NCERT Class 10th Social Science Geography Notes Chapter 7 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ
इस अध्याय मे हम परिवहन, स्थल परिवहन, रेल परिवहन, पाइपलाइन, जल परिवहन, वायु परिवहन, संचार सेवाएँ, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, पर्यटन एक व्यापार के रूप आदि के बारे में विस्तार से पड़ेगे।
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ
परिवहन :-
परिवहन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लोगों, वस्तुओं और सेवाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है। यह आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे व्यापार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार को सुविधा मिलती है।
परिवहन क्यों ज़रूरी है?
- हम अपने दैनिक जीवन में कई वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं।
- ये सभी चीज़ें हमारे आस-पास ही नहीं मिलतीं, बल्कि कहीं और से लाई जाती हैं।
- वस्तुओं को उत्पादन स्थल से उपभोक्ता तक पहुँचाने के लिए परिवहन आवश्यक है।
परिवहन का महत्व :-
परिवहन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ माना जाता है। इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- व्यापार और उद्योग का विकास :- कच्चे माल को कारखानों तक और तैयार वस्तुओं को बाजार तक पहुँचाने में मदद करता है।
- क्षेत्रों के बीच संपर्क :- दूर-दराज़ क्षेत्रों को जोड़कर सामाजिक व आर्थिक एकता बढ़ाता है।
- रोजगार के अवसर :- परिवहन सेवाओं से अनेक रोजगार पैदा होते हैं।
- आर्थिक विकास :- संसाधनों के कुशल उपयोग और बाजार विस्तार में सहायक।
- राष्ट्रीय एकता :- विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के बीच संबंध मजबूत करता है।
- आपदा और आपातकाल में सहायता :- राहत सामग्री और सेवाएँ जल्दी पहुँचाने में सहायक।
- पर्यटन को बढ़ावा :- लोगों की आवाजाही आसान बनाकर पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करता है।
भारत में परिवहन और संचार का महत्व :-
- भारत विशाल, विविधताओं से भरा देश है – अलग-अलग भाषाएँ, संस्कृति, रहन-सहन।
- इसके बावजूद रेल, वायु, जल परिवहन, समाचारपत्र, रेडियो, दूरदर्शन, सिनेमा, इंटरनेट ने पूरे देश को जोड़ रखा है।
- इन्हीं की बदौलत स्थानीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक व्यापार संभव हो पाया है।
परिवहन के प्रकार :-
परिवहन को तीन आधारों पर बाँटा गया है:
🔸 1. स्थल परिवहन :- इसमें वे साधन आते हैं जो भूमि पर चलते हैं:
- सड़क परिवहन – बस, कार, ट्रक आदि
- रेल परिवहन – ट्रेन
- पाइपलाइन – तेल, गैस, पानी का परिवहन
🔸 2. जल परिवहन :- इसमें जल मार्गों का उपयोग होता है:
- आंतरिक जल परिवहन – नदियाँ, झीलें
- समुद्री परिवहन – जहाज़
🔸 3. वायु परिवहन :- हवाई मार्ग से परिवहन:
- घरेलू विमान सेवा
- सार्वजनिक प्राधिकरण
- निजी विमान सेवा
- अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा
भारत में सड़क परिवहन :-
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क जाल वाला देश है।
- कुल लंबाई: लगभग 62.16 लाख किमी (2020–21)
- भारत में सड़क परिवहन, रेल से पहले शुरू हुआ।
- निर्माण तथा व्यवस्था में सड़क परिवहन , रेल परिवहन की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक है।
भारत मे सड़को के प्रकार :-
भारत में सड़कों को उनकी क्षमता व महत्त्व के आधार पर छः वर्गों में बाँटा गया है:
