इस अध्याय में हम विकास के विभिन्न लक्ष्यों, आय और अन्य मापदंडों (जैसे प्रति व्यक्ति आय), विश्व बैंक और यूएनडीपी (UNDP) द्वारा उपयोग किए जाने वाले मानव विकास सूचकांक (HDI), और विकास की धारणीयता (सतत विकास) के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
विकास
अर्थव्यवस्था :-
अर्थव्यवस्था उस प्रणाली को कहते हैं जिसमें लोग अपनी आजीविका के लिए उत्पादन, वितरण और उपभोग जैसी आर्थिक क्रियाएँ करते हैं।
विकास या प्रगति क्या है?
विकास / प्रगति का अर्थ है जीवन की गुणवत्ता में सुधार। यह केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की आकांक्षाएँ, इच्छाएँ, अवसर और जीवन-स्तर से जुड़ा है। हर व्यक्ति, समुदाय और देश के लिए विकास का अर्थ अलग हो सकता है।
विकास के लक्ष्य भिन्न-भिन्न एवं परस्पर विरोधी कैसे होते हैं?
विकास की धारणा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।
🔸 भिन्न-भिन्न लक्ष्य :- हर व्यक्ति, समूह या वर्ग के विकास के लक्ष्य अलग होते हैं। लोगों की आवश्यकताएँ, परिस्थितियाँ और प्राथमिकताएँ अलग होने के कारण विकास की उनकी परिभाषा भी अलग होती है।
🔸 परस्पर विरोधी लक्ष्य :- कई बार एक व्यक्ति या समूह का विकास दूसरे के लिए हानिकारक हो सकता है। यानी जो एक के लिए लाभदायक है, वही दूसरे के लिए नुकसानदेह बन सकता है।
उदाहरण :- नदी पर बाँध बनाना बिजली उत्पादन और सिंचाई के लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन इससे वहाँ रहने वाले किसानों और लोगों का विस्थापन हो सकता है, जो उनके लिए समस्या बन जाती है।
आय के अतिरिक्त बेहतर जीवन के लिए अन्य आवश्यक तत्व :-
बेहतर जीवन के लिए केवल आय ही पर्याप्त नहीं होती। आय के अलावा परिवार का सहयोग, स्थायी रोज़गार, मित्रता, सुरक्षा की भावना, समानता तथा शांतिपूर्ण वातावरण भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं।
🔸 कारण :- इसका कारण यह है कि मुद्रा से केवल भौतिक वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं, लेकिन सम्मान, प्रेम, सुरक्षा और मानसिक संतोष जैसी चीज़ें धन से प्राप्त नहीं की जा सकतीं।
समझने के लिए एक उदाहरण: नौकरी का चुनाव :-
जब कोई व्यक्ति नौकरी चुनता है, तो वह केवल वेतन नहीं देखता, बल्कि अन्य कारकों पर भी विचार करता है:
- आय: कितना वेतन मिलेगा?
- परिवार: क्या परिवार के लिए स्कूल, अस्पताल जैसी सुविधाएँ हैं?
- माहौल: काम करने का माहौल कैसा है? (तनाव तो नहीं?)
- सीखना: आगे बढ़ने के कितने अवसर हैं?
देशों में विकास की तुलना कैसे की जाती है?
विकास का अर्थ अलग-अलग लोगों और देशों के लिए भिन्न हो सकता है। इसलिए देशों की तुलना करने के लिए किसी सामान्य मापदण्ड की आवश्यकता होती है।
सबसे सामान्य मापदण्ड – आय (Income) देशों की तुलना करने के लिए सामान्यतः आय को सबसे महत्त्वपूर्ण मापदण्ड माना जाता है।
जिस देश की आय अधिक होती है, उसे कम आय वाले देश की तुलना में अधिक विकसित माना जाता है। इसका कारण यह है कि अधिक आय होने पर लोग भोजन, कपड़े, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकते हैं।
एक देश की आय क्या होती है?
