
        बारीपथ, चिकटोली गली, लंगरटोली, 
        पटना-800 004

विषय : वी. पी. पी. द्वारा पुस्तक भेजने के संबंध में ।

महाशय,

    आपके प्रकाशन की कुछ पुस्तकें हमारे निकट की दुकानों में उपलब्ध नहीं हैं। मुझे उन पुस्तकों की नितांत आवश्यकता है।

    अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि निम्नांकित पुस्तकों की एक-एक प्रति वी॰ पी॰ पी॰ के द्वारा भेजने की कृपा करें। मैं इसे अवश्य छुड़ा लूँगा । 

पुस्तकों के नाम —

वर्ग VII-VIII के लिए

☐ Oxford Junior English Translation
☐ Oxford Junior English Grammar
☐ Oxford Junior Essays Letters & Conversations
☐ सहज जूनियर हिंदी व्याकरण और रचना
☐ Goodman's Junior English Grammar & Composition (for CBSE ) Written by : Prof. B. K. Sinha

वर्ग IX, X एवं +2 के लिए

☐ Oxford Current English Translation 
☐ Oxford Current English Grammar
☐ Oxford Current Essays & Letters
☐ सहज हाईस्कूल हिंदी व्याकरण और रचना
☐ Goodman's Current English Grammar & Composition (for CBSE) Written by : Prof. B. K. Sinha

                                                                    विश्वासभाजन, 
                                                                नफीस अहमद खान 
                                                           रेलवे कालोनी, क्वार्टर न. : 81 
                                                                        हावड़ा

अभ्यास

1. पत्र मुख्यतः कितने प्रकार के होते हैं ? इनके भेद लिखें ।

2. व्यक्तिगत पत्र किसे कहते हैं ? इसका उत्तर एक पंक्ति में दें । 

3. आवेदन-पत्र से क्या समझते हैं ? इसका उत्तर संक्षेप में दें ।

4. व्यावसायिक पत्र किसे कहते हैं ? इसका संक्षिप्त उत्तर दें ।

5. अपने सहपाठियों के साथ आप किसी दर्शनीय स्थान का भ्रमण करना चाहते हैं। अतः इसकी अनुमति के लिए अपने पिता को एक पत्र लिखें।

6. अपने पिता को एक पत्र लिखिए जिसमें अपने विद्यालय के वार्षिक पुरस्कारवितरण का वर्णन कीजिए ।

7. विद्यालय में प्रथम दिन आपका कैसा अनुभव रहा ? इस संबंध में अपने मित्र को एक पत्र लिखें ।

8. आपका सर्वप्रिय सहपाठी कौन है ? इससे संबंधित अपने मित्र को एक पत्र लिखें ।

9. आपके बड़े भाई ने आपको कुछ रुपए दिए थे। आपने उन रुपयों को किस प्रकार खर्च किया ? अपने भाई को इससे संबंधित एक पत्र लिखें ।

10. अपनी बड़ी बहन के पास एक पत्र लिखें, जिसमें आपने नववर्ष किस प्रकार मनाया, इसका वर्णन हो ।

11. प्रधानाध्यापक के पास एक आवेदन-पत्र लिखें, जिसमें पुस्तकें खरीदने के लिए निर्धन छात्र- कोष से सहायता हेतु कुछ रुपयों की माँग की गई हो ।

12. आपके मुहल्ले में बहुत गंदगी फैली हुई है। अतः इसकी सफाई की समुचित व्यवस्था के लिए नगरपालिका अध्यक्ष को एक आवेदन-पत्र लिखें ।

13. पुस्तकें मँगवाने हेतु किसी प्रकाशक या प्रबंधक के नाम एक आदेश-पत्र लिखें । 

14. उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति करें :
(क) जो पत्र समाचार के आदान-प्रदान हेतु अपने मित्रों या संबंधियों को लिखे जाते हैं, ....... पत्र कहलाते हैं । 
(ख) जो पत्र व्यापार और लेन-देन से संबंधित होते हैं, .......... पत्र कहलाते हैं।
(ग) किसी भी सरकारी या गैरसरकारी संगठनों के प्रधानों को लिखे जानेवाले पत्र, .......... कहलाते हैं । 
(घ) पत्र मुख्यतः ......... प्रकार के होते हैं ।

अनुच्छेद/लघु निबंध-लेखन

किसी भी विषय से संबद्ध महत्त्वपूर्ण तथ्यों को जब छोटे-छोटे वाक्यों द्वारा एक ही अनुच्छेद में प्रस्तुत किया जाए, तो यह अनुच्छेद-लेखन कहलाएगा। यह निबन्ध का छोटा रूप समझा जाता है, क्योंकि एक निबन्ध में कई-कई अनुच्छेद समाहित रहते हैं, जैसे—इसमें भूमिका, मध्य, लाभहानि, उपसंहार आदि की चर्चा अलग-अलग अनुच्छेदों में करना आवश्यक होता है, लेकिन अनुच्छेद-लेखन में अलग-अलग उल्लेख करना आवश्यक नहीं होता ।

अनुच्छेद-लेखन के लिए आवश्यक निर्देश : 
(1) प्रस्तुत विषय पर पहले अच्छी तरह सोच-विचार करें । 
(2) सोचे गए वाक्यों को सजाकर लिखें । 
(3) यथासंभव अपनी भाषा में छोटे-छोटे वाक्य लिखें । 
(4) शुद्धता एवं सुलेख पर पूरा ध्यान दें । 
(5) अनावश्यक शब्दों के प्रयोग से बचें। 
(6) अनुच्छेद की रचना ऐसी हो कि गागर में सागर समाया हुआ लगे।

उदाहरण के लिए कुछ अनुच्छेद/लघु निबंध नीचे दिए जा रहे हैं

1. गुरु गोबिंद सिंह

गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 5 जनवरी 1666 को पटना, बिहार में हुआ था। इनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर सिंह था। इनकी माँ का नाम माता गुजरी था । ये सिक्खों के दसवें गुरु थे। इनका विवाह माता जित्तो से हुआ था। इनके चार पुत्र थे । ये एक महान् योद्धा और कवि थे। ये नौ वर्ष की आयु में ही सिक्खों के नेता बने। इन्होंने सिक्ख धर्म के विकास के लिए बहुत सारे कार्य किए। ये जाति-भेद, गुलामी और धर्मान्तरण के खिलाफ थे। इन्होंने लोगों के कल्याण हेतु अपना जीवन समर्पित कर दिया। ये मानवता से प्रेम करते थे। ये चाहते थे कि सिक्ख शुद्ध और सादा जीवन बिताएँ । 1699 ई. में इन्होंने बैसाखी के अवसर पर 'खालसा पंथ की स्थापना की थी । सामाजिक बुराइयों को मिटाने हेतु इन्होंने अपना जीवन बलिदान कर दिया । इनके उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। इनकी मृत्यु 7 अक्टूबर 1708 को हुई थी। ये भारतीय इतिहास की एक महान् हस्ती थे । प्रत्येक वर्ष हम इनका जन्मदिन 'गुरु गोबिंद सिंह जयंती' के रूप में मनाते हैं। साथ ही साथ, इस अवसर पर देश-विदेश के सभी गुरुद्वारों में सबद-कीर्तन, लंगर आदि का भव्य आयोजन होता है । इनका जन्म स्थान 'पटना साहिब', सिक्खों का एक प्रमुख तीर्थस्थल है । वास्तव में, गुरु गोबिंद सिंह का जीवन हमें बुराइयों से लड़ने की शिक्षा देता है

2. महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी स्वतंत्र भारत के जनक थे। इनके त्याग, बलिदान और निरंतर संघर्ष के कारण भारत को स्वतंत्रता मिली। हम भारतवासी बड़े सम्मान से इन्हें ‘राष्ट्रपिता' और 'बापू' कहकर पुकारते हैं। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी तथा माता का नाम पुतलीबाई था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और उच्च शिक्षा इंग्लैंड में हुई । भारत लौटकर ये वकालत करने लगे। इन्हें 1893 ई. में एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ इन्होंने भारतीयों के प्रति गोरे लोगों का अत्याचार देखा । इन्होंने वहाँ इस अत्याचार और शोषण के विरुद्ध सत्य-अहिंसा द्वारा आंदोलन किया। फलतः, हो रहे अत्याचार में कुछ कमी आई। भारत लौटकर इन्होंने अँगरेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। इनके 'असहयोग आंदोलन’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन' में सारा देश शामिल हुआ। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारतवर्ष अँगरेजों की गुलामी से आजाद हुआ। ये सत्य, अहिंसा और एकता के परम पुजारी थे । नाथूराम गोडसे द्वारा 30 जनवरी, 1948 ई. को इनकी हत्या कर दी गई, लेकिन ये मरकर भी आज प्रत्येक भारतवासी के दिल में अमर हैं।

3. बिरसा भगवान्

भारतीय स्वतंत्रता की बलि वेदी पर शीश चढ़ानेवाले महानायक थे— बिरसा मुंडा । इनके त्याग, बलिदान और महानता के कारण लोग इन्हें ‘बिरसा भगवान्' कहते हैं । इनका जन्म 15 नवंबर 1875 को राँची जिला के 'उलीहातु' नामक गाँव में हुआ था । ये आदिवासियों के मुंडा परिवार से आते थे जो आर्थिक रूप से कमजोर था । इनकी प्राथमिक शिक्षा जर्मन एवेंजलिक चर्च द्वारा संचालित स्कूल में, और बाद में चाईबासा में हुई थी। इनके विचार प्रगतिशील, क्रांतिकारी एवं उच्च संस्कारवाले थे। ये झूठ बोलना, चोरी करना, शराब पीना आदि आदतों को पाप समझते थे। कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण सभी पर इनकी बातों का अच्छा प्रभाव पड़ता था। अँगरेजों द्वारा आदिवासियों का शोषण किए जाने के विरुद्ध इन्होंने आवाज उठाई। आंदोलन करने के कारण अँगरेजों ने इन्हें कैद कर लिया। 24 अगस्त 1895 से 28 जनवरी 1898 तक ये जेल में रहे। बाहर निकलने के बाद इन्होंने फिर आंदोलन तेज किया। 1900 ई. में फिर इन्हें जेल में डाल दिया गया, जहाँ 9 जून 1900 को जहर देकर इनकी हत्या कर दी गई । इनके त्याग, बलिदान और संघर्ष के कारण अँगरेजी हुकूमत को झुकना पड़ा। धन्य है वह धरती जहाँ बिरसा - जैसे महापुरुष पैदा हुए। हमें इनके द्वारा दिखलाए आदर्शों पर चलना चाहिए ।

4. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद

डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे । महान् विलक्षण बुद्धि और प्रतिभा के धनी इस व्यक्ति का संपूर्ण जीवन स्वच्छ चरित्र, कर्मठता और देशप्रेम में बीता। इनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार राज्य के जीरादेई नामक गाँव में हुआ । इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। बाद में इन्होंने कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। ये सभी परीक्षाओं में हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त करते थे । ये इतने प्रतिभावान् थे कि एक अँगरेज परीक्षक को इनकी उत्तर पुस्तिका पर लिखना पड़ा—“The examinee is better than the examiner. " उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद ये कुछ समय तक अध्यापन कार्य से जुड़े रहे। बाद में ये वकालत के पेशे से जुड़े और एक सफल वकील के रूप में विख्यात हुए । चंपारण आंदोलन में ये महात्मा गाँधी के सहयोगी बने । ये वकालत छोड़कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े । असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। आजादी के बाद ये प्रथम कृषि मंत्री बने । संविधान सभा का गठन इनके नेतृत्व में हुआ । 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ तब इन्हें भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया। ये सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर चलते रहे। भारत सरकार ने इन्हें 'भारतरत्न' से सम्मानित किया । हम भारतवासी प्यार से इन्हें ‘देशरत्न' कहते हैं । इनकी मृत्यु 28 फरवरी 1963 को सदाकत आश्रम, पटना में हुई ।

5. जवाहरलाल नेहरू

जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे । ये एक महान् राजनीतिज्ञ, शान्तिदूत, विद्वान् और सफल प्रशासक थे। इनका जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद के एक सम्भ्रांत परिवार में हुआ था । इनके पिता पंडित मोतीलाल नेहरू भारत के प्रसिद्ध वकील थे। नेहरूजी की शिक्षा विदेशों में हुई थी। इनका विवाह कमला नेहरू से हुआ था। भारत लौटकर ये भी वकालत के पेशे से जुड़ गए । स्वदेश प्रेम से प्रभावित होकर ये वकालत छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। कई बार इन्हें जेल भी जाना पड़ा। जेल में इन्होंने अपनी लोकप्रिय पुस्तक 'भारतः एक खोज' की रचना की। भारत की आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को इन्हें देश का प्रथम प्रधानमंत्री चुना गया । इन्होंने भारत के विकास के लिए कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए, जिनमें पंचवर्षीय योजना प्रमुख है । इस योजना के माध्यम से इन्होंने भारत के चतुर्दिक विकास का प्रयास किया। पंचशील का सिद्धान्त देकर इन्होंने विश्व में शांति और सौहार्द बनाए रखने का प्रयास किया, फलतः इन्हें विश्व में 'शांतिदूत' भी कहा जाता है। बच्चों से लगाव के कारण इन्हें 'चाचा नेहरू' भी कहा जाता है। इनका जन्मदिन 14 नवंबर को हर वर्ष 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इनकी मृत्यु 27 मई 1964 को हुई । इनकी कर्मठता और देश के प्रति अटूट निष्ठा अनुकरणीय है ।

