अव्यय हिंदी व्याकरण: परिभाषा, भेद और उदाहरण आसान भाषा में
अव्यय (INDECLINABLE)
अव्यय— अव्यय या अविकारी उन शब्दों को कहते हैं जिनमें लिंग, वचन, पुरुष आदि के कारण कभी कोई परिवर्तन नहीं होता, जैसे—
बहुत, भारी, यहाँ, वहाँ, आगे, पीछे, और, तथा, लेकिन, परन्तु, अपितु, वाह, धन्यवाद आदि।
उदाहरण :
मैं बहुत खाता हूँ । (मैं, खाता हूँ — उत्तमपुरुष, एकवचन, पुं०)
आप बहुत खाती हैं । (आप, खाती हैं — मध्यमपुरुष, बहुवचन, स्त्री०)
यहाँ दूसरे वाक्य के लिंग, वचन और पुरुष में अन्तर आने से सभी शब्दों के लिंग, वचन और पुरुष में अन्तर, परिवर्तन या विकार उत्पन्न हुआ, क्योंकि ये विकारी शब्द हैं । परन्तु, 'बहुत' शब्द में कोई विकार उत्पन्न नहीं हुआ, इसलिए 'बहुत' शब्द 'अविकारी' या 'अव्यय' है ।
अव्यय के भेद
अव्यय के चार भेद हैं—
(1) क्रियाविशेषण (Adverb)
(2) संबंधबोधक (Preposition)
(3) समुच्चयबोधक (Conjunction)
(4) विस्मयादिबोधक (Interjection)
(1) क्रियाविशेषण
परिभाषा— क्रिया की विशेषता बतलानेवाले शब्दों को क्रिया-विशेषण कहते हैं, जैसे—
यहाँ, वहाँ, अब, अभी, ऐसे, वैसे, बहुत, बड़ा, क्यों, क्या आदि।
उदाहरण :
राम बहुत खा रहा है। ( बहुत — क्रियाविशेषण)
यहाँ 'बहुत' शब्द क्रियाविशेषण है, क्योंकि यह 'खा रहा है' क्रिया की विशेषता बतलाता है ।
क्रियाविशेषण के कार्य
क्रियाविशेषण के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं—
(i) क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बतलाता है, जैसे—
श्याम तेज दौड़ता है । (तेज — विशेषता का बोध)
वह शुद्ध लिखता है । (शुद्ध — विशेषता का बोध)
(ii) यह क्रिया के स्थान की स्थिति या दिशा का बोध कराता है, जैसे—
वह बाहर बैठा है । (बाहर — स्थान की स्थिति का बोध)
सड़क के बाएँ चलें। (बाएँ — स्थान की दिशा का बोध)
(iii) यह क्रिया के समय, अवधि आदि का बोध कराता है, जैसे—
राधा कल आएगी । (कल — समय का बोध)
वह रात भर पढ़ता रहा । (रात भर — अवधि का बोध)
(iv) यह क्रिया के प्रकार, स्वीकार, निषेध, निश्चय, अनिश्चय आदि का बोध कराता है, जैसे—
यहाँ नहीं खेलो । (नहीं — निषेध का बोध)
हाँ, आइए। (हाँ — स्वीकार का बोध)
(v) यह क्रिया की न्यूनता, अधिकता, तुलना आदि का बोध कराता है, जैसे—
सीता थोड़ा खाती है । (थोड़ा — न्यूनता का बोध)
गीता बहुत पढ़ती है। (बहुत — अधिकता का बोध)
क्रियाविशेषण के भेद
क्रियाविशेषण के मुख्यतः चार भेद हैं—
(i) स्थानवाचक, (ii) कालवाचक, (iii) रीतिवाचक और (iv) परिमाण-वाचक ।
(i) स्थानवाचक क्रियाविशेषण— जो शब्द क्रिया के स्थान की स्थिति एवं दिशा का बोध कराए उसे स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं, जैसे—
यहाँ, वहाँ, यहीं, वहीं, बाहर, भीतर, इधर, उधर, पास, दूर, दाएँ, बाएँ, आगे, पीछे, ऊपर, नीचे, की तरफ, की ओर आदि ।
उदाहरण :
वह यहाँ रहता है । (स्थान की स्थिति का बोध)
सड़क के बाएँ चलो। (स्थान की दिशा का बोध)
