वर्तनी नियम एवं त्रुटि शोधन: शुद्ध लेखन के आसान नियम जानें

 

वर्तनी : नियम एवं त्रुटि शोधन (SPELLING : RULES & CORRECTIONS)

'वर्तनी' शब्द 'वर्तन' से बना है, अर्थात् अनुवर्तन करना या पीछे-पीछे चलना। इसे अक्षरी, हिज्जे, स्पेलिंग या बँगला में 'बनान' भी कहते हैं । वर्तनी-संबंधी अशुद्धियों या समस्याओं के मुख्य तीन कारण हैं
(क) किसी शब्द का अशुद्ध उच्चारण करना या सुनना । 
(ख) अशुद्ध वर्तनीवाले शब्दों का बार-बार दर्शन होना । 
(ग) मत-भिन्नता के कारण विभिन्न समस्याएँ । जैसे—

(क) यदि हम 'श' का उच्चारण 'स' की तरह करते या सुनते हैं, तो निश्चित रूप से 'अशोक' शब्द को लिखते समय 'असोक' लिखेंगे। यह समस्या या अशुद्धि, गलत उच्चारण करने या सुनने के कारण है।

(ख) शिक्षा-मनोविज्ञान (Educational Psychology) की दृष्टि से जिस शब्द की जो वर्तनी बार - बार दिखाई देती है, दर्शक/ पाठक के मानस पटल पर वही अंकित हो जाती है । अतः बच्चों के समक्ष अशुद्ध वर्तनीवाले शब्दों को कभी न रखें ।

(ग) कोई 'गये-गयी' लिखता है तो कोई 'गए गई' | 'पक्का' शब्द को कोई ‘पक्का’ लिखता है, तो कोई 'पक्का' । इस प्रकार की कई समस्याएँ हैं। ये समस्याएँ मत- भिन्नता के कारण हैं ।

वर्तनी से सम्बद्ध विभिन्न समस्याओं एवं उनके निदान की चर्चा करने के लिए निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करना होगा—
(1) व्यंजनों का संयुक्त रूप ।
(2) विभक्ति-चिह्न ।
(3) उपसर्ग-प्रत्ययवाले शब्द ।
(4) श्री/ जी का प्रयोग ।
(5) संयुक्त क्रिया, सहायक क्रिया एवं अव्यय।
(6) संयोजक-चिह्न ।
(7) तत्सम और विदेशज शब्द |
(8) अनुस्वार और चन्द्रबिंदु |
(9) ए/ये तथा ई/यी का प्रयोग ।
(10) की / कि लिखने की दुविधा ।
(11) शुद्ध वर्तनी कैसे लिखें ।

1. व्यंजनों का संयुक्त रूप :

(क) खड़ी पाईवाले व्यंजनों (ख, ग, घ, च, ज, ञ, ण, त, थ, ध, न आदि) का संयुक्त रूप खड़ी पाई को हटाकर बनाएँ । जैसे
अच्छा, पुष्प, ज्वर, पत्थर आदि ।

(ख) जिनमें खड़ी पाई (क, फ) बीच में है, उन्हें इस प्रकार लिखें
मक्का, चक्की, दफ्तर, रफ्तार, रक्त (रक्त) आदि ।

(ग) जिनमें खड़ी पाई (ङ, ट, ठ, ड, ढ, द, ह आदि) नहीं है, उनके नीचे हल् दें या उन्हें निम्नांकित ढंग से संयुक्त करें । जैसे—
अड्डा/अड्डा, विद्यालय/विद्यालय, ब्रह्मा / ब्रह्मा, चिह्न / चिह्न आदि ।

(घ) 'र' की स्थिति कुछ अलग है । यदि 'र्' (स्वररहित अर्थात् आधा 'र्') पहले हो और बाद में कोई व्यंजन हो, तो 'र्' उस व्यंजन के ऊपर दिया जाता है। इसे रेफ ( ᒼ ) कहते हैं। जैसे—
धर्म (ध + र् + म) ।
शीर्षक (शी + र् + ष + क) ।

यदि व्यंजन के बाद कोई मात्रा हो, तो 'रेफ' मात्रा के ऊपर लगता है। जैसे—
वर्मा, कर्मी, धर्मेन्द्र आदि ।

(i) यदि आधा व्यंजन (स्वररहित ) के बाद पूरा 'र' (स्वरसहित) हो, तो पाईवाले व्यंजन में इसे '৴I' की तरह दिखलाया जाता है। जैसे—
व्रत (व् + र + त), क्रम, वज्र, सम्राट् आदि।
लेकिन, 'श' और 'त' के साथ इसका संयोग इस प्रकार होता है
त् + र = त्र—त्रस्त, त्रिवेणी, अस्त्र आदि ।
श् + र = श्र–श्रवण, श्रेणी, श्री आदि ।