एक देश की आय उसके सभी नागरिकों की आय का योग होती है, जिसे देश की कुल आय कहा जाता है।
कुल आय बनाम औसत आय :-
देशों के बीच तुलना के लिए ‘कुल आय’ एक सही माप नहीं है क्योंकि हर देश की जनसंख्या अलग-अलग होती है।
🔸 समस्या: यदि एक देश की जनसंख्या बहुत अधिक है, तो उसकी कुल आय ज्यादा हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वहां का हर व्यक्ति समृद्ध है।
🔸 समाधान: इसलिए हम ‘औसत आय’ का उपयोग करते हैं।
औसत आय या प्रति व्यक्ति आय :-
जब देश की कुल आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है, तो उसे औसत आय या प्रति व्यक्ति आय कहते हैं। यह बताती है कि औसतन एक व्यक्ति कितना कमा रहा है।
प्रति व्यक्ति आय = देश की कुल आय ÷ कुल जनसंख्या
देशों के मध्य विकास के अन्य मापदण्ड :-
देशों के मध्य विकास को मापने के लिए केवल औसत आय (प्रति व्यक्ति आय) ही पर्याप्त नहीं होती। इसके साथ-साथ सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, जन्म एवं मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा तथा स्वच्छ एवं प्रदूषण-मुक्त वातावरण जैसे मानकों का भी उपयोग किया जाता है।
👉 उच्च आय होने का अर्थ हमेशा बेहतर विकास नहीं होता मानव कल्याण ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है।
प्रति व्यक्ति आय के आधार पर देशों का वर्गीकरण :-
विश्व बैंक अपनी ‘विश्व विकास रिपोर्ट’ में देशों को उनकी प्रति व्यक्ति आय के आधार पर वर्गीकृत करता है (2023 के आंकड़ों के अनुसार):
- वे देश जिनकी 2023 में प्रतिव्यक्ति आय US $63,400 प्रति वर्ष या उससे अधिक है, उसे समृद्ध अथवा उच्च आय देश कहा गया है।
- वे देश जिनकी प्रतिव्यक्ति आय लगभग US $2400 प्रति वर्ष या उससे कम है, उन्हें निम्न आय वाला देश कहा गया है।
- भारत मध्य आय वर्ग के देशों में आता है क्योंकि उसकी प्रतिव्यक्ति आय 2023 में लगभग US $10,030 प्रति वर्ष थी।
विकास के महत्वपूर्ण संकेतक :-
विभिन्न देशों के विकास को मापने और तुलना करने के लिए कई संकेतकों का उपयोग किया जाता है।
🔹 1. प्रति व्यक्ति आय – सबसे प्रमुख संकेतक :-
प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या
यह बताती है कि औसतन एक व्यक्ति की आय कितनी है। कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में देशों की तुलना का मुख्य आधार यही है।
🔹 2. सकल घरेलू उत्पाद :-
जीडीपी किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाती है।
उच्च जीडीपी मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत हो सकती है। लेकिन यह लोगों के जीवन स्तर या खुशहाली को पूरी तरह नहीं दर्शाती।
🔹 3. सकल राष्ट्रीय आय :-
सकल राष्ट्रीय आय में देश के निवासियों द्वारा अर्जित कुल आय शामिल होती है, चाहे वह आय देश के भीतर से हो या विदेशों से।
यह देश की आय का व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है।
🔹 4. शिशु मृत्यु दर :-
शिशु मृत्यु दर से तात्पर्य किसी वर्ष में पैदा हुए प्रत्येक 1,000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मर जाने वाले बच्चों की संख्या से है।
🔹 5. साक्षरता दर :-
साक्षरता दर 7 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या में पढ़ने-लिखने में सक्षम लोगों का प्रतिशत दर्शाती है।
🔹 6. निवल उपस्थिति अनुपात :-
14 तथा 15 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों का उस आयु-वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत।
🔹 7. अन्य सामाजिक संकेतक :-
केवल आय से विकास का सही आकलन नहीं होता, इसलिए अन्य संकेतक भी महत्वपूर्ण हैं:
- स्वास्थ्य (Health) – जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर
- शिक्षा (Education) – साक्षरता दर, स्कूली शिक्षा
- सार्वजनिक सुविधाएँ – अस्पताल, स्कूल, स्वच्छ पानी
- समानता और सुरक्षा
विकसित और विकासशील देशों के बीच अंतर :-
🔸 विकसित देश की मुख्य विशेषताएँ :-
- नई एवं उन्नत तकनीक का उपयोग
- विकसित एवं मजबूत उद्योग
- उच्च स्तरीय रहन-सहन
- उच्च प्रति व्यक्ति आय
- साक्षरता दर उच्च
- स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर
- जन्मदर एवं मृत्यु दर पर नियंत्रण / जीवन प्रत्याशा अधिक
🔸 विकासशील देश की मुख्य विशेषताएँ :-
- औद्योगिक रूप से अपेक्षाकृत पिछड़े
- निम्न प्रति व्यक्ति आय
- साक्षरता दर कम
- सामान्य / निम्न स्तरीय रहन-सहन
- स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
- मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक / जीवन प्रत्याशा कम
पोषण का माप: BMI (बॉडी मास इंडेक्स) :-
BMI (बॉडी मास इंडेक्स) एक वैज्ञानिक माप है जिसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि व्यक्ति उचित रूप से पोषित है या नहीं।
🔸 BMI निकालने का सूत्र :-
BMI = वजन (किलोग्राम में) ÷ ऊँचाई² (मीटर में)
🔸 BMI से क्या पता चलता है?
- BMI कम → व्यक्ति अल्प-पोषित (Underweight)
- BMI सामान्य → उचित पोषण (Normal)
- BMI अधिक → अधिक-पोषित (Overweight)
🔸 सरल भाषा में समझे :-
- यदि BMI बहुत कम है → शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा
- यदि BMI बहुत अधिक है → अधिक वजन / स्वास्थ्य जोखिम
मानव विकास सूचकांक :-
“मानव विकास सूचकांक एक समग्र मापदण्ड है, जिसके आधार पर किसी देश के विकास का आकलन किया जाता है। यह केवल आय पर निर्भर नहीं करता, बल्कि लोगों के शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य स्थिति तथा प्रति व्यक्ति आय जैसे महत्त्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखता है।
मानव विकास सूचाकांक में भारत का स्थान :-
2025 मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर) में भारत मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में 193 देशों में 130वें स्थान पर है।
विकास की धारणीयता :-
विकास की धारणीयता का अर्थ है ऐसा विकास करना जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे और वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भावी पीढ़ियों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।
विकास की धारणीयता की मुख्य विशेषताएँ :-
- संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग
- नवीकरणीय संसाधनों का अधिकतम प्रयोग
- वैकल्पिक संसाधनों की खोज को प्रोत्साहन
- संसाधनों के पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण पर ज़ोर