(ii) कालवाचक क्रियाविशेषण— जो शब्द क्रिया के समय, अवधि, बारंबारता आदि का बोध कराए उसे कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं, जैसे—
आज, कल, अब, जब, अभी, कभी, सांय, प्रातः, तुरत, पहले, आजकल, दिन भर, नित्य, सदा, लगातार, सदैव, बहुधा, प्रतिदिन, रोज, कई बार, हर बार आदि ।
उदाहरण :
श्री मरांडी अभी जा रहे हैं। (क्रिया के समय का बोध)
मि. जॉन आजकल खेलते हैं। (क्रिया की अवधि का बोध)
मो. रहीम प्रतिदिन पढ़ रहे हैं । (क्रिया की बारंबारता का बोध)
(iii) रीतिवाचक क्रियाविशेषण— जिस शब्द से क्रिया के प्रकार, निश्चय, अनिश्चय, स्वीकार, निषेध आदि का बोध हो उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं, जैसे—
ऐसे, वैसे, कैसे, जैसे, शायद, अवश्य, न, नहीं, मत, तो भी, ही, क्योंकि, चूँकि, अतः, इसलिए, धीरे-धीरे, तेजी से, जोर-जोर से, ध्यानपूर्वक आदि ।
उदाहरण :
वह ऐसे लिखता है । (क्रिया के प्रकार का बोध)
वह शायद जाए । (क्रिया के अनिश्चय का बोध)
मैं नहीं खेलूँगा। (क्रिया के निषेध का बोध)
(iv) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण— जिस शब्द से क्रिया की न्यूनता, अधिकता, तुलना, मात्रा आदि का बोध हो उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं, जैसे—
इतना, उतना, जितना, कितना, थोड़ा, बहुत, कम, खूब, अधिक, अति, अत्यंत, अतिशय, केवल, बस, काफी, जरा, थोड़ा-थोड़ा, तिल-तिल, बारीबारी से, क्रमशः, एक-एक कर आदि ।
उदाहरण :
वह थोड़ा खाती है । (न्यूनता का बोध)
मैं बहुत पढ़ता हूँ। (अधिकता का बोध)
मोहन कितना सोता है ? (तुलना का बोध)
क्रियाविशेषण : वाक्यों में स्थान एवं क्रम
'क्रियाविशेषण' का सामान्य अर्थ होता है—क्रिया की विशेषता बतलाना । किसी वाक्य में क्रियाविशेषण शब्द का प्रयोग इस प्रकार करें कि वह शब्द क्रिया की ही विशेषता बतलाए, वाक्य में प्रयुक्त अन्य शब्दों (पदों) की नहीं। इसका सबसे आसान तरीका है कि वाक्य में प्रयुक्त मुख्य क्रिया के पहले क्रियाविशेषण शब्द को रखें, जैसे—
लड़के बहुत खा रहे हैं । (बहुत — क्रिया की विशेषता = क्रियाविशेषण)
अब, 'बहुत' शब्द को संज्ञा के पहले रखकर देखें—
बहुत लड़के खा रहे हैं । (बहुत — संज्ञा की विशेषता = विशेषण)
अब, 'बहुत' शब्द को विशेषण के पहले रखकर देखें—
बहुत लम्बे लड़के खा रहे हैं । (बहुत — विशेषण की विशेषता = प्रविशेषण)
क्रियाविशेषणों का प्रयोग
अभी तक आपने कुछ क्रियाविशेषण शब्दों का प्रयोग देखा। अब कुछ ऐसे क्रियाविशेषण शब्दों के प्रयोग दिए जा रहे हैं, जो एकार्थक दिखाई तो पड़ते हैं, लेकिन उनमें अंतर है, जैसे—
अब, अभी; तब, फिर; ही, भी; न, नहीं, मत आदि ।
(i) अब, अभी— दोनों कालवाचक क्रियाविशेषण हैं । लेकिन, 'अब' से वर्तमान के अनिश्चित और 'अभी' से निश्चित समय का बोध होता है, जैसे—
वह अब जाएगा । (हो सकता है, कुछ देर बाद)
वह अभी जाएगा । (इसी क्षण, तत्काल)
वह अब नहीं जाएगा । (भविष्य में कभी नहीं जाएगा ।)
वह अभी नहीं जाएगा। (भविष्य में जा सकता है ।)