(ii) बिना पाईवाले (ट्, व्, ड्, ह् आदि) व्यंजन के साथ पूरा 'र' इस प्रकार जुड़ता है—
ट्रक (ट् + र + क), राष्ट्र, ट्राम, ड्रामा आदि ।
लेकिन, 'ह' के साथ पूरा 'र' इस प्रकार जुड़ता है—
ह्रस्व (ह् + र + स्व), ह्रास, ह्राद, ह्रस्वता आदि ।

2. विभक्ति-चिह्न :

(क) विभक्ति-चिह्न का प्रयोग संज्ञा से अलग, लेकिन सर्वनाम के साथ करें । जैसे—
राम ने, युद्ध में, रथ पर, सीता के लिए ।
उसने, उनमें, मुझपर, आपके, आपकी, आपका ।

(ख) अगर दो विभक्तियों का प्रयोग करना हो, तो पहली विभक्ति को सर्वनाम के साथ और दूसरी को अलग लिखें। जैसे— 
उनमें से, मेरे लिए, उसके लिए, आपके द्वारा ।

(ग) अगर सर्वनाम के रूप बड़े हों, तो विभक्ति/विभक्तियों को अलग लिखें। जैसे—
आपलोगों के, आपलोगों के द्वारा, उनलोगों में, उनलोगों में से।

(घ) यदि सर्वनाम और विभक्ति के बीच 'ही', 'भी', 'तक' आदि अव्यय हों, तो विभक्ति को अलग लिखें। जैसे—
मुझ तक को, मेरे ही लिए, आप ही के लिए ।

3. उपसर्ग-प्रत्ययवाले शब्द – ऐसे शब्दों को एक साथ लिखें। जैसे— 
उपसर्गवाले शब्द — अधपका, प्रतिध्वनि, खुशहाल आदि ।
प्रत्ययवाले शब्द — पढ़कर, पढ़वाकर, दूधवाला, लकड़हारा आदि। 

4. श्री/जी का प्रयोग — आदरसूचक 'श्री' एवं 'जी' को शब्द के साथ लिखें। जैसे—
श्री — श्रीराम, श्रीगणेश, श्रीयुत, धनश्री, राजश्री आदि ।
जी — भाईजी, बहनजी, माताजी, पिताजी, रामजी, कृष्णजी आदि । 

5. संयुक्त क्रिया, सहायक क्रिया एवं अव्यय — इन्हें अलग-अलग लिखें। जैसे—

(क) हँस पड़ा, आ गया, खेल रहा है, पढ़ता आ रहा था।

(ख) अव्यय शब्द —यहाँ तक, वहाँ तक, रात भर, दिन भर आदि। 

6. संयोजक-चिह्न – यह चिह्न दो शब्दों को जोड़ता है। इसका प्रयोग निम्नलिखित परिस्थितियों में करें। जैसे—

(क) जब दोनों पद प्रधान हों भाई-बहन, सीता-राम, लोटा-डोरी आदि ।

(ख) विलोम शब्दों में— अच्छा-बुरा, स्वर्ग-नरक, लाभ-हानि आदि । 

(ग) एकार्थकबोधक सहचर शब्दों में― चमक-दमक, दीन-दुःखी आदि ।

(घ) एक शब्द सार्थक और दूसरा निरर्थक हो— उलटा-पुलटा, रोटी-वोटी, झूठ-मूठ, चाय-वाय, पानी-वानी आदि ।

(ङ) पुनरुक्ति या द्विरुक्ति में — गाँव-गाँव, शहर-शहर, अपना-अपना आदि ।

(च) दो विशेषण पदों में — दो-चार, दस-बीस, चौथा - पाँचवाँ आदि ।

(छ) सा, से, सी, जैसा, जैसी आदि में― चाँद सा मुखड़ा, कम-सेकम, चाँदी-सी चमक, आप जैसा होनहार, सीता - जैसी नारी आदि । 

(ज) जब दो शब्दों के बीच संबंधकारक के चिह्न (का, के, की) लुप्त हों । जैसे—
राम-लीला, लीला - भूमि, मानव-जीवन, जीवन-दर्शन, शब्द-भेद, ज्ञान-सागर, संत-मत, लेखन - कला आदि ।

उदाहरण :
लेखन-कला             (लेखन की कला)
शब्द-भेद                (शब्द के भेद / शब्द का भेद)

नोट : पदों, दुकानों, संस्थाओं, समितियों आदि के नाम बिना संयोजकचिह्न के लिखें। जैसे—
उपकुलपति, भूतपूर्व सैनिक, पाटलिपुत्र, किताबघर, सोवियत संघ, नागरी प्रचारिणी सभा आदि ।

7. (अ) तत्सम शब्द :

(क) हिन्दी में बहुत सारे तत्सम शब्द प्रयुक्त होते हैं, उनमें कुछ शब्दों के अंत में हल् आता है। जैसे—
महान्, विद्वान्, जगत्, विद्युत् आदि ।

