लिंग: हिंदी व्याकरण में लिंग के प्रकार और पहचान का आसान तरीका
लिंग (GENDER)
'लिंग' का अर्थ होता है— चिह्न । चिह्न से तात्पर्य है— स्त्री-चिह्न या पुरुष-चिह्न। दूसरे शब्दों में, जिस शब्द से पुरुष- जाति या स्त्री-जाति का बोध हो उसे ‘लिंग' कहते हैं। 'लड़का' पुरुष- जाति का है और 'लड़की' स्त्रीजाति की। हिन्दी में सजीव के अलावा निर्जीव और भाव को भी पुरुष-जाति अथवा स्त्री- जाति में रखा गया है। जैसे—
सजीव निर्जीव भाव
पुरुष-जाति— लड़का मकान प्यार
स्त्री-जाति— लड़की इमारत मुहब्बत
पुरुष-जाति को पुंलिंग और स्त्री- जाति को स्त्रीलिंग कहते हैं।
लिंग के भेद
अँगरेजी में लिंग के चार भेद होते हैं, जबकि संस्कृत में तीन — स्त्रीलिंग, पुंलिंग और नपुंसक, लेकिन हिन्दी में लिंग के दो ही भेद हैं—
(1) पुंलिंग (Masculine Gender)
(2) स्त्रीलिंग (Feminine Gender )
1. पुंलिंग— जिस शब्द से पुरुष- जाति का बोध हो उसे पुंलिंग कहते हैं। जैसे—
सजीव (प्राणिवाचक) — राम, लड़का, घोड़ा, बैल, नाग आदि ।
निर्जीव (अप्राणिवाचक) — मकान, पत्र, नेत्र, ऊख, पवन आदि ।
भाव (अप्राणिवाचक) — प्रेम, बुढ़ापा, लड़कपन, सुख, दुःख आदि ।
2. स्त्रीलिंग— जिस शब्द से स्त्री- जाति का बोध हो उसे स्त्रीलिंग कहते हैं। जैसे—
सजीव (प्राणिवाचक) — सीता, लड़की, घोड़ी, गाय, नागिन आदि।
निर्जीव (अप्राणिवाचक) — इमारत, चिट्ठी, आँख, ईख, हवा आदि ।
भाव (अप्राणिवाचक) — सचाई, ईमानदारी, बनावट, सजावट आदि ।
लिंग-निर्णय
प्राणिवाचक शब्दों का लिंग-निर्णय करना आसान है, परन्तु अप्राणिवाचक का अपेक्षाकृत कठिन । लेकिन, बोलते या लिखते समय लिंगनिर्णय के नियमों को ध्यान में रखा जाए, तो धीरे-धीरे सारी कठिनाइयाँ दूर होती जाएँगी । लिंग-निर्णय के कुछ सामान्य नियम दिए जा रहे हैं, इन्हें समझने की कोशिश करें—
लिंग-निर्णय के सामान्य नियम
(1) मनुष्य और बड़े जीवों में पुंलिंग/स्त्रीलिंग की पहचान आसान है । जैसे—
पिता, पुत्र, सुनार, लोहार, हाथी, ऊँट, हंस आदि —– पुंलिंग ।
माता, पुत्री, सुनारिन, लोहारिन, हथनी, ऊँटनी, हंसी आदि — स्त्रीलिंग ।
(2) कुछ ऐसे जीव जिनमें पुंलिंग/स्त्रीलिंग की पहचान कठिन है, उन्हें या तो पुंलिंग मान लिया गया है या स्त्रीलिंग। जैसे—
झींगुर, चीता, भालू, गीदड़, घड़ियाल, भेड़िया, गिरगिट, साँप, खटमल, छछूंदर, बटेर, बिच्छू, मच्छर आदि — पुंलिंग ।
यदि इन संज्ञाओं में 'मादा' शब्द जोड़ दिया जाए, तो ये स्त्रीलिंग हो जाती हैं। जैसे—
मादा चीता, मादा भालू, मादा गीदड़ आदि — स्त्रीलिंग ।
कुछ जीव नर हों या मादा उन्हें स्त्रीलिंग मान लिया गया है । जैसे—
कोयल, मैना, गौरैया, मक्खी, मछली, लोमड़ी, गिलहरी आदि— स्त्रीलिंग |
(3) द्वंद्व समास की प्राणिवाचक संज्ञा पुंलिंग और अप्राणिवाचक संज्ञा अंतिम संज्ञा के अनुसार पुंलिंग / स्त्रीलिंग होती है। जैसे—