🔸 (i) राष्ट्रीय राजमार्ग :- राष्ट्रीय राजमार्ग देश के दूरस्थ भागों को जोड़ते हैं। ये प्राथमिक सड़क तंत्र हैं। अनेक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम दिशाओं में फैले हैं।
🔸 (ii) राज्य राजमार्ग :- राज्यों को राजधानियों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें राज्य राजमार्ग कहलाती हैं।
🔸 (iii) जिला मार्ग :- ये सड़कें जिले के विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ती हैं।
🔸 (iv) अन्य सड़कें :- इस वर्ग के अंतर्गत वे सड़कें आती हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों तथा गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं।
🔸 (v) सीमांत सड़कें :- इनका निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया जाता है जिसकी स्थापना 1960 में हुई थी।
महत्व :- ये उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व की सड़कों का विकास करना था। इनसे दुर्गम क्षेत्रों में पहुंच आसान हुई है।
🔸 (vi) निर्माण पदार्थ के आधार पर सड़कों का वर्गीकरण :- सड़कों को उनके बनाने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ के आधार पर दो भागों में बाँटा जाता है:
पक्की सड़कें – वे सड़कें जो सीमेंट, कंक्रीट या तारकोल जैसे मजबूत पदार्थों से बनाई जाती हैं। ये सड़कों पर वर्ष भर वाहनों का आवागमन संभव होता है, इसलिए इन्हें बारहमासी सड़कें कहा जाता है।
कच्ची सड़कें – वे सड़कें जो मिट्टी या अन्य अस्थायी सामग्री से निर्मित होती हैं। ये विशेषकर वर्षा ऋतु में खराब हो जाती हैं और कई बार उपयोग के योग्य नहीं रहतीं।
स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग :-
स्वर्णिम चतुर्भुज भारत की एक प्रमुख सड़क परियोजना है, जिसके अंतर्गत दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को 6-लेन महा राजमार्गों द्वारा जोड़ा गया है।
🔸 मुख्य उद्देश्य :-
- देश के मेगासिटी के बीच दूरी और परिवहन समय कम करना
- तेज, सुरक्षित एवं सुगम यातायात
- व्यापार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा
यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अंतर्गत संचालित है।
उत्तर-दक्षिण एवं पूर्व-पश्चिम गलियारा :-
स्वर्णिम चतुर्भुज से अलग, सरकार ने दो प्रमुख गलियारों का विकास किया:
- प्रथम उत्तर-दक्षिण गलियारा जो श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ता है,
- द्वितीय जो पूर्व-पश्चिम गलियारा जो सिलचर (असम) तथा पोरबंदर (गुजरात) को जोड़ता है।
🔸 उद्देश्य :-
- देश के दूरस्थ भागों को जोड़ना
- संतुलित क्षेत्रीय विकास
राष्ट्रीय राजमार्गों की महत्त्वपूर्ण भूमिका :-
राष्ट्रीय राजमार्ग देश के परिवहन तंत्र की प्रमुख धुरी हैं। इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
- देशव्यापी संपर्क :- ये देश के प्रमुख महानगरों, राज्यों की राजधानियों एवं औद्योगिक केंद्रों को जोड़ते हैं।
- आर्थिक विकास में सहायक :- व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन के विकास को प्रोत्साहित करते हैं।
- तेज एवं सुगम परिवहन :- लंबी दूरी की यात्रा को तेज, सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाते हैं।
- रक्षा एवं प्रशासनिक महत्त्व :- सैनिक गतिविधियों, आपदा प्रबंधन एवं प्रशासनिक कार्यों में सहायक।
- अन्य परिवहन साधनों से समन्वय :- बंदरगाहों, हवाई अड्डों तथा रेलवे जंक्शनों को जोड़कर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हैं।
रेल परिवहन की तुलना में सड़क परिवहन क्यों बेहतर है?
