क्रिया प्रकरण संस्कृत व्याकरण: धातु, रूप और नियम समझें
क्रिया-प्रकरण
तिङन्त पद
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं । जैसे- भू, गम्, पा, स्था इत्यादि ।
धातुओं में तिङ् विभक्तियाँ लगाकर जो क्रिया- पद बनते हैं, उन्हें तिङन्त पद कहते हैं। जैसे—भवति, गच्छति, पिबतु, तिष्ठेत् आदि । सकर्मक और अकर्मक भेद से क्रिया दो तरह की होती है।
सकर्मक
जिसमें कर्म लगे, अर्थात् जिस क्रिया के व्यापार और फल अलग-अलग रहें, उसे ‘सकर्मक' कहते हैं। जैसे— बालक दूध पीता है- 'बालकः दुग्धं पिबति' - इस वाक्य में 'पिबति' क्रिया का व्यापार 'बालक' में है तथा पीने का फल (पीया जाना) 'दूध' में है । इसलिए पीना यानी 'पा' धातु सकर्मक हुआ।
गमन, भोजन, दर्शन, पठन, पूजन, चिन्तन, ज्ञान, बन्धन, मुक्ति इत्यादि अर्थबोधक धातु सकर्मक कहलाते हैं।
अकर्मक
जिसमें कर्म की अपेक्षा नहीं रहे, अर्थात् क्रिया के व्यापार और फल दोनों एक ही में रहें, उसे अकर्मक कहते हैं। जैसे— 'महेश हँसता है' - 'महेशः हसति' - इस वाक्य में हँसने का काम और हँसना फल दोनों महेश में ही है। इसलिए 'हस्' धातु अकर्मक हुआ।
हर्ष, शोक, लज्जा, भय, रोदन, नर्तन, शयन, जीवन, मरण, जागरण, वृद्धि, क्षय, सत्ता, स्थिति, दीप्ति (चमकना ), खेल इत्यादि अर्थबोधक धातु अकर्मक कहलाते हैं।
ये सभी धातु भवादि, अदादि, जुहोत्यादि, दिवादि, स्वादि, तुदादि, रुधादि, तनादि, क्र्यादि तथा चुरादि, इन दस गुणों में बँटे हुए हैं।
काल
संस्कृत में कालबोधक दस लकार हैं- लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ्, लृट्, लिट्, लुट्, लेट्, लुङ् और लृङ् । यहाँ केवल प्रथम पाँच लकारों का ही उल्लेख किया जा रहा है। प्रत्येक लकार में तीन पुरुष होते हैं- 1. प्रथम पुरुष, 2. मध्यम पुरुष और 3. उत्तम पुरुष। प्रत्येक पुरुष में तीन वचन होते हैं- 1. एकवचन, 2. द्विवचन तथा 3. बहुवचन।
लट्
लट् लकार वर्तमानकाल में होता है। जो समय बीत रहा है, उसे वर्तमानकाल कहते हैं। जैसे – बालक पढ़ता है - बालकः पठति । मैं हँसता हूँ — अहं हसामि ।
लोट्
लोट् लकार आज्ञा, अनुरोध, प्रश्न, आशीर्वाद इत्यादि अनुज्ञा अर्थ में होता है। जैसेतुम पढ़ो - त्वम् पठ। वह घर जाए- -स गृहं गच्छतु। मैं घर जाऊँ – अहम् गृहं गच्छानि ? -
लङ्
लङ् लकार का प्रयोग भूतकाल में होता है। जो समय बीत गया है, उसे भूतकाल कहते हैं। जैसे— रमेश विद्यालय गया- -रमेशः विद्यालयम् अगच्छत् । मैं घर गया – अहम् गृहम् अगच्छम्। तुमने पुस्तक पढ़ी - त्वम् पुस्तकम् अपठः ।
विधिलिङ्
विधिलिङ् का प्रयोग 'चाहिए', 'सकना तथा लोट् लकार (अनुज्ञा) के सभी अर्थों में होता है। जैसे- - उसे सच बोलना चाहिए - स सत्यं वदेत् । मुझे रामायण पढ़नी चाहिए— अहं रामायणं पठेयम् ।
लृट्
लृट् लकार भविष्यत्काल में होता है। जो होनेवाला है, उसे भविष्यत्काल कहते हैं। जैसे- वह घर जाएगा- स गृहं गमिष्यति। मैं वेद पढूँगा – अहम् वेदम् पठिष्यामि । तुम तमाशा देखोगे — त्वम् कौतुकं द्रक्ष्यसि ।
परस्मैपद एवं आत्मनेपद
संस्कृत में कुछ धातुओं में परस्मैपद की, कुछ धातुओं में आत्मनेपद की तथा कुछ धातुओं में दोनों तरह की विभक्तियाँ लगती हैं। इसलिए, वे धातु क्रमशः परस्मैपदी, आत्मनेपदी तथा उभयपदी कहलाते हैं। जैसे—
परस्मैपदी – भवति, पठति, क्रीणाति इत्यादि
आत्मनेपदी – सेवते कुरुते वर्द्धते इत्यादि
उभयपदी – कृ धातु - करोति, कुरुते आदि
नीचे परस्मैपद एवं आत्मनेपद की विभक्तियाँ दी जा रही हैं।

नीचे परस्मैपद विभक्तियों के व्यावहारिक रूप दिए गए हैं।
परस्मैपद 'भू' (होना)
विभक्ति — लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष ति तः अन्ति
मध्यम पुरुष सि थ: थ
उत्तम पुरुष आमि (मि) आवः (वः) आमः (मः)
प्रयोग
प्रथम पुरुष भवति भवतः भवन्ति
मध्यम पुरुष भवसि भवथः भवथ
उत्तम पुरुष भवामि भवावः भवामः
विभक्ति-लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष तु ताम् अन्तु
मध्यम पुरुष अ (हि) तम् त
उत्तम पुरुष आनि आव आम
प्रयोग
प्रथम पुरुष भवतु भवताम् भवन्तु
मध्यम पुरुष भव भवतम् भवत
उत्तम पुरुष भवानि भवाव भवाम
विभक्ति — लङ् (भूतकाल )
प्रथम पुरुष त् ताम् अन्
मध्यम पुरुष अः तम् त
उत्तम पुरुष अम् आव आम
प्रयोग
प्रथम पुरुष अभवत् अभवताम् अभवन्
