ध्वनि की पिच में परिवर्तन क्यों में होता है?

 ध्वनि की पिच में परिवर्तन क्यों में होता है?

ध्वनि की पिच में परिवर्तन क्यों में होता है?

👉 जब कोई रेलगाड़ी या अन्य कोई गाड़ी पास आती है, तो उसकी आवाज की पिच ऊंची प्रतीत होती है। यह गाड़ी जब दूर जाती है, तो उसकी आवाज की पिच कम होती हुई लगती है, किंतु वास्तव में दोनों स्थितियों में आवाज की पिच एक ही होती है? आइए जानें कि पिच का परिवर्तन क्यों होता है। इस तथ्य की विवेचना जोहान्न डापलर ने की थी, जिनके नाम पर इसे 'डापलर प्रभाव' कहा जाता है। इसके अनुसार ध्वनि, तरंगों के रूप में यात्रा करती है। ध्वनि की पिच इसकी आवृत्ति पर निर्भर करती है। आवृत्ति ध्वनितरंगों की उस संख्या को कहते हैं, जो प्रति सेकेंड कानों से टकराती है।
जब ध्वनि-स्रोत श्रोता की तरफ बढ़ रहा होता है, तो स्रोत से निकली प्रत्येक ध्वनि-तरंग को पहले निकली तरंग से कम रास्ता तय करना होता है। इस प्रकार प्रत्येक तरंग स्रोत के स्थिर होने की अपेक्षा श्रोता के कानों तक जल्दी पहुंच जाती है। परिणाम यह होता है कि तरंगों के बीच की दूरी कम होती जाती है, इसलिए इनकी आवृत्ति या पिच अनुपात में ऊंची होती जाती है। जैसे ही रेलगाड़ी श्रोता से आगे निकल जाती है अर्थात् दूर जाने लगती है, तो ध्वनि तरंगों के बीच की दूरी बढ़ने लगती है और सामान्य स्थिति के विपरीत प्रत्येक तरंग कुछ लंबी हो जाती है, जिससे पिच कम हो जाती है।
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