विलियम चतुर्थ 1830-1837 ई. | William 4 1830-1837A.D.

 विलियम चतुर्थ 1830-1837 ई. | William 4 1830-1837A.D.

विलियम चतुर्थ 1830-1837 ई. | William 4 1830-1837A.D.

विलियम चतुर्थ 1830 ई. से 1837 ई. तक ब्रिटेन की गद्दी पर बैठा। जार्ज चतुर्थ के काल में जो सुधारों का प्रयत्न किया गया था उसे वह अपने शासनकाल में भी जारी रखा। जो सुधार हुए वे इस प्रकार हैं—
(1) पहला सुधार एक्ट 1832 ई.— विलियम चतुर्थ के शासनकाल में पार्लियामेण्ट की निर्वाचन पद्धति में सुधार लाने की बहुत जरूरत थी। ग्रामों की भारी आबादी की बजाय उजाड़ स्थानों से निरन्तर प्रतिनिधि भेजे जाते थे। बड़े-बड़े जमीदारों एवं धनाढ्य लोगों को ही मत देने का अधिकार था। देश की एक बड़ी संख्या वोट देने के अधिकार से वंचित थी। काफी प्रयत्नों के पश्चात लार्ड ग्रे के मंत्रित्वकाल में पहला सुधार का कानून 1832 ई. में पास हुआ। इस कानून के अनुरूप वहाँ से प्रतिनिधि भेजने का अधिकार अधिक जनसंख्या वाले नगरों को दे दिया गया। मतदाताओं की योग्यता की शर्तें ढीली करके प्रथम श्रेणी के लोग भी पार्लियामेण्ट में प्रवेश करने लगे। पार्लियामेण्ट अब पहले से अधिक लोगों की प्रतिनिधि सभा बन गयी।
(2) दासता का अन्त 1833 ई.— ऐलिजाबेथ के शासनकाल में अंग्रेजी नाविक सर जॉन हाकिन्स ने दासों के व्यापार को आरम्भ किया था। दासों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता था। अंगेजी समाज सुधारकों, उदाहरण के तौर पर विलबर फोर्स और क्लार्कसन ने इसके विरुद्ध आवाज उठाई। पहली बार दासों के स्वामियों ने भी इनका विरोध किया। 1880 ई. में दासों के व्यापार को कानून के विरुद्ध ठहराया गया, लेकिन पहले दासों को दासता की मुक्ति से छुड़वाने का कोई प्रत्यन न किया। अन्त में 1833 ई. में दासों की स्वतंत्रता का कानून पास किया गया। जिसके अनुसार सभी दासों को मुक्त कर दिया गया। यह कार्य विलबर फोर्स के माध्यम से ही हुआ।
(3) फैक्टरी एक्ट 1833 ई.— कारखानों में मालिक छोटे-छोटे बच्चों को नौकर रखकर उनसे कोई 12-12, 14-14 घण्टे काम लेते थे। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता था। ऐसी दशा को सुधारने हेतु 1833 ई. में एक कानून पास किया गया जिसमें कारखानों में नौकर रखा निषिद्ध ठहराया गया एवं 13 वर्ष से कम आयु के बालकों से 8 घण्टे, 18 वर्ष के युवकों एवं युवतियों से 10 घण्टे से अधिक काम न लेने की घोषणा की गई।
(4) शिक्षा का कानून 1833 ई.— सरकार ने इन बच्चों की शिक्षा की ओर ध्यान दिया। जल्दी ही उसी वर्ष पार्लियामेण्ट ने एक शिक्षा सम्बन्धी कानून पास किया जिसके अनुसार अंग्रेजी सरकार ने अब एक बड़ी (लगभग 20,000 पौंड) राशि प्रतिवर्ष शिक्षा के प्रसार हेतु व्यय करनी आरम्भ की।
(5) कानूनी सुधार, 1832 ई.— 1833 ई. में ब्रिटेन की विभिन्न बस्तियों में अपील सुनने हेतु प्रिवी कौंसिल और एक न्याय सम्बन्धी कमेटी का गठन किया गया। उपरान्त में यह कमेटी ब्रिटिश राज्य की अपीलें सुनने हेतु उच्चतम न्यायालय का कार्य करने लगी।
(6) निर्धनों के कानून में सुधार 1834 ई.— एलिजाबेथ प्रथम शासनकाल से ही गरीबों को संरक्षण प्रदान करने हेतु समय-समय पर कई कानून पास किए गए, परन्तु इन कानूनों में कुछ कमियाँ रह गई । इस कारण 1834 ई. में गरीबों से सम्बन्धि त कानून पास किया गया, जिसके अनुसार अंगहीन और बूढ़े लोगों को छोड़कर बाकी सभी प्रकार के गरीबों को सरकार की ओर से मदद देना बन्द कर दिया।
(7) नगर निगम कानून, 1885 ई.— नगर निगम कानून पास होने से पहले विभिन्न नगरों की कमेटियों के सदस्य जन साधारण के माध्यम से नहीं चुने जाते थे। मत देने का अधिकार धनाढ्य लोगों तक ही सीमित था। अतएव नगरों की सफाई एवं रोशनी आदि की कोई ठीक व्यवस्था नहीं होती थी। 1835 ई. के नगर निगम कानून के अनुरूप प्रत्येक करदाता को अपने नगर निगम को नगर पालिका के सदस्यों को चुनने का अधिकार प्रदान किया गया। नगरों की दशा को सुधारने एवं समाज सेवा के कार्य करने की ओर अब विशेष ध्यान दिया जाने लगा।
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