6. डॉ. बी. आर. अम्बेदकर

डॉ॰ भीमराव रामजी अम्बेदकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मउ, मध्यप्रदेश में हुआ था । इनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल था । इनकी माता का नाम भीमाबाई मुरबदकर सकपाल था । ये पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। इन्होंने विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की थी। कोलम्बिया विश्वविद्यालय से इन्होंने 1916 ई. में पी. एच डी. की डिगरी हासिल की। भारत लौटने पर बड़ौदा के महाराज ने इन्हें सैन्य सचिव बनाया। कुछ वर्षों बाद ये मुंबई में एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बन गए। अछूत होने के कारण ये बहुत पीड़ित रहे । इन्होंने जीवनभर स्पृश्यता और दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष किया । विधि ज्ञान में इनका कोई विकल्प न था, अतः इन्हें 'संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। संविधान लिखनेवाले व्यक्तियों में ये एक प्रमुख व्यक्ति थे । इन्होंने विशाल संविधान को मात्र 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिनों में ही पूरा कर देशवासियों को विस्मित कर दिया । इन्होंने कई तरह से देश की सेवा की। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए इन्होंने मिलिन्द विश्वविद्यालय की स्थापना की। सन् 1947 में इनकी नियुक्ति कानून मंत्री के रूप में हुई। हमलोग इनके जन्म-दिवस को 'अम्बेदकर जयंती' के रूप में मनाते हैं । 1955 ई. में इन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया । इनकी मृत्यु 6 दिसंबर 1956 को हुई।

7. लालबहादुर शास्त्री

लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता का नाम शारदा प्रसाद वर्मा था। इनकी माता का नाम रामदुलारी देवी था । ये एक प्रतिभाशाली छात्र थे। इन्होंने काशी विद्यापीठ में अध्ययन किया था। यहीं से इन्हें ‘शास्त्री' की उपाधि दी गई थी। 1920 में ये भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। ये गाँधीजी के विचारों से बहुत प्रभावित थे। 1928 ई. में इनका विवाह ललिता देवी से हुआ था। ये एक समर्पित तथा कर्मठ नेता थे। इन्होंने अँगरेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। इसके लिए इन्होंने कई जगहों पर आंदोलन किए। परिणामस्वरूप, ये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कई बार गिरफ्तार किए गए। जेल से निकलने के बाद भी इनका आंदोलन जारी रहा। पंडित नेहरू के नेतृत्व में जब गणतंत्र भारत का प्रथम मंत्रिमंडल बना, तब उसमें शास्त्रीजी रेल और परिवहन मंत्री बनाए गए। बाद में, ये गणतंत्र भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री बने। इन्होंने देश की उन्नति के लिए बहुत कठिन परिश्रम किया । ये उच्च विचार तथा शांत प्रकृति के व्यक्ति थे। इनका जीवन सादा एवं ओजस्विता से परिपूर्ण था । इन्होंने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया। इनकी मृत्यु 11 जनवरी 1966 को ताशकंद, रूस में हुई। ये वास्तव में गुदड़ी के लाल थे।

8. मदर टेरेसा

मदर टेरेसा का जन्म युगोस्लाविया में 26 अगस्त 1910 को हुआ था । इनका असली नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू था । इनके पिता का नाम निकोला बोयाजू था जो एक भवन निर्माता थे । इनका परिवार बहुत धार्मिक था । बारह वर्ष की अल्पायु में ही इन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य मानव सेवा के रूप में तय कर लिया था और अट्ठारह वर्ष की आयु में ये 'सिस्टर्स ऑफ लोरेटो’ से जुड़ गईं। 1929 ई. में ये कोलकाता आईं। इन्होंने कुछ वर्षों के लिए एक शिक्षिका के रूप में कार्य किया। भारत की गरीब बस्तियों की दशा से ये बहुत व्यथित थीं । इन्होंने गरीब और अनाथ बच्चों के लिए काम करना शुरू किया । इन्होंने 1952 ई. में अपना पहला अनाथालय खोला। उसका नाम इन्होंने 'निर्मल हृदय' रखा। ये गरीब बस्तियों के बच्चों को पढ़ाया करती थीं। इनकी छत्रच्छाया में गरीब एवं अनाथ बच्चों को मुफ्त भोजन तथा चिकित्सा - संबंधी सारी सुविधाएँ मिलती थीं। मानवता के प्रति महान् कार्य के लिए वर्ष 1979 का 'नोबेल शांति पुरस्कार' इन्हें दिया गया। 1980 ई. में इन्हें 'भारतरत्न' भी प्रदान किया गया । मदर टेरेसा ने मानवता से प्रेम किया। इन्होंने अपना जीवन दुःखी लोगों, खासकर बच्चों के लिए समर्पित कर दिया । 5 सितंबर 1997 को इनकी मृत्यु हो गई । मरणोपरांत 2016 ई. में इन्हें 'संत' की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। विश्व सदा इनकी दयालुता और मानवता को याद करेगा।

9. इंदिरा गाँधी

श्रीमती इंदिरा गाँधी भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं । ये पंडित जवाहरलाल नेहरू की एकमात्र संतान थीं । इनका पूरा नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी था। इनका जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुआ था । इनकी शिक्षा विदेशों में हुई थी। कुछ समय तक इन्होंने शांति निकेतन, पश्चिम बंगाल में भी अध्ययन किया था । राजनीति विरासत में मिलने के कारण ये बहुत कम उम्र में शास्त्रीजी के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं। 1966 ई. में शास्त्रीजी की अकाल मृत्यु के बाद इन्हें देश का प्रधानमंत्री चुना गया । भारतवर्ष में हरित क्रांति की शुरुआत इन्होंने ही की। इन्होंने भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत बनाया; विभिन्न राष्ट्रों से मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किया; अशिक्षा, बेरोजगारी और बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर गरीबी को दूर करने का यथासंभव प्रयास किया; पोखरण में परमाणु विस्फोटकर भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं का परिचय दिया; साथ-ही-साथ 20-सूत्री कार्यक्रम देकर देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया; 'सिक्किम' का भारत में विलय करवाया। इन्होंने अपनी कूटनीति और दूरदर्शिता से भारत को विकास के शिखर तक पहुँचाया। दुर्भाग्यवश, निज सुरक्षा प्रहरियों द्वारा 31 अक्टूबर 1984 को इनकी हत्या गोली मारकर कर दी गई। वास्तव में, ये हमारे देश की आन-बान और शान थीं । हमें सदा इनपर गर्व रहेगा।

10. डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

डॉ॰ कलाम पहले वैज्ञानिक थे, जो भारत के राष्ट्रपति बने । इनका पूरा नाम अवुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम था । इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम् में हुआ था । ये एक गरीब परिवार से थे । इनके पिता एक साधारण नाव-निर्माता थे। डॉ. कलाम ने अपनी इंजीनियरिंग की डिगरी मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई से प्राप्त की । 'साराभाई स्पेस रिसर्च सेंटर' एवं 'इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन' में इन्होंने अपना योगदान दिया। वहाँ इन्होंने एक अंतरिक्षयान अभियंता के रूप में कार्य किया। इन्होंने कई प्रक्षेपास्त्रों और कृत्रिम उपग्रहों के प्रक्षेपणयानों के विकास के लिए कार्य किया। ये ‘भारत के मिसाइलमैन' के नाम से भी जाने जाते थे। ये शांति-प्रेमी थे। ये क्लासिकल संगीत पसंद करते थे 1 ये तमिल में कविताएँ लिखते थे। ये वीणा बजाना पसंद करते थे। इन्हें इनके योगदानों के लिए 1997 ई. में 'भारतरत्न' से नवाजा गया। 2002 ई॰ में ये भारत के राष्ट्रपति बने । सन् 2002 से 2007 तक इन्होंने राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया। ये बच्चों से प्रेम करते थे। वास्तव में, डॉ॰ कलाम भारत के सच्चे सपूत थे । इनकी सरलता, शालीनता, नम्रता और चिंतनशीलता इन्हें अद्वितीय व्यक्तित्व प्रदान करती हैं। लगभग 84 वर्ष की अवस्था में 27 जुलाई 2015 को शिलांग में इनकी मृत्यु हो गई । हमें इनपर गर्व है।

11. श्री नरेंद्र मोदी

श्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को वडनगर, गुजरात में हुआ था। इनके पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था। इनकी माता का नाम हीराबेन था । इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वडनगर में पूरी की। उस समय इनके पिताजी की चाय की एक दुकान थी जिसमें ये उनकी मदद किया करते थे। परंतु, ये कुशाग्र बुद्धि और उच्च नेतृत्व क्षमतावाले व्यक्ति थे। फलतः ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। सन् 1995 में ये भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव चुने गए। सन् 1998 में बीजेपी के महासचिव के पद पर ये पदोन्नत किए गए। बाद में, गुजरात के ये मुख्यमंत्री भी बने। इन्होंने राज्य की उन्नति तथा विकास के लिए बहुत से कार्य किए। बहुत कम समय में इन्होंने गुजरात का चतुर्दिक विकास किया। 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में इन्होंने शपथ ली। देश के लिए इनकी कई अद्भुत योजनाएँ एवं परियोजनाएँ हैं। इनकी योजनाओं में सबसे प्रमुख योजना 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना' है। इस योजना के अंतर्गत करोड़ों गरीब भारतीयों का बैंकों में खाता (शून्य राशि से) खोला गया। इससे गरीब व्यक्तियों को वित्तीय लेनदेन में काफी सुविधा हुई है। 2019 में इन्हें पुनः प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। हमारी शुभकामनाएँ इनके साथ हैं, ये अपनी सभी योजनाओं-परियोजनाओं में सफल हों और भारत को उन्नति के पथ पर अग्रसर करते रहें ।

12. श्री सचिन तेंदुलकर

श्री सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुम्बई में हुआ था। इनके पिता का नाम स्वर्गीय रमेश तेंदुलकर था । इनकी माता का नाम श्रीमती रजनी तेंदुलकर है। इनकी पत्नी का नाम श्रीमती अंजलि तेंदुलकर है, जो पेशे से एक डॉक्टर हैं । श्री सचिन तेंदुलकर की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में हुई। पढ़ाई-लिखाई में ये औसत छात्र थे । परंतु, छोटी-सी उम्र में ही इनका क्रिकेट के प्रति जबरदस्त आकर्षण था । इन्होंने अपने प्रशिक्षक श्री रमाकांत आचरेकर के मार्गदर्शन में क्रिकेट खेलना शुरू किया। नतीजा यह हुआ कि 16 वर्ष की आयु में ही इन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलने का अवसर मिला। कुछ समय के लिए इन्हें भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान भी बनाया गया । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई रिकॉर्ड इनके नाम हैं। ये एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 34,000 रनों से ज्यादा रन बनाए। इन्हें कई पुरस्कारों जैसे—अर्जुन पुरस्कार, राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार, पद्मश्री, पद्म विभूषण और भारतरत्न से सम्मानित किया गया। इन्हें पी॰एच डी. की मानद डिगरी भी प्रदान की गई है। कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण इन्हें भारतीय वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर की उपाधि दी गई। सन् 2012 में ये राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किए गए। इन्होंने सन् 2013 में क्रिकेट से अपने संन्यास की घोषणा की। हम सभी को इनपर गर्व है।

13. हमारा देश : भारत

भारतवर्ष, एशिया महादेश का एक विशाल देश है । क्षेत्रफल की दृष्टि से यह दुनिया का सातवाँ और आबादी में सबसे बड़ा देश है । इस देश के उत्तर में नेपाल और हिमालय पर्वत, दक्षिण में हिंद महासागर, पूरब में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर हैं। तीन ओर से जल से घिरा होने के कारण भारत-भूमि को भूगोल की भाषा में 'प्रायद्वीप' कहा जाता है। जलवायु की दृष्टि से भी हमारा देश विश्व का सिरमौर रहा है। छह ऋतुओं—वसंत, ग्रीष्म, पावस (वर्षा), शरद्, हेमंत और शिशिर के कारण यहाँ की जलवायु सालभर संतुलित रहती है । हमारे देश की सभ्यता अति प्राचीन है । यह धर्म और विवेक की भूमि रही है। एक वीर और महाप्रतापी राजा 'भरत' के नाम पर इस देश का नाम 'भारत' पड़ा। यह एक कृषि-प्रधान देश है । कृषि हमारे देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्रोत है। यहाँ की भूमि लगभग हर तरह के खनिजों से परिपूर्ण है । भारत ने विश्व को विज्ञान, गणित, चिकित्सा आदि के क्षेत्र में बहुत कुछ दिया है । यह शांति के पुजारी के रूप में विख्यात रहा है । यहाँ की धरती पर कई ऋषि-मुनियों और महापुरुषों ने जन्म लिया और भारत को विश्व में एक विशेष पहचान दिलाई । यहाँ हर धर्म और सम्प्रदाय के लोग रहते हैं जिनकी अपनी-अपनी भाषा, रहन-सहन, वेश-भूषा और खानपान हैं । इन्हीं कारणों से इसे विविधता में एकतावाला देश कहा जाता है।

14. बिहार

बिहार में 12वीं शताब्दी के अंत में 'बौद्ध विहारों' की बहुलता थी । 'विहार' का अर्थ है 'मठ' यानी भिक्षुओं का निवास स्थान । बौद्ध विहारों की बहुलता के कारण इस क्षेत्र का नाम 'विहार' पड़ा जो कालांतर में 'बिहार' के नाम से प्रचलित हुआ । बिहार का स्थापना दिवस 22 मार्च है, क्योंकि इसी दिन 1912 को बिहार, बंगाल से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में स्थापित हुआ था । इस राज्य की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में झारखंड, पूरब में पश्चिम बंगाल तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश है । इस राज्य की राजभाषा हिंदी है। इस राज्य की जलवायु मानसूनी है । यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्रोत कृषि है, जो पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, सरयू, कमला, कोसी, बलान, बागमती, महानंदा, पुनपुन तथा सोन यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं । धान, गेहूँ, मक्का और दलहन बिहार की मुख्य खाद्य फसलें हैं। आलू, गन्ना, तंबाकू, मिर्च, प्याज, तेलहन तथा कपास बिहार की नकदी फसलें हैं। चूँकि यह राज्य औद्योगिक दृष्टि से संपन्न नहीं है, फिर भी पेट्रोरसायन, इंजीनियरिंग, चमड़ा, सीमेंट आदि यहाँ के कुछ प्रमुख उद्योग हैं। चित्रकला के क्षेत्र में मधुबनी पेंटिंग का एक विशेष स्थान है । यहाँ का 'सोनपुर पशुमेला' एशिया का सबसे बड़ा पशुमेला है। बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं— पटना, गया, मुंगेर, वैशाली, बोधगया, सासाराम, राजगीर और पावापुरी ।

