क्रियाविशेषण संस्कृत व्याकरण: परिभाषा, भेद और उदाहरण
क्रियाविशेषण
जिस विशेषण से क्रिया के गुण या अवस्था का बोध हो, उसे क्रियाविशेषण कहते हैं। क्रियाविशेषण में द्वितीया विभक्ति होती है तथा वह एकवचनान्त नपुंसकलिंग होता है। यथा—
स मधुरं वदति — वह मीठा बोलता है ।
कच्छपः मन्दं-मन्दं चलति — कछुआ धीरे-धीरे चलता है।
छात्रः द्रुतं पठति — छात्र तेजी से पढ़ता है।
साधु कथयति — साधु कहता है।
कालः शीघ्रं गच्छति — समय जल्दी चला जाता है।
अव्ययीभाव और बहुव्रीहि समास से निष्पन्न कतिपय विशेषणों का प्रयोग क्रियाविशेषण के समान होता है। यथा—
सविनयं निवेदयति—विनयपूर्वक निवेदन करता है।
निर्भयं गच्छति—निडर होकर जाता है।
सहासं वदति—हँसते हुए बोलता है ।
यथाशक्ति धनं ददाति — शक्तिभर धन देता है।
नीचे कुछ विभिन्न क्रियाविशेषण-पद दिए जा रहे हैं।
सुखेन वसति — आराम से रहता है।
वेगेन धावति—तेजी से दौड़ता है।
समूलं अपतत् — जड़ से गिर पड़ा।
स बद्धाञ्जलिः अवदत् — वह हाथ जोड़कर बोला।
श्यामः हसन् गच्छति — श्याम हँसते हुए जाता है।
कपोताः एकचित्तीभूय उत्पतिताः — कबूतर एकमत होकर उड़ गए।
प्रातः भ्रमेत् — सुबह में टहलना चाहिए।
मृषा न वदेत् — झूठ नहीं बोलना चाहिए।
स नूनं आगमिष्यति — वह जरूर आएगा।
सुरेशः गृहं गत्वा पठति — सुरेश घर जाकर पढ़ता है।
नक्तम् ओदनं न खादेत् — रात में भात नहीं खाना चाहिए ।
स पठितुं शक्नोति — वह पढ़ सकता है।
नदीम् उभयतः वृक्षाः सन्ति — नदी के दोनों ओर पेड़ हैं।
अचिरं फलं दास्यति — शीघ्र फल देगा।
दिनेशः श्वः पठिष्यति — दिनेश कल पढ़ेगा।
अभ्यास
1. क्रियाविशेषण किसे कहते हैं ?
2. निम्नलिखित क्रियाविशेषणों का वाक्यों में प्रयोग करें।
सायम्, पुनः, मृदु, चिरम्, प्रायः, तूष्णीम् (चुपचाप ), ह्यः, एकदा, स्वयम्
3. निम्नलिखित वाक्यों में क्रियाविशेषण पदों को रेखांकित करें।
सहसा किमपि कार्यम् न कुर्यात् । स भूयः आगमिष्यति । शीला पठितुम् गच्छति। प्रदीपः खादित्वा विद्यालयं अगच्छत्। त्वम् इदानीम् किम् करोषि । अशोकः हसन् वदति । रामेण साकं सीता वनं गच्छतिस्म ।
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