यदि हल् के बिना इन शब्दों को लिखा जाए, तो इन शब्दों की व्युत्पत्ति समझ में नहीं आएगी। साथ ही, संधि और छंद में भी कठिनाई उत्पन्न हो जाएगी, अतः हल् हटाना उचित नहीं है । 

(ख) द्वित्व का प्रयोग यथासंभव होना चाहिए। जैसे—
सत्ता, पत्ता, कुत्ता, चक्का, अड्डा आदि । लेकिन, जिन शब्दों में अब द्वित्व का प्रयोग नहीं होता, वहाँ इससे बचना चाहिए। जैसे—
आवर्तन, परिवर्तन, वर्तमान, कर्ता आदि ।

(ग) कुछ तत्सम शब्दों में विसर्ग ( : ) का प्रयोग होता है । जैसे
अतः, स्वतः, प्रातः, मूलतः, अंशतः, पयःपान आदि । शुद्ध उच्चारण के लिए इनमें विसर्ग का प्रयोग अवश्य करें । 

(ब) विदेशज शब्द :

(क) अरबी-फारसी और अँगरेजी के कुछ शब्दों के नीचे बिंदु हिन्दी में, ध्वनि-विशेष के लिए दिया जाता है। हालाँकि, वाक्य-प्रयोग से ही उनका अर्थ स्पष्ट हो जाता है, अतः बिंदु देने की जरूरत नहीं है। उन्हें बिंदुरहित लिखें, जैसे—राज, खैर, गरीब, कागज, कब्र, इज, जीरो, फास्ट, फेल आदि । हाँ, यदि शब्दों के बीच फर्क दिखलाना हो, तो बिंदु का प्रयोग किया जा सकता है । जैसे— खान-खान, राज- राज़, गज-गज़ आदि ।

(ख) अँगरेजी के कुछ शब्दों के उच्चारण में औ-जैसी ध्वनि निकलती है। इनमें ध्वनि-विशेष के लिए हिन्दी में अर्द्धचन्द्र (  ̆  )) का प्रयोग करें। जैसे—
ऑफिस, ऑफिसर, कॉलेज, नॉलेज, स्टॉप, स्पॉट आदि । 

8. अनुस्वार और चंद्रबिंदु :

(क) यदि पंचमाक्षर व्यंजन के साथ संयुक्त हो, तो अनुस्वार का प्रयोग करें। जैसे—
अंक, मंजन, मंडन, बिंदु, खंभा आदि ।

(ख) चंद्रबिंदुवाले शब्दों में, चंद्रबिंदु के बदले अनुस्वार का प्रयोग न करें। इससे अर्थ में बहुत अंतर आ जाता है। जैसे—
हंस-हँस, अंगना-अँगना आदि में बहुत अंतर है ।

नोट- सिर्फ शिरोरेखा पर चंद्रबिंदु न देकर उसके बदले बिंदु दें। जैसे— चलें, में, मैं, हैं, सिंगार आदि ।

(ग) बहुवचन के इन रूपों – साड़ियाँ, तिथियाँ, नीतियाँ, मिठाइयाँ, कठिनाइयाँ, भाषाएँ, संज्ञाएँ आदि में चंद्रबिंदु दें, बिंदु नहीं । 

(घ) अनुस्वारयुक्त तत्सम शब्दों का तद्भव रूप प्रायः चंद्रबिंदु के साथ आता है। जैसे—
अंकुर-अँकरा, अंचल-आँचल, अंधकार- अँधेरा, अंक- आँक, चंद्रचाँद, झंप-झाँप, टंकण - टाँकना, दंत-दाँत, पंक-पाँक, पंच-पाँच, बंधन - बाँधना, बिंदु-बूँद, मंद-माँद, रंग-राँगा आदि।

9. ए/ये तथा ई/यी का प्रयोग — शब्दों के अंत में ए/ये अथवा ई/यी लिखा जाए, इसमें बहुत मतांतर है । कोई 'गए-गई' लिखता है, तो कोई ‘गये-गयी’। इसी प्रकार कोई 'नए - नई' लिखता है, तो कोई ‘नयेनयी'। अगर एक नियम का पालन किया जाए, तो इनके लिखने में एकरूपता आ सकती है। आप सिर्फ स्वर (आ-ई-ए) का ध्यान रखें, जैसे—
पढ़ा—पढ़ी—पढ़े
गया—गई—गए
आया— आई—आए
आए—आएँ—आएँगे
आईआई—आएँगी
नया—नई—नए

इसी प्रकार इन शब्दों को लिखें— 
लीजिए, लीजिएगा, कीजिए, कीजिएगा, पीएँगी, खाएँगी, जाएँगी, आइए, आइएगा, खाएगा, जाएगा आदि ।