15. झारखंड

झारखंड राज्य की स्थापना 15 नवंबर 2000 को हुई । भारतीय संघ में इस राज्य का स्थान 28वाँ है । इसका निर्माण दक्षिण बिहार के पठारी भाग को बिहार से पृथक् करके हुआ है । खनिज संपदा की दृष्टि से यह भारत के संपन्न राज्यों में से एक है। इस राज्य में कुल आबादी का 28% आदिवासी रहते हैं । इसकी राजधानी राँची है। इस राज्य में कुल 24 जिले हैं। जंगल-झाड़ की प्राकृतिक बहुलता के कारण इसका नाम झारखंड पड़ा। राज्य की अधिकांश भूमि पठारी, पहाड़ी एवं अनुपजाऊ है। यह राज्य खनिज संपदा का भंडार होने के कारण भारत में ही नहीं वरन् सम्पूर्ण विश्व में भी प्रमुख स्थान रखता है । अपनी स्वायत्तता के लिए लगभग 150 वर्षों तक संघर्ष के पश्चात् नेताओं के अथक प्रयास से इस राज्य का उदय संभव हुआ। स्वर्ण रेखा, कोयल, संख, हरमू, दामोदर, बराकर एवं अजय आदि यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं । यहाँ की मुख्य फसलें धान, मक्का, गेहूँ, जौ, चना, गन्ना एवं दलहन हैं । यहाँ कृषि कार्य के साथ ही पशुपालन का काम बड़े स्तर पर होता है । झारखंड औद्योगिक दृष्टि से भी विकसित है | जमशेदपुर स्थित लौह उद्योग (टिस्को) एवं राँची स्थित भारी मशीनरी संयंत्र भारत के महत्त्वपूर्ण संस्थान हैं । यहाँ छोटे-बड़े कई जल-प्रपात हैं । देवघर, वासुकिनाथ एवं रजरप्पा आदि यहाँ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं।

16. गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है । इसी दिन भारत गणतंत्र हुआ था और सन् 1950 में देश को इसका संविधान प्राप्त हुआ। यह दिन देशवासियों के लिए खुशी का दिन है। इस दिवस को बहुत तड़क-भड़क के साथ मनाया जाता है । नई दिल्ली में एक विशाल परेड आयोजित की जाती है। इस परेड में सेना के तीनों अंग भाग लेते हैं । राष्ट्रपति द्वारा झंडोत्तोलन किया जाता है। मार्च करते जवानों से राष्ट्रपति सलामी लेते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं । इस अवसर पर हमारे विशिष्ट अस्त्रशस्त्रों का प्रदर्शन करके हमारी सैन्य शक्ति को दर्शाया जाता है । परंपरागत रूप में इस अवसर पर प्रत्येक वर्ष किसी अन्य राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष अथवा किसी महत्त्वपूर्ण हस्ती को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। सभी राज्यों द्वारा रंग-बिरंगी झाँकियाँ प्रस्तुत की जाती हैं। सर्वश्रेष्ठ झाँकी को पुरस्कृत किया जाता है । इस पावन अवसर पर बहादुरी के लिए पुरस्कारों की घोषणा की जाती है । सभी प्रमुख सरकारी भवनों को प्रकाश से सजाया जाता है। गणतंत्र दिवस इसी तरह से सभी राज्यों की राजधानियों में भी मनाया जाता है । स्कूली बच्चे परेड में भाग लेते हैं। वे स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं । गणतंत्र दिवस का बहुत बड़ा राष्ट्रीय महत्त्व है । यह हमें राष्ट्र की उन्नति के लिए कठिन परिश्रम करने का स्मरण कराता है । हमें इस दिन की महत्ता को समझना चाहिए ।

17. स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)

स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है। भारत लगभग दो सौ वर्षों तक अँगरेजी शासन के अधीन रहा। सन् 1947 में इसी दिन भारत स्वतंत्र हुआ था। यह दिन भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम दिवस है। इस दिन सभी स्कूल, कॉलेज तथा दफ्तर बंद रहते हैं । 15 अगस्त की सुबह सभी स्कूलों एवं कॉलेजों, सरकारी एवं गैरसरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है । प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्रीय गान गाता है । नई दिल्ली में लाल किले पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। वे राष्ट्र को संबोधित भी करते हैं । सेना एवं सामान्य नागरिकों के द्वारा राष्ट्रध्वज के सम्मान में सलामी दी जाती है। पूरा दिन खुशी एवं उत्साह का माहौल रहता है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों एवं देशभक्तों के योगदान को याद किया जाता है । इस अवसर पर कई जगहों पर देशभक्ति कार्यक्रम एवं सभाएँ आयोजित होती हैं। सभी राज्यों में इस उत्सव को इसी तरह मनाया जाता है । स्कूलों में प्राचार्य ध्वज फहराते हैं। इस अवसर पर एक संक्षिप्त भाषण भी किया जाता है । बच्चे अपने हाथों में तिरंगा झंडा लिए बहुत खुश नजर आते हैं । विद्यार्थी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। स्कूलों में बच्चों के बीच मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं। इस प्रकार स्वतंत्रता दिवस हमें देश के प्रति त्याग और बलिदान के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

18. शिक्षक दिवस

भारतीय समाज में शिक्षकों का स्थान बहुत आदरणीय है । उन्हें राष्ट्रनिर्माता माना जाता है। वे विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करते हैं । हमारे देश में 5 सितंबर 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है । यह दिवस महान् शिक्षक, डॉ. एस. राधाकृष्णन् का जन्मदिन है। वे भारत के राष्ट्रपति ही नहीं, एक अच्छे नेता, महान् दार्शनिक एवं आदर्श शिक्षक भी थे । उन्हें देश एवं विदेश में लोगों का सम्मान मिला। इसलिए उनका जन्मदिन ‘शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस सभी शिक्षकों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को विभिन्न प्रकार के उपहार देते हैं। शिक्षक उन्हें आशीर्वाद देते हैं। कई उत्सव आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। वे अपने शिक्षकों के प्रति स्नेह एवं सम्मान प्रदर्शित करते हैं। यह वह अवसर होता है, जब शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच एक अटूट संबंध बनता है। हम सभी को अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए । वे हमारे भविष्य को उज्ज्वल बनाते हैं । वे हमें अच्छा मानव बनने में मदद करते हैं। महान् संत कबीरदास ने सच ही कहा है—
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काको लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोविन्द दियो बताय॥

19. बाल दिवस

बाल दिवस हर वर्ष 14 नवम्बर को मनाया जाता है । इसी दिन 1889 को हमारे प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म हुआ था। बच्चों से उन्हें बहुत प्रेम था। जब भी अवकाश मिलता, वे उनके साथ रहना चाहते थे। बच्चे प्यार से उन्हें 'चाचा नेहरू' कहते थे । वे बच्चों के महत्त्व को समझते थे। बच्चों से अत्यधिक लगाव के कारण ही उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में बाल दिवस मनाया जाने लगा। इस दिन स्कूलों तथा कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। छोटे बच्चे इस दिन काफी खुश नजर आते हैं। बच्चों की उपस्थिति मानवीय संवेदना का स्रोत है। उनके अभाव में ऐसी संवेदनाएँ सूख जाती हैं। उनकी विलक्षण प्रतिभा को समझना और महसूस करना चाहिए। बच्चे ही आनेवाले कल के भविष्य होते हैं। उनके भोजन, देखरेख, शिक्षा और विकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वे जीवन में सबकुछ पा सकें। बच्चे प्रेम के भूखे होते हैं। प्रेम के अभाव में उनका मानसिक विकास रुक जाता है। वे समाज में अपने आप को सही ढंग से स्थापित नहीं कर पाते हैं । सरकार और आम आदमी को उन्हें शोषण से बचाने का प्रयास करना चाहिए । अनाथ एवं गरीब बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें जीवन में प्रगति करने का हरसंभव सहयोग देना चाहिए। तभी बाल दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी ।

20. राष्ट्रीय एकता

प्रत्येक देश में विभिन्न जाति, धर्म एवं संप्रदाय के लोग रहते हैं । उनके बीच विचारों के आपसी तालमेल को 'राष्ट्रीय एकता' की संज्ञा दी जाती है। यह राष्ट्र को सबल, उन्नत और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्त्वपूर्ण बनाती है । राष्ट्रीय एकता किसी देश के अस्तित्व की रक्षा के लिए अति आवश्यक है । एकजुट होकर छोटा देश भी शक्तिशाली और आत्मनिर्भर हो जाता है। एकता के अभाव में बड़े-से-बड़ा देश भी विखंडित और कमजोर हो जाता है। अतः राष्ट्रीय एकता के लिए नागरिकों के बीच आपसी प्रेम, विश्वास और त्याग का भाव होना आवश्यक है । भारत विविधताओं का देश है। यहाँ अनेक धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं। सभी की अपनी अलग-अलग भाषाएँ, रहन-सहन, खान-पान और मान्यताएँ हैं । फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर यहाँ की जनता में एकता की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है। इस देश के देशवासियों के बीच सामाजिक और साम्प्रदायिक सहयोग की गंगा बहती है । राष्ट्र के अस्तित्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरवशाली बनाने के लिए राष्ट्रीय एकता एक आवश्यक तत्त्व है। यह राष्ट्र को उन्नति, आत्मनिर्भरता और सुख-समृद्धि की ओर ले जाती है। आज के युग में सभी राष्ट्र विकास की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय एकता और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

21. अनुशासन

अनुशासन का वास्तविक अर्थ है— नियमों का पालन करना, बड़ों का आज्ञा मानना एवं उन्हें उचित सम्मान देना, शिष्टाचार एवं अच्छे आचरण को अपनाना। अनुशासन जीवन को एक आधार प्रदान करता है । जीवन के हर कदम पर इसकी आवश्यकता है । घर, कार्यालय, विद्यालय, कारखाना, खेल का मैदान, युद्ध-भूमि, सभी जगह इसकी जरूरत होती है । घर में अनुशासन नहीं हो तो परिवार के सदस्य मनमानी करने लगेंगे। परिवार में अशांति का माहौल व्याप्त हो जाएगा। परिवार के लोगों का विकास रुक जाएगा। कार्यालय में अनुशासन न हो तो कार्यालय और कारखाना चलाना मुश्किल हो जाएगा । विद्यालय में यदि अनुशासन न हो तो कोई भी छात्र अपने शिक्षक का आदर नहीं करेगा। उसके जीवन का संपूर्ण विकास रुक जाएगा। खेल के मैदान में यदि खिलाड़ी अनुशासन का पालन नहीं करें तो वे कभी नहीं जीत सकते । युद्ध के मैदान में यदि सैनिक अनुशासित न हों तो उनकी पराजय निश्चित है । इसके बगैर समाज क्या, राष्ट्र में भी शांति एवं उन्नति की कल्पना नहीं की जा सकती । अनुशासन एक अच्छी चीज है। यह मनुष्य के चरित्र का निर्माण करता है तथा एकता एवं सहयोग की भावना का विकास करता है । अतः बच्चों को अनुशासन की शिक्षा प्रारंभ से ही दी जानी चाहिए। यह जीवन की सफलता का स्रोत है ।

22. शिष्टाचार

शिष्ट + आचार से बना है— शिष्टाचार, यानी सभ्य या उत्तम आचरण । शिष्ट आचरणवाले मनुष्य ही सही अर्थों में मनुष्य हैं । शिष्ट होने के लिए सुशिक्षा, सत्संगति और सुविचार आवश्यक हैं। ऐसे व्यक्ति को समाज में आदर-सम्मान मिलता है । शिष्ट व्यक्ति विनम्र और हँसमुख होता है । वह दूसरों के काम में दखल नहीं देता । वह दूसरों के दुर्गुणों पर ध्यान न देकर अपने को सुधारने के लिए प्रयत्नशील रहता है। ऐसे मनुष्य के अंदर घमंड, द्वेष, ईर्ष्या आदि भाव नहीं होते हैं । वह अनुशासित तथा समय का पाबंद होता है । वह सभी से प्रेम करता है, चाहे वह मनुष्य हो या जीव-जंतु । वह क्षमाशील होता है और किसी का बुरा नहीं चाहता। वह परोपकारी और स्वाभिमानी होता है । मानव-जीवन में शिष्टाचार हर कदम पर अपना महत्त्व रखता है । शिष्ट व्यक्ति कहीं और कभी भी लज्जित नहीं होता। उसे हर जगह सम्मान प्राप्त होता है । शिष्ट व्यवहार से दुश्मन भी धीरे-धीरे मित्र बन जाते हैं । शिष्टाचार बिगड़े हुए काम बना सकता है, वहीं अशिष्टता से बने हुए काम भी बिगड़ जाते हैं। हर व्यक्ति में अच्छे और बुरे गुण होते हैं, लेकिन अधिक अच्छे गुणोंवाला व्यक्ति समाज का आदर्श होता है। उसके शिष्टाचार से दूसरों को शिष्ट बनने की प्रेरणा मिलती है।

23. पुस्तकालय

पुस्तकालय का शाब्दिक अर्थ है— पुस्तकों का घर । अतः जहाँ ज्ञानवर्धक और महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का संग्रह होता है, उस स्थान को पुस्तकालय कहते हैं । यहाँ आकर लोग अपने ज्ञान का भंडार बढ़ाते हैं। पुस्तकालय दो प्रकार के होते हैं—व्यक्तिगत और सार्वजनिक । धनी व्यक्तियों के द्वारा अपने आवास पर बड़ी संख्या में पुस्तकों का संग्रह, व्यक्तिगत पुस्तकालय कहलाता है । जो पुस्तकालय जन-साधारण के लिए खोले जाते हैं, उन्हें सार्वजनिक पुस्तकालय कहा जाता है । पुस्तकों के द्वारा ही हम प्राचीनकाल से वर्तमानकाल तक की स्थितियों से अवगत होते हैं। पुस्तकें संसार के कई रहस्यों से भी परिचित कराती हैं। हर व्यक्ति पुस्तक खरीदकर नहीं पढ़ सकता । अतः वह पुस्तकालय में जाकर ज्ञान प्राप्त करता है। यहाँ एक साथ अनेक लोग बैठकर अध्ययन करते हैं। वे आपस में ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं । कुछ पुस्तकालय में लोगों को पुस्तक घर ले जाने की सुविधा भी दी जाती है। इसके लिए पुस्तकालय द्वारा एक निश्चित शुल्क लिया जाता है । पुस्तकालय में जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र से संबंधित किताबें होती हैं। कोलकाता का 'नेशनल लाइब्रेरी' भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय है । पुस्तकालय मानव-जीवन का अभिन्न अंग है। अतः यहाँ समसामयिक पुस्तकों का संग्रह, इसका सदुपयोग और इसकी सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य है ।