मध्यम पुरुष अभवः अभवतम् अभवत
उत्तम पुरुष अभवम् अभवाव अभवाम
विभक्ति - विधिलिङ् (चाहिए)
प्रथम पुरुष एत् एताम् एयुः
उत्तम पुरुष एः एतम् एत
मध्यम पुरुष एयम् एव एम
प्रयोग
प्रथम पुरुष भवेत् भवेताम् भवेयुः
मध्यम पुरुष भवेः भवेतम् भवेत
उत्तम पुरुष भवेयम् भवेव भवेम
विभक्ति - लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष स्यति स्यतः स्यन्ति
मध्यम पुरुष स्यसि स्यथः स्यथ
उत्तम पुरुष स्यामि स्यावः स्यामः
प्रयोग
प्रथम पुरुष भविष्यति भविष्यतः भविष्यन्ति
मध्यम पुरुष भविष्यसि भविष्यथः भविष्यथ
उत्तम पुरुष भविष्यामि भविष्यावः भविष्यामः
पठ् (पढ़ना)
लट् (वर्तमानकाल)
प्रथम पुरुष
एकवचन पठति (सः पठति — वह पढ़ता है)
द्विवचन पठतः (तौ पठतः - वे दोनों पढ़ते हैं)
बहुवचन पठन्ति (ते पठन्ति – वे सब पढ़ते हैं)
मध्यम पुरुष
एकवचन पठसि (त्वंः पठसि – तू पढ़ता है)
द्विवचन पठथः (युवाम् पठथः - तुम दोनों पढ़ते हो)
बहुवचन पठथ (यूयम् पठथ - तुमलोग पढ़ते हो)
उत्तम पुरुष
एकवचन पठामि (अहम् पठामि – मैं पढ़ता हूँ)
द्विवचन पठावः (आवाम् पठावः - हम दोनों पढ़ते हैं)
बहुवचन पठामः (वयम् पठामः - हमलोग पढ़ते हैं)
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष
एकवचन पठतु (सः पठतु - वह पढ़े)
द्विवचन पठताम् (तौ पठताम् - वे दोनों पढ़ें)
बहुवचन पठन्तु (ते पठन्तु - वे सब पढ़ें)
मध्यम पुरुष
एकवचन पठ (त्वं पठ— तू पढ़ो )
द्विवचन पठतम् (युवाम् पठतम् — तुम दोनों पढ़ो )
बहुवचन पठत (यूयम् पठत — तुमलोग पढ़ो )
उत्तम पुरुष
एकवचन पठानि (अहम् पठानि—मैं पढूँ)
द्विवचन पठाव (आवाम् पठाव - हम दोनों पढ़ें)
बहुवचन पठाम (वयम् पठाम—हमलोग पढ़ें)
लङ् (भूतकाल )
प्रथम पुरुष
एकवचन अपठत् (स्ः अपठत्—उसने पढ़ा )
द्विवचन अपठताम् (तौ अपठताम् — उन दोनों ने पढ़ा )
बहुवचन अपठन् (ते अपठन् — उन लोगों ने पढ़ा)
मध्यम पुरुष
एकवचन अपठः (त्वम् अपठः - तूने पढ़ा)
द्विवचन अपठतम् (युवाम् अपठतम्—तुम दोनों ने पढ़ा)
बहुवचन अपठत (यूयम् अपठत—तुमलोगों ने पढ़ा)
उत्तम पुरुष
एकवचन अपठम् (अहम् अपठम् — मैंने पढ़ा)
द्विवचन अपठाव (आवाम् अपठाव — हम दोनों ने पढ़ा)
बहुवचन अपठाम (वयम् अपठाम—हमलोगों ने पढ़ा)
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष
एकवचन पठेत् (सः पठेत् — उसे पढ़ना चाहिए, वह पढ़ें)
द्विवचन पठेताम् (तौ पठेताम् — उन दोनों को पढ़ना चाहिए)
बहुवचन पठेयुः (ते पठेयुः - उन लोगों को पढ़ना चाहिए )
मध्यम पुरुष
एकवचन पठेः (त्वं पठेः – तुझे पढ़ना चाहिए )
द्विवचन पठेतम् (युवाम् पठेतम् — तुम दोनों को पढ़ना चाहिए)
बहुवचन पठेत (यूयम् पठेत—तुमलोगों को पढ़ना चाहिए)
उत्तम पुरुष
एकवचन पठेयम् (अहम् पठेयम् — मुझे पढ़ना चाहिए)
द्विवचन पठेव (आवाम पठेव - हम दोनों को पढ़ना चाहिए)
बहुवचन पठेम (वयम् पठेम — हमलोगों को पढ़ना चाहिए)
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष
एकवचन पठिष्यति (सः पठिष्यति — वह पढ़ेगा )
द्विवचन पठिष्यतः (तौ पठिष्यतः - वे दोनों पढेंगे)
बहुवचन पठिष्यन्ति (ते पठिष्यन्ति – वे सब पढ़ेंगे)
मध्यम पुरुष
एकवचन पठिष्यसि (त्वम् पठिष्यसि – तू पढ़ोगे )
द्विवचन पठिष्यथः (युवाम् पठिष्यथः - तुम दोनों पढ़ोगे )
बहुवचन पठिष्यथ (यूयम् पठिष्यथ – तुमलोग पढ़ोगे )
उत्तम पुरुष
एकवचन पठिष्यामि (अहम् पठिष्यामि – मैं पढूँगा)
द्विवचन पठिष्यावः (आवाम् पठिष्यावः - हम दोनों पढ़ेंगे)
बहुवचन पठिष्यामः (वयम् पठिष्यामः - हमलोग पढ़ेंगे)
वद् (बोलना )
लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष वदति वदतः वदन्ति
मध्यम पुरुष वदसि वदथः वदथ
उत्तम पुरुष वदामि वदावः वदामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष वदतु वदताम् वदन्तु
मध्यम पुरुष वद वदतम् वदत
उत्तम पुरुष वदानि वदाव वदाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अवदत् अवदताम् अवदन्
मध्यम पुरुष अवदः अवदतम् अवदत
उत्तम पुरुष अवदम् अवदाव अवदाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष वदेत् वदेताम् वदेयुः
मध्यम पुरुष वदेः वदेतम् वदेत
उत्तम पुरुष वदेयम् वदेव वदेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष वदिष्यति वदिष्यतः वदिष्यन्ति
मध्यम पुरुष वदिष्यसि वदिष्यथः वदिष्यथ
उत्तम पुरुष वदिष्यामि वदिष्यावः वदिष्यामः