नोट लेकिन, इन शब्दों को इस प्रकार लिखें— 
आयव्यय; न्यायअन्याय; जययविजय; विनयअनुनय; आशयमहाशय आदि ।

10. 'कि/को' के लिखने में दुविधा 'कि' एवं 'की' में बहुत अंतर है । 'कि' योजक है, जबकि 'की' संबंधकारक की विभक्ति अथवा करना (क्रिया) का भूतकालिक रूप । कभी-कभी 'कि' का प्रयोग प्रश्नसूचक के रूप में भी होता है । वाक्य लिखने के क्रम में विद्यार्थियों को दुविधा हो जाती है कि- 'कि' लिखें या 'की' । अतः इनके प्रयोग को समझें—

(i) संबंधकारक के रूप में (की) —
(क) उनकी कलम अच्छी है। 
(ख) आपकी किताब नई है । 
(ग) राम को गाय अच्छी है । 
(घ) गाय की पूँछ लंबी है ।
(ध्यान दें— 'की' के द्वारा सर्वनाम -संज्ञा अथवा 'संज्ञा - संज्ञा' का संबंध बतलाया गया है ।)

(ii) क्रिया के रूप में (की) —
(क) उसने मेरी शिकायत की। 
(ख) आपने उसकी पिटाई की।

(iii) योजक के रूप में (कि) —
(क) उसने कहा कि मैं पढ़ने जाऊँगा ।
(ख) यही कारण है कि वह पढ़ना नहीं चाहता ।
(ग) वह हमेशा कहता था कि आप मेरी मदद करें ।
(ध्यान दें—‘कि' के द्वारा दो वाक्यों को जोड़ा गया है ।) 

(iv) प्रश्नसूचक के रूप में
(क) तुम पढ़ोगे कि नहीं ?
(ख) वहाँ सीता थी कि गीता ? 

नोट  इन अव्यय शब्दों को इस प्रकार लिखें—
चूँकि, जबकि, जोकि, क्योंकि, ताकि, हालाँकि, इसलिए कि आदि। 

11. शुद्ध वर्तनी कैसे लिखें—

(i) उच्चारण के समय जिस अक्षर पर कम जोर पड़े वहाँ ह्रस्व की मात्रा (‘ि/ ु) दें, अधिक जोर पड़ने पर दीर्घ की मात्रा (‘ि/ ू) दें। जैसे—
पिता-पीता, सुत-सूत, उष्म ऊष्म, इड़ा-ईड़ा आदि।
ऐसे शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखने के लिए श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्दों की सूची पढ़ें ।

(ii) अधिकतर शब्द उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास आदि के नियमों से बनते हैं । जैसे—
परि (उपसर्ग) + भाषा (शब्द) = परिभाषा ( नया शब्द)
परिभाषा (शब्द) + इक (प्रत्यय) = पारिभाषिक (नया शब्द) 
रवि + इन्द्र = रवीन्द्र (संधि); मंत्री + मंडल = मंत्रिमंडल (समास)

अतः ऐसे शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखने के लिए उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास आदि को पढ़ें और इनकी सूची देखें ।

ऊपर वर्तनी के नियम बतलाए गए हैं, फिर भी आपको वर्तनी-संबंधी अशुद्धियाँ हो सकती हैं । अतः कुछ सरल एवं कठिन शब्दों की एक सूची दी जा रही है। आप श्रुतलेख (Dictation) के माध्यम से इन शब्दों की शुद्ध वर्तनी सीखें ।

श्रुतलेख के लिए सूची

स्वर— अंकगणित, अंकित, अंकुरण, अंगूर, अंतरिक्ष, अंतर्दृष्टि, अंतर्यामी, अंतर्राष्ट्रीय, अंतिम, अंत्याक्षरी, अंधविश्वास, अकड़ना, अकर्मण्य, अखिलेश, अतिरिक्त, अतिवृष्टि, अतिशयोक्ति, अतुलित, अदूरदर्शी, अद्वितीय, अनियमित, अनुकूल, अनुत्तीर्ण, अनुपस्थिति, अन्वय, अन्वेषण, अपरिचित, अपेक्षित, अभिमन्यु, अभिरुचि, अभूतपूर्व, अर्थशास्त्र, अवधि, अवधी, अविवाहित, अशिष्ट, अहल्या। आकाश, आखिरी, आचार्य, आणविक, आपत्ति, आभूषण, आयुर्वेद, आयुष्मान्, आयोजित, आविष्कर्ता, आशिष, आशीर्वाद, आश्वासन, आषाढ़ । इंदिरा, इंदु, इंद्रजित्, इंद्रिय, इक्कीस, इतिहास, इमली, इलायची । ईंट, ईंधन, ईख, ईद, ईर्ष्या, ईश्वर, ईसा, ईसाई । उक्ति, उच्चारण, उज्ज्वल, उत्कृष्ट, उत्तीर्ण, उदित, उद्गम, उद्देश्य (उद्देश्य), उन्मूलन, उपर्युक्त, उपलब्धि, उर्दू, उर्वशी, उल्लू। ऊख। ऋणी, ऋषि । एड़ी। ऐच्छिक, ऐनक, ऐरावत। ओंठ। औरत