24. एक शैक्षिक सैर का वर्णन

यात्रा शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण अंग है । यह हमें व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। यात्रा के दौरान हम नए लोगों से मिलते हैं और नई जगहों को देखते हैं । यदि यात्रा शैक्षिक हो, तो यह हमें अतुलनीय आनंद देता है। हाल ही में हमलोग स्कूल द्वारा एक शैक्षिक सैर पर गए । हमलोगों ने अपने शहर यानी पटना के कई प्रसिद्ध भवनों एवं स्मारकों का भ्रमण एवं दर्शन किया । सर्वप्रथम हमलोग ‘पटना तारामंडल' गए। यह एशिया के सबसे बड़े तारामंडलों में से एक है । इसके बाद हमलोग 'पटना म्यूजियम' (संग्रहालय) गए। यह अँगरेजों द्वारा बनाया गया था । फिर हमने हाल ही में बने नए 'बिहार म्यूजियम' को भी देखा। यह काफी बड़े क्षेत्र में बनाया गया है। हमलोगों ने 'संजय गाँधी जैविक उद्यान' का भ्रमण किया । यह बहुत बड़े क्षेत्र में है। इसके बाद हमलोग 'खुदाबख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी' गए। वहाँ बहुत-सी दुर्लभ पुस्तकें एवं चित्र थे। हमलोग गोलघर, कारगिल चौक, दरभंगा हाउस, बुद्ध स्मृति पार्क, कुम्हरार पार्क और पादरी की हवेली भी गए। इन स्थानों के भ्रमण से बहुत-सी जानकारियाँ प्राप्त हुईं। इसके बाद, सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी शाम में घर लौट गए। हमारे पूर्ण ज्ञान के लिए शैक्षिक भ्रमण आवश्यक है। हमें केवल किताबी ज्ञान पर आधारित नहीं रहना चाहिए । शैक्षिक यात्रा के अभाव में हमारी शिक्षा अधूरी रहेगी ।

25. विज्ञान के चमत्कार

मनुष्य अतीत से ही खोजी प्रवृत्ति का रहा है । इसी प्रवृत्ति के कारण मनुष्य क्रमिक विकास की दौड़ में सबसे आगे रहा है। आग के आविष्कार के बाद मनुष्य ने अपने जीवन को उन्नत बनाने का प्रयास किया । विज्ञान मनुष्य के उसी क्रमबद्ध प्रयास की देन है। पिछले कुछ वर्षों में विज्ञान ने अद्भुत प्रगति की है । आज विज्ञान के चमत्कार हर तरफ दिखाई दे रहे हैं। जीवन की सारी सुविधाओं का श्रेय विज्ञान को है । पहले लोगों के घरों में बिजली नहीं होती थी । आज बिजली के आविष्कार ने अंधकार में डूबी दुनिया को रौशन कर दिया । अब हमारे अधिकतर कार्य बिजली के माध्यम से ही होते हैं। बिजली से बड़े-बड़े कल-कारखाने और उद्योग-धंधे चलते हैं। चिकित्सा-क्षेत्र में भी विज्ञान के कई चमत्कार देखने को मिलते हैं। आज जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज संभव हो गया है । चिकित्सा क्षेत्र में कई तरह की दवाइयाँ, एक्स-रे मशीन आदि विज्ञान की ही देन हैं । परिवहन क्षेत्र में मोटर साइकिल, कार, ट्रेन, हवाईजहाज आदि विज्ञान के कारण ही उपलब्ध हैं । मोबाइल, रेडियो, कंप्यूटर, दूरदर्शन आदि विज्ञान के ही चमत्कार हैं । इसने समय और दूरी की समस्याओं का हल कर दिया है । इस प्रकार हम पाते हैं कि हर छोटी-बड़ी सुविधाओं का श्रेय विज्ञान को ही जाता है । आज इनके बगैर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती ।

26. टेलीविजन (दूरदर्शन)

दूर-संचार का एक सशक्त माध्यम है — टेलीविजन | पूरी दुनिया को टेलीविजन द्वारा दर्शन कराने का श्रेय जाता है जे. एल. बेयर्ड को । पहले हम रेडियो द्वारा समाचार, संदेश, मनोरंजन आदि के कार्यक्रमों को सिर्फ सुन सकते थे, लेकिन आज टेलीविजन उन कार्यक्रमों का दर्शन भी कराता है। आज टेलीविजन हर घर में लोकप्रिय हो चुका है । शिक्षा और मनोरंजन का यह अच्छा साधन है। इसके द्वारा हमलोग पूरी दुनिया के घटनाचक्र को देख सकते हैं। इससे हमें अनेक लाभ हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है। जानकारी के अभाव में पहले किसान तकनीकी रूप से सक्षम नहीं थे, पर टेलीविजन की सहायता से आज वे कृषि संबंधी उन्नत तकनीक की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। वे आज अधिक-से-अधिक अन्न उपजाने लगे हैं। दूरदर्शन पर कई तरह के कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों से लोगों में ज्ञान की वृद्धि होती है। यह खाली समय में बैठे लोगों का भरपूर मनोरंजन करता है । यह राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचार शीघ्र प्रसारित करता है । इसका उपयोग शिक्षा के प्रसार के लिए किया जाता है। परंतु, कुछ चैनल असामाजिक कार्यक्रमों का भी प्रसारण करते हैं, जिससे अराजकता फैलने की संभावना रहती है। बच्चों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है । वे पहले की अपेक्षा ज्यादा आक्रामक और हिंसक होते जा रहे हैं। हमें टेलीविजन का सही उपयोग करना चाहिए ।

27. कंप्यूटर

टेलीविजन की तरह आज कंप्यूटर सभी शिक्षित व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन चुका है । यहाँ तक कि स्कूली बच्चे भी कंप्यूटर के विषय में सबकुछ जानने लगे हैं। आज हर स्कूल में इसकी पढ़ाई अनिवार्य हो चुकी है । आज जिस कंप्यूटर का लाभ हम उठा रहे हैं उसका श्रेय चार्ल्स बैबेज को जाता है । उन्होंने कंप्यूटर का आविष्कार किया । एक कंप्यूटर के कई भाग होते हैं। इसका स्क्रीन एक टेलीविजन - जैसा होता है जो 'मॉनीटर' कहलाता है । इसका एक सी. पी. यू. एवं एक कीबोर्ड होता है । इस पर सभी संख्याएँ, अक्षर तथा चिह्न छपे होते हैं। इसका एक छोटा माउस भी होता है । इसके माध्यम से बिना कीबोर्ड की सहायता से भी कंप्यूटर चलाया जा सकता है । यह पल भर में अनेक कार्यों को संपादित कर सकता है। वर्तमान समय में कार्यालयों एवं संस्थाओं में कार्य के बोझ से निजात पाने के लिए इसका व्यवहार किया जा रहा है। अब इसका प्रयोग हर क्षेत्र में किया जा रहा है । शिक्षा के क्षेत्र में इसका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके आ जाने से कई प्रशिक्षण केंद्र और संस्थाएँ खुल गए हैं। आज शहर हो या गाँव, हर जगह कंप्यूटर ने दस्तक दे दिया है। इसकी ट्रेनिंग से लोग अपना रोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार कंप्यूटर से हम पूरी दुनिया का ज्ञान बैठे-बैठे प्राप्त कर सकते हैं।

28. इंटरनेट

सूचना-तंत्र के क्षेत्र में इंटरनेट एक नवीनतम खोज है। यह आजकल बहुत प्रसिद्ध होता जा रहा है । हम इससे बहुत सारी सूचनाएँ प्राप्त करते हैं। इसके पास सभी आयु वर्गों के लिए ज्ञान होता है । यहाँ तक कि अब छोटे-छोटे बच्चे भी इंटरनेट से दूर नहीं हैं । वे इसपर कहानियाँ पढ़ सकते हैं। युवा वर्ग को यह खास तौर पर आकर्षित करता है । उन सबके लिए यह संपूर्ण मनोरंजन का साधन है । इसके पास सभी कक्षाओं के लिए पाठ्य सामग्रियाँ होती हैं । उच्च वर्ग के छात्र इसपर पुस्तकें पढ़ सकते हैं। वे सभी प्रकार की सूचनाएँ ढूँढ़ सकते हैं। हम अपने कमरे में बैठकर दुनिया के बारे में जान सकते हैं । यह हमारे स्कूल या कार्यक्षेत्र की परियोजनाएँ बनाने में हमारी सहायता करता है । यह सभी क्षेत्रों से संबंधित हमें नई-नई सूचनाएँ देता है । यह हमें संदेश भेजने में मदद करता है। यह हमें अपने मित्रों तथा परिवार से जोड़ता है। इसका उपयोग बैंकों तथा कार्यालयों में किया जाता है। हम इसपर रेल-टिकट, हवाईजहाज-टिकट, सिनेमा-टिकट आदि भी आरक्षित करा सकते हैं। आज संचार के विभिन्न माध्यमों में यह साधारण डाक अथवा टेलीफोन से सस्ता पड़ता है। हर संभव सूचना के लिए अब इंटरनेट एक वैश्विक स्रोत बन गया है। इसने शिक्षा और ज्ञान को उन्नत बनाया है । हम सभी को इसका उपयोग सीखना चाहिए ।

29. सिनेमा से लाभ-हानि

सिनेमा मनोरंजन का एक उत्तम स्रोत है । यह आधुनिक विज्ञान की विशेष देन है। यह समाज का दर्पण होता है । सिनेमा के द्वारा हम समाज में होनेवाली गतिविधियों को जान पाते हैं । सुंदर दृश्य, गाने एवं नृत्य हमें आनंदित करते हैं । हम कुछ समय के लिए अपने को भूल जाते हैं। चूँकि यह विज्ञान की देन है, इसलिए इसके लाभ और हानियाँ भी हैं। लाभ के दृष्टिकोण से यह शिक्षा का भी अच्छा माध्यम है । इसके माध्यम से देश-विदेश का इतिहास, भूगोल, जीवविज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बारे में हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम दूसरे देशों की सभ्यता एवं संस्कृति से अवगत होते हैं । फिल्म के द्वारा मिली शिक्षा हमारे याददाश्त में अधिक दिनों तक रहती है। हानि के दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो सभी फिल्में अच्छी नहीं होती हैं। आजकल कुछ फिल्म-निर्माता ऐसी फिल्में प्रस्तुत कर रहे हैं जो हमारे युवक-युवतियों को दिग्भ्रमित कर रही हैं। कुछ फिल्में अश्लील एवं हिंसक दृश्य प्रस्तुत कर रही हैं जिनका हमारे समाज पर बुरा असर पड़ रहा है । इसका नतीजा है कि आजकल बच्चे पहले की तुलना में ज्यादा हिंसक और आक्रामक विचारवाले होते जा रहे हैं। इसलिए अच्छी एवं प्रेरणादायक फिल्में बनाने का प्रयास होना चाहिए । केवल पैसा कमाने के उद्देश्य से फिल्मों का निर्माण नहीं करना चाहिए ।

30. स्वच्छ भारत अभियान

‘स्वच्छ भारत अभियान' 2 अक्टूबर 2014 से शुरू किया गया। चूँकि गाँधीजी को स्वच्छता बहुत प्रिय थी, अतः उनका जन्म - दिवस इस अभियान के शुभारंभ के लिए चुना गया । यह भारत सरकार के द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान है । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में राजघाट पर इसकी शुरुआत की। ये पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने स्वयं हाथों में झाडू लेकर राजघाट की सफाई की। इन्होंने भारत के नागरिकों को संबोधित किया और इसमें भाग लेने को प्रोत्साहित किया । यह एक स्वच्छता अभियान है । इस अभियान का लक्ष्य भारत देश को 'कचरामुक्त' बनाना है । अनेक सरकारी संस्थानों ने इसमें भाग लिया है। कई स्कूलों और कॉलेजों के छात्र भी इस अभियान में भाग ले रहे हैं। अनेक प्रसिद्ध हस्तियाँ भी इस अभियान से जुड़ गई हैं। कई गैर-सरकारी संगठन भी इस अभियान पर जोर-शोर से कार्य कर रहे हैं। गंदगी साफ करना भी एक कार्य है। इस अभियान से स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है, फलस्वरूप इसे सफल बनाने हेतु लोगों का योगदान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । भारत की धरती शस्य - श्यामला कही जाती है । जिस प्रकार हम अपने घर से कचरा साफ करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम अपने देश को भी कचरामुक्त करें । हमें आशा है कि यह अभियान बहुत सफल होगा ।

31. वसंत ऋतु

वसंत ऋतु शरत् ऋतु के बाद आती है। यह फरवरी के महीने से शुरू होती है और अप्रैल माह में समाप्त होती है। इस ऋतु का अपना एक अलग ही विशेष सौंदर्य एवं आकर्षण है । इसे सभी पसंद करते हैं। इसे ऋतुओं का राजा या 'ऋतुराज' कहा जाता है । इस ऋतु में मौसम बहुत सुहावना होता है। इसमें न अधिक गरमी होती है और न अधिक ठंडी । सुबह और रात में हलकी ठंड रहती है। सूरज की रोशनी नर्म होती है। पूरा दिन शीतल पवन बहता रहता है। पेड़ों की नई पत्तियाँ निकल आती हैं। चारों तरफ फूल खिले होते हैं। फूलों पर रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराती रहती हैं। पेड़ों पर बैठकर कोयल गाने लगती हैं । इस ऋतु में फसलें पककर तैयार हो जाती हैं। इसी ऋतु में सरस्वतीपूजा का आयोजन होता है और लोग होली भी मनाते हैं। इस अवधि में स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होती। लोग अपने को तरोताजा और ऊर्जावान् महसूस करते हैं । चूँकि इस समय धरती दुलहन की तरह मनोहारी प्रतीत होती है, अतः लोग आनंद का अनुभव करते हैं। इस ऋतु पर अनेक कविताएँ लिखी गई हैं। अतः वसंत एक आनन्ददायक ऋतु है । यह धरती को नई ऊर्जा प्रदान करती है । इस समय हम अपने दुःख और क्लेश को भूल जाते हैं ।