वस् (रहना)
लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष वसति वसतः वसन्ति
मध्यम पुरुष वससि वसथः वसथ
उत्तम पुरुष वसामि वसावः वसामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष वसतु वसताम् वसन्तु
मध्यम पुरुष वस वसतम् वसत
उत्तम पुरुष वसानि वसाव वसाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अवसत् अवसताम् अवसन्
मध्यम पुरुष अवसः अवसतम् अवसत
उत्तम पुरुष अवसम् अवसाव अवसाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष वसेत् वसेताम् वसेयुः
मध्यम पुरुष वसेः वसेतम् वसेत
उत्तम पुरुष वसेयम् वसेव वसेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष वत्स्यति वत्स्यतः वत्स्यन्ति
मध्यम पुरुष वत्स्यसि वत्स्यथः वत्स्यथ
उत्तम पुरुष वत्स्यामि वत्स्यावः वत्स्यामः
हृ (हरना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष हरति हरतः हरन्ति
मध्यम पुरुष हरसि हरथः हरथ
उत्तम पुरुष हरामि हरावः हरामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष हरतु हरताम् हरन्तु
मध्यम पुरुष हर हरतम् हरत
उत्तम पुरुष हराणि हराव हराम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अहरत् अहरताम् अहरन्
मध्यम पुरुष अहरः अहरतम् अहरत
उत्तम पुरुष अहरम् अहराव अहराम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष हरेत् हरेताम् हरेयुः
मध्यम पुरुष हरेः हरेतम् हरेत
उत्तम पुरुष हरेयम् हरेव हरेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष हरिष्यति हरिष्यतः हरिष्यन्ति
मध्यम पुरुष हरिष्यसि हरिष्यथः हरिष्यथ
उत्तम पुरुष हरिष्यामि हरिष्यावः हरिष्यामः
जि (जीतना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष जयति जयतः जयन्ति
मध्यम पुरुष जयसि जयथः जयथ
उत्तम पुरुष जयामि जयावः जयामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष जयतु जयताम् जयन्तु
मध्यम पुरुष जय जयतम् जयत
उत्तम पुरुष जयानि जयाव जयाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अजयत् अजयताम् अजयन्
मध्यम पुरुष अजयः अजयतम् अजयत
उत्तम पुरुष अजयम् अजयाव अजयाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष जयेत् जयेताम् जयेयुः
मध्यम पुरुष जयेः जयेतम् जयेत
उत्तम पुरुष जयेयम् जयेव जयेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष जेष्यति जेष्यतः जेष्यन्ति
मध्यम पुरुष जेष्यसि जेष्यथः जेष्यथ
उत्तम पुरुष जेष्यामि जेष्यावः जेष्यामः
खाद् (खाना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष खादति खादतः खादन्ति
मध्यम पुरुष खादसि खादथः खादथ
उत्तम पुरुष खादामि खादावः खादामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष खादतु खादताम् खादन्तु
मध्यम पुरुष खाद खादतम् खादत
उत्तम पुरुष खादानि खादाव खादाम
लड् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अखादत् अखादताम् अखादन्
मध्यम पुरुष अखादः अखादतम् अखादत
उत्तम पुरुष अखादम् अखादाव अखादाम
विधिलिङ् (चाहिए)
प्रथम पुरुष खादेत् खादेताम् खादेयुः
मध्यम पुरुष खादेः खादेतम् खादेत
उत्तम पुरुष खादेयम् खादेव खादेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष खादिष्यति खादिष्यतः खादिष्यन्ति
मध्यम पुरुष खादिष्यसि खादिष्यथः खादिष्यथ
उत्तम पुरुष खादिष्यामि खादिष्यावः खादिष्यामः
अनुवाद
मोहन ने रामायण पढ़ी – मोहनः रामायणम् अपठत् ।
देवदत्त वेद पढ़े – देवदत्तः वेदं पठतु ।
चोर धन हरते हैं – चौराः धनं हरन्ति ।
पृथ्वीराज ने संयुक्ता का हरण किया – पृथ्वीराजः संयुक्ताम् अहरत् ।
नदी का पानी गिरता है – नद्याः जलम् पतति।
भोज राजा हुआ – भोजः राजा अभवत् ।
हमलोग भात-दाल खाते हैं – वयम् भक्तं द्विदलं च खादामः ।
रात में दही नहीं खाना चाहिए – रात्र्यां दधि न खादेत् ।
यह मुनि का आश्रम है – अयम् मुनेः आश्रमः अस्ति।
वह युद्ध जीत गया – स युद्धम् अजयत्।
सुदामा कृष्ण के मित्र थे – सुदामा कृष्णस्य सखा आसीत् ।
वे सच कहते हैं – ते सत्यं वदन्ति ।
जंगल में बहुत फल हैं – वने बहूनि फलानि सन्ति।
मैं काम करता हूँ – अहम् कार्यम् करोमि।
सिंह वन में रहता है – सिंहः वने वसति ।
यहाँ बहुत दाता हैं – अत्र बहवः दातारः सन्ति।
वे पाठशाला में क्या करते हैं? – ते पाठशालायां किं कुर्वन्ति ?
