गुर्दे को शरीर की छलनी क्यों कहते हैं?

 गुर्दे को शरीर की छलनी क्यों कहते हैं?

गुर्दे को शरीर की छलनी क्यों कहते हैं?

👉सभी रीढ़ वाले जीवों के शरीर में दो गुर्दे होते हैं। गुर्दो का मुख्य कार्य खून की गंदगी को शरीर से बाहर निकालना है। इसके अलावा गुर्दे शरीर में ज़रूरत से ज्यादा पानी की मात्रा हो जाने पर उसे मूत्र के रूप में बाहर निकालते रहते हैं। इस प्रकार वह रक्त को अधिक गाढ़ा या पतला नहीं होने देते और एक प्रकार की छलनी का काम करते हैं। यही  नहीं ये खून में हर चीज की मात्रा का संतुलन भी बनाए रखते हैं। कभी-कभी रक्त में चीनी, नमक और पानी की मात्रा अधिक हो जाती है, तो गुर्दे इन पदार्थों की अतिरिक्त मात्रा को शरीर से मूत्र के द्वारा बाहर निकाल देते हैं। शरीर की पाचन क्रिया और अन्य क्रियाओं के कारण शरीर में अमोनिया, यूरिक एसिड, कार्बन-डाई-आक्साइड और पानी बनता है।
यह पदार्थ शरीर के लिए जहर की तरह घातक होता हैं। अधिक मात्रा में एकत्रित होने पर इनसे मनुष्य की मृत्यु भी हो सकती है। गुर्दे शरीर की इस गंदगी को मूत्र के रूप में निकालते रहते हैं और शरीर को स्वस्थ रखते हैं। प्रत्येक गुर्दे में दस लाख के करीब कुंडलीदार नलियां होती हैं। हृदय से आया हुआ रक्त इन नलियों से होकर बहता है। ये नलियां छन्नियों की तरह काम करती हैं। करीब 1850 लीटर खून प्रतिदिन गुर्दो से होकर बहता है। इसमें से छानी गई गंदगी गुर्दो में से मूत्राशय थैली में जाती है। थैली के भरने पर मूत्र के साथ यह गंदगी भी बाहर निकल जाती है।
🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1