वाच्य हिंदी व्याकरण: परिभाषा, भेद और उदाहरण आसान भाषा में

 

वाच्य (VOICE)

आप जानते हैं कि संज्ञा के अपने लिंग, वचन तथा पुरुष होते हैं, लेकिन क्रिया यदि शुद्ध रूप में हो, तो उसका कोई अपना लिंग, वचन या पुरुष नहीं होता। उसके लिंग, वचन और पुरुष संज्ञा या सर्वनाम के लिंग, वचन और पुरुष पर निर्भर करते हैं । इस बात की विशेष जानकारी हमें 'वाच्य' के अध्ययन से मिलेगी ।

वाच्य— कर्ता, कर्म या भाव (क्रिया) के अनुसार क्रिया के रूप-परिवर्तन को वाच्य कहते हैं । दूसरे शब्दों में, वाक्य में किसकी प्रधानता है, अर्थात्क्रिया का लिंग, वचन और पुरुष, कर्ता के अनुसार होगा या कर्म के अनुसार अथवा स्वयं भाव के अनुसार, इसका बोध 'वाच्य' है, जैसे—

राम रोटी खाता है । कर्ता के अनुसार क्रिया — कर्ता की प्रधानता । 

यहाँ कर्ता के अनुसार क्रिया का अर्थ है—
राम (कर्ता) = खाता है (क्रिया) ।
राम —पुंलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष।
खाता है —पुंलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष।

राम द्वारा रोटी खाई गई । कर्म के अनुसार क्रियाकर्म की प्रधानता ।

यहाँ कर्म के अनुसार क्रिया का अर्थ है—
रोटी (कर्म) = खाई गई (क्रिया) ।
रोटी —स्त्रीलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष
खाई गई —स्त्रीलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष

सीता से चला नहीं जाता । भाव के अनुसार क्रिया – भाव की प्रधानता। 

यहाँ भाव (क्रिया) के अनुसार क्रिया का अर्थ है—
चला (भाव या क्रिया) = जाता (क्रिया) ।
चला —पुंलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष।
जाता —पुंलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष।

यहाँ वाच्य की संक्षिप्त चर्चा की गई है। अब इसके भेद पर विचार करें

वाच्य के भेद

वाच्य के तीन भेद हैं—
1. कर्तृवाच्य (Active Voice), 2. कर्मवाच्य (Passive Voice) और 3. भाववाच्य (Impersonal Voice)

1. कर्तृवाच्य—कर्ता के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो, तो उसे कर्तृवाच्य कहते हैं, जैसे—


यहाँ प्रयुक्त क्रियाएँ — खाता है, खाती है तथा खाते हैं, कर्ता के अनुसार आईं हैं, क्योंकि यहाँ कर्ता की प्रधानता है, अतः यह कर्तृवाच्य हुआ । इसमें कर्म की कोई महत्ता नहीं रहती है । अब कुछ और वाक्यों को देखें—
राम (रोटी/रोटियाँ / भात/संतरा/संतरे) खाता है । 
सीता (रोटी/रोटियाँ / भात/संतरा/संतरे) खाती है ।
लड़के (रोटी/रोटियाँ / भात/संतरा/संतरे) खाते हैं ।

2. कर्मवाच्य— कर्म के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो, तो उसे कर्मवाच्य कहते हैं, जैसे—


यहाँ प्रयुक्त क्रियाएँ — खाई गई, खाया गया तथा खाए गए, कर्म के अनुसार आई हैं, क्योंकि यहाँ कर्म की प्रधानता है, अतः यह कर्मवाच्य हुआ । इसमें कर्ता से कुछ मतलब नहीं है । कर्ता कुछ भी हो सकता है, जैसे
राम/सीता/लड़के/लड़कों/कुत्ते/मेरे/उसके द्वारा रोटी खाई गई ।
राम/सीता/लड़के/लड़कों/कुत्ते/मेरे/उसके द्वारा भात खाया गया ।
राम/सीता/लड़के/लड़कों/कुत्ते/मेरे/उसके द्वारा संतरे खाए गए।
राम/सीता/लड़के/लड़कों/कुत्ते/मेरे/उसके द्वारा नारंगियाँ खाई गईं ।

3. भाववाच्य— भाव (क्रिया) के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो, तो उसे भाववाच्य कहते हैं, जैसे—