महर्षि व्यास ने महाभारत लिखा – महर्षि व्यासः महाभारतम् अलिखत् ।
इस कुएँ का जल मीठा था – अस्य कूपस्य जलं मधुरम् आसीत्।
तुम सच बोलो – त्वम् सत्यं वद।
वह पढ़कर दौड़ेगा – स पठित्वा धाविष्यति ।
रमा पानी पीकर आती है – रमा जलं पीत्वा आगच्छति।
अभ्यास
1. संस्कृत में अनुवाद करें-
सुरेश ने शास्त्र पढ़ा। गणेश रामायण पढ़े। वैद्य रोग हरता है। दीप अन्धकार हरते हैं। वह कुलपति हुआ। हमलोग मछली नहीं खाते हैं। विद्यालय में मन से पढ़ना चाहिए । सत्य हमेशा जीतता है। वह पहलवान जीत गया। लड़का सच कहता है। दुकान में फल नहीं है। तालाब में बहुत फूल हैं। सुग्रीव राम का मित्र था। छात्र ने पाठ रटा। किसान खेत में काम करता है। मैं ऑफिस में काम नहीं करता हूँ। क्या इस तालाब का पानी स्वच्छ था ? तुम व्याकरण पढ़ो। झूठ मत बोलो। राम घर जाकर पढ़ेगा। वे खाकर हँसते हैं।
शब्द-संकेत–
भात-दाल — भक्तम् द्विदलञ्च, सच — सत्यम्, जंगल में — वने, बहुत (नपुं० ) — बहूनि, काम — कार्यम्, शास्त्र — शास्त्रम्, आश्रम — आश्रमः, वैद्य — वैद्यः, मछली ( कर्म०) — मीनम्, मन से — मनसा, पहलवान — मल्लः, दुकान में — आपणे, मत — मा, किसान — कृषकः, ऑफिस में — कार्यालये, स्वच्छ — निर्मलम्, झूठ — असत्यम्, पढ़कर — पठित्वा, जाकर — गत्वा, पीकर — पीत्वा, खाकर — खादित्वा
श्रु (सुनना)
लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष शृणोति शृणुतः शृण्वन्ति
मध्यम पुरुष शृणोषि शृणुथः शृणुथ
उत्तम पुरुष शृणोमि शृणुवः शृण्वः शृणुमः, शृण्मः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष शृणोतु शृणुताम् शृण्वन्तु
मध्यम पुरुष शृणु शृणुतम् शृणुत
उत्तम पुरुष शृणवानि शृणवाव शृणवाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अशृणोत् अशृणुताम् अशृण्वन्
मध्यम पुरुष अशृणोः अशृणुतम् अशृणुत
उत्तम पुरुष अशृणवम् अशृणुव अशृणुम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष शृणुयात् शृणुयाताम् शृणुयुः
मध्यम पुरुष शृणुयाः शृणुयातम् शृणुयात
उत्तम पुरुष शृणुयाम् शृणुयाव शृणुयाम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष श्रोष्यति श्रोष्यतः श्रोष्यन्ति
मध्यम पुरुष श्रोष्यसि श्रोष्यथः श्रोष्यथ
उत्तम पुरुष श्रोष्यामि श्रोष्यावः श्रोष्यामः
लिख् (लिखना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष लिखति लिखतः लिखन्ति
मध्यम पुरुष लिखसि लिखथः लिखथ
उत्तम पुरुष लिखामि लिखावः लिखामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष लिखतु लिखताम् लिखन्तु
मध्यम पुरुष लिख लिखतम् लिखत
उत्तम पुरुष लिखानि लिखाव लिखाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अलिखत् अलिखताम् अलिखन्
मध्यम पुरुष अलिखः अलिखतम् अलिखत
उत्तम पुरुष अलिखम् अलिखाव अलिखाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष लिखेत् लिखेताम् लिखेयुः
मध्यम पुरुष लिखेः लिखेतम् लिखेत
उत्तम पुरुष लिखेयम् लिखेव लिखेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष लेखिष्यति लेखिष्यतः लेखिष्यन्ति
मध्यम पुरुष लेखिष्यसि लेखिष्यथः लेखिष्यथ
उत्तम पुरुष लेखिष्यामि लेखिष्यावः लेखिष्यामः
तृ (तैरना)
लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष तरति तरतः तरन्ति
मध्यम पुरुष तरसि तरथः तरथ
उत्तम पुरुष तरामि तरावः तरामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष तरतु तरताम् तरन्तु
मध्यम पुरुष तर तरतम् तरत
उत्तम पुरुष तराणि तराव तराम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अतरत् अतरताम् अतरन्
मध्यम पुरुष अतरः अतरतम् अतरत
उत्तम पुरुष अतरम् अतराव अतराम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष तरेत् तरेताम् तरेयुः
मध्यम पुरुष तरेः तरेतम् तरेत
उत्तम पुरुष तरेयम् तरेव तरेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष तरिष्यति तरिष्यतः तरिष्यन्ति
मध्यम पुरुष तरिष्यसि तरिष्यथः तरिष्यथ
उत्तम पुरुष तरिष्यामि तरिष्यावः तरिष्यामः
नम् (प्रणाम करना, झुकना)
लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष नमति नमतः नमन्ति
मध्यम पुरुष नमसि नमथः नमथ
उत्तम पुरुष नमामि नमावः नमामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष नमतु नमताम् नमन्तु
मध्यम पुरुष नम नमतम् नमत
उत्तम पुरुष नमानि नमाव नमाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अनमत् अनमताम् अनमन्
मध्यम पुरुष अनमः अनमतम् अनमत
उत्तम पुरुष अनमम् अनमाव अनमाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष नमेत् नमेताम् नमेयुः
मध्यम पुरुष नमे: नमेतम् नमेत
उत्तम पुरुष नमेयम् नमेव नमेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष नंस्यति नंस्यतः नंस्यन्ति
मध्यम पुरुष नंस्यसि नंस्यथः नंस्यथ
उत्तम पुरुष नंस्यामि नंस्यावः नंस्यामः
नी (ले जाना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष नयति नयतः नयन्ति
मध्यम पुरुष नयसि नयथः नयथ
उत्तम पुरुष नयामि नयावः नयामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष नयतु नयताम् नयन्तु
मध्यम पुरुष नय नयतम् नयत
उत्तम पुरुष नयानि नयाव नयाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अनयत् अनयताम् अनयन्
मध्यम पुरुष अनयः अनयतम् अनयत
उत्तम पुरुष अनयम् अनयाव अनयाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष नयेत् नयेताम् नयेयुः
मध्यम पुरुष नयेः नयेतम् नयेत
उत्तम पुरुष नयेयम् नयेव नयेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष नेष्यति नेष्यतः नेष्यन्ति
मध्यम पुरुष नेष्यसि नेष्यथः नेष्यथ
उत्तम पुरुष नेष्यामि नेष्यावः नेष्यामः