रेल परिवहन की अपेक्षा सड़क परिवहन की बढ़ती महत्ता निम्नकारणों से है-
- रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है।
- अपेक्षाकृत ऊबड़-खाबड़ व विच्छिन्न भू-भागों पर सड़कें बनाई जा सकती हैं।
- अधिक ढाल प्रवणता तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी सड़कें निर्मित की जा सकती हैं।
- अपेक्षाकृत कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में सड़क मितव्ययी है।
- यह घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है तथा सामान चढ़ाने व उतारने की लागत भी अपेक्षाकृत कम है।
- सड़क परिवहन, अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी के रूप में भी कार्य करता है, जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पत्तनों को जोड़ती हैं।
भारत में रेल परिवहन :-
भारतीय रेल देश की अर्थव्यवस्था की “जीवन रेखा” मानी जाती है। पिछले 150 वर्षों से भारतीय रेल देश की आर्थिक, औद्योगिक एवं कृषि विकास की आधारशिला रही है।
देश की पहली रेलगाड़ी 1853 में मुंबई और थाणे के मध्य चलाई गई जो 34 किमी. की दूरी तय करती थी। वर्तमान में भारतीय रेल को 17 रेल प्रखंडों (Zones) में संगठित किया गया।
रेल परिवहन क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में रेल परिवहन यात्रियों एवं वस्तुओं के परिवहन का प्रमुख साधन है। यह व्यापार, पर्यटन, तीर्थ यात्राओं तथा लंबी दूरी तक भारी सामान के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक :-
🔸 उत्तरी मैदान :- समतल भूमि, सघन जनसंख्या, विकसित कृषि एवं संसाधनों की उपलब्धता के कारण यहाँ रेल परिवहन का सर्वाधिक विकास हुआ है, यद्यपि नदियों पर पुलों का निर्माण एक चुनौती रहा है।
🔸 प्रायद्वीपीय भारत :- ऊबड़-खाबड़ भू-भाग, पहाड़ियाँ एवं सुरंगों के कारण रेलमार्गों का निर्माण कठिन रहा है।
🔸 हिमालयी क्षेत्र :- ऊँचे पर्वत, विरल जनसंख्या तथा सीमित आर्थिक गतिविधियों के कारण रेल परिवहन का विकास कम हुआ है।
🔸 अन्य क्षेत्र :- पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थल, गुजरात के दलदली भाग, मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र तथा छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में रेल लाइनों का निर्माण कठिन है।
भारतीय रेल की प्रमुख समस्याएँ :-
🔸 यात्री संबंधी समस्याएँ :-
- बिना टिकट यात्रा – इससे रेलवे को भारी राजस्व हानि होती है।
- रेल संपत्ति की हानि एवं चोरी – कुछ यात्री सीट, पंखे, खिड़कियाँ आदि को नुकसान पहुँचाते हैं।
- अनावश्यक जंजीर खींचना – बिना कारण ट्रेन रोकने से समय और ईंधन की हानि होती है।
🔸 अन्य प्रमुख समस्याएँ :-
- पुरानी तकनीक – कई स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं का अभाव।
- रेलवे ट्रैक का रखरखाव – पटरियों की नियमित देख-रेख एक बड़ी चुनौती।
- भीड़भाड़ – विशेषकर सामान्य डिब्बों में अत्यधिक भीड़।
- दुर्घटनाएँ – तकनीकी व मानवीय कारणों से दुर्घटनाओं की समस्या।
पाइपलाइन परिवहन :-
- यह भारत के परिवहन मानचित्र पर नया और आधुनिक परिवहन साधन है।
- प्रारंभ में इसका उपयोग शहरों और उद्योगों तक पानी पहुँचाने के लिए किया जाता था।
- वर्तमान में पाइपलाइनों द्वारा कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस का परिवहन किया जाता है।
- तेल व गैस क्षेत्रों से शोधनशालाओं, उर्वरक कारखानों तथा ताप विद्युत गृहों तक आपूर्ति की जाती है।
- ठोस पदार्थों को घोल में बदलकर भी पाइपलाइन से ले जाया जा सकता है।
पाइपलाइन परिवहन के लाभ :-
- लंबी दूरी के लिए उपयुक्त
- चलाने की लागत न्यूनतम
- समय की बचत एवं सुरक्षित परिवहन
- रिसाव/हानियाँ बहुत कम
- प्रारंभिक लागत अधिक, पर संचालन सस्ता
भारत में पाइपलाइन परिवहन के प्रमुख जाल :-
- ऊपरी असम तेल क्षेत्र से गुवाहाटी, बरौनी, प्रयागराज होते हुए कानपुर तक पाइपलाइन जाल।
- गुजरात क्षेत्र से मथुरा, दिल्ली, सोनीपत होते हुए पंजाब तक पाइपलाइन नेटवर्क।
