संस्कृत व्याकरण: कुछ प्रेरणार्थक क्रियाएँ – नियम, उदाहरण व अभ्यास
कुछ प्रेरणार्थक क्रियाएँ
पाठयति — पढ़ाता है
कारयति — करवाता है
बोधयति — समझाता है
पातयति — गिराता है
स्थापयति — ठहराता है
प्रज्वालयति — जलाता है
दापयति — दिलाता है
क्राययति — खरीदवाता है
श्रावयति — सुनाता है
दर्शयति — दिखलाता है
स्मारयति — याद कराता है
स्वापयति — सुलाता है
भोजयति — खिलाता है
पाययति — पिलाता है
अनुवाद
गुरु शिष्य को गणित पढ़ाता है — गुरु शिष्यं गणितं पाठयति।
वह तमाशा दिखाता है — स कौतुकं दर्शयति ।
किसान दरिद्रों को खिलाता है — कृषकः दरिद्रान् भोजयति ।
पंडित कथा सुनाता है — पण्डितः कथां श्रावयति।
माँ बच्चे को दूध पिलाती है — माता शिशुं दुग्धं पाययति।
अभ्यास
1. संस्कृत में अनुवाद करें—
मजदूर (श्रमिकाः) पेड़ गिराते हैं। वह रमेश को पुस्तक दिलाता है। अध्यापक छात्रों को भूगोल समझाता है। लड़कियाँ दीप जलाती हैं। वे प्यासे को (पिपासितम्) पानी पिलाते हैं। राजकिशोर वस्त्र खरीदवाता है।
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