लिप् (लीपना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष लिम्पति लिम्पतः लिम्पन्ति
मध्यम पुरुष लिम्पसि लिम्पथः लिम्पथ
उत्तम पुरुष लिम्पामि लिम्पावः लिम्पामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष लिम्पतु लिम्पताम् लिम्पन्तु
मध्यम पुरुष लिम्प लिम्पतम् लिम्पत
उत्तम पुरुष लिम्पानि लिम्पाव लिम्पाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अलिम्पत् अलिम्पताम् अलिम्पन्
मध्यम पुरुष अलिम्पः अलिम्पतम् अलिम्पत
उत्तम पुरुष अलिम्पम् अलिम्पाव अलिम्पाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष लिम्पेत् लिम्पेताम् लिम्पेयुः
मध्यम पुरुष लिम्पेः लिम्पेतम् लिम्पेत
उत्तम पुरुष लिम्पेयम् लिम्पेव लिम्पेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष लेप्स्यति लेप्स्यतः लेप्स्यन्ति
मध्यम पुरुष लेप्स्यसि लेप्स्यथः लेप्स्यथ
उत्तम पुरुष लेप्स्यामि लेप्स्यावः लेप्स्यामः
सृज् (निर्माण करना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष सृजति सृजतः सृजन्ति
मध्यम पुरुष सृजसि सृजथः सृजथ
उत्तम पुरुष सृजामि सृजावः सृजामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष सृजतु सृजताम् सृजन्तु
मध्यम पुरुष सृज सृजतम् सृजत
उत्तम पुरुष सृजानि सृजाव सृजाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष असृजत् असृजताम् असृजन्
मध्यम पुरुष असृजः असृजतम् असृजत
उत्तम पुरुष असृजम् असृजाव असृजाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष सृजेत् सृजेताम् सृजेयुः
मध्यम पुरुष सृजेः सृजेतम् सृजेत
उत्तम पुरुष सृजेयम् सृजेव सृजेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष स्रक्ष्यति स्रक्ष्यतः स्त्रक्ष्यन्ति
मध्यम पुरुष स्रक्ष्यसि स्रक्ष्यथः स्रक्ष्यथ
उत्तम पुरुष स्रक्ष्यामि स्रक्ष्यावः स्रक्ष्यामः
दा (देना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष ददाति दत्तः ददति
मध्यम पुरुष ददासि दत्थः दत्थ
उत्तम पुरुष ददामि दद्वः दद्मः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष ददातु दत्ताम् ददतु
मध्यम पुरुष देहि दत्तम् दत्त
उत्तम पुरुष ददानि ददाव ददाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अददात् अदत्तम् अददुः
मध्यम पुरुष अददाः अदत्तम् अदत्त
उत्तम पुरुष अददाम् अदद्व अदद्म
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष दद्यात् दद्याताम् दद्युः
मध्यम पुरुष दद्याः दद्यातम् दद्यात
उत्तम पुरुष दद्याम दद्याव दद्याम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष दास्यति दास्यतः दास्यन्ति
मध्यम पुरुष दास्यसि दास्यथः दास्यथ
उत्तम पुरुष दास्यामि दास्यावः दास्यामः
लुभ् (मोहना)लट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष लुभति लुभतः लुभन्ति
मध्यम पुरुष लुभसि लुभथः लुभथ
उत्तम पुरुष लुभामि लुभावः लुभामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष लुभतु लुभताम् लुभन्तु
मध्यम पुरुष लुभ लुभतम् लुभत
उत्तम पुरुष लुभानि लुभाव लुभाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अलुभत् अलुभताम् अलुभन्
मध्यम पुरुष अलुभः अलुभतम् अलुभत
उत्तम पुरुष अलुभम् अलुभाव अलुभाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष लुभेत् लुभेताम् लुभेयुः
मध्यम पुरुष लुभेः लुभेतम् लुभेत
उत्तम पुरुष लुभेयम् लुभेव लुभेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष लोभिष्यति लोभिष्यतः लोभिष्यन्ति
मध्यम पुरुष लोभिष्यसि लोभिष्यथः लोभिष्यथ
उत्तम पुरुष लोभिष्यामि लोभिष्यावः लोभिष्यामः
अनुवाद
लोग कथा सुनते हैं— जनाः कथां शृण्वन्ति ।
अशोक ने एक पुस्तक लिखी — अशोकः एकं पुस्तकं अलिखत्।
तालाब में मछलियाँ तैरती हैं— तडागे मत्स्याः तरन्ति ।
उसने गुरु को प्रणाम किया— सं गुरुं अनमत्।
श्यामा रामायण ले जाएगी — श्यामा रामायणं नेष्यति ।
राधा घर लीपती है— राधा गृहं लिम्पति।
ब्रह्मा ने संसार की सृष्टि की — ब्रह्मा संसारं असृजत् ।
किसान ने गरीबों को अन्न दिया— कृषकः निर्धनेभ्यः अन्नं अददात्।
उसने मिठाई से बच्चे को मोह लिया— स मिष्टान्नेन बालं अलुभत् ।
अभ्यास
1. संस्कृत में अनुवाद करें—
पेड़ की डाल झुक गई। लड़कियाँ कथा सुनेंगी। वह हिसाब लिखे । लड़की ने घर लीपा। नदी में नाव तैरती है। अशोक कलम ले गया। कवि काव्य की रचना करता है। नरेश छात्र को पुस्तक देता है। रमेश पुस्तक लिखेगा। वे धन देते हैं। छात्र ध्यान से पाठ सुनें। सुन्दर फूल मन को मोह लेता है। रावण ने सीता को हर लिया। वह कहाँ बसेगा?
क्रिया-संकेत—
झुक गई— अनमत्, सुनेंगी — श्रोष्यन्ति, लीपा — अलिम्पत्, ले गया— अनयत्, रचना करता है— सृजति, बसेगा— वत्स्यति
शब्द-संकेत—
डाल — शाखा, हिसाब — गणितम्, नाव — नौका, छात्र को — छात्राय, ध्यान से — ध्यानेन, मन को — मनः (कर्म), कहाँ — कुत्र
2. निम्नलिखित धातुओं के रूप लोट् लकार के प्रथम पुरुष के सभी वचनों में लिखें।
श्रु, तृ, नी, सृज्, दा
3. निम्नलिखित धातुओं के रूप लङ् लकार के मध्यम पुरुष के सभी वचनों में लिखें।
घ्रा, खाद्, लिख्, लिप्, नम्
4. निम्नलिखित धातुओं के रूप विधिलिङ् उत्तम पुरुष के सभी वचनों में लिखें।
वस्, जि, हृ, दृश्, स्था
5. निम्नलिखित धातु रूपों का वाक्यों में प्रयोग करें।
अशृण्वम्, नेष्यति, लिम्पतु, यच्छेत्, लेखिष्यति, अतरत्, खादिष्यति, लुभन्ति
6. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें—
बालकाः .........पठन्ति । त्वम् ....... वद्। स ...... हरति । ते ........ खादन्ति । ........ छात्राः खेलन्ति। अहम् विद्यालये ..........। ........शत्रून् जेष्यति। तस्मिन् .........बहवः .......सन्ति। कृष्णा .......चरति ।सा ....... वसति। ...... किं हससि ?
