अव्यय संस्कृत व्याकरण: संपूर्ण अध्ययन, नियम, प्रयोग व उदाहरण


अव्यय

लिंग, विभक्ति या वचन के कारण जिन शब्दों में किसी तरह का परिवर्तन न हो, वे अव्यय कहलाते हैं। नीचे कुछ अव्यय अर्थसहित दिए गए हैं। 

अथअनन्तर, बाद 
इदानीम्, सम्प्रति इस समय 
तदानीम् — उस समय 
पुरा  प्राचीन समय में 
इतस्ततः इधर-उधर 
अद्यआज 
श्वः आगामी कल 
ह्यः  बीता हुआ कल 
परश्वः— परसों 
अन्येद्युः  दूसरे दिन 
परेद्युः—दूसरे दिन 
पूर्वेद्युः  पिछले दिन 
पुरः  आगे 
पश्चात् — पीछे 
प्राक् — पहले
पार्श्वतः— दोनों बगल से
उभयतः दोनों तरफ
सर्वतः, अभितः सब तरफ
परितः  चारों तरफ
प्रतिदिनम् — हर रोज
सर्वदा सब समय
सदा — हमेशा
दिवा  दिन में
नक्तम् — रात में
सह, सार्द्धं, साकं साथ
ऋते — बिना
सायम् — साँझ
अत्र  यहाँ 
यत्र  जहाँ 
तत्र—वहाँ 
कुत्र—कहाँ 
यदा जब 
तदा तब 
कदा कब 
यथा—जैसे 
तथा — वैसे 
अपि — भी 
एव — ही 
सर्वत्र — सब जगह 
अन्यत्र — दूसरी जगह 
सद्यः  तत्क्षण  
नीचैः  नीचा   
उच्चैः — ऊँचा 
पृथक्—अलग  
कथम् — किस तरह  
इत्थम् — इस तरह        
यावत् — जब तक 
तावत् तब तक 
कुतः  कहाँ से 
तूष्णीम् — चुपचाप 
किञ्चित्  थोड़ा 
सर्वथा सब तरह 
अन्यथा— नहीं तो 
ओम, आम्—हाँ
प्रातः  भोर
उपरि — ऊपर
अधः — नीचे
ईषत्  थोड़ा
च, तथा, एवम् — और
अथवा, किंवा — या
मुहुः, भूयः, पुनः — फिर, बार-बार 
उपरिष्टात् — ऊपर से
अधस्तात् — नीचे से
अग्रतः  आगे से
पृष्ठतः  पीछे से
क्वचित्— कहीं
जातु — कभी
हन्त खेद, अफसोस
युगपत्  एक समय में, साथ-साथ
धिक्—धिक्कार
समया, निकषा — समीप
अतः  इसलिए
अग्निसात्— अग्नि के अधीन, दग्ध
शनैः शनैः  धीरे-धीरे
मा — नहीं, मत
हे, अरे, अयि — सम्बोधन
परुत्, परारि  गत वर्ष
मृषा, मिथ्या  झूठ 
असाम्प्रतम् — अनुचित 
सुष्ठु  सुन्दर 
अचिरात् — शीघ्र
चिरम्, चिरेण, चिराय, चिरात्  बहुत समय तक
सहसा  एकाएक
अकस्मात् — अचानक
सम्यक् — अच्छी तरह
प्रायः  शायद, बहुधा
बहुश:  बहुत बार
अद्यत्वे  अब, आजकल
अद्य प्रभृति  आज से
अन्तरेण  बिना
अन्ततोगत्वा— अन्त में
अवश्यम्  जरूर 
कृते — लिए 
स्वयम् — खुद
क्षणम्  थोड़ी देर 
चेत्, यदि  अगर, तो
बहिः  बाहर
अन्तः — भीतर
ऐषमः  इस वर्ष

अनुवाद

हमेशा सच बोलना चाहिए— सदा सत्यं वदेत्। 
राकेश इस समय खाता है— राकेशः इदानीं खादति । 
सोहन कल घर जाएगा  सोहनः श्वः गृहं गमिष्यति । 
रमेश कल पटना गया — रमेशः ह्यः पाटलिपुत्रम् अगच्छत्। 
पानी थोड़ा गरम है— जलम् ईषत् उष्णम् अस्ति। 
रात में दही नहीं खाना चाहिए— नक्तं दधि न खादेत् । 
झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए कदापि मिथ्या न वदेत् । 
तुम क्यों नहीं जाते हो ?  त्वम् कथम् न गच्छसि ? 
मैं सुबह टहलता हूँ — अहम् प्रातः भ्रमामि। 
वह बार-बार पढ़ता है  सः पुनः पुनः पठति । 
वे दूसरे दिन घर जाएँगे  ते अन्येद्युः गृहं गमिष्यन्ति ।
रमा चुपचाप उठकर चली गई— रमा तूष्णीम् उत्थाय अगच्छत्। 
क्या श्याम भी खेलता है ?  किं श्यामः अपि खेलति ? 
हाँ, श्याम भी खेलता है— आम्, श्यामः अपि खेलति । 
सब जगह सज्जन हैं— सर्वत्र सज्जनाः सन्ति ।

अभ्यास

1. संस्कृत में अनुवाद करें
वह हमेशा सच बोलता है। सीता इस समय पढ़ती है। लड़के इस समय क्या करते हैं? मैं कल घर जाऊँगा। वह कल पटना जाएगा। श्याम कल विद्यालय नहीं जाएगा। दिनेश कल मुंगेर गया। वह कल घर नहीं गया। दूध थोड़ा मीठा है। रात में नहीं घूमना चाहिए। तुम क्यों नहीं पढ़ते हो ? सुरेश घर कब जाएगा ? बालेश्वर कहाँ जाता है ? वह जहाँ जाएगा, वहाँ मैं भी जाऊँगा। रामायण बार-बार पढ़नी चाहिए ( पठेत्) । वे दूसरे दिन पढ़ेंगे। मोहन चुपचाप चला गया। सब जगह कीचड़ है। क्या राम भी पढ़ता है ? हाँ, राम भी पढ़ता है।

शब्द-संकेत—
पानी — जलम्, दही  दधि, पटना —  पाटलिपुत्रम्, दूध — दुग्धम्, मीठा— मधुरम्, कीचड़ — कर्दमः

2. निम्नलिखित अव्यय पदों का वाक्यों में प्रयोग करें।
पूर्वेद्युः, दिवा, सहसा, सुष्ठु, कथम्, अवश्यम्, प्रायः, मा, स्वयम्

3. निम्नलिखित शब्दों की द्वितीया विभक्ति के तीनों वचनों में रूप लिखें। 
मति, नदी, वारि, युष्मद्, तद् (पुं०)

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