क-वर्ग— कंठस्थ, कण, कतई, कदापि, कपिलवस्तु, कमसिन, करुणा, करुणानिधि, करोड़पति, कलियुग, कल्याण, कश्मीर, कष्ट, कस्तूरी, काजू, कादंबिनी, कामिनी, कायस्थ, कालिमा, किरानी, किवाड़, किशमिश, किस्मत, कीचड़, कीमत, कीर्ति, कुंडली, कुआँ, कुलीन, कुल्हाड़ी, कूदना, कृतघ्न, कृतज्ञ, कृत्रिम, कृषि, कृष्ण, केसरी, कैकेयी, कोल्हू, कोहनूर, कौशल्या; क्षति, क्षमा । खरबूजा, खिचड़ी, खिलाड़ी, खुशबू, खूबसूरत, खेतिहर, खोपड़ी, ख्याति। गगनचुंबी, गट्ठर (गट्ठर), गड़ेरिया, गणतंत्र, गर्भवती, गिनती, गिरगिट, गिरवी, गिलहरी, गुदगुदी, गोशाला, ग्राह्य ( ग्राह्य), ग्रीष्म, ग्वालिन। घड़ियाल, घड़ी, घर्षण, घिग्घी, घुड़दौड़, घूस, घोषणा ।

च-वर्ग— चंद्रग्रहण, चंद्रिका, चक्रव्यूह, चक्षु, चतुर्भुज, चश्मा, चालीस, चिकित्सक, चिट्ठी, चिड़िया, चिड़ीमार, चिरंजीव, चौमंजिला, च्यवनप्राश । छछूंदर, छात्रवृत्ति, छिपकली, छुआछूत । जन्मकुंडली, जन्मतिथि, जन्मभूमि, जितेंद्रिय, जीविका, जुगनू, जुड़वाँ, ज्यामिति, ज्येष्ठ, ज्योतिषी । झंझट, झिलमिल, झींगुर, झील, झुनझुनी, झोंपड़ा, झोली।

ट-वर्ग— टाइपराइटर, टिकली, टिप्पणी, टिफिन, टिमटिमाना, टेनिस, टेलीविजन। ठकुराइन । डाकू, डिबिया, डूबना, ड्योढ़ी, ड्राइवर ।

त-वर्ग— तकलीफ, तपस्विनी, तपस्वी, तबीयत, तराजू, तांत्रिक, तारीख, तिगुना, तितली, तिमंजिला, तिरहुतिया, तुलसीदास, तूतिया, तूफान, त्रिशूल, त्रुटि । थप्पड़, थर्मामीटर, थर्राना, थियेटर, थूकना, थोबड़ा | दंगल, दंडित, दंडी, दधीचि, दरिद्र, दरियादिल, दर्पण, दर्शन, दर्शनीय, दलित, दलील, दशमी, दसवाँ, दिलीप, दीपक, दीपावली, दीवाली, दुर्योधन, दुर्व्यवहार, दुलहन, दूधिया, दूषित, द्रोणाचार्य, द्वितीया । धर्मावतार, धारावाहिक, धारावाही, धुआँ, धूमकेतु, धूम्रपान, धूर्त, धृतराष्ट्र, धोबिन, धोबी, ध्वज, ध्वनि । नकद, नक्षत्र, नवाब, नाबालिग, नामुमकिन, नारियल, नाश्ता, नास्तिक, निंदनीय, निंदित, निपुण, निःसंकोच, निःसंदेह, निमंत्रण, नियमित, नियुक्ति, निराशा, निर्जीव, निश्चित, निष्कर्ष, निष्क्रिय, निहित, नीबू, नेकनीयत, न्यायाधीश ।