कुछ आदेशी (परिवर्तनीय) धातु
नीचे कुछ परिवर्तनीय धातु दिए जा रहे हैं। लट्, लोट्, लङ्, और विधिलिङ् में इनके रूप बदल जाते हैं।
धातु अर्थ आदेश वर्तमानकालिक रूप
गम् जाना गच्छ गच्छति
स्था ठहरना तिष्ठ तिष्ठति
पा पीना पिब पिबति
दृश् देखना पश्य पश्यति
घ्रा सूँघना जिघ्र जिघ्रति
दाण् देना यच्छ यच्छति
प्रच्छ् पूछना पृच्छ पृच्छति
गम् (गच्छ) — जानालट् (वर्तमानकाल ) — जाता है।
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष गच्छति गच्छतः गच्छन्ति
मध्यम पुरुष गच्छसि गच्छथः गच्छथ
उत्तम पुरुष गच्छामि गच्छावः गच्छामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष गच्छतु गच्छताम् गच्छन्तु
मध्यम पुरुष गच्छ गच्छतम् गच्छत
उत्तम पुरुष गच्छानि गच्छाव गच्छाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अगच्छत् अगच्छताम् अगच्छन्
मध्यम पुरुष अगच्छः अगच्छतम् अगच्छत
उत्तम पुरुष अगच्छम् अगच्छाव अगच्छाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष गच्छेत् गच्छेताम् गच्छेयुः
मध्यम पुरुष गच्छेः गच्छेतम् गच्छेत
उत्तम पुरुष गच्छेयम् गच्छेव गच्छेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष गमिष्यति गमिष्यतः गमिष्यन्ति
मध्यम पुरुष गमिष्यसि गमिष्यथः गमिष्यथ
उत्तम पुरुष गमिष्यामि गमिष्यावः गमिष्यामः
स्था ( तिष्ठ) — ठहरनालट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष तिष्ठति तिष्ठतः तिष्ठन्ति
मध्यम पुरुष तिष्ठसि तिष्ठथः तिष्ठथ
उत्तम पुरुष तिष्ठामि तिष्ठावः तिष्ठामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष तिष्ठतु तिष्ठताम् तिष्ठन्तु
मध्यम पुरुष तिष्ठ तिष्ठतम् तिष्ठत
उत्तम पुरुष तिष्ठानि तिष्ठाव तिष्ठाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अतिष्ठत् अतिष्ठताम् अतिष्ठन्
मध्यम पुरुष अतिष्ठः अतिष्ठतम् अतिष्ठत
उत्तम पुरुष अतिष्ठम् अतिष्ठाव अतिष्ठाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष तिष्ठेत् तिष्ठेताम् तिष्ठेयुः
मध्यम पुरुष तिष्ठेः तिष्ठेतम् तिष्ठेत
उत्तम पुरुष तिष्ठेयम् तिष्ठेव तिष्ठेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष स्थास्यति स्थास्यतः स्थास्यन्ति
मध्यम पुरुष स्थास्यसि स्थास्यथः स्थास्यथ
उत्तम पुरुष स्थास्यामि स्थास्यावः स्थास्यामः
पा (पिब ) – पीनालट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष पिबति पिबतः पिबन्ति
मध्यम पुरुष पिबसि पिबथः पिबथ
उत्तम पुरुष पिबामि पिबावः पिबामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष पिबतु पिबताम् पिबन्तु
मध्यम पुरुष पिब पिबतम् पिबत
उत्तम पुरुष पिबानि पिबाव पिबाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अपिबत् अपिबताम् अपिबन्
मध्यम पुरुष अपिबः अपिबतम् अपिबत
उत्तम पुरुष अपिबम् अपिबाव अपिबाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष पिबेत् पिबेताम् पिबेयुः
मध्यम पुरुष पिबेः पिबेतम् पिबेत
उत्तम पुरुष पिबेयम् पिबेव पिबेम
लुट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष पास्यति पास्यतः पास्यन्ति
मध्यम पुरुष पास्यसि पास्यथः पास्यथ
उत्तम पुरुष पास्यामि पास्यावः पास्यामः
दृश् (पश्य) — देखनालट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष पश्यति पश्यतः पश्यन्ति
मध्यम पुरुष पश्यसि पश्यथः पश्यथ
उत्तम पुरुष पश्यामि पश्यावः पश्यामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष पश्यतु पश्यताम् पश्यन्तु
मध्यम पुरुष पश्य पश्यतम् पश्यत
उत्तम पुरुष पश्यानि पश्याव पश्याम
लड् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अपश्यत् अपश्यताम् अपश्यन्
मध्यम पुरुष अपश्यः अपश्यतम् अपश्यत
उत्तम पुरुष अपश्यम् अपश्याव अपश्याम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष पश्येत् पश्येताम् पश्येयुः
मध्यम पुरुष पश्येः पश्येतम् पश्येत
उत्तम पुरुष पश्येयम् पश्येव पश्येम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष द्रक्ष्यति द्रक्ष्यतः द्रक्ष्यन्ति
मध्यम पुरुष द्रक्ष्यसि द्रक्ष्यथः द्रक्ष्यथ
उत्तम पुरुष द्रक्ष्यामि द्रक्ष्यावः द्रक्ष्यामः
घ्रा (जिघ्र ) — सूँघनालट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष जिघ्रति जिघ्रतः जिघ्रन्ति
मध्यम पुरुष जिघ्रसि जिघ्रथः जिघ्रथ
उत्तम पुरुष जिघ्रामि जिघ्रावः जिघ्रामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष जिघ्रतु जिघ्रताम् जिघ्रन्तु
मध्यम पुरुष जिघ्र जिघ्रतम् जिघ्रत
उत्तम पुरुष जिघ्राणि जिघ्राव जिघ्राम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अजिघ्रत् अजिघ्रताम् अजिघ्रन्
मध्यम पुरुष अजिघ्रः अजिघ्रतम् अजिघ्रत
उत्तम पुरुष अजिघ्रम् अजिघ्राव अजिघ्राम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष जिघ्रेत् जिघ्रेताम् जिघ्रेयुः
मध्यम पुरुष जिघ्रेः जिघ्रेतम् जिघ्रेत
उत्तम पुरुष जिघ्रेयम् जिघ्रेव जिघ्रेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष घ्रास्यति घ्रास्यतः घ्रास्यन्ति
मध्यम पुरुष प्रास्यसि घ्रास्यथः घ्रास्यथ
उत्तम पुरुष प्रास्यामि घ्रास्यावः घ्रास्यामः
दाण् (यच्छ) — देनालट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष यच्छति यच्छतः यच्छन्ति
मध्यम पुरुष यच्छसि यच्छथः यच्छथ
उत्तम पुरुष यच्छामि यच्छावः यच्छामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष यच्छतु यच्छताम् यच्छन्तु
मध्यम पुरुष यच्छ यच्छतम् यच्छत
उत्तम पुरुष यच्छानि यच्छाव यच्छाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अयच्छत् अयच्छताम् अयच्छन्
मध्यम पुरुष अयच्छः अयच्छतम् अयच्छत
उत्तम पुरुष अयच्छम् अयच्छाव अयच्छाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष यच्छेत् यच्छेताम् यच्छेयुः
मध्यम पुरुष यच्छेः यच्छेतम् यच्छेत
उत्तम पुरुष यच्छेयम् यच्छेव यच्छेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष दास्यति दास्यतः दास्यन्ति
मध्यम पुरुष दास्यसि दास्यथः दास्यथ
उत्तम पुरुष दास्यामि दास्यावः दास्यामः
प्रच्छ् (पृच्छ) — पूछनालट् (वर्तमानकाल)
एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष पृच्छति पृच्छतः पृच्छन्ति
मध्यम पुरुष पृच्छसि पृच्छथः पृच्छथ
उत्तम पुरुष पृच्छामि पृच्छावः पृच्छामः
लोट् (अनुज्ञा)
प्रथम पुरुष पृच्छतु पृच्छताम् पृच्छन्तु
मध्यम पुरुष पृच्छ पृच्छतम् पृच्छत
उत्तम पुरुष पृच्छानि पृच्छाव पृच्छाम
लङ् (भूतकाल)
प्रथम पुरुष अपृच्छत् अपृच्छताम् अपृच्छन्
मध्यम पुरुष अपृच्छः अपृच्छतम् अपृच्छत
उत्तम पुरुष अपृच्छम् अपृच्छाव अपृच्छाम
विधिलिङ्
प्रथम पुरुष पृच्छेत् पृच्छेताम् पृच्छेयुः
मध्यम पुरुष पृच्छेः पृच्छेतम् पृच्छेत
उत्तम पुरुष पृच्छेयम् पृच्छेव पृच्छेम
लृट् (भविष्यत्काल)
प्रथम पुरुष प्रक्ष्यति प्रक्ष्यतः प्रक्ष्यन्ति
मध्यम पुरुष प्रक्ष्यसि प्रक्ष्यथः प्रक्ष्यथ
उत्तम पुरुष प्रक्ष्यामि प्रक्ष्यावः प्रक्ष्यामः
अनुवाद
लड़के चन्द्रमा देखें — बालकाः चन्द्रं पश्यन्तु।
वह तुमसे पूछता है — स त्वाम् पृच्छति।
तुमने पुस्तक दी — त्वम् पुस्तकम् अयच्छः।
साधु के आश्रम में तुम क्या करते हो ? — साधोः आश्रमे त्वम् किं करोषि ?