- हजीरा–विजयपुर–जगदीशपुर (HVJ) गैस पाइपलाइन, जो पश्चिमी और उत्तरी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ती है।
जल परिवहन :-
भारत में जल परिवहन का उपयोग प्राचीनकाल से होता रहा है। भारतीय नाविकों ने जलमार्गों के माध्यम से व्यापार और संस्कृति का प्रसार किया।
जल परिवहन के प्रमुख लाभ :-
- जल परिवहन सबसे सस्ता परिवहन साधन है।
- यह भारी एवं स्थूलकाय वस्तुओं के परिवहन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
- यह ऊर्जा सक्षम और पर्यावरण अनुकूल साधन माना जाता है।
- जल परिवहन रेल और सड़क परिवहन का किफायती पूरक माध्यम है।
भारत में राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways – NW) :-
- भारत में अंतःस्थलीय जलमार्गों की कुल लंबाई लगभग 14,500 किमी है।
- राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया।
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्ग :-
- राष्ट्रीय जलमार्ग–1 – गंगा नदी : हल्दिया से प्रयागराज (1620 किमी)
- राष्ट्रीय जलमार्ग–2 – ब्रह्मपुत्र नदी : सदिया से धुबरी (891 किमी)
- राष्ट्रीय जलमार्ग–3 – पश्चिम तटीय नहर, केरल (205 किमी)
- राष्ट्रीय जलमार्ग–4 – गोदावरी–कृष्णा नदी एवं नहरें (1078 किमी)
- राष्ट्रीय जलमार्ग–5 – महानदी डेल्टा, ब्राह्मणी नदी व पूर्वी तटीय नहर (588 किमी)
🔹 अन्य महत्वपूर्ण जलमार्ग :-
इनके अलावा भारत में मांडवी, जुआरी, सुंदरवन, बराक और केरल के पश्चजल में भी नौकायन और परिवहन होता है।
समुद्री परिवहन व विदेशी व्यापार :-
- भारत का लगभग 95% विदेशी व्यापार (मात्रा में) समुद्री मार्ग से होता है।
- मूल्य के आधार पर लगभग 68% व्यापार समुद्रों द्वारा किया जाता है।
- यह व्यापार भारतीय तट पर स्थित प्रमुख पत्तनों के माध्यम से संचालित होता है।
भारत के प्रमुख पत्तन :-
भारत की समुद्री तटरेखा लगभग 7,516.6 किमी लंबी है। देश में 12 प्रमुख तथा लगभग 200 मध्यम व छोटे पत्तन हैं। ये प्रमुख पत्तन देश का 95% विदेशी व्यापार संचालित करते हैं।
🔹 भारत के पश्चिमी तट के प्रमुख पत्तन :-
- कांडला (दीनदयाल पत्तन) :- गुजरात में स्थित, स्वतंत्रता के बाद विकसित पहला पत्तन, यह एक ज्वारीय पत्तन है।
- मुंबई पत्तन :- महाराष्ट्र में स्थित, भारत का सबसे बड़ा प्राकृतिक पत्तन, विस्तृत व सुरक्षित पोताश्रय वाला।
- जवाहरलाल नेहरू पत्तन :- मुंबई के निकट विकसित, मुंबई पत्तन के दबाव को कम करने हेतु निर्मित प्रमुख पत्तन।
- मुरगांव पत्तन :- गोवा में स्थित, देश का प्रमुख लौह अयस्क निर्यातक पत्तन।
- न्यू मैंगलोर पत्तन :- कर्नाटक में स्थित, कुद्रेमुख खानों के लौह अयस्क निर्यात के लिए प्रसिद्ध।
- कोचीन पत्तन :- केरल में स्थित, लैगून के मुहाने पर बना प्राकृतिक पत्तन।
🔹 भारत के पूर्वी तट के प्रमुख पत्तन :-
- बी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन) पत्तन :- तमिलनाडु में स्थित, प्राकृतिक पोताश्रय वाला महत्वपूर्ण पत्तन।
- चेन्नई पत्तन :- तमिलनाडु में स्थित, भारत का प्राचीनतम कृत्रिम पत्तन।
- विशाखापत्तनम पत्तन :- आंध्र प्रदेश में स्थित, गहरा, सुरक्षित व प्राकृतिक पत्तन।
- पारादीप पत्तन :- ओडिशा में स्थित, लौह अयस्क निर्यात के लिए प्रसिद्ध पत्तन।
- कोलकाता पत्तन (श्यामाप्रसाद मुखर्जी पत्तन) :- पश्चिम बंगाल में स्थित, हुगली नदी पर बना प्रमुख नदीय पत्तन।
- हल्दिया पत्तन :- कोलकाता पत्तन के दबाव को कम करने हेतु विकसित सहायक पत्तन।
वायु परिवहन :-
वायु परिवहन सबसे तेज, आरामदायक एवं प्रतिष्ठित परिवहन का साधन है। यह ऊँचे पर्वतों, मरुस्थलों, घने जंगलों एवं अति दुर्गम क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है।
🔹 वायु परिवहन के प्रमुख लाभ :-
- लंबी दूरी की यात्रा को कम समय में संभव बनाता है।
- उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे दुर्गम एवं बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों को अधिक अभिगम्य बनाता है।