प-वर्ग— पंक्ति (पंक्ति), पंछी, पंजिका, पक्षिराज, पक्षी, पट्टिका, पट्टी, पतित, पतिव्रता, पत्रिका, पत्री, परशुराम, परिणाम, परिपूर्ण, परीक्षण, परीक्षा, पश्चिम, पारदर्शिता, पारदर्शी, पिंजरा, पितृगृह, पिल्लू, पिस्तौल, पुरोहित, पुलकित, पुलिंदा, पुलिस, पुष्ट, पुष्पवाटिका, पूँछ, पूँजी, पूछताछ, पूजनीय, पूर्णविराम, पूर्णाहुति, पूर्णिमा, पूर्ति, पूर्ववत्, पृथ्वी, पेशाब, पैतृक, पोषण, प्रकाशित, प्रकृति, प्रतिज्ञा, प्रतियोगिता, प्रतियोगी, प्रतीक्षा; प्रत्यक्षीकरण, प्रह्लाद (प्रह्लाद), प्रफुल्लित, प्रवेशिका, प्रशंसित, प्राणिशास्त्र, प्राणी। फिटकिरी, फुजूल, फुलवारी, फूल, फूलगोभी । बंदूक, बदबू, बदरीनारायण, बलवान्, बलिष्ठ, बल्कि, बवासीर, बहुमूल्य, बहुव्रीहि, बहू, बागीचा, बाणासुर, बासंतिक, बिंदी, बिकाऊ, बिक्री, बिगाड़ना, बिछुड़ना, बिरादरी, बिलकुल, बिस्कुट, बीड़ी, बुद्धिमान्, बृहस्पति, बेहूदा, बैलून, ब्रह्मचारिणी (ब्रह्मचारिणी), ब्रह्मचारी, ब्रह्मर्षि । भँगेड़ी, भगीरथ, भरण, भरद्वाज /भारद्वाज, भर्त्सना, भविष्यत्, भागीरथी, भाग्यवान्, भिनभिनाना, भीड़-भाड़, भीषण, भीष्म, भूतपूर्व, भूमिका, भूमिहार, भूलभुलैयाँ, भेड़िया, भ्रमण मंजिल, मंजूर, मंत्रिणी, मंत्री, मंदाकिनी, मजदूर, मदिरा, मयूर, मरुभूमि, मस्तिष्क, महँगा, महफिल, महाराणा, मारवाड़ी, मिथिला, मिश्रित, मिस्तरी, मुकुट, मुक्ति, मुठभेड़, मुद्रण, मुसाफिर, मूर्ति, मैथिली, मोरचा, म्यूजियम, म्लेच्छ ।

अंतःस्थ— यक्ष्मा, यजुर्वेद, यदुवंशी, यजुर्वेद, यदुवंशी, यशोधरा, यहूदी, युक्ति, युधिष्ठिर, यूनानी, यौगिक । रँगना, रचयिता, रणभूमि, रफूचक्कर, रवि, रवीन्द्र, रामायण, रावण, राष्ट्रीय, रिक्शा, रिमझिम, रीति, रुचि, रूई, रूढ़ि रूबरू, रेगिस्तान, रेशम, रोशनाई। लक्षण, लक्ष्मण, लवणासुर, लिफाफा, लीची, लू, लोकोक्ति। वंशीधर, वज्रपाणि, वनस्थली, वनस्पति, वरुण, वर्गीकरण, वर्जित, वर्णित, वाजिब, वाटिका, वाल्मीकि, विदाई, विदेश, विद्युत् (विद्युत्), विनती, विनीत, विपत्ति, विपरीत, विभिन्न, विभीषण, विरुद्ध, विलक्षण, विलासी, विशिष्ट, विशेषण, विश्लेषण, विश्वसनीय, विस्मरण, विस्मृति, विहीन, वीणापाणि, वैजयंती, व्यवस्थित।

ऊष्म— शकरकंद, शक्तिमान्, शताब्दी, शत्रुघ्न, शनिवार, शरीर, शशिभूषण, शहतूत, शहनाई, शारीरिक, शाहजादा, शिक्षित, शिलान्यास, शिविर, शीर्षक, शीशमहल, शीशी, शुक्रिया, शुतुरमुर्ग, शुभचिंतक, शुभाकांक्षी, शुभाकांक्षिणी, शून्य, शूर्पणखा, श्मशान, श्रीमान्, श्रेष्ठ, श्रृंखला, शृंगार, श्वशुर/ससुर। संकीर्ण, संकुचित, संक्रांति, संक्षेपण, संन्यासी, संपत्ति, संपूर्ण, समाधि, सरस्वतीपूजा, सरोजिनी, सर्वज्ञ, सर्वस्व, सर्वांगीण, सर्वोपरि, सहानुभूति, साप्ताहिक, सार्वजनिक, सावित्री, सिंघाड़ा, सिंचाई, सिंचित, सिंदूर, सिंहासन, सिकड़ी, सिटकिनी, सिद्धार्थ, सिपाही, सींग, सीढ़ी, सीसमहल, सुंदरता, सूचित, सूची, सूचीपत्र, सूर्यमुखी, स्तुति, स्तूप, स्थानांतरण, स्पर्द्धा, स्पष्टीकरण, स्वयंभू, स्वर्गीय, स्वामिनी, स्वामी, स्वास्थ्य, स्वीकृति । हथकड़ी, हथनी, हथौड़ा, हरिआली /हरियाली, हरिणी/ हरिनी, हरिश्चंद्र, हस्तिनापुर, हाकिम, हास्यास्पद, हितैषी, हिनहिनाना, हिन्दुस्तान, हिन्दू, हिरण्यकशिपु, हुजूर, होंठ, होशियार ।

चंद्रबिंदुवाले कुछ शब्द :