(ii) तब, फिर— दोनों शब्द कालवाचक क्रियाविशेषण हैं, फिर भी दोनों में अंतर है। 'तब' का अर्थ होता है— उस समय या उस वक्त । 'फिर' का अर्थ होता है— एक बार और, दोबारा, पुनः, जैसे—
उसने तब परीक्षा दी । (जब तैयारी हो गई, उस वक्त)
मोहन तब आया । (जब सोहन चला गया, उस समय)
उसने फिर परीक्षा दी। (एक बार और दी, दोबारा )
मोहन फिर आया । (एक बार और आया, दोबारा )
(iii) हो, भी— 'ही' का व्यवहार किसी बात पर जोर देने के लिए या निश्चय, अल्पता, स्वीकृति आदि सूचित करने के लिए होता है। ‘भी' का प्रयोग न्यूनता, अवश्य, निश्चय करके, जरूर आदि के अर्थ में प्रयुक्त होता है. जैसे—
इसे राम ही कर सकता है । (दूसरा नहीं — निश्चय, बल)
इसे राम भी कर सकता है । (दूसरों के अलावा — न्यूनता)
उसने उसे पीटा ही नहीं, नौकरी से भी निकाल दिया ।
प्रभु यीशु ने लोगों को उपदेश ही नहीं दिया, उनकी सेवा भी की।
(iv) न, नहीं, मत — ये शब्द निषेधबोधक क्रियाविशेषण हैं, लेकिन तीनों के अर्थ में अंतर है । 'न' का प्रयोग हलका निषेध, 'नहीं' का पूर्ण निषेध और 'मत' का निषेधात्मक आज्ञा के लिए होता है, जैसे—
इस किताब को न पढ़ना या वह न खेलेगा । (हलका निषेध)
इस किताब को नहीं पढ़ना या वह नहीं खेलेगा । (पूर्ण निषेध )
इस किताब को मत पढ़ना या तुम मत खेलना । (निषेधात्मक आज्ञा)
(2) संबंधबोधक
परिभाषा— जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर वाक्य के दूसरे शब्द के साथ संबंध बतलाए उसे संबंधबोधक कहते हैं, जैसे—
निकट, दूर, आगे पीछे, अंदर, बाहर, ओर, तरफ, पार, द्वारा, मारफत, लिए, सिवा, अलावा, अतिरिक्त, संग, साथ, विरुद्ध, खिलाफ, बिना, भर आदि ।
उदाहरण :
राम के आगे मैं खड़ा हूँ । (संज्ञा के बाद)
मेरे आगे राम खड़ा है। (सर्वनाम के बाद)
संबंधबोधक के भेद
संबंधबोधक के दो भेद हैं—
(i) संबद्ध संबंधबोधक और (ii) अनुबद्ध संबंधबोधक ।
(i) संबद्ध संबंधबोधक— यह अव्यय विभक्ति के बाद आता है, जैसे—
भोजन के बिना भजन में मन नहीं लगता । ('के' विभक्ति के बाद अव्यय)
आपकी ओर मैं खड़ा हूँ । ('की' विभक्ति के बाद अव्यय)
(ii) अनुबद्ध संबंधबोधक— यह अव्यय बिना विभक्ति के आता है, जैसे—
भोजन बिना भजन नहीं । (बिना विभक्ति के अव्यय)
आप बिना घर सूना । (बिना विभक्ति के अव्यय)
वह कटोरे भर दूध पी गया । (बिना विभक्ति के अव्यय)
संबंधबोधकों का क्रियाविशेषण के रूप में प्रयोग
यदि संबंधबोधक शब्द को वाक्य में प्रयुक्त मुख्य क्रिया के पहले रखा जाए, तो वह शब्द क्रियाविशेषण माना जाएगा, जैसे—
राम के आगे मैं हूँ । (आगे—संबंधबोधक)
मैं राम के आगे हूँ । (आगे— क्रियाविशेषण)
मेरे निकट सोहन रहता है । (निकट — संबंधबोधक)
सोहन मेरे निकट रहता है। (निकट — क्रियाविशेषण)
घर के अंदर एक चोर है । (अंदर — संबंधबोधक)
एक चोर घर के अंदर है। (अंदर — क्रियाविशेषण)
कमरे से बाहर मोहन जाएगा। (बाहर — संबंधबोधक)
मोहन कमरे से बाहर जाएगा। (बाहर — क्रियाविशेषण)
सीता के अलावा गीता गाएगी । (अलावा — संबंधबोधक)
गीता सीता के अलावा गाएगी। (अलावा — क्रियाविशेषण)
(3) समुच्चयबोधक
