आर्कर फिश कीड़ों पर क्यों थूकती है?

 आर्कर फिश कीड़ों पर क्यों थूकती है?

आर्कर फिश कीड़ों पर क्यों थूकती है?

👉 आर्कर फिश एक ऐसी मछली है, जो छोटे-छोटे समुद्री पौधों पर लटके कीड़ों पर थूक सकती है। इसका निशाना बहुत सटीक होता है और यह 1.8 मीटर की दूरी से कीड़ों और मक्खियों पर धूककर उन्हें पानी में गिरा देती है। पानी में गिरे कीड़ों पर यह तेजी से झपटती है और उन्हें खा जाती है। इन्हीं कीड़े-मकोड़ों को खाकर यह जिंदा रहती है। आकर फिश इतनी दूर तक किस प्रकार ठीक निशाने पर थूक पाती है, यह अपने आप में एक बड़ी रोचक प्रक्रिया है। इसके मुंह के ऊपरी हिस्से में एक लंबी नली जैसी संरचना होती है। यदि यह मछली अचानक ही अपने गिल ढक्कनों को बंद करती है, तो गिल कक्ष से दबाव के साथ पानी मुंह में आ जाता है। इसी समय जीभ ऊपर उठा दी जाती है, जिससे मुंह में बनी नली का आकार एक लंबी नलिका जैसा हो जाता है, जिससे पानी थूक के रूप में एक सीधी रेखा में बाहर निकल पड़ता है। आर्कर मछली का नाम इसके शिकार पकड़ने के इसी तरीके के आधार पर पड़ा है। आर्कर ताजे पानी की मछली है, जो टोक्सोटायडी परिवार में आती है। इस जाति की मछलियां खारे पानी में भी रह सकती हैं
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