वे वहाँ टहलें — ते तत्र भ्रमन्तु ।
तुम कहाँ ठहरोगे ? — त्वं कुत्र स्थास्यसि ?
मैं कल घर गया था — अहं ह्यः गृहं अगच्छम्।
अभ्यास
1. संस्कृत में अनुवाद करें—
क्या लड़के विद्यालय जाते हैं ? दिनेश गाँव जाएगा। अविनाश पटना नहीं जाएगा। वह विद्यालय में ठहरा है। मैं होटल में ठहरूँगा। साधु के पास गंगाजल था। मैं रात में दूध पीता हूँ। लड़के गेंद का खेल खेलते हैं। वह सिनेमा देखेगा। लड़के सिनेमा नहीं देखते हैं। छात्र फूल नहीं सूँघते हैं। तुम दोनों मैदान में खेलो। वह ब्राह्मण को वस्त्र देता है। क्या तुम छात्र को पुस्तक दोगे? क्या तुमने साहित्य पढ़ा? वे वहाँ क्या करते हैं? मैं पाठ याद करूँगा।
शब्द-संकेत—
गाँव (कर्म) — ग्रामम्, होटल में — भोजनालये, पास — पार्श्वे, गङ्गाजल — गङ्गाजलम्, गेंद का खेल (कर्म) — कन्दुक-क्रीडाम्, सिनेमा (कर्म) — चलचित्रम्, मैदान में — क्षेत्रे, वस्त्र — वस्त्रम्, साहित्य — साहित्यम्
2. निम्नलिखित धातुओं के रूप लट्, लङ् एवं लृट् लकारों के प्रथम पुरुष के सभी वचनों में लिखें।
गम्, दृश्, दाण्, नी, श्रु
3. निम्नलिखित धातु-रूपों का वाक्यों में प्रयोग करें।
अगच्छः, अपिबम्, पास्यन्ति, द्रक्ष्यामि, जिघ्रन्ति, यच्छति, दास्यसि
4. कोष्ठक में दिए गए दो शब्दों में से किसी एक युक्तिसंगत शब्द के द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति करें—
अहम् गीतां ......... (अपठः, अपठम्)। उद्याने ....... भ्रमन्ति (मृगः, मृगाः) । अजा घासं ....... (अचरत्, अचरन्)। दातारः ...... यच्छन्ति (धनः, धनम्)। रमेशस्य ....... अधावन् (अश्वः, अश्वाः) । ....... क्रीडाक्षेत्रे खेलतः (बालकौ, बालकाः) । राधा फलम् ........ (खादति, खादसि)। तस्मिन् ....... बहवः मत्स्याः सन्ति ( तडागे, नद्याम् ) । रमेन्द्रः ........ सूर्यं पश्यति (आकाशे, आकाशं)। यूयम् चन्द्रं .......... (द्रक्ष्यथ, पश्यिष्यथ)
5. निम्नलिखित धातु-रूपों में जो शुद्ध हों उनपर √ लगाएँ ।
अपठावः — अपठाव । वत्स्यति — वसिष्यति । अगमत् — अगच्छत् । गमिष्यति — गच्छिष्यति ।
अयच्छन् — अदत्तन् । घ्रासि — जिघ्रसि । स्थाति — तिष्ठति । तिष्ठिष्यति — स्थास्यति।
जयिष्यामि — जेष्यामि । दृश्यतु — पश्यतु । द्रक्ष्यति — पश्यिष्यति ।
6. निम्नलिखित वाक्यों में जो शुद्ध हों उनपर √ लगाएँ ।
स पुस्तकं अयच्छत् — तेन पुस्तकं अददत्। अहम् महाभारतम् अपठत् — अहम् महाभारतम् अपठम्। त्वम् गृहं अगमः — त्वम् गृहं अगच्छः । वयम् पुस्तकं पठामः ― वयम् पुस्तकं पठन्ति। आवाम् विद्यालयः गच्छिष्यावः — आवाम् विद्यालयं गमिष्यावः । राज्ञः राज्यं जयिष्यति ― राजा राज्यं जेष्यति । किं त्वम् दुग्धं पिवस्यसि ― किं त्वम् दुग्धं पास्यसि? अहम् मुद्गलपुरे स्थास्यामि ― अहम् मुद्गलपुरं तिष्ठिष्यामि ।
उपसर्ग, उपसर्ग से युक्त धातु
प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आङ् (आ), नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप ― ये प्रादि (22) उपसर्ग कहलाते हैं। उपसर्ग धातु के आदि में तथा प्रत्यय धातु के अन्त में लगते हैं।
उपसर्ग के लगने से धातु के अर्थ में विचित्र परिवर्तन हो जाता है। जैसे— 'गच्छति' का अर्थ होता है— ‘जाता है', किन्तु उसमें 'आ' उपसर्ग लगने से 'आगच्छति' हो जाता है, जिसका अर्थ होता है— 'आता है।
नीचे कुछ अर्थसहित उपसर्ग से युक्त धातु दिए जा रहे हैं।
भू (भवति) — होता है
प्र + भवति = प्रभवित — निकलता है
अनु + भवति = अनुभवति — अनुभव करता है
सम् + भवति = संभवति ― उत्पन्न होता है
गम् (गच्छति) — जाता है
आ + गच्छति = आगच्छति ― आता है
अनु + गच्छति = अनुगच्छति — पीछे-पीछे चलता है
अव + गच्छति = अवगच्छति — जानता है
निर् + गच्छति = निर्गच्छति — निकलता है
प्रति + आ + गच्छति = प्रत्यागच्छति — लौटता है
हृ (हरति) — हरण करता है
प्र + हरति = प्रहरति — प्रहार करता है
सम् + हरति = संहरति — संहार करता है
वि + हरति = विहरति — विचरण करता है
परि + हरति = परिहरति — दूर करता है
उत् + हरति = उद्धरति — उद्धार करता है
