भाषा, बोली और व्याकरण: हिंदी व्याकरण का सरल परिचय

 

भाषा, बोली और व्याकरण (LANGUAGE, DIALECT & GRAMMAR)

मनुष्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए समाज में रहता है । समाज या परिवार में रहने के लिए उसे अपनी इच्छाओं या भावनाओं को व्यक्त करना पड़ता है । साथ ही, दूसरे व्यक्ति की इच्छाओं या भावनाओं को समझना पड़ता है। इन्हें समझने या समझाने के लिए किसीन-किसी माध्यम की आवश्यकता होती है, उसे ही भाषा कहते हैं । जैसे—

मान लिया जाए कि आपको एक पुस्तक की आवश्यकता है । आप पुस्तक की किसी दुकान के सामने खड़े हैं । आप अपनी इस इच्छा को तीन रूपों में व्यक्त कर सकते हैं—

1. पुस्तक की तरफ उँगली से इशारा करते हुए “ पुस्तक की माँग करना ।”
या, 2. मुँह से बोलकर — "अमुक पुस्तक दीजिए ।”
या, 3. कागज पर लिखकर – “ अमुक पुस्तक दीजिए।"

पुस्तक-प्राप्ति के लिए आपने जो प्रथम विधि अपनाई, उसे सांकेतिक भाषा कहते हैं। हालाँकि संकेत से आपका काम तो हो गया, लेकिन इसे भाषा की श्रेणी में नहीं रखा गया है । क्योंकि, सभी संकेत सार्वदेशिक या सार्वभौमिक नहीं होते। देश और काल के अनुरूप इनका अर्थ बदलता रहता है। जैसे—

किसी व्यक्ति को " अँगूठा दिखाना" हमारे देश में बुरा माना जाता है, लेकिन कुछ देशों में यह प्रसन्नता का सूचक है ।

पुस्तक माँगने के लिए जो दूसरी विधि अपनाई गई, उसे मौखिक तथा तीसरी को लिखित भाषा कहते हैं ।

स्पष्ट है कि मौखिक या लिखित भाषा ही 'भाषा' है । दूसरे शब्दों में— “मनुष्य अपनी भावनाओं को जिस माध्यम (मौखिक या लिखित) से व्यक्त करता है उसे भाषा कहते हैं !"

मौखिक और लिखित भाषा

मौखिक भाषा के लिए मुख के विभिन्न भागों की आवश्यकता होती है । इन भागों को उच्चारण-स्थान कहते हैं । इनके सहयोग से विभिन्न ध्वनियाँ निकलती हैं। यदि ध्वनियाँ अर्थपूर्ण हों, तो वे मौखिक भाषा का निर्माण करती हैं। निरर्थक ध्वनियाँ भाषा की श्रेणी में नहीं आती हैं। जैसे—

यदि मुख से 'कलम' या 'कमल' ध्वनि का उच्चारण किया जाए, तो यह मौखिक भाषा कहलाएगी, क्योंकि इसका कुछ-न-कुछ अर्थ होता है । इसके विपरीत यदि 'मकल' या 'लकम' शब्द बोला जाए, तो यह अर्थहीन ध्वनि कहलाएगी ।

मौखिक भाषा द्वारा आमने-सामने बैठे व्यक्ति से अनुभवों का आदानप्रदान किया जाता है । लेकिन, दूर-दराज व्यक्तियों से सम्पर्क रखने के लिए या अपने अनुभवों को अपेक्षाकृत अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए हमें उन्हें मूर्त रूप देना पड़ता है। इसके लिए लिखित भाषा की आवश्यकता होती है । लिखित भाषा के लिए ध्वनियों को सांकेतिक रूप देना पड़ता है। ध्वनियों के लिए जो संकेत या चिह्न निर्धारित किए गए हैं, उन्हें 'लिपि' कहते हैं ।

स्पष्ट है कि मौखिक भाषा मुख द्वारा उच्चरित होती है और कान द्वारा सुनी जाती है । इसके विपरीत लिखित भाषा के लिए ध्वनियों के सांकेतिक रूप (लिपि) को हाथ से लिखा या यंत्र द्वारा छापा जाता है ।

भाषा और बोली

घरेलू बोल-चाल की भाषा को 'बोली' कहते हैं, क्योंकि इसका कोई व्याकरण नहीं होता । प्रायः इसमें साहित्य की रचना नहीं की जाती । प्रायः प्रत्येक बीस-पचीस कोस पर इसका रूप बदल जाता है। इसके विपरीत, भाषा का अपना व्याकरण होता है । इसमें साहित्य की रचना की जाती है । इसका रूप प्रत्येक स्थान पर समान होता है । जैसे—

आपका क्या नाम है ?             (साहित्य की भाषा = भाषा) 
आहाँ के की नाम छै : ?           (क्षेत्रीय भाषा = बोली)
तोर का नाम हौ ?                   ( "    "    =    " )
राऊर का नाम भइल ?            ( "    "    =    " )