32. ग्रीष्म ऋतु

ग्रीष्म ऋतु अप्रैल माह के मध्य में शुरू होती है । इस ऋतु में मौसम अत्यधिक गरम होता है। सूरज की किरणें बहुत तीक्ष्ण होती हैं। दिन लंबे तथा रातें छोटी होती हैं । हमें गरमियों में बहुत प्यास लगती है । शरीर से बहुत पसीना आता है। गरमियों में हम बाहर जाना पसंद नहीं करते । दिनभर गरम हवाएँ चलती हैं। बच्चे बाहर खेल नहीं पाते। इस मौसम में लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। उन्हें काफी थकावट महसूस होती है। लोगों से मेहनतवाला कार्य नहीं हो पाता । कभी-कभी गरम हवाएँ लू का रूप धारण कर लेती हैं। लू के कारण लोग बीमार पड़ जाते हैं । उन्हें उलटी और दस्त होना शुरू हो जाता है । पशु एवं पक्षी ज्यादा समय छाया में बिताते हैं । नदी तथा तालाब सूख जाते हैं । गरमियों में हमें पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। लोग इस मौसम में ठंडे पेय तथा फलों के रस पीना पसंद करते हैं। ग्रीष्म ऋतु हमारे लिए कई स्वादिष्ट फल लाती है। इस ऋतु में आम, जामुन, तरबूज, खरबूज, लीची इत्यादि स्वादिष्ट फल खाने को मिलते हैं। बच्चे तो इस ऋतु का बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि इस दौरान उनके स्कूलों में छुट्टियाँ रहती हैं । भयानक गरमी से बचने के लिए कुछ लोग ठंडे प्रदेशों में घूमने-फिरने के लिए चले जाते हैं । कुल मिलाकर यह ऋतु सुख-दुःख, हर्ष-विषाद का संगम है।

33. वर्षा ऋतु

वर्षा ऋतु जुलाई के महीने में आती है । यह सितंबर तक जारी रहती है । यह ऋतु हमें सूरज की चिलचिलाती गरमी से राहत दिलाती है और प्यासी धरती को जल देती है । इस अवधि में आसमान में बादल उमड़तेघुमड़ते रहते हैं । बादलों को देखकर मोर नाचने लगते हैं। नदियाँ तथा तालाब पानी से भर जाते हैं । झर-झर करते झरने और कल-कल करती नदियाँ इठलाने-बलखाने लगती हैं । पक्षियों का कलरव पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर देता है। पेड़-पौधे हरे-भरे तथा ताजा हो जाते हैं। वर्षा ऋतु में इंद्रधनुष दिखाई पड़ता है। किसानों के लिए तो यह ऋतु वरदानस्वरूप है। इस समय वे खेतों में नई-नई फसलें लगाते हैं। बच्चे वर्षा के पानी में खेलना पसंद करते हैं। लेकिन, कभी-कभी भारी वर्षा मानव-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। सड़कों तथा नालियों में पानी भर जाता है । वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। तरह-तरह के कीड़ोंमकोड़ों के काटने से भयंकर बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। कहीं-कहीं अतिवृष्टि के कारण बाढ़ आ जाती है, जिससे जान-माल को काफी नुकसान पहुँचता है। ये चीजें जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हैं। फिर भी, हम सभी वर्षा ऋतु का दिल खोलकर स्वागत करते हैं। यह हमें नया जीवन तथा ताजगी देती है। संत तुलसीदास ने सच ही कहा है
वर्षाकाल मेघ नभ छाए, गरजत लागत परम सुहाए ।

34. बैसाखी

बैसाखी सिक्ख समुदाय का एक प्रसिद्ध त्योहार है । भारत के उत्तरी राज्यों में विशेषकर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में इस त्योहार की धूम देखने लायक होती है । सिक्ख समुदाय की मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सिक्खों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह अप्रैल के महीने में आता है। यह फसल काटने का त्योहार होता है । इसे नववर्ष दिवस के रूप में भी मनाया जाता है । किसान अच्छी फसल देने के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं । इस दिन वे अपनी फसलें काटते हैं। लोग नृत्य करते हैं, गाना गाते हैं तथा नए अनाजों से बने व्यंजनों का आनंद लेते हैं । ऐसा भी माना जाता है कि देवी गंगा इसी दिन पृथ्वी पर आई थीं। इस दिन सिक्ख लोग गुरुद्वारे जाते हैं। वे प्रार्थना करते हैं तथा भजन गाते हैं । युवक-युवतियाँ सज-धज कर हर्षोल्लास के साथ इस उत्सव का आनंद उठाते हैं। पुरुष 'भांगड़ा' करते हैं तथा स्त्रियाँ 'गिद्दा ' करती हैं। बैसाखी की धूम पश्चिम बंगाल राज्य में भी देखने को मिलती है। पश्चिम बंगाल के निवासी इस दिन को नववर्ष के रूप में मनाते हैं। उनके अनुसार बँगला कैलेंडर की शुरुआत इसी दिन से हुई थी। लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं। वे तरह-तरह के व्यंजनों का आनंद उठाते हैं। बच्चे बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं । अतः बैसाखी सभी के लिए समृद्धि का त्योहार है ।

35. सरस्वती-पूजा

सरस्वती-पूजा विद्यार्थियों का एक लोकप्रिय त्योहार है । यह भारत के उत्तरी राज्यों में मनाया जाता है । यह माघ महीने (वसंत ऋतु में) के पाँचवें दिन मनाया जाता है । इस त्योहार को 'वसंत पंचमी' भी कहा जाता है । इस दिन देवी सरस्वती की पूजा 'विद्या की देवी' के रूप में की जाती है। इस दिन सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहते हैं। बच्चे इस त्योहार को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं । वे अपने पास-पड़ोस से चंदा के रूप में धन इकट्ठा करते हैं । विद्यार्थी, देवी सरस्वती की मूर्ति को फूलों से सजाते हैं। वे उनकी भक्ति भाव से पूजा करते हैं। सभी के बीच 'प्रसाद' बाँटा जाता है। देवी सरस्वती को विद्या और संगीत की देवी के रूप में आदर दिया जाता है। कहीं-कहीं विद्यार्थिगण इस पूजा में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। वे इन कार्यक्रमों में बड़े-बुजुर्गों को आमंत्रित करते हैं तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बड़े लोग उनके आमंत्रण को स्वीकारते हुए इसमें सम्मिलित होकर उनके मनोबल को बढ़ाते हैं। विवेक, ज्ञान और अनुशासित जीवन जीने के लिए विद्यार्थी देवी से प्रार्थना करते हैं। वे मूर्ति के साथ शोभायात्रा भी निकालते हैं। अंत में मूर्ति को किसी तालाब या नदी में विसर्जित कर दिया जाता है । अतः सरस्वतीपूजा सचमुच एक विशेष पूजा है। देवी सरस्वती की कृपा हमें बुद्धिमान् एवं सभ्य बनाती है ।

36. होली

होली हिंदुओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह फाल्गुन के महीने में पड़ता है। होली से शरद ऋतु खत्म होती है तथा वसंत ऋतु शुरू होती है। होली दो दिनों तक मनाई जाती है । यह खुशी एवं उमंग का त्योहार है। इस त्योहार से संबंधित एक प्रसिद्ध कहानी प्रह्लाद तथा राजा हिरण्यकशिपु के बारे में है । प्रह्लाद भगवान् विष्णु का परम भक्त था, दूसरी तरफ, उसके पिता हिरण्यकशिपु भगवान् विष्णु का घोर विरोधी था, इसलिए वह अपने पुत्र को मार देना चाहता था । प्रह्लाद की बूआ होलिका उसे मारने के लिए अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई । परंतु, भगवान् विष्णु ने उसे बचा लिया तथा होलिका मारी गई। इसी की याद में होली से पहलेवाली शाम को आग (होलिका दहन) जलाई जाती है। अगले दिन लोग रंग तथा गुलाल से खेलते हैं। इस अवसर पर लोग सामाजिक भेदभाव भूल जाते हैं । वे एक-दूसरे से उन्मुक्त भाव से मिलते हैं। सभी अपने मित्रों एवं पड़ोसियों के घर जाते हैं। छोटे बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। लोग मिठाइयाँ एवं अन्य स्वादिष्ट पकवान खाते और खिलाते हैं। लेकिन, इस त्योहार में कुछ लोग शराब पीते हैं और असामाजिक व्यवहार करते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । शालीनता एवं अच्छे व्यवहार होली की खुशी को बढ़ा देते हैं। अतः हमें प्रेम और भाईचारे से अपनी खुशियों को आपस में बाँटना चाहिए ।

37. सरहुल

आदिवासी समुदाय में उराँव जाति का एक प्रमुख पर्व है 'सरहुल' । यह पर्व कृषि आरंभ करने की खुशी में मनाया जाता है । इस पर्व से लगभग एक माह पहले बाहर रहनेवाले सभी लोग अपने-अपने घर चले आते हैं। उसके बाद गाँव की सड़कों और नालियों की सफाई की जाती है। इस सामूहिक कार्य के बाद लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई करते हैं। वे अपने घरों की दीवारों पर आकर्षक रंग-बिरंगे चित्र बनाते हैं। उन चित्रों में पेड़-पौधे, फल-फूल, पशु-पक्षी आदि प्राकृतिक चीजें प्रदर्शित की जाती हैं। यह उनके प्रकृति - प्रेम को दर्शाता है। इस दिन सभी लोग सुबह में ही नहा-धोकर, नए-नए वस्त्र पहनकर तैयार हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें ‘सरना' की पूजा करनी होती है। सरना एक छोटा-सा कुंज होता है, जहाँ ‘साल' के वृक्ष लगे होते हैं। यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। इनके पुजारी, 'पाहन' सरना की विधिवत् पूजा करते हैं। मुरगे की बलि दी जाती है तथा 'हँड़िया' का अर्घ्य दिया जाता है। हँड़िया एक प्रकार का मादक पेय होता है, जिसे आदिवासी लोग बड़े चाव से पीते हैं। इसे पीने के बाद आदिवासी लोग आनंदमग्न होकर गाते-बजाते अपनेअपने घर चले जाते हैं । यह पर्व होली, ईद, क्रिसमस आदि की तरह प्रेम और सौहार्द का त्योहार है।

38. रक्षाबंधन

रक्षाबंधन एक बहुत प्रसिद्ध त्योहार है । यह भारत के लगभग सभी भागों में मनाया जाता है। विशेषकर हिंदू समुदाय के बीच यह पर्व काफी महत्त्व रखता है। इस त्योहार के पीछे एक रोचक ऐतिहासिक कहानी भी है। जब गुजरात के शासक बहादुरशाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया, तो महारानी कर्मवती ने अपनी सुरक्षा के लिए हुमायूँ से प्रार्थना की। उसे 'भाई' शब्द से संबोधित कर रक्षाबंधन का सूत्र भेजा । इससे प्रभावित होकर हुमायूँ ने कर्मवती की पूर्ण सहायता की, शायद तभी से भाइयों और बहनों के बीच प्यार का यह त्योहार प्रचलन में आया । बहनें भाइयों के प्रति अपना प्यार प्रकट करती हैं । भाई अपनी बहनों के प्रति अपने कर्तव्य का स्मरण करते हैं। यह श्रावण महीने के पूर्णिमा के दिन आता है। बहनें इस दिन भाइयों के पसंद का पकवान बनाती हैं । वे भाइयों के लिए व्रत रखती हैं। वे भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं। वे उन्हें मिठाइयाँ भी खिलाती हैं। वे उनके लंबे जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं । भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। आजकल बड़े शहरों में रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन होने लगा है । जो बहनें अपने भाइयों से दूर रहती हैं, वे उन्हें ‘राखी' डाक या कूरियर द्वारा भेजती हैं । वस्तुतः यह त्योहार बहन का भाई के प्रति सम्मान और भाई का बहन के प्रति कर्तव्य का बोध करानेवाला त्योहार है । मैं इस त्योहार को बहुत ज्यादा पसंद करता हूँ ।

39. दुर्गा-पूजा (दशहरा)

दशहरा हिंदुओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है । भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार की सबसे ज्यादा धूम पश्चिम बंगाल एवं बिहार में देखने को मिलती है। यह आश्विन महीने में दस दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक अनुष्ठान चलने के कारण इसे नवरात्र भी कहा जाता है। चूँकि यह पर्व दस दिनों तक रहता है, इसलिए इसे दशहरा या विजयादशमी भी कहा जाता है। कई आकर्षक एवं भव्य पंडाल बनाए जाते हैं। वे फूलों तथा प्रकाश से सजाए जाते हैं। उनमें देवी दुर्गा की सुंदर मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। कुछ लोग अपने घरों में भी कलश की स्थापना करते हैं और भक्तिभाव से पूजा करते हैं। छोटे-बड़े मेले आयोजित किए जाते हैं। वहाँ मिठाइयाँ, खिलौने तथा खाद्य पदार्थ आदि बेचे जाते हैं। दस दिनों तक पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है । इस दौरान कहीं-कहीं रामलीला भी प्रदर्शित की जाती है। रावण, कुंभकरण तथा मेघनाद के विशाल पुतले बनाकर बड़े मैदानों में रखे जाते हैं । भगवान् राम का अभिनय करनेवाला व्यक्ति उन प्रत्येक पुतलों पर बाण चलाता है । यह देखकर बच्चे, बूढ़े सभी खुश होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति इस त्योहार का आनंद लेता है । इस प्रकार, बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश के साथ यह त्योहार समाप्त हो जाता है ।