परिभाषा— जो अव्यय दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ता है उसे समुच्चयबोधक कहते हैं, जैसे—
और, न ....न, व, एवं, तथा, या, अथवा, किन्तु, परन्तु, कि, क्योंकि, जोकि, ताकि, हालाँकि, चूँकि, लेकिन, अतः, अतएव, इसलिए आदि ।
उदाहरण :
राम और रहीम दोस्त हैं । (दो शब्दों को)
राम आया और उसने रहीम को समझाया । (दो वाक्यों को)
समुच्चयबोधक के कार्य
समुच्चयबोधक के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं—
(i) यह दो शब्दों या सरल वाक्यों को जोड़ता है, जैसे—
राम और रहीम दोस्त हैं । (दो शब्दों को जोड़ता है ।)
राम गाता है और रहीम बजाता है। (दो वाक्यों को जोड़ता है ।)
(ii) यह दो शब्दों या वाक्यों में से एक का ग्रहण या त्याग अथवा दोनों का त्याग करता है, जैसे—
मोनी या सोनी आई। (एक का ग्रहण, एक का त्याग)
न मोनी आई न सोनी । (दोनों का त्याग)
(iii) यह कभी-कभी दो वाक्यों या शब्दों में विरोध दिखलाता है, जैसे—
महेश छोटा है, परन्तु गणेश लम्बा है । (दोनों वाक्यों में विरोध)
सुरेश बुद्धिमान्, लेकिन बदमाश है। (दोनों शब्दों में विरोध)
(iv) समुच्चयबोधक यह बतलाता है कि अगले वाक्य के अर्थ का परिणाम पिछले वाक्य के अर्थ का परिणाम है या पिछले वाक्य का अर्थ पहले वाक्य के अर्थ का परिणाम, जैसे—
(क) “मैंने तुम्हें पढ़ाया था, इसलिए तुम सफल हुए ।"
(अगले वाक्य के अर्थ का परिणाम पिछले वाक्य का अर्थ )
(ख) “तुम सफल हुए, क्योंकि मैंने तुम्हें पढ़ाया था । "
(पिछले वाक्य के अर्थ का परिणाम अगले वाक्य का अर्थ )
समुच्चयबोधक के भेद
समुच्चयबोधक के दो भेद हैं—
(i) समानाधिकरण समुच्चयबोधक और
(ii) व्यधिकरण समुच्चयबोधक |
(i) समानाधिकरण समुच्चयबोधक— यह अव्यय दो मुख्य वाक्यों या एक ही प्रकार के दो शब्दों को जोड़ता है, जैसे—
और, व, एवं, तथा, भी, या, अथवा, न ... न, चाहे .... चाहे, पर, परन्तु, किन्तु, लेकिन, वरन्, बल्कि, अगर, मगर, अतः, इसलिए, अतएव आदि ।
उदाहरण :
मोहन आएगा और सोहन को पढ़ाएगा । (दोनों मुख्य वाक्यों को)
जॉन और जोसेफ आए । (एक ही प्रकार के संज्ञा शब्दों को)
न राम आया न श्याम ।
राम आया, परन्तु श्याम न आया ।
(ii) व्यधिकरण समुच्चयबोधक— यह अव्यय मुख्य वाक्य के साथ आश्रित वाक्य को जोड़ता है, जैसे—
ताकि, चूँकि, क्योंकि, इसलिए कि, जिससे कि, मानों, अर्थात्, यानी, अगर ... तो, यद्यपि ... तथापि आदि ।
उदाहरण :

(4) विस्मयादिबोधक
परिभाषा— जिन अव्यय शब्दों से हर्ष, शोक, क्रोध, भय, आश्चर्य, घृणा आदि तीव्र मनोभाव व्यक्त होते हैं उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं, जैसे—
आह, वाह, काश, शाबाश, ए, ऐ, बाप रे, राम-राम, छी-छी आदि।
उदाहरण :
वाह! वाह! अच्छा किया ! (हर्ष का भाव)
आह! वह मर गया ! (शोक का भाव )
बाप रे! कितना भयानक शेर ! (आश्चर्य का भाव)
विस्मयादिबोधक के कार्य
विस्मयादिबोधक के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं—
(i) यह हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य आदि तीव्र मनोभावों को व्यक्त करता है, जैसे—
वाह! तुम जीते!