स्पष्ट है कि साहित्य की भाषा में सदा एकरूपता रहती है, लेकिन क्षेत्रीय भाषा में इसका अभाव पाया जाता है ।

हिन्दी-क्षेत्र और बोलियाँ

भारत में विभिन्न भाषाएँ बोली जाती हैं । इनमें प्रमुख हैं – हिन्दी, मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका, बँगला, असमिया, उड़िया, तमिल, तेलुगू (तेलगू), कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, पंजाबी, सिन्धी, कश्मीरी, उर्दू, मणिपुरी, कोंकणी, नेपाली, संस्कृत आदि । इन सभी भाषाओं में हिन्दी बोलनेवालों की संख्या सबसे अधिक है ।

'हिन्दी' शब्द की उत्पत्ति फारसी भाषा से हुई है । प्राचीनकाल में इस शब्द का प्रयोग सिन्ध प्रदेश या सिंधवासियों के लिए होता था । चूँकि फारसी भाषा में 'स' का उच्चारण 'ह' के समान होता है, अतः 'सिन्ध' के बदले 'हिन्द' तथा 'सिन्धी' के बदले 'हिन्दी' का प्रयोग होने लगा ।

हिन्दी का प्रयोग ब्रजभाषा, अवधी, मैथिली, मगही, राजस्थानी, खड़ीबोली आदि के लिए होता है। लेकिन, आधुनिक काल की हिन्दी मुख्यतः 'खड़ीबोली' पर आधारित है ।

हिन्दी की बोलियों को अध्ययन की दृष्टि से पाँच भागों में बाँटा जा सकता है
(1) पूर्वी हिन्दी, (2) पश्चिमी हिन्दी, (3) राजस्थानी हिन्दी, (4) बिहारी हिन्दी और (5) पहाड़ी हिन्दी ।

1. पूर्वी हिन्दी — इसमें प्रमुख बोलियाँ हैं— अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी। अवधी भाषा में तुलसीकृत 'रामचरितमानस' और मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित 'पद्मावत' प्रसिद्ध काव्य हैं।

2. पश्चिमी हिन्दी — इसमें प्रमुख बोलियाँ हैं— ब्रजभाषा, खड़ीबोली, हरियाणवी, बुंदेली और कन्नौजी । ब्रजभाषा में सूरदास और नंददास की कृष्णभक्ति से सराबोर उत्कृष्ट काव्य-रचनाएँ हैं।

खड़ीबोली विशेषकर दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, बिजनौर, सहारनपुर तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है।

3. राजस्थानी हिन्दी — राजस्थान प्रदेश में प्रयुक्त बोलियों के समूह को राजस्थानी हिन्दी कहते हैं। इनमें प्रमुख हैं— मारवाड़ी, मेवाड़ी, मेवाती, हाड़ोती आदि।

4. बिहारी हिन्दी — बिहार तथा झारखंड प्रदेशों में प्रयुक्त बोलियों के समूह को बिहारी हिन्दी कहते हैं । इनमें प्रमुख हैं— मैथिली, भोजपुरी, मगही और बज्जिका । मैथिली के आदि-कवि 'विद्यापति' की प्रसिद्ध ' पदावली' मैथिली भाषा में ही है ।

5. पहाड़ी हिन्दी — हिमाचल की बोली (मंडियाली), गढ़वाल की बोली (गढ़वाली) और कुमाऊँ क्षेत्र की बोली (कुमाऊँनी) पहाड़ी हिन्दी कहलाती है।

हिन्दी : संपर्क-भाषा और राजभाषा

हिन्दी संपूर्ण भारतवासियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में अपनी ख्याति अर्जित कर चुकी है । आप भारत के किसी भी कोने में चले जाएँ, इस भाषा से आपका काम चल सकता है।

हिन्दी भाषा को भारत-संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। साथ ही यह भारत के अधिकतर राज्यों की राजभाषा भी है, जैसे—बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा केंद्रशासित प्रदेश अंडमान-निकोबार |

त्रिभाषा सूत्र के अनुसार हिन्दी को देश के सभी विद्यालयों में कहीं प्रथम, कहीं द्वितीय और कहीं तृतीय भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है ।

यह भाषा भारतीय सीमा तक ही सीमित नहीं है, वरन् नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मॉरीशस, त्रिनिदाद, मलाया, फिजी, सूरीनाम, दक्षिण और पूर्वी अफ्रीका तक थोड़ी-बहुत फैली हुई है। रूस, चीन, जापान, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस आदि विकसित देशों के कुछ महाविद्यालयों में इसकी पढ़ाई भी हो रही है।

भाषा और व्याकरण

भाषा और व्याकरण में अन्योन्याश्रय संबंध है । भाषा के बिना व्याकरण या व्याकरण के बिना भाषा की कल्पना नहीं की जा सकती । भाषा यदि शरीर है, तो व्याकरण इसकी आत्मा ।