40. दीपावली

दीपावली हिंदुओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है । इसे पूरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे 'दीवाली' भी कहा जाता है । दीपावली का अर्थ है 'दीपों की आवली या पंक्ति' । यह कार्तिक महीने में अमावस्या की रात्रि में मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान् श्रीराम चौदह वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, अतः उनके वापस आने की खुशी में लोगों ने पूरे अयोध्या को दीपों से सजा दिया था। तब से यह प्रथा चली आ रही है। दीवाली से पहले लोग अपने घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई करते हैं। दीवाली पर लोग अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं। लोग अपने घरों में सुंदर एवं आकर्षक रंगोली भी बनाते हैं। दीवाली पर भगवान् गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी की कृपा उन्हीं पर होती है, जो लोग अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं। लोग अपने दोस्तों तथा रिश्तेदारों में मिठाइयाँ बाँटते हैं। दीवाली पर प्रत्येक व्यक्ति नए कपड़े पहनकर त्योहार का आनंद लेता है। बच्चे पटाखे जलाकर खुशियाँ मनाते हैं। हर जगह दीए तथा मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं। हमें पटाखे जलाते समय सावधान रहना चाहिए। शोर मचानेवाले पटाखे हमें नहीं जलाने चाहिए। चूँकि दीपावली खुशी का त्योहार है, इसलिए इसे मनाते समय पूर्ण सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए ।

41. ईद-उल-फितर

ईद-उल-फितर मुसलमानों का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। यह प्रेम और सद्भाव का त्योहार है। यह भाईचारे का संदेश देता है। यह रमजान के महीने की समाप्ति का संकेत होता है। रमजान उपवास का महीना होता है। उपवास सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलता है । संध्या समय एक निश्चित समय पर वे लोग रोजा खोलते हैं। ईद की तैयारियाँ ईद के कुछ दिनों पहले से शुरू हो जाती हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं। घरों की रंगाईपुताई की जाती है । बच्चे बहुत सुंदर तथा खुश दिखते हैं। बच्चे हों या बूढ़े, सभी नए जोश और उमंग में होते हैं। बच्चे बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। वे उनसे उपहार के रूप में कुछ पैसे भी पाते हैं। इस पैसे को ‘ईदी' कहा जाता है। लोग इस दिन मसजिदों में जाते हैं। वे अल्लाह को नमाज अदा करते हैं। नमाज अदा करने का अंदाज बड़ा निराला होता है। सभी एक साथ सजदे में उठते हैं, बैठते हैं और झुकते हैं। यह उनकी एकता और अनुशासन का प्रतीक है। नमाज समाप्त होने के बाद लोग एक-दूसरे को 'ईद-मुबारक' की शुभकामनाएँ देते हैं। बड़ी दावतें आयोजित की जाती हैं। इस दावत में सभी धर्मों के लोग इकट्ठा होते हैं । मीठी सेंवइयाँ बनाई तथा परोसी जाती हैं। लोग गरीबों को दान देते हैं । ईद-उल-फितर दुनिया भर में मनाई जाती है । यह प्रेम तथा भाईचारे का त्योहार है ।

42. क्रिसमस

क्रिसमस ईसाइयों का एक प्रसिद्ध त्योहार है । यह पूरे विश्व में 25 दिसंबर को हर वर्ष मनाया जाता है । इस दिन प्रभु ईशु का जन्म हुआ था। वे ईसाई धर्म के संस्थापक थे। ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी पर जब अत्याचारियों का अत्याचार बढ़ गया था तब मनुष्य जाति तथा मानवता की रक्षा हेतु प्रभु ईशु का जन्म हुआ । मानवता के लिए उन्होंने अपना जीवन बलिदान कर दिया। इस दिन, सभी ईसाई अपने घरों को सजाते हैं। वे अपने घर में 'क्रिसमस ट्री' लाते हैं । यह एक कृत्रिम पेड़ होता है। वे सितारों तथा रंगीन बल्बों से इस पेड़ को सजाते हैं । वे इस पर उपहार, घंटियाँ तथा रिबन भी रखते हैं । इस दिन गिरजाघरों को खूब सजाया जाता है। इस दिन लोग गिरजाघर जाते हैं। वहाँ वे भजन गाते तथा प्रार्थना करते हैं। कई जगहों पर प्रार्थना - सभाएँ भी आयोजित की जाती हैं। लोग प्रभु ईशु के त्याग और बलिदान को याद करते हैं। ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस पर सांता क्लॉज बच्चों से मिलने आते हैं । वे बच्चों के लिए उपहार तथा मिठाइयाँ लाते हैं । क्रिसमस पर स्वादिष्ट केक तथा पेस्ट्री बनाई जाती है। लोग एक-दूसरे को 'मेरि क्रिसमस' की बधाई देते हैं । क्रिसमस पर सभी दुकानों, होटलों और मॉलों को भी सजाया जाता है। यह नए साल के आगमन का स्वागत करता है। साथ ही, सभी से प्रेम करो, दूसरे की भलाई करो और अपाहिजों की सेवा करो, इसका भी संदेश देता है ।

अभ्यास

1. निम्नलिखित विषयों पर अनुच्छेद / लघु निबंध लिखें— 
बिहार, जाड़े की रात, हमारा भारत, हमारा विद्यालय, परोपकार, दुर्गापूजा, वसंत ऋतु, साइकिल, मोटरगाड़ी, गुलाब का फूल, नदी ।

अपठित अनुच्छेद/गद्यांश से संबद्ध प्रश्नोत्तर-लेखन

किसी दिए हुए अवतरण को पढ़कर उसके आधार पर किए गए प्रश्नों के उत्तर दे पाना हमारे भाषा - ज्ञान को प्रमाणित करता है। किसी भी स्तर पर प्रश्नोत्तर ही वह विधा है जो किसी विद्यार्थी के मानसिक विकास को दर्शाती है। उदाहरणार्थ कुछ अपठित अनुच्छेद / गद्यांश और उनके आधार पर प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं

TYPE - I

निर्देश : प्रत्येक अनुच्छेद को सावधानी से पढ़िए और उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न के चार संभावित उत्तर दिए गए हैं, जिनकी क्रम संख्या (A), (B), (C) और (D) है। इनमें से कोई एक उत्तर ही सही है।

अनुच्छेद- 1

पृथ्वी शायद ब्रह्मांड में एक अकेला ग्रह है जहाँ पर जीवन है, किंतु जब पृथ्वी का निर्माण हुआ, तब यहाँ कोई जीवन न था। एक कारण तो यह था कि यहाँ बहुत गरमी थी और गैसें नहीं थीं । किंतु करोड़ों वर्षों के बाद, जब ग्रह ठंडा हुआ, तो महासागरों में पानी भर गया और गैसें बनीं । शीघ्र ही पृथ्वी की स्थितियाँ जीवित रहने के लिए अनुकूल हो गईं। पृथ्वी जीवन के लिए क्यों अनुकूल है, इसके अनेक कारण हैं। पहला, यह सूर्य से सही दूरी पर है जिससे न यह अधिक गरम होती है न अधिक ठंडी। दूसरा, पृथ्वी के चारों ओर गैसों की उपस्थिति सूर्य की हानिकारक किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है। एक और महत्त्वपूर्ण कारण है जल, जो सभी जीवधारियों के जीवित रहने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है । 

1. जब पृथ्वी बनी, तो इस पर जीवन नहीं था, क्योंकि—
(A) यह बहुत गरम थी
(B) यह बहुत ठंडी थी
(C) यहाँ बहुत हानिकारक गैसें थीं
(D) यह पानी से ढकी थी
उत्तर (A)

2. जीवधारियों के जीवित रहने के लिए जरूरी स्थिति/स्थितियाँ है/हैं— 
(A) गरमी और गैसें 
(B) जल से भरे महासागर 
(C) सूर्य से बहुत दूरी 
(D) जल और गैसों की परतें
उत्तर (D)

3. पृथ्वी के बहुत गरम या बहुत ठंडी होने से बचने का कारण है—
(A) केवल सूर्य से सही दूरी
(B) केवल पृथ्वी से लिपटी गैसों की परत
(C) पृथ्वी पर जल की उपस्थिति
(D) सूर्य से सही दूरी और पृथ्वी से लिपटी गैसों की परत 
उत्तर— (A)

4. गद्यांश में वह शब्द कौन-सा है, जो 'प्रतिकूल' का विलोम है ? 
(A) महत्त्वपूर्ण 
(B) अनुकूल 
(C) उपस्थिति 
(D) हानिकारक
उत्तर— (B)

5. पृथ्वी के चारों ओर की गैसें
(A) पृथ्वी से सही दूरी बनाए रखती हैं 
(B) सागरों को पानी से भरती हैं 
(C) सूर्य की हानिकारक किरणों को पृथ्वी तक आने से रोकती हैं 
(D) पृथ्वी की सतह को ठंडा रखती हैं 
उत्तर— (C)

अनुच्छेद- 2

गफूर एक किसान था जो एक छोटे जमींदार का खेत जोता करता था। उसके पास बैलों की एक जोड़ी थी जो उसके बड़े काम की थी। संयोग से उसका एक बैल बीमार पड़ा और कुछ ही दिनों में मर गया । 

अब गफूर को एक बचे हुए बैल पर ही निर्भर रहना पड़ा। वह उसका बहुत ध्यान रखता था, परंतु गरीब होने के कारण उसे पर्याप्त चारा नहीं दे पाता था। वह गाँव के साहूकार के पास गया और उससे दो रुपए का ऋण माँगा। लेकिन, साहूकार ने मना कर दिया। उसे पता था कि गफूर ऋण चुका नहीं सकता ।

1. गफूर था :
(A) एक छोटा जमींदार 
(B) पशुओं का एक व्यापारी 
(C) एक किसान 
(D) एक साहूकार 
उत्तर (C)

2. उसका एक बैल मर गया
(A) जब वह बीमार पड़ा 
(B) जब वह खेत में गिर पड़ा 
(C) जब वह बाजार में गिर पड़ा 
(D) एकदम अचानक
उत्तर— (A)

3. वह अपने एकमात्र बैल को खिला नहीं सका, क्योंकि
(A) बैलों के साथ उसकी रुचि नहीं थी
(B) उसके पास पैसा नहीं था
(C) उसका बैल बेकार था
(D) उसे डर था कि यह बैल भी मर न जाए
उत्तर— (B)

4. साहूकार ने उसे दो रुपए नहीं दिए, क्योंकि 
(A) उसके पास रुपए न थे 
(B) उसके पास एक रुपए के सिक्के न थे 
(C) गफूर रुपए नहीं लौटाएगा
(D) वह खुद एक बैल खरीदना चाहता था
उत्तर— (C)

5. 'चारा' शब्द का क्या अर्थ है ? 
(A) पशुओं का भोजन 
(B) पशुओं की दवा 
(C) पशुओं का आसरा 
(D) एक मशीन
उत्तर— (A)

अनुच्छेद- 3

केला पीले रंग का एक फल है जो गरम जलवायु में होता है। कभी-कभी इसे 'पूर्ण फल' कहा जाता है, क्योंकि इसे धोना नहीं पड़ता और इसे ले जाना आसान होता है। इसका छिलका उतारना सरल है। केले मांसपेशियों के लिए अच्छे होते हैं । स्वादिष्ट व्यंजन बनाने के लिए सिरिअल, आइसक्रीम या पीनट बटर सैंडविच के साथ कुछ केले मिला लीजिए । केला सुबह के नाश्ते के लिए भी श्रेष्ठ है।

गरम जलवायु में उगनेवाले पीले फलों का दूसरा उदाहरण है पाइनएपल । पाइनएपल बड़े रसीले और मीठे होते हैं। जब इन्हें पीजा, आइसक्रीम या केक आदि अन्य व्यंजनों में मिलाया जाए, तो इनका स्वाद अद्भुत हो जाता है । पाइनऐपल को इधर-उधर ले जाना बहुत आसान नहीं है, क्योंकि ये बड़े होते हैं । इनका छिलका कँटीला होता है और इन्हें छीलना कठिन होता है । चूँकि, पाइनऐपल के छिलके को खाया नहीं जाता, इसलिए खाने से पूर्व इसे धोना आवश्यक नहीं है 

1. केले और पाइनएपल एक-से हैं, क्योंकि— 
(A) दोनों रसभरे होते हैं
(B) इन्हें ले जाना आसान होता है
(C) दोनों गरम जलवायु में उगते हैं
(D) इनके छिलके नरम होते हैं
उत्तर— (C)

2. खाने से पहले पाइनऐपल को धोना आवश्यक नहीं, क्योंकि
(A) यह गंदा नहीं होता 
(B) इसका छिलका उतारना आसान है
(C) हम इसका छिलका नहीं खाते
(D) यह रसीला फल है
उत्तर— (C)

3. निम्नलिखित में से किस कथन में एक राय निहित है ?
(A) पाइनऐपल का स्वाद अनोखा होता है 
(B) केला पीले रंग का एक फल है
(C) पाइनऐपल का छिलका कँटीला होता है 
(D) केले को 'पूर्ण फल' कहा जाता है 
उत्तर— (A)

4. पाइनऐपल .......... फल है। 
(A) छोटा और पीला
(B) बड़ा और कँटीला
(C) बड़ा और हरा
(D) कँटीला और छोटा
उत्तर— (B)

5. इस गद्यांश में 'स्वादिष्ट' शब्द का अर्थ है— 
(A) बेस्वाद 
(B) सुस्वाद 
(C) ठीक-ठाक 
(D) आनंददायक 
उत्तर— (B)

अनुच्छेद- 4

जो पशु दिन में सोते हैं और रात को बाहर निकलते हैं, उन्हें रात्रिचर कहा जाता है।

मरुस्थलों के पशु, जो रात में सक्रिय रहते हैं वे दिन की गरमी से बच पाते हैं और पानी को सुरक्षित रखते हैं । बहुत-से साँप और चूहे उन मरुस्थलीय पशुओं के उदाहरण हैं, जो रात्रि को वरीयता देते हैं ।