अँकड़ी, अँकना, अँकुड़ा, अँगड़ाई, अँगरेजी, अँगूठा, अँगूठी, अँगोछा, अँधेरा। आँकड़ा, आँकना, आँख, आँगन, आँच, आँचल, आँत, आँधी, आँवला, आँसू । उँगली, ऊँघना, ऊँचा, ऊँट । कँकड़ीला, कँगना, कँजियाना, कँपकँपी, कहाँ, काँख, काँच, काँटा, काँप, खाँसना, खाँसी, खूँटा, गँवार, गाँजा, गाँठ, गुँथना, गूँगा, गूँज, घुँघनी, घुँघरू, घूँघट, घूँसा । चाँद, चाँदी, चाँप, चूँकि, छाँटना, छाँह, जँगला, जँभाई, जाँघ, जाँता, जूँ, झाँसा, झाँकना। टाँक, टाँगना, टाँय-टाँय, ठाँय-ठाँय, ठूंठ, ठूंसना, डाँट, ढलवाँ, ढाँकना, ढाँचा, ढालवाँ, ढूँढ़ । ताँत, ताँबा, मँतुला, दाँत, दाएँ, धँसना, धाँधली, धुँधला, नाँद। पाँक, पाँच, पूँछ, पूँजी, फँसना, फुंकना, फूँकना, बँगला, बँटना, बाँझ, बाँध, बाँधना, बाँसुरी, बाँह, बूँद, भँवर, भाँग, भाँति, भुँकाना, भूँकना, मँडुआ, माँ, माँग, मुँह, मूँग, मूँछ, मूँदना । रँगना, रँगरेज, राँगा, लँगड़ा, लँगड़ी, लाँघना। सँपेरा, साँचा, साँड़, साँप, साँवला, साँवाँ, साँस, सूँघना, सूँड़, हँसना, हाँपना / हाँफना, हुँकार, हूँठ आदि ।

ष्ट/ष्ठ-युक्त शब्दों की संक्षिप्त सूची :

ष्ट— अंत्येष्टि, अंबष्ट, अतिवृष्टि, अदृष्ट, अनिष्ट, अपभ्रष्ट, अभीष्ट, अशिष्ट, अष्टम, अष्टमी, इष्ट, उत्कृष्ट, कष्ट, चेष्टा, दुष्ट, दृष्टि, धृष्ट, नष्ट, निकृष्ट, पुष्ट, पृष्ट (पूछा हुआ), विशिष्ट, शिष्टाचार, सृष्टि, हृष्टपुष्ट आदि ।

ष्ठ— अनुष्ठान, ओष्ठ, कनिष्ठ, कुष्ठ, गोष्ठी, ज्येष्ठ, निष्ठुर, पृष्ठ (पीठ, पीछे का भाग), प्रतिष्ठा, बलिष्ठ, श्रेष्ठ आदि ।

शब्दों में एक से सौ तक की संख्या- सूची :

एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह, सात, आठ, नौ, दस, ग्यारह, बारह, तेरह, चौदह, पंद्रह, सोलह, सत्रह, अठारह, उन्नीस, बीस, इक्कीस, बाईस, तेईस, चौबीस, पचीस, छब्बीस, सत्ताईस, अट्ठाईस, उनतीस, तीस, इकतीस, बत्तीस, तेंतीस, चौंतीस, पैंतीस, छत्तीस, सैंतीस, अड़तीस, उनतालीस / उनचालीस, चालीस, इकतालीस, बयालीस, तेंतालीस, चौवालीस, पैंतालीस, छियालीस, सैंतालीस, अड़तालीस, उनचास पचास, इक्यावन, बावन, तिरपन, चौवन, पचपन, छप्पन, सत्तावन, अट्ठावन, उनसठ, साठ, इकसठ, बासठ, तिरसठ, चौंसठ, पैंसठ, छियासठ, सड़सठ, अड़सठ, उनहत्तर, सत्तर, इकहत्तर, बहत्तर, तिहत्तर, चौहत्तर, पचहत्तर, छिहत्तर, सतहत्तर, अठहत्तर, उन्नासी, अस्सी, इक्यासी, बयासी, तिरासी, चौरासी, पचासी, छियासी, सत्तासी, अट्ठासी, नवासी, नब्बे, इक्यानवे, बानवे, तिरानवे, चौरानवे, पंचानवे, छियानबे / छानबे, सत्तानवे, अट्ठानवे, निन्यानवे, सौ I

संधि, समास एवं प्रत्यय-सम्बन्धी कुछ शब्द :