कृ (करोति) — करता है
अप + करोति = अपकरोति — अपकार करता है
अनु + करोति = अनुकरोति — नकल करता है
उप + करोति = उपकरोति — उपकार करता है
अधि + करोति = अधिकरोति — अधिकार करता है
नी (नयति) — ले जाता है
आ + नयति = आनयति — लाता है
अनु + नयति = अनुनयति — अनुनय करता है।
अप + नयति = अपनयति — दूर करता है
सृ (सरति) — जाता है
अनु + सरति = अनुसरति — पीछे-पीछे चलता है
निः + सरति = निःसरति — निकलता है
स्था (तिष्ठति) — ठहरता है
उत् + तिष्ठति = उत्तिष्ठति — उठता है
उप + तिष्ठति = उपतिष्ठति — समीप रहता है
सद् (सीदति) — दुःखी होता है
प्र + सीदति = प्रसीदति — प्रसन्न होता है
अव + सीदति = अवसीदति — दुःखी होता है
नि + सीदति = निषीदति — बैठता है
पत् (पतति) — गिरता है
उत् + पतति = उत्पतति — उड़ता है
प्र + नि + पतति = प्रणिपतति — प्रणाम करता है
नम् (नमति) — झुकता है
प्र + नमति = प्रणमति — प्रणाम करता है
रुह् (रोहति) — उगता है
प्र + रोहति = प्ररोहति — उगता है, जनमता है
आ + रोहति = आरोहति — चढ़ता है
विश् (विशति) — घुसता है
प्र + विशति = प्रविशति — प्रवेश करता है
उप + विशति = उपविशति — बैठता है
तृ ( तरति ) — तैरता है
अव + तरति = अवतरति — उतरता
अनुवाद
वह सुख का अनुभव करता है — सः सुखम् अनुभवति ।
लड़के घर से आते हैं — बालकाः गृहात् आगच्छन्ति।
राम गुरु को देखकर खड़ा होता है — रामः गुरुं दृष्ट्वा उत्तिष्ठति।
श्याम बदमाश को मारता है — श्यामः दुष्टं प्रहरति ।
राघव वेद जानता है — राघवः वेदम् अवगच्छति।
छात्र पुस्तक की नकल करते हैं — छात्राः पुस्तकम् अनुकुर्वन्ति।
गङ्गा हिमालय से निकलती है — गङ्गा हिमालयात् निःसरति ।
वह शिक्षक को प्रणाम करता है — सः शिक्षकं प्रणमति ।
बच्चा कोठे पर चढ़ता है — बालकः सौधम् आरोहति ।
चिड़ियाँ उड़ती हैं — खगाः उत्पतन्ति ।
वह राज्य पर अधिकार करता है — सः राज्यम् अधिकरोति ।
अभ्यास
1. संस्कृत में अनुवाद करें—
लड़की घर से आती है। वह विद्यालय से नहीं आता है। विश्वामित्र को देखकर राम खड़ा हो जाता है। रमेश शास्त्र नहीं जानता है। उमेश कपड़ा लाता है। कबूतर उड़ता है। सुरेश बड़े को प्रणाम करता है। महेश हिसाब की नकल करता है। चाँदनी आकाश से उतरती है।
शब्द-संकेत—
देखकर — दृष्ट्वा, शास्त्र — शास्त्रम्, कपड़ा — वस्त्रम्, कबूतर — कपोतः, बड़े को — श्रेष्ठम्, हिसाब की — गणितम्, चाँदनी — चन्द्रिका
'स्म' अव्यय का प्रयोग
लिट् लकार, अर्थात् परोक्ष अनद्यतन भूतकाल के अर्थ में लट् लकार के प्रथम (अन्य ) पुरुष की क्रियाओं में 'स्म' लगता है। यथा— भवतिस्म, कुर्वन्तिस्म आदि । मध्यम पुरुष और उत्तम पुरुष में 'स्म' का प्रयोग नहीं होता । अतः, गच्छतिस्म या गच्छामिस्म जैसा प्रयोग करना सर्वथा भ्रामक है।
अनुवाद
युधिष्ठिर ने यज्ञ किया था — युधिष्ठिरः यजतिस्म ।
राम ने रावण को मारा — रामः रावणं हन्तिस्म ।
राम और लक्ष्मण वन गए थे — राम-लक्ष्मणौ वनं गच्छतः स्म ।
तुलसीदास ने रामायण लिखी — तुलसीदासः रामायणं लिखतिस्म ।
देवताओं ने युद्ध किया था — देवाः युद्धं कुर्वन्तिस्म ।
अभ्यास
1. संस्कृत में अनुवाद करें—
कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने गीता कही थी। वाल्मीकि ने रामायण लिखी थी। श्रीकृष्ण ने कंस को मारा था। महाराणा प्रताप ने अकबर के साथ युद्ध किया था। भोज एक विद्वान राजा हुआ था । लड़के विद्यालय से चले गए। सुरेश और रमेश पटना गए थे। महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना की थी ।
2. निम्नलिखित पदों का वाक्यों में प्रयोग करें।
द्रक्ष्यामि, पिबेयम्, पृच्छामि, उपविशति, अयच्छत्, आनयति, निर्गच्छति, भवन्तिस्म
3. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कर लिखें।
वृक्षेन फलाः पतन्ति। स पिताम् प्रणमति । लतेस्मिन् पुष्पाः न सन्ति । किम् यूयम् न पठन्ति। मुनिस्य आश्रमे कः अस्ति । त्वम् गृहं न गच्छतु । वयम् श्वः पाटलिपुत्रं गमिष्यामि ।
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