- आपातकालीन सेवाओं एवं आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत के मुख्य हवाई अड्डे :-
- राजा सांसी हवाई अड्डा :- अमृतसर (पंजाब) में स्थित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा।
- इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा :- नई दिल्ली में स्थित, भारत का अत्यंत व्यस्त हवाई अड्डा।
- छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा :- मुंबई (महाराष्ट्र) में स्थित प्रमुख हवाई अड्डा।
- मीनाम्बक्कम हवाई अड्डा :- चेन्नई (तमिलनाडु) में स्थित महत्वपूर्ण हवाई अड्डा।
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा :- कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में स्थित।
- राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा :- हैदराबाद (तेलंगाना) में स्थित प्रमुख हवाई अड्डा।
संचार सेवाएँ :-
संचार सेवाएँ मानव को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचना पहुँचाने में सहायता करती हैं। आधुनिक युग में संचार के माध्यमों से लंबी दूरी का संपर्क सरल और त्वरित हो गया है। संचार के प्रमुख साधनों में दूरदर्शन, रेडियो, समाचार पत्र, प्रेस एवं सिनेमा शामिल हैं।
डाक-संचार सेवाएँ :-
- भारत का डाक-संचार तंत्र विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है।
- यह पार्सल, निजी पत्र, तार आदि सेवाएँ प्रदान करता है।
- प्रथम श्रेणी डाक में कार्ड व लिफाफा बंद चिट्ठियाँ शामिल हैं, जिन्हें प्रायः वायु मार्ग से भेजा जाता है।
- द्वितीय श्रेणी डाक में रजिस्टर्ड पैकेट, किताबें, अखबार व पत्रिकाएँ आती हैं, जिन्हें स्थल व जल परिवहन द्वारा पहुँचाया जाता है।
- बड़े शहरों में शीघ्र वितरण हेतु छः डाक चैनल बनाए गए हैं – राजधानी, मेट्रो, ग्रीन, बिजनेस, भारी तथा दस्तावेज़ चैनल।
दूरसंचार सेवाएँ :-
- भारत एशिया में दूरसंचार के क्षेत्र में अग्रणी देश है।
- देश के दो-तिहाई से अधिक गाँव STD दूरभाष सेवा से जुड़े हैं।
- सरकार ने प्रत्येक गाँव में 24 घंटे STD सुविधा उपलब्ध कराई है।
- पूरे देश में STD दरों का एकीकरण किया गया है।
जन-संचार के प्रमुख साधन एवं महत्त्व :-
- जनसंचार लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ जागरूकता प्रदान करता है।
- इसके प्रमुख साधन रेडियो, दूरदर्शन, समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें और चलचित्र हैं।
- आकाशवाणी देशभर में विभिन्न भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित करती है।
- दूरदर्शन भारत का राष्ट्रीय टेलीविजन नेटवर्क है।
- भारत में लगभग 100 भाषाओं और बोलियों में समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं।
- हिंदी भाषा के समाचार पत्रों की संख्या सबसे अधिक है।
- भारत विश्व में सबसे अधिक फिल्में बनाने वाला देश है।
- सभी भारतीय व विदेशी फिल्मों का प्रमाणन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा किया जाता है।
व्यापार :-
दो या अधिक व्यक्तियों, राज्यों या देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान-प्रदान व्यापार कहलाता है।
बाज़ार :-
वस्तुओं का विनिमय जिस स्थान पर होता है, उसे बाजार कहते हैं।
व्यापार के प्रकार :-
- स्थानीय व्यापार :- शहरों, कस्बों व गाँवों में होने वाला व्यापार स्थानीय व्यापार कहलाता है।
- राज्यस्तरीय व्यापार :- दो या अधिक राज्यों के बीच का व्यापार राज्यस्तरीय व्यापार होता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार :- दो देशों के मध्य होने वाला व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है।
व्यापार के प्रमुख घटक :-
- आयात :- विदेशों से वस्तुओं या सेवाओं को खरीदकर देश के अंदर लाना।
- निर्यात :- देश में उत्पादित वस्तुओं या सेवाओं को विदेशों में बेचना।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकता क्यों है?