अत्युक्ति, अधोगति, अनधिकारी, अहोरात्र, अष्टावक्र, इकतारा, उज्ज्वल, उपर्युक्त, पितृण, प्रतिच्छाया, भास्कर, वयोवृद्ध, विच्छेद, इकलौता, त्रैवार्षिक, दायित्व, दुष्कर, पक्षिगण, मंत्रिमंडल, दिवारात्र, महाराज, योगिराज, विद्यार्थिगण, ऐतिहासिक, माननीय, मान्य, पूजनीय, पूज्य, प्रादेशिक, प्रामाणिक, पैतृक, सदुपदेश, समुद्री, सांसारिक, साप्ताहिक, सामुद्रिक, सार्वजनिक, सार्वजनीन ।

अभ्यास

1. वर्तनी से संबंधित कुछ समस्याएँ संक्षेप में लिखें।
2. व्यंजनों को संयुक्त करने की किन्हीं दो विधियों को लिखें ।
3. 'रेफ' से बने किन्हीं दो शब्दों को लिखें ।
4. संयोजक-चिह्न का प्रयोग मुख्यतः दो शब्दों के बीच किया जाता है। ऐसे किन्हीं चार अलग-अलग शब्दों को लिखें ।

5. संयोजक-चिह्न को ध्यान में रखकर निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करें—
(क) प्रत्येक अमीर गरीब के जीवन में सुख दुःख तो लगा ही रहता है । 
(ख) जन्म मरण और यश अपयश तो विधि का विधान है ।
(ग) उमेश के भाई बहन मेरे माता पिता के साथ शहर शहर घूम रहे हैं। 
(घ) झूठ मूठ की बात है कि तुम्हारे कपड़े लत्ते मार पीट में फट गए । 
(ङ) गीता जैसी नारी का चाँद सा मुखड़ा देखकर मोहन मोहित हो गया। 

6. विभक्ति-चिह्न/चिह्नों को कैसे लिखा जाता है ? इससे संबद्ध किन्हीं दो नियमों को लिखें ।
7. अनुस्वार और पंचमाक्षरों के प्रयोग को सोदाहरण स्पष्ट करें ।

8. विभक्ति-चिह्नों को ध्यान में रखते हुए निम्नांकित वाक्यों को शुद्ध करें—
(क) सोहनके एक भैंस है । उस का दूध मीठा है ।
(ख) यह मिठाई मोहनके लिए है । यह उस के पिताजीने दी है ।
(ग) मैं ने आप से कहा था कि उस पर मेरा उधार है । 
(घ) आपलोगोंके द्वारा उनलोगोंकी सहायता की गई है । 
(ङ) आपहीके लिए मुझतकको नहीं छोड़ा गया ।

9. उपसर्ग, प्रत्यय, संयुक्त क्रिया, सहायक क्रिया एवं आदरसूचक जी/श्री को ध्यान में रखकर निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करें
(क) चूड़ी हारा चूड़ी बेच कर जारहा था । 
(ख) वह अध पका आम खा कर चलागया । 
(ग) वह रोताहुआ जारहा था कि रास्ते में एक व्यक्ति से भेंट होगई। 
(घ) आज पिता जी, भाई जी के गुरु जी से मिले । 
(ङ) श्री कांतको पद्म श्री से सम्मानित कियागया था । 

10. सही कथन के सामने () और गलत के सामने (x) का निशान लगाएँ—
(क) खड़ी पाईवाले व्यंजनों का संयुक्त रूप खड़ी पाई हटाकर बनाया जाता है ।
(ख) धर्म, कर्म, शीर्षक में 'र' स्वरसहित (पूरा) है ।
(ग) ड्रग, ड्रम, ट्रक में 'र' स्वररहित (आधा) है।
(घ) संयुक्त क्रिया और सहायक क्रिया को अलग-अलग लिखना चाहिए।

11. 'कि/की' को ध्यान में रखकर निम्नांकित वाक्यों को शुद्ध करें—
(क) राम कि गाय अच्छी है।
(ख) कलम कि स्याही लाओ ।
(ग) उसने मेरी शिकायत कि ।
(घ) उसने कहा की मैं पढ़ने जाऊँगा ।
(ङ) यही कारण है की वह पढ़ना नहीं चाहता ।
(च) वह हमेशा कहता था की आप मेरी मदद करें ।
(छ) उसने उसकि पिटाई कि ।
(ज) तुम पढ़ोगे की नहीं ?
(झ) सीता गाएगी की गीता ?

12. निम्नांकित शब्दों के शुद्ध रूप लिखें ।
(क) आर्शीवाद
(ख) अनुकुल 
(ग) परिछा
(घ) पुरष्कार
(ङ) सप्ताहिक
(च) दारिद्रता

13. निम्नलिखित में कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
(क) दुषित
(ख) दुषीत
(ग) दूषित
(घ) दूषीत

14. इनमें कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
(क) उज्ज्वल 
(ख) दिपक
(ग) मुर्ति
(घ) इनमें कोई नहीं

15. इनमें कौन-सा रूप शुद्ध है ?
(क) दर्शन
(ख) दर्सन
(ग) दरशन
(घ) दर्शण

***
🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1