उल्लू और बिल्ली की कुछ प्रजातियाँ तो रात के अच्छे शिकारी हैं, क्योंकि रात में उनकी देखने और सुनने की शक्ति बड़ी अच्छी होती है । इसके अतिरिक्त उल्लुओं के पंख अन्य पक्षियों की अपेक्षा अधिक मुलायम होते हैं, इसलिए वे चुपचाप अपने शिकार तक आ पहुँचते हैं, हाँ, बिल्लियों के पंख नहीं होते परंतु उनके पैरों की नर्म गद्दियाँ उन्हें छोटे पशुओं को चुपचाप पकड़ने में मदद करती हैं। बिल्लियाँ रात में अपना मार्ग ढूँढ़ने में अपने गलमुच्छों का उपयोग करती हैं—

1. 'रात्रिचर' पशु
(A) रात में सोते हैं
(B) रात में बाहर निकलते हैं
(C) दिन-रात जागे रहते हैं 
(D) हर समय सोते रहते हैं
उत्तर— (B)

2. कुछ मरुस्थलीय पशु रात को पसंद करते हैं—
(A) गरमी से बचने के लिए
(B) सुरक्षित रहने के लिए
(C) शिकार पर चुपचाप हमले के लिए
(D) दिन में सोने के लिए
उत्तर— (A)

3. उल्लू रात को आसानी से शिकार करते हैं, क्योंकि— 
(A) वे रात में अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं
(B) वे रात में दिखाई नहीं पड़ते
(C) उनमें रात में देखने और सुनने की अच्छी शक्ति होती है 
(D) वे रात में सक्रिय रहते हैं 
उत्तर— (C)

4. बिल्लियों के गलमुच्छ उनकी मदद करते हैं
(A) रात में देखने में 
(B) शिकार पकड़ने में 
(C) चुपचाप चलने में 
(D) अँधेरे में रास्ता ढूँढ़ने में
उत्तर— (D)

5. 'सुरक्षित रखने' का आशय है 
(A) जमा रखना 
(B) बचाकर रखना 
(C) खर्च करना 
(D) बनाए रखना 
उत्तर— (B)

अनुच्छेद- 5

एक बार एक पति-पत्नी अपने एक परिचित से मिलने चले, जिसका घर कुछ दूरी पर था । जाते समय उन्हें याद आया कि रास्ते में उन्हें नदी पार जाने के लिए एक पुराना और असुरक्षित पुल पार करना पड़ेगा ।

पत्नी पति से कहने लगी, "हमें उसपर से बिलकुल भी नहीं जाना चाहिए,” पति ने पत्नी का समर्थन करते हुए कहा, "मान लो, यदि पार करते समय वह टूट जाता है, तो हम तो नदी में डूब जाएँगे । " पत्नी ने कहा, “ और मान लो पार करते समय किसी पुराने फट्टे पर पैर पड़ने से वह टूट जाए तो आपका पैर टूट जाएगा, तो हमारे परिवार हम का खयाल कौन करेगा ?" पति ने कहा, "तुम ठीक कह रही हो, तो भूखे मर जाएँगे ।" ऐसी ही बातें चलती रहीं । दोनों अनेक प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण बातें सोचते और चिंताएँ करते हुए जब पुल के पास पहुँचे तो देखा कि वहाँ तो पहले ही एक नया पुल बन गया है और वे सुरक्षित नदी को पार कर गए।

हमें व्यर्थ चिंता करने और नकारात्मक बातें सोचने की आदत छोड़ देनी चाहिए ।

1. पति-पत्नी घर से निकले
(A) नदी पार करने के लिए
(B) पुराने पुल पर चलने के लिए 
(C) अपने परिचित से मिलने के लिए 
(D) कुछ निजी बातें करने के लिए
उत्तर— (C)

2. थोड़ी देर बाद उन्हें याद आया कि
(A) उनका परिचित कुछ दूरी पर रहता है 
(B) एक नदी को पार करना पड़ेगा
(C) नदी पर एक पुराना पुल है
(D) उन्हें तैरना नहीं आता है
उत्तर— (C)

3. वे सहमत थे कि उन्हें पुल पर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि
(A) वे नीचे गिर जाएँगे
(B) पुल टूटकर गिर सकता है
(C) परिचित घर पर नहीं हो सकता 
(D) वहाँ अँधेरा हो चुका था
उत्तर— (A)

4. पुल के पास पहुँचकर उन्होंने देखा—
(A) पुल गिर चुका था
(B) एक नया पुल बनाया जा चुका था
(C) उनका परिचित उनके स्वागत के लिए आया हुआ था
(D) नदी में पानी बहुत कम था
उत्तर— (B)

5. 'दुर्भाग्य' का अर्थ है
(A) बुरा भाग्य
(B) डर
(C) चिंता
(D) सुरक्षा 
उत्तर— (A)

अनुच्छेद- 6

प्राचीनकाल में मनुष्य के पास पक्षियों को मारने के लिए धनुष-बाण भी नहीं होते थे। इसलिए वह उनके झुंड पर तीखे पत्थरों से निशाना लगाता था या वह पक्षियों को दानों से आकर्षित करता और उनके ऊपर जाल डाल देता था । कभी-कभी वह मुट्ठी भर दाने जमीन पर फेंक देता और कुछ खूँटे गाड़ देता जिन पर पेड़ों से इकट्ठा की हुई गोंद लगी होती थी। फिर वह इंतजार करता था कि पेड़ों से पक्षी उतरकर नीचे आएँ और उन खूँटों से चिपक जाएँ। यह पक्षियों को फाँसने का बड़ा क्रूर तरीका था।

1. प्राचीनकाल का मनुष्य पक्षियों को मारने के लिए किसका उपयोग नहीं करता था ?
(A) धनुष-बाण का 
(B) बीज और वृक्षों का 
(C) चिपकनेवाली खूँटियों का 
(D) तीखे पत्थरों का
उत्तर(A)

2. वे पक्षियों को आकर्षित करने के लिए उन्हें दिखाते थे—
(A) गोंद 
(B) बीज (दाना)
(C) जाल
(D) पत्थर
उत्तर(B)

3. गोंद इकट्ठा की जाती थी
(A) लोगों से
(B) पौधों से
(C) पेड़ों से
(D) पशुओं से
उत्तर(C)

4. पक्षियों को फँसाने का सबसे क्रूर तरीका था
(A) उन्हें पत्थर से मारना
(B) उनके ऊपर जाल डाल देना
(C) मारने के लिए उन्हें दाने दिखाना
(D) उन्हें गोंद लगी खूँटों से चिपकाना 
उत्तर(D)

5. 'प्राचीन' शब्द का विपरीतार्थ है
(A) आधुनिक
(B) आजकल 
(C) हाल का
(D) अभी-अभी
उत्तर(A)

अनुच्छेद- 7

रवि की मामी ने जब उसके लिए सेब के आकार का मिट्टी का गुल्लक खरीदा तो वह बहुत रोमांचित था । इसमें सिक्के अंदर डालने के लिए एक छेद था। रवि ने अपने पिताजी को कहा, “अब मैं पैसे बचाऊँगा और अपने जन्मदिन के लिए एक क्रिकेट-बैट खरीदूँगा।”

रवि ने पैसे बचाना शुरू कर दिया । उसने अपनी दीवाली की खरीदारी से पैसे बचाए और गुल्लक में डाल दिए। उसने अपना जेब खर्च का भी सावधानी से प्रयोग किया और इससे भी कुछ बचत की। अब उसके जन्मदिन के दो ही दिन शेष थे। रवि उदास था कि उसने क्रिकेट बैट खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचाया । जन्मदिन से एक दिन पूर्व उसको पिताजी ने कहा, “अपनी माँ को बुलाओ, हम गुल्लक खोलेंगे । जब उन्होंने गुल्लक खोली तो देखा कि रेजगारी के बीच एक सौ रुपए का नोट भी था। रवि अपने पिताजी से लिपट गया और उन्हें धन्यवाद देकर बोला, “अब मैं समझा कि आपने माँ को बुलाने के लिए क्यों कहा”, खुशी-खुशी वे लोग क्रिकेट-बैट खरीदने चल पड़े।

1. रवि की मामी ने उसे दिया था— 
(A) उपहार 
(B) सेब
(C) गुल्लक
(D) सौ रुपए
उत्तर(C)

2. अपने जन्मदिन पर रवि खरीदना चाहता था— 
(A) फुटबॉल 
(B) गुल्लक 
(C) क्रिकेट-बैट 
(D) कमीज 
उत्तर(C)

3. जन्मदिन से दो दिन पहले रवि उदास था, क्योंकि
(A) उसके पास पैसा नहीं था
(B) उसके पिता ने उसे डाँटा था
(C) वह क्रिकेट बैट खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे जमा नहीं कर पाया
(D) उसका गुल्लक खो गया
उत्तर(C)

4. गुल्लक में एक सौ रुपए का नोट किसने डाला ?
(A) रवि ने
(B) रवि के पिता ने
(C) रवि की मामी ने
(D) रवि की माँ ने
उत्तर(B)

5. 'रोमांचित' का अर्थ है—
(A) संतुष्ट
(B) बहुत खुश 
(C) प्रसन्न
(D) आभारी
उत्तर(B)

अभ्यास - A

एक बार डिम्पी बीमार हो गई । उसके सिर में दर्द था, उसकी नाक बह रही थी। उसकी माँ उसे डॉक्टर को दिखाने ले गई जिसने उसको कुछ दवाइयाँ दी।

दवाई लेते ही उसके मुँह से 'ऊह' की आवाज निकली । उसको अचानक एक छींक आई और उसने देखा कि उसके हाथ पर कोई गंदा-सा पदार्थ आ पड़ा है।

उसने पूछा, “तुम कौन हो ?” उस गंदे पदार्थ ने कहा, "हम बीमारी फैलानेवाले बैक्टीरिया हैं, हम हजारों साथियों के साथ तुम्हारे पेट में थे । तुम्हारे दवाई लेने से मेरे हजारों साथी तो समाप्त हो गए किंतु मैं तुम्हारी नाक में सुरक्षित रह गया और छींक के साथ तुम्हारे हाथ पर आ गिरा हूँ ।'

"ओह! तुम्हीं मेरी बीमारी के कारण हो, तो बताओ कि तुम मेरे पेट में कैसे पहुँचे?” डिम्पी ने पूछा। “तुमने सड़क के किनारे जो खाना खाया था, उसी के द्वारा मैं अपने साथियों के साथ तुम्हारे पेट तक पहुँचा। तुम नहीं जानती हम यहाँ-वहाँ सभी जगह रहते हैं । यदि तुम खाने के मामले में सावधानी बरतती तो कुछ भी नहीं होता ।" बैक्टीरिया ने कहा ।

1. डिम्पी को डॉक्टर के पास ले जाया गया, क्योंकि
(A) वह उसे जानती थी 
(B) वह उससे मिलना चाहती थी 
(C) वह बीमार थी 
(D) वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी
उत्तर(C)

2. उसे डॉक्टर के पास कौन ले गया ? 
(A) उसकी माँ 
(B) उसके पिता 
(C) उसके मित्र 
(D) वह स्वयं गई
उत्तर(A)

3. छींक आने के बाद वह किससे बातें कर रही थी ? 
(A) डॉक्टर से 
(B) अपनी माँ से 
(C) बैक्टीरिया से 
(D) अपनी सहेली से
उत्तर(C)

4. उसके पेट में बैक्टीरिया कैसे पहुँचा ?
(A) दवाओं से 
(B) पानी से
(C) गंदे हाथों से 
(D) सड़क किनारे के भोजन से
उत्तर(D)

5. उसे कुछ नहीं होता, यदि   
(A) उसकी नाक नहीं बह रही होती 
(B) वह अपनी माँ का कहना मानती 
(C) वह खाने में सावधानी बरतती 
(D) वह बैक्टीरिया को जानती होती
उत्तर(C)

अभ्यास - B

हरा रंग सुंदर होता है। घास, जिसपर हम टहलते हैं और पेड़ों के पत्ते जिनको हम प्रकृति में देखते हैं, प्रायः हरे रंग के ही होते हैं, बहुतसे पौधे भी हरे रंग के ही दिखाई देते हैं ।

क्या आप जानते हैं कि आप नीले और पीले रंग का मिश्रण करके हरा रंग बना सकते हैं ? चूँकि आप दो मुख्य रंगों का मिश्रण करके हरा रंग बना सकते हैं, इसलिए इसे गौण रंग कहा जाता है । पृथ्वी को हानि न पहुँचानेवाले पदार्थों के निर्माण का वर्णन करने के लिए भी हरा नाम का प्रयोग किया जाता है। हरे उत्पाद प्रायः पुनः उपयोग में लाई जानेवाली सामग्री से बने होते हैं या उनसे, जिन्हें कूड़े के रूप में फेंकना सुरक्षित होता है । हरा जीवन का अर्थ है पर्यावरण के अनुकूल जीवन-शैली अपनाना ।

1. अनुच्छेद के अनुसार 'हरा' है
(A) एक तेज रंग
(B) एक गौण रंग
(C) एक मुख्य रंग 
(D) एक पादप 
उत्तर(B)

2. किन रंगों को मिलाने से हरा रंग बनता है ? 
(A) नीला और हरा 
(B) पीला और नारंगी 
(C) पीला और नीला 
(D) नीला और बैंगनी
उत्तर(C)

3. 'हरा जीवन' से तात्पर्य है
(A) हरे कपड़े पहनना
(B) घर को हरे रंग में रँगना
(C) पेड़ों को लगाना
(D) पर्यावरण के अनुकूल जीवन-शैली
उत्तर(D)

4. 'हरे उत्पाद' हैं—
(A) खतरनाक
(B) पृथ्वी को बचानेवाले
(C) सरलता से उपलब्ध
(D) महँगे
उत्तर(B)

5. 'मुख्य' शब्द का विपरीतार्थ है
(A) उच्च
(B) गौण
(C) मध्य
(D) आधारभूत
उत्तर(B)

TYPE - II

निर्देश : प्रत्येक अनुच्छेद को सावधानी से पढ़िए और उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