हाय! मर गया!
(ii) यह स्वीकार और तिरस्कार को व्यक्त करता है, जैसे—
जी! ठीक है!
छिः ! गलत हुआ !
(iii) यह सम्बोधन व्यक्त करता है, जैसे—
अरे ! इधर आओ!
ऐ ! ठहरो!
विस्मयादिबोधक के भेद
विस्मयादिबोधक के निम्नलिखित प्रमुख भेद हैं—
(i) हर्षसूचक— इससे हर्ष के भाव का बोध होता है, जैसे—
वाह, वाह-वाह, धन्य, धन्य-धन्य, शाबाश आदि ।
(ii) शोकसूचक— इससे शोक के भाव का बोध होता है, जैसे—
अह, आह, ओह, हाय, काश, ऊह आदि ।
(iii) आश्चर्यसूचक— इससे आश्चर्य के भाव का बोध होता है, जैसे—
ए, ऐ, ओहो, हैं, क्या, बाप रे आदि ।
(iv) घृणासूचक— इससे घृणा के भाव का बोध होता है, जैसे—
छिः, छी, धिक्, धिक्कार, हट आदि ।
(v) स्वीकारसूचक— इससे स्वीकार के भाव का बोध होता है, जैसे—
जी, हाँ, जी हाँ, ठीक, अच्छा आदि ।
(vi) संबोधनसूचक— इससे कभी-कभी संबोधन भी व्यक्त होता है, जैसे—
हे, अरे, अजी, भई आदि ।
विस्मयादिबोधक : वाक्य में स्थान
विस्मयादिबोधक अव्ययों का प्रयोग वाक्य में सदा शुरू में होता है, जैसे—
(क) वाह! वाह! अच्छा किया !
(ख) ओह! इतनी गरमी !
(ग) क्या! आ गया !
(घ) धिक्कार! डूब मरो !
(ङ) जी हाँ! अच्छा है !
(च) हे ईश्वर ! उसे ज्ञान दो ।
अभ्यास
1. अव्यय शब्द की परिभाषा दें और उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें ।
2. अव्यय के कितने भेद हैं ? इनके नाम लिखें ।
3. क्रियाविशेषण किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।
4. क्रियाविशेषण के प्रमुख कार्यों को लिखें ।
5. क्रियाविशेषण के कितने भेद हैं ? इनके नाम लिखें ।
6. स्थानवाचक क्रियाविशेषण किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।
7. कालवाचक क्रियाविशेषण की परिभाषा उदाहरणसहित लिखें ।
8. रीतिवाचक क्रियाविशेषण की परिभाषा लिखें और उदाहरण दें ।
9. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण की परिभाषा लिखें और उदाहरण दें।
10. संबंधबोधक अव्यय किसे कहते हैं ? इसे उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें ।
11. संबंधबोधक अव्यय के कितने भेद हैं ? इनके नाम लिखें ।
12. संबद्ध संबंधबोधक किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।
13. अनुबद्ध संबंधबोधक की परिभाषा लिखें और उदाहरण दें ।
14. समुच्चयबोधक किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।
15. समुच्चयबोधक के प्रमुख कार्यों को लिखें ।
16. समानाधिकरण समुच्चयबोधक और व्यधिकरण समुच्चयबोधक के अंतर को उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें ।
17. विस्मयादिबोधक अव्यय किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।
18. विस्मयादिबोधक के प्रमुख कार्यों को लिखें ।
19. विस्मयादिबोधक के प्रमुख भेद कौन-कौन से हैं?