- संसाधनों का असमान वितरण :- विभिन्न देशों में संसाधनों की उपलब्धता अलग-अलग होती है।
- जलवायु में भिन्नता :- अलग जलवायु के कारण विभिन्न देशों में अलग-अलग वस्तुओं का उत्पादन होता है।
- तकनीकी विशेषज्ञता :- कुछ देश विशेष तकनीक एवं उद्योगों में अधिक दक्ष होते हैं।
- लागत में अंतर :- उत्पादन लागत में अंतर होने से वस्तुएँ कहीं सस्ती, कहीं महंगी होती हैं।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान :- व्यापार से देशों के बीच संस्कृति, विचार एवं जीवनशैली का प्रसार होता है।
भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार :-
- भारत के विश्व के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों से व्यापारिक संबंध हैं।
- भारत की प्रमुख निर्यातित वस्तुएँ – रत्न एवं आभूषण, रसायन व संबंधित उत्पाद, कृषि एवं कृषि-आधारित उत्पाद।
- भारत की प्रमुख आयातित वस्तुएँ – कच्चा पेट्रोलियम व पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, मशीनें व आधार धातुएँ।
- भारत सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है।
- आईटी सेवाओं से भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
पर्यटन :-
पिछले दो दशकों में भारत में पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पर्यटन के विकास में सरकारी पहल एवं बुनियादी ढांचे का योगदान महत्वपूर्ण है। पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु स्वदेश दर्शन 2.0, प्रसाद योजना, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी योजनाएँ लागू की गई हैं।
पर्यटन के लाभ :-
🔸 राष्ट्रीय स्तर पर लाभ :-
- राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा – देश के कोने-कोने के लोग एक-दूसरे की संस्कृति से रूबरू होते हैं।
- स्थानीय हस्तकला को प्रोत्साहन – हाथ से बने उत्पाद, मूर्तियाँ, वस्त्र, आभूषण।
- सांस्कृतिक उद्यमों को बढ़ावा – लोक नृत्य, संगीत, त्योहार, भोजन।
🔸 अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाभ :-
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान – विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति को समझते हैं।
- विरासत का प्रसार – भारत की प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य से दुनिया परिचित होती है।
- विदेशी मुद्रा अर्जन – पर्यटन से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
भारत में पर्यटन के प्रमुख प्रकार :-
- विरासत पर्यटन – ऐतिहासिक स्थलों पर आधारित।
- पारि-पर्यटन – प्राकृतिक पर्यावरण से जुड़ा।
- रोमांचकारी पर्यटन – साहसिक गतिविधियों पर आधारित।
- सांस्कृतिक पर्यटन – कला, परंपरा व उत्सवों से संबंधित।
- चिकित्सा पर्यटन – स्वास्थ्य सेवाओं हेतु यात्रा।
- व्यापारिक पर्यटन – व्यावसायिक उद्देश्यों हेतु यात्रा।
पर्यटन उद्योग की चुनौतियाँ :-
- सफाई व्यवस्था का अभाव
- पर्यटन स्थलों पर भीड़भाड़
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- सीमित बुनियादी ढाँचा (कुछ क्षेत्रों में)
- पर्यावरणीय क्षरण