यह सही है कि सबसे पहले 'बोली' की उत्पत्ति होती है । जब इसमें साहित्य की रचना होने लगती है, तब यह भाषा का रूप ले लेती है । फिर अंत में व्याकरण की उत्पत्ति होती है । दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि भाषा आगे-आगे चलती है और इसके पीछे-पीछे व्याकरण। भाषा में एकरूपता लाने के लिए इसे कुछ नियमों से बाँधा जाता है । यही नियम व्याकरण है।

दूसरे शब्दों में, भाषा की क्या लिपि हो, वर्णों को किस प्रकार संयोजित किया जाए, शब्दों एवं वाक्यों की रचना में किन-किन बातों का खयाल रखा जाए, इन्हीं बातों की व्याख्या और व्यवस्था करना व्याकरण का काम है । अतः व्याकरण की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है—“व्याकरण एक ऐसा शास्त्र है जिसके द्वारा शुद्ध-शुद्ध बोलना और लिखना सिखलाया जाता है।"

अध्ययन की सुविधा के लिए हिन्दी व्याकरण को चार भागों में बाँटा गया है
(1) वर्ण-विचार
(2) शब्द-विचार
(3) वाक्य-विचार
(4) चिह्न-विचार

1. वर्ण-विचार — इसमें वर्ण, ध्वनि, अक्षर, लिपि की परिभाषा, भेद, आपसी संयोग आदि का अध्ययन किया जाता है ।

2. शब्द-विचार  इस अध्याय में शब्द की परिभाषा, भेद, उत्पत्ति, रचना, रूपांतर, प्रयोग, अर्थ आदि का अध्ययन किया जाता है।

3. वाक्य-विचार — इसमें वाक्य की परिभाषा, भेद, रचना, रूपांतर, शुद्धता आदि का अध्ययन किया जाता है ।

4. चिह्न-विचार — इस अध्याय के अन्तर्गत वाक्यों में प्रयोग किए जानेवाले विभिन्न चिह्नों का अध्ययन किया जाता है।

अभ्यास

1. भाषा किसे कहते हैं ? इसे संक्षेप में लिखें ।

2. लिखित और मौखिक भाषा को संक्षेप में समझाकर लिखें । 

3. बोली और भाषा में क्या अंतर है ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें । 

4. हिन्दी - क्षेत्र में बोली जानेवाली प्रमुख बोलियों को संक्षेप में लिखें । 

5. हिन्दी किन-किन राज्यों की राजभाषा है ? 

6. सही जोड़े बनाएँ
(क) पूर्वी हिन्दी                 (अ) गढ़वाली, कुमाऊँनी आदि 
(ख) पश्चिमी हिन्दी             (आ) मगही, भोजपुरी आदि 
(ग) राजस्थानी हिन्दी          (इ) बघेली, छत्तीसगढ़ी आदि 
(घ) बिहारी हिन्दी              (ई) खड़ीबोली, ब्रजभाषा आदि 
(ड.) पहाड़ी हिन्दी             (उ) मेवाड़ी, हाड़ोती आदि 

7. खाली जगहों को उपयुक्त शब्दों से भरें
(क) मनुष्य अपनी भावनाओं को जिस माध्यम से व्यक्त करता है, उसे ....... कहते हैं।
(ख) भाषा के मुख्यतः दो रूप हैं, ...... और ...... 
(ग) घरेलू बोल-चाल की भाषा को ........ कहते हैं।
(घ) हिन्दी की बोलियों को अध्ययन की दृष्टि से पाँच भागों में बाँटा जा सकता है— पूर्वी, पश्चिमी, राजस्थानी, बिहारी और ....... 
(ड.) व्याकरण एक ऐसा शास्त्र है जिसके द्वारा शुद्ध-शुद्ध ........ और ....... आता है। 
(च) हिन्दी व्याकरण को चार भागों में बाँटा गया है—वर्ण-विचार, शब्द-विचार, वाक्य-विचार और ...... 

8. हिन्दी भाषा का कौन-सा रूप मानक हिन्दी के रूप में स्वीकार किया गया है ?
(i) पूर्वी हिन्दी
(ii) पहाड़ी हिन्दी 
(iii) खड़ीबोली 
(iv) पश्चिमी हिन्दी

9. देश के अधिकतर निवासी जिस भाषा का प्रयोग करते हैं, उसे निम्नलिखित में क्या कहते हैं ?
(i) राजभाषा
(ii) मातृभाषा 
(iii) राष्ट्रभाषा
(iv) देशी भाषा

10. वर्तमान समय में हिन्दी का कौन-सा रूप प्रचलित है ?
(i) अवधी
(ii) ब्रज
(iii) खड़ीबोली
(iv) देवनागरी

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