आंकड़ों का प्रबंधन किसे कहते हैं

 आंकड़ों का प्रबंधन किसे कहते हैं

आंकड़ों का प्रबंधन किसे कहते हैं


आँकड़ों का प्रबंधन

हम अपने आस-पास की जानकारियों को इकट्ठा कर उनके आँकड़ों को विभिन्न तरीकों से अपने पास रखते हैं। इसे इकट्ठा कर अपने कार्यों के अनुरूप इस्तेमाल करना ही आँकड़ा प्रबंधन कहलाता है।
ये विभिन्न प्रकार के होते हैं–
1. चित्रालेख (Pictograph)–इस विधि में संकेतों का प्रयोग करते हुए, आँकड़ों का
चित्रिय निरूपण किया जाता है।
2. दंड आलेख (Bar graphs)–दंड आलेख में प्रत्येक की चौड़ाई समान होती है तथा
वे एक-दूसरे से समान दूरी पर होते हैं। दंड की ऊंँचाई आँकड़ों के अनुसार समानुपातिक होती
है।
3. दोहरे दंड आलेख (Double Bar graphs)–दो समूहों की तुलना करने की
आवश्यकता होती है तो दोहरे दंड आलेख खींचे जाते हैं।

→ आँकड़े-एकत्रित की गई सूचनाएँ आँकड़े (Data) कहलाती हैं।

→ यथा प्राप्त आँकड़े-हमें उपलब्ध अधिकतर आँकड़े असंगठित रूप में होते हैं जिन्हें यथा प्राप्त आँकड़े अथवा कच्चे आँकड़े (Raw Data) कहते हैं।

→ किन्हीं भी आँकड़ों से अर्थपूर्ण निष्कर्ष निकालने के लिए उन्हें क्रमबद्ध रूप से संगठित करना आवश्यक होता है।

→ बारम्बारता-किसी प्रविष्टि की बारम्बारता (Frequency) वह संख्या है जितनी बार वह प्रविष्टि आँकड़ों में आती है।

→ वर्ग अन्तराल-यथाप्राप्त आँकड़ों की संख्या अधिक होने पर उनको समूह में सुव्यवस्थित किया जाता है, जिन्हें वर्ग अन्तराल (Class interval) कहते हैं।

→ बारम्बारता बंटन सारिणी-जिस सारणी में विभिन्न वर्ग अन्तरालों की आवृत्ति दिखाई जाती है, वह बारम्बारता सारणी कहलाती है।

→ वर्गीकृत आँकड़े-बारम्बारता बंटन सारणी द्वारा प्रस्तुत आँकड़े वर्गीकृत आँकड़े (Grouped Data) कहलाते हैं।

→ आयत चित्र (Histogram)-आयत चित्र एक प्रकार का दण्ड आलेख है जिसे आयत के रूप में बनाया जाता है । इसमें आधार अर्थात् क्षैतिज अक्ष पर वर्ग अन्तरालों को दर्शाया जाता है तथा दण्डों की लम्बाइयाँ वर्ग अन्तरालों की बारम्बारता दर्शाती हैं। इसमें दण्डों के बीच में कोई रिक्तता नहीं होती है।

→ वृत्त आलेख या पाई चार्ट (Circle Graph or Pie Chart)-वृत्त आलेख किसी सम्पूर्ण तथा उसके भागों में सम्बन्ध दर्शाता है सम्पूर्ण वृत्त को त्रिज्यखण्डों (Sectors) में विभक्त किया जाता है। प्रत्येक त्रिज्य खण्ड का साइज उसके द्वारा निरूपित सूचना के समानुपाती होता है।

→ वृत्त के केन्द्र पर पूरा कोण 360° होता है । वृत्त को घटकों के मान के अनुसार निम्न प्रकार विभाजित कर लिया जाता है
RBSE Class 8 Maths Notes Chapter 5 आँकड़ो का प्रबंधन 1

→ कुछ ऐसे प्रयोग होते हैं जिनमें परिणामों के आने के संयोग बराबर होते हैं।

→ यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment)-वह प्रयोग जिसमें परिणामों की ठीक-ठीक भविष्यवाणी पहले से नहीं की जा सकती, यादृच्छिक प्रयोग कहलाता है।

→ किसी प्रयोग के परिणाम सम सम्भावित या समप्रायिक (equally likely) कहलाते हैं, यदि उनके आने के संयोग बराबर हों।

→ एक घटना की प्रायिकता (Probability)
RBSE Class 8 Maths Notes Chapter 5 आँकड़ो का प्रबंधन 2
(जब परिणाम समप्रायिक हैं।)

→ किसी प्रयोग के एक या अधिक परिणामों से एक घटना बनती है।

→ संयोग और प्रायिकता वास्तविक जीवन से सम्बन्धित हैं।

 

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