अनुच्छेद- 1

मनुष्य इसलिए श्रेष्ठ है, क्योंकि उसमें स्वयं को बदलने की शक्ति है । गधे में यह ताकत नहीं है। बैल एक हजार साल पहले भी गाड़ी में जुतता था, आज भी उसी में जुतता है। गधा पहले भी भार ढोता था, आज भी भार ढोता है। इन प्राणियों में न तो कोई परिवर्तन हुआ, न ही ये परिवर्तन के लिए प्रयत्नशील हुए और न किसी ने इनके लिए आवाज उठाई, परंतु मनुष्य हर दिन, हर पल परिवर्तन के लिए बेचैन है । वह अपनी सभ्यता को तो बदल ही रहा है, सर्जरी के सहारे अपने रंग-रूप को भी बदल रहा है। लेकिन, वास्तविक बदलाव तब होगा जब वह भीतर से बदलेगा। वह उसी तरह से जी सकेगा जैसा कि वह जीना चाहता है । 

1. मानव पशु से क्यों श्रेष्ठ है ?
उत्तर मानव में स्वयं को बदलने की शक्ति है, पशु में स्वयं को बदलने की शक्ति नहीं है, अतः मानव पशु से श्रेष्ठ है। 

2. गधे और बैल प्रगति क्यों नहीं कर पाए ?
उत्तर गधे और बैल कभी परिवर्तन के लिए प्रयत्नशील नहीं हुए । इन जानवरों के परिवर्तन के लिए कभी किसी ने आवाज नहीं उठाई। इस कारण गधे और बैल प्रगति नहीं कर पाए।

3. भीतरी बदलाव का क्या अर्थ है ?
उत्तर भीतरी बदलाव का अर्थ है मानसिक विचारों का परिवर्तन । 

4. ‘सभ्यता' का विलोम शब्द लिखिए ? 
उत्तर असभ्यता।

5. मनुष्य हर दिन, हर पल क्यों बेचैन है ?
उत्तर— मनुष्य हर दिन, हर पल परिवर्तन के लिए बेचैन है ।

अनुच्छेद- 2

चींटियाँ सभी कीटों में बहुत रोचक हैं, क्योंकि वे अनेक प्रकार से मनुष्य के बहुत समान हैं, वे परिवार में रहती हैं, अपना स्वयं की बाँबी बनाती हैं तथा उनके राजा और रानी भी होते हैं । प्रत्येक चींटी को करने के लिए अपना एक कार्य होता है और यह अपना कार्य भली-भाँति करती है। नन्ही चींटियाँ जो अभी कोकून से बाहर निकली हैं, प्रायः धाय होती हैं । जब वे बड़ी और कठोर त्वचा से युक्त हो जाती हैं, तब वे अपनी बाँबी छोड़ने तथा दूसरे कार्यों को करने के लिए तत्पर रहती हैं । कुछ चींटियाँ भोजन की खोज करती हैं। कीट की अन्य लगभग सभी प्रजातियाँ भोजन की तलाश में रहती हैं, परंतु यह हमेशा केवल उनके अपने लिए होता है। जबकि चींटियाँ अपनी बाँबी के बारे में सोचती हैं, वे रानी और अन्य कर्मियों के साथ-ही-साथ अपने लिए भी भोजन लाती हैं।

1. चींटियाँ किस प्रकार मनुष्य के समान हैं ?
उत्तर चीटियाँ मनुष्य के समान होती हैं, क्योंकि वे अपने रहने के लिए बाँबी बनाती हैं, वे परिवार में रहती हैं तथा उनके मुखिया के रूप में राजा और रानी भी होते हैं ।

2. नन्ही चींटियाँ कौन-सा कार्य करती हैं ?
उत्तर नन्हीं चींटियाँ प्रायः धाय का काम करती हैं ।

3. नन्ही चींटियाँ घर को कब छोड़ती हैं ?
उत्तर नन्ही चींटियाँ जब बड़ी हो जाती हैं और उनकी त्वचा कठोर हो जाती है, तो वे बाँबी छोड़ देती हैं।

4. गद्यांश में कौन शब्द 'आवरण जो किसी को सुरक्षित और गरम रखता है' के अर्थ को प्रकट करता है ? 
उत्तर कोकून ।

5. चींटियाँ कैसे अन्य लगभग सभी कीट की प्रजातियों से भिन्न हैं ? 
उत्तर— चींटियाँ अन्य कीटों से भिन्न होती हैं, क्योंकि वे भोजन की तलाश पूरे परिवार के लिए करती हैं, वे रानी और अन्य कर्मियों के लिए भी भोजन लाती हैं ।

अनुच्छेद- 3

समाचार-पत्र का कागज, लिखनेवाला कागज, छपाईवाला कागज, टाइप करने का कागज, स्याही चूसनेवाला कागज, कार्बन कागज, भूरा कागज, दीवाल पर चिपकानेवाला कागज, टिकट का कागज, इस बात को कौन अस्वीकार कर सकता है कि मनुष्य के दैनिक जीवन में कागज बहुत लाभदायक वस्तुओं में से एक नहीं है । फिर भी, कागज का आविष्कार मनुष्य ने नहीं किया । इसके वास्तविक आविष्कर्ता ततैये (बर्रे) हैं, जो ताड़ के खंभों तथा वृक्षों के तनों से लकड़ी की छोटी-छोटी कतरनें नत्थी करती हैं और उन्हें चबाकर एक बारीक गुद्दा बना लेती हैं, जिससे वे अपने छत्ते की भूरी कागज की दीवारें बनाती हैं। मनुष्यों में सबसे प्रथम कागज बनानेवाले कौन थे ? हजारों वर्ष पूर्व मिस्र के लोगों ने नील नदी के निकट दलदल में उगनेवाले नरकट के पौधे के रस से एक प्रकार का कागज बनाया था। नरकट का कागज लंबी-लंबी परतों में बनाया गया था और इसपर लिखी हुई पुस्तकें लपेटी जाती थीं, न कि पृष्ठों में काटी जाती थीं। एक प्राचीन पुस्तक जो कि लंदन के 'ब्रिटिश संग्रहालय' में देखी जा सकती है, 120 फुट लंबी है।

1. दैनिक जीवन में काम आनेवाले तीन प्रकार के कागजों के नाम बताओ ?
उत्तर— समाचार-पत्र का कागज, लिखनेवाला कागज और टाइप करनेवाला कागज हमारे दैनिक जीवन में काम आनेवाले तीन प्रकार के कागज हैं ।

2. कागज का आविष्कार किसने किया ?
उत्तर कागज का आविष्कार ततैये (बर्रे) ने किया।

3. मनुष्यों में सर्वप्रथम कागज बनानेवाले कौन थे ? 
उत्तर मनुष्यों में कागज बनानेवाले सर्वप्रथम मिस्र के लोग थे। मिस्र के लोगों ने नील नदी के दलदल में उगनेवाले नरकट के पौधों से कागज बनाया था ।

4. ततैये अपनी छतों की दीवारें कैसे बनाती हैं ?
उत्तर ततैये (बर्रे) ताड़ के वृक्षों के तनों से छोटी-छोटी कतरनें काट लेती हैं। इन कतरनों को चबाकर गुद्दा बना लेती हैं । फिर गुद्दा से भूरी कागज की दीवार बनाती हैं

5. वह पुस्तक जो 120 फुट लंबी है, कहाँ देखी जा सकती है ?
उत्तर— लंदन के 'ब्रिटिश संग्रहालय' में 120 फुट लंबी पुस्तक देखी जा सकती है।

अभ्यास

निर्देश : नीचे लिखे गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनपर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

1. स्वस्थ रहने के लिए हमें हरी सब्जियाँ और ताजे फल खाना चाहिए । गाजर, मटर, बंदगोभी और पालक आदि का सेवन हमें रोगों से दूर रखता है, जबकि सेब, पपीता, संतरा, अनार और आम आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं। शाकाहारी भोजन मांसाहारी भोजन से अच्छा माना जाता है । हमें तली हुई वस्तुएँ खाने से बचना चाहिए । समोसे, बर्गर, पिज्जा, पकौड़े आदि पाचन-शक्ति को कमजोर करते हैं। चॉकलेट और टॉफी दाँतों के शत्रु हैं । स्वस्थ रहने के लिए खानपान पर ध्यान देना आवश्यक है ।

प्रश्न :
1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
2. स्वस्थ रहने के लिए हमें क्या-क्या खाना चाहिए ?
3. फल खाने से हमें क्या लाभ है ?
4. पाचन शक्ति को कौन-सी चीजें कमजोर करती हैं ?
5. कौन-सी वस्तुएँ दाँतों के शत्रु हैं ?

2. “हमारी धरती ने बापू को जन्म दिया । किन्तु, इस धरती को यह सौभाग्य न हुआ कि जो महापुरुष देश की पराधीनता की बेड़ियाँ काटे और देश की प्रतिष्ठा को संसार में ऊँचा ले जाए, वह अपने द्वारा प्रतिष्ठापित स्वतन्त्र राष्ट्र में जीवित रहकर विश्वशांति और विश्वबन्धुत्व का अपना स्वप्न पूरा कर सके । महात्माजी को इससे अच्छी मृत्यु और क्या मिल सकती थी कि मानवता की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राण दिए ?”

प्रश्न :
1. महात्माजी ने हमारे लिए क्या किया ?
2. उनकी मृत्यु कैसे हुई ?
3. क्या महात्माजी विश्वशांति और विश्वबन्धुत्व का अपना सपना पूरा कर सके ?
4. रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए ।

TYPE - III

निर्देश : प्रत्येक अनुच्छेद में आए काले शब्दों का प्रयोग करके अलग से नए वाक्य बनाइए :

अनुच्छेद- 1

एक छोटी लड़की ऊँचे पहाड़ पर चढ़ रही थी । उसकी पीठ पर एक बच्चा सवार था । महात्मा गाँधी ने उस लड़की को कहा, 'प्रिय बेटी ! ला अपना भारी बोझ मुझे दे दे'। उस ग्रामीण लड़की ने कहा, 'कहाँ है बोझ ? यह लड़का तो मेरा भाई है, जिसे मैंने अपने कंधे पर बिठाया है ।' भोली लड़की ने उत्तर दिया और चुपचाप अपने मार्ग पर चल दी। 

पहाड़ — हिमालय पहाड़ की चोटियाँ अकसर बर्फ से ढकी रहती हैं । 
सवार  आजकल मोटरसाइकिल पर सवार होकर अधिकतर लोग दफ्तर जाते हैं ।
बोझ — मेरे वृद्ध पितामह अब अधिक बोझ नहीं उठा पाते हैं। 
ग्रामीण  अब ग्रामीण बालक और बालिकाएँ भी मन लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं ।
चुपचाप — चुपचाप बैठकर पढ़ो।

अनुच्छेद- 2

हँसी का ठहाका खुशी का सूचक है । जो मनुष्य हँसता है, प्रसन्नता फैलाता है और मित्र बनाता है । उसके लिए हँसी एक बढ़िया शक्तिवर्धक दवा हो सकती है । जो मनुष्य हँस नहीं सकता, अपने मित्रों को आकर्षित करने में असफल रहता है, वह अपना स्वास्थ्य खो देता है तथा स्वयं को जीवन के सभी तरह के आनंद से वंचित कर लेता है। 

हँसता — मेरा छोटा भाई सदा हँसता रहता है ।
प्रसन्नता  अपने पिताजी से बहुत दिनों बाद मिलकर दीपक को काफी प्रसन्नता हुई ।
आकर्षित — सुंदर चित्र सभी लोगों को आकर्षित करता है । 
स्वास्थ्य  दूध पीना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है । 
आनंद — जीवन में आनंद तभी है जब शरीर स्वस्थ हो ।

अनुच्छेद- 3

मनुष्य के विकास में शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है । शिक्षा द्वारा मनुष्य का मानसिक एवं बौद्धिक विकास होता है । शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है।

शिक्षा — अच्छी शिक्षा देश के विकास में सहायक होती है । 
महत्त्वपूर्ण — विद्यार्थी जीवन में खेलकूद का महत्त्वपूर्ण स्थान है । 
मानसिक — मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति का इलाज संभव है । 
विकास  हमारा देश भारत सभी क्षेत्रों में विकास कर रहा है । 
पशु — कृषि विकास में पशु सहायक होते हैं ।

अनुच्छेद- 4

क्या आप फुटबॉल टीम या हॉकी टीम का समर्थन करते हैं ? शायद आप अपनी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की सफलता के बारे में जानकारी रखते हैं। आप जानते हैं कि हर खेल का अपना महत्त्व और अनुशासन होता है। किसी भी खेल का अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए आपको निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है। खेल की मूलभूत कार्यकुशलता को जानना बहुत आवश्यक होता है ।

समर्थन — मैं पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद का भी समर्थन करता हूँ। 
सफलता  कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त होती है ।
अनुशासन — मनुष्य के जीवन में अनुशासन का बड़ा महत्त्व है। 
निरंतर — मेरा छोटा भाई लंबी कूद का निरंतर अभ्यास करता रहता है।
आवश्यक  स्वस्थ रहने के लिए हरी सब्जियों का सेवन करना आवश्यक है।

अभ्यास

निर्देश : प्रत्येक अनुच्छेद में आए काले शब्दों का प्रयोग करके नए वाक्य बनाइए ।

1. मनुष्य अपनी सुख-सुविधाओं के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग करता रहा है, जिसके कारण वातावरण प्रदूषित हो चुका है । इस प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ फैल रही हैं। अतः मनुष्य को प्रकृति की महत्ता और उसके संरक्षण पर पुनः व्यापक विचार करना होगा ।

प्राकृतिक  
दुरुपयोग  
प्रदूषित     
मानसिक  
महत्ता       

2. “संयुक्त राज्य अमेरिका ने एटम बम बनाया और द्वितीय महायुद्ध में जापान पर उसका प्रयोग किया। जापान ध्वस्त हो गया और युद्ध के लिए तत्काल वह फिर उठ न सका । इसका यह निष्कर्ष निकाला गया कि एटम बम या ऐसे ही शक्तिशाली बमों के आतंक से युद्ध रोका जा सकता है।”

एटम बम      
ध्वस्त           
निष्कर्ष        
शक्तिशाली  

***
🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1