20. दिए गए शब्दों में से अव्यय चुनें—
अचानक, यहाँ, आगे, आना, आवश्यकता, अब, अवश्य, कल, काला।
21. इनमें से क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक शब्दों को चुनकर लिखें—
अब, यहाँ, पीछे, और, आगे, व, एवं, वाह, आह, शाबाश, क्यों, किन्तु ।
22. निम्नांकित शब्दों का प्रयोग वाक्यों में क्रियाविशेषण के रूप में करें—
अब, तब, अभी, फिर, न, मत, नहीं ।
23. निम्नलिखित संबंधबोधकों का प्रयोग क्रियाविशेषण के रूप में करें—
आगे, निकट, अंदर, बाहर ।
24. किन्हीं चार विस्मयादिबोधक अव्ययों का प्रयोग अलग-अलग वाक्यों में करें ।
25. इन वाक्यों में रेखांकित अव्ययों के नाम (भेद) कोष्ठकों में लिखें—
(क) वह यहाँ रहता है । (स्थानवाचक क्रियाविशेषण)(ख) सोहन अभी जा रहा है । ( )(ग) आप कैसे बोल रहे हैं ? ( )(घ) थोड़ा खा लीजिए । ( )(ङ) आपकी ओर मैं खड़ा हूँ । ( )(च) करीम और रहीम दोस्त हैं । ( )(छ) वह लाचार है, क्योंकि वह बीमार है । ( )
26. दिए गए विकल्पों से रिक्त स्थानों की पूर्ति करें—
(क) मैं गोरा हूँ ......... मेरी बहन साँवली है।
(i) परंतु(ii) क्योंकि(iii) कि(iv) जैसे कि
(ख) सड़क पर ....... होकर चलना ।
(i) स्थिर(ii) चौकन्ना(iii) सावधान(iv) सचेष्ट
(ग) महात्मा गाँधी ........ के पुजारी थे ।
(i) अनशन(ii) क्रांति(iii) अहिंसा(iv) हड़ताल
27. रिक्त स्थानों को दिए गए विकल्पों से भरें—
(i) भाई की बीमारी का समाचार पाकर रमेश ........ घर चला गया। (शीघ्र/तुरत)(ii) ....... मैंने फायर किया ...... बाघ ने आक्रमण । (न, न / क्या, क्या)(iii) ...... पढ़ो ...... सोओ, मैं कुछ नहीं कहूँगा । (क्या, क्या/चाहे, चाहे)(iv) ईश्वर ने ......... चाहा ....... मैं पढ़कर देशसेवी बनूँगा । (यदि/तो/अथवा)(v) क्या यह ठीक है ....... उनकी दशा चिंतनीय है ? ( कि / मानो/लेकिन)(vi) मैंने बहुत कहा ....... उसने मेरी बात नहीं मानी । (कि / यद्यपि / फिर भी)(vii) मैं परीक्षा में नहीं बैठा ....... मैं बीमार था । (और/क्योंकि/लेकिन)(viii) मेरे दो भाई ........ तीन बहनें हैं। (परंतु / और/अथवा)(ix) मैं पढ़ता हूँ ........ लिख नहीं सकता । (पर/तथा/किंतु)(x) ....... आप मेरा नाम लिख लें । (कृपया / कृपा करके)
28. वाह ! वाह! अव्यय है—
(i) आश्चर्यबोधक(ii) शोकबोधक(iii) स्वीकारबोधक(iv) हर्षबोधक
29. “अहा ! आम बहुत मीठा है ।" में विस्मयादिबोधक शब्द कौन-सा है ?
(i) आम(ii) अहा(iii) मीठा(iv) बहुत
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