कर्ता                            भाव (क्रिया)         क्रिया 
राम से/राम द्वारा             चला नहीं               जाता । 
सीता से/सीता द्वारा          चला नहीं               जाता । 
लड़कों से/लड़कों द्वारा     चला नहीं               जाता । 

उपर्युक्त सभी कर्ताओं के साथ सिर्फ 'जाता' क्रिया का प्रयोग हुआ है, अतः यह भाववाच्य हुआ । इसमें कर्म नहीं रहता और कर्ता से भी कुछ लेना-देना नहीं। सिर्फ भाव की प्रधानता रहती है, जैसे
मुझसे/उनसे/आपसे/कुत्ते से/कुत्तों से/लड़कियों से चला नहीं जाता । 
मुझसे/उनसे/आपसे/कुत्ते से/कुत्तों से/लड़कियों से सोया नहीं जाता ।

नोट— भाववाच्य में कर्म नहीं होता। इसमें अकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है । यहाँ प्रयुक्त 'चला' या 'सोया' शब्द–अकर्मक क्रिया है ।

संक्षेप में याद रखें—
कर्ता के अनुसार क्रिया कर्तृवाच्य ।
कर्म के अनुसार क्रिया —कर्मवाच्य।
भाव (क्रिया) के अनुसार क्रिया भाववाच्य ।

वाच्य-रूपांतर (परिवर्तन)

एक वाच्य से दूसरे वाच्य में परिवर्तन वाच्य परिवर्तन या रूपांतर कहलाता है।

ध्यान रखें—ऐसे परिवर्तन से वाक्य के अर्थ या क्रिया के काल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए, जैसे— 

कर्तृवाच्य                             कर्मवाच्य 
मैं रोटी खाता हूँ।                     मेरे द्वारा रोटी खाई जाती है। 
मैं रोटियाँ खाता हूँ ।                 मेरे द्वारा रोटियाँ खाई जाती हैं । 
गीता भात खाती है।                 गीता द्वारा भात खाया जाता है। 
तुम अंडे खाती हो ।                 तुम्हारे द्वारा अंडे खाए जाते हैं। 
आप अंडे खा रहे थे ।               आपके द्वारा अंडे खाए जा रहे थे। 
वह आम खाएगा                    उसके द्वारा आम खाया जाएगा । 
राम आम खा चुका है ।             राम द्वारा आम खाया जा चुका है 
वे मुझे अँगरेजी पढ़ाते थे।          उनके द्वारा मुझे अँगरेजी पढ़ाई जाती थी । 
उमेश ने महेश को पढ़ाया।        महेश उमेश द्वारा पढ़ाया गया। 
                                            या, उमेश द्वारा महेश को पढ़ाया गया। I

अभ्यास

1. वाच्य की परिभाषा दें और इसके भेदों को उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें । 

2. कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य किसे कहते हैं ? इन्हें सोदाहरण स्पष्ट करें । 

3. भाववाच्य किसे कहते हैं ? इसे सोदाहरण स्पष्ट करें ।

4. निम्नांकित प्रत्येक वाक्य के सामने कोष्ठकों में वाच्य-भेद लिखें—
(क) श्याम रोटी खाता है ।              (            )
(ख) श्याम द्वारा रोटी खाई गई ।      (            )
(ग) श्याम से चला नहीं जाता ।        (            )
(घ) उसके द्वारा भात खाया गया ।    (            )
(ङ) वह भात खाता है ।                  (            )
(च) बिल्ली मांस खाती है ।              (            )
(छ) सोहन द्वारा संतरे खाए गए।       (            )

5. दिए गए वाक्यों को कर्मवाच्य में लिखें—
(क) मैं नारंगियाँ खाता हूँ ।
(ख) आप अंडा खाती हैं ।
(ग) आप अंडे खा रहे हैं ।
(घ) मैं आपको अँगरेजी पढ़ा रहा हूँ ।
(ङ) शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं ।
(च) डॉक्टर रोगी को देख रहा है ।
(छ) वह कुत्ते को डंडे से पीट चुका था । 

6. इन वाक्यों को कर्तृवाच्य में लिखें— 
(क) राम द्वारा रोटी खाई जाती है । 
(ख) सीता द्वारा भात खाया जाता है ।
(ग) माँ द्वारा बच्चे खिलाए जा रहे हैं ।
(घ) आपके द्वारा मेरी सहायता की जाती है । 
(ङ) हमलोगों के द्वारा व्यायाम किया जाता है । 
(च) रीता द्वारा पत्र लिखा जा चुका है ।

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