(क) प्राणिवाचक संज्ञाएँ— माँ-बाप, भाई-बहन, बहन-बहनोई, शिवपार्वती, सीता-राम, नर-नारी, राजा-रानी, गाय-बैल आदि — पुंलिंग ।
उदाहरण :
मेरे माँ-बाप अच्छे हैं ।
मेरे भाई-बहन लंबे हैं ।
(ख) अप्राणिवाचक संज्ञाएँ— अन्न-जल, घर-द्वार, नाक-कान, कपड़ालत्ता, चाल-चलन, इलायचीदाना आदि । (अंतिम संज्ञा पुंलिंग) — पुंलिंग ।
दूध-रोटी, दाल-रोटी, चमक-दमक आदि । (अंतिम संज्ञा स्त्रीलिंग) स्त्रीलिंग |
(4) तत्पुरुष संज्ञाओं (प्राणिवाचक / अप्राणिवाचक) के लिंग का निर्धारण अंतिम संज्ञा के लिंग के अनुसार होता है। जैसे—
राजकुमार, राजभवन, राजपुत्र, राजमार्ग, सेनापति, पूजाघर, किताबघर, राहखर्च, विद्यालय आदि (अंतिम संज्ञा पुंलिंग ) – पुंलिंग ।
राजकन्या, राजसत्ता, राजसभा, विधानसभा, लोकसभा, धर्मशाला, राष्ट्रभाषा, साहित्य परिषद् आदि (अंतिम संज्ञा स्त्रीलिंग)—स्त्रीलिंग ।
अपवाद : दल (पुंलिंग) — दलदल (स्त्रीलिंग)
देन (स्वीलिंग) — लेनदेन (पुंलिंग)
मणि (स्त्रीलिंग) — नीलमणि (पुंलिंग)
निधि (स्त्रीलिंग) — नीरनिधि, जलनिधि, क्षीरनिधि (पुंलिंग)
मूर्ति (स्त्रीलिंग) — त्रिमूर्ति (पुंलिंग)
(5) हिन्दी में कुछ ऐसी भी अप्राणिवाचक संज्ञाएँ हैं, जो एक अर्थ में तो पुंलिंग हैं, लेकिन दूसरे अर्थ में स्त्रीलिंग। जैसे—
हार (पुंलिंग) — यह मेरा हार (माला) है ।
हार (स्त्रीलिंग) — आपकी हार ( पराजय) हो गई ।
ऐसे कुछ शब्द नीचे दिए जा रहे हैं—
पुंलिंग स्त्रीलिंग
एका (एकता, मेल) एका (दुर्गा)
ओर (सिरा, छोर, किनारा) ओर (दिशा, पक्ष)
खान (सरदार, पठानों की उपाधि) खान (खदान)
चूक (खट्टा स्वाद) चूक (गलती, भूल)
जेब (पॉकेट) जेब (शोभा, सौन्दर्य)
ढील (केश का कीड़ा) ढील (सुस्ती, शिथिलता)
तारा (नक्षत्र) तारा (बालि की स्त्री)
बक (बगुला, कुबेर, बकासुर) बक (बकवाद)
(6) कभी-कभी समानार्थक शब्दों में भी लिंग-भेद पाए जाते हैं। जैसे—
पुंलिंग स्त्रीलिंग
ग्रन्थ पुस्तक, किताब
नेत्र आँख
केश अलक
प्रातः भोर
इंगित चितवन
प्यार मुहब्बत
शरीर देह, काया
मार्ग बाट
पवन वायु
पैर टाँग
दरिया नदी
आशीर्वाद आशिष
(7) जिन शब्दों के अंत में — आ, पा, आवा, आव, र्य, त्र, पन, त्व, र, ख, ना आदि प्रत्यय लगे हों वे प्रायः पुंलिंग होते हैं । जैसे—
आ — घेरा, फेरा, जोड़ा, तोड़ा, झगड़ा, रगड़ा आदि ।
पा — पुजापा, बुढ़ापा, मोटापा, रँड़ापा आदि ।
आवा — बुलावा, भुलावा, बहकावा, पछतावा, चढ़ावा आदि ।
आव — बहाव, जमाव, बचाव, टकराव, बदलाव, फैलाव आदि ।
र्य ― आर्य, अनार्य, शौर्य, धैर्य, वीर्य, आदि ।
त्र ― पत्र, पात्र, चित्र, मित्र, मंत्र, तंत्र आदि ।
पन ― बड़प्पन, छुटपन, बचपन, लड़कपन, अपनापन आदि ।
त्व ― पुरुषत्व, नारीत्व, सतीत्व, अपनत्व आदि ।
र ― प्रकार, प्रचार, सार, प्रसार, नगर, सागर आदि ।
ख ― शंख, सुख, नख, मुख, दुःख आदि ।
ना ― लिखना, पढ़ना, हँसना, रोना, दिखाना आदि ।
नोट : सूत्र याद रखें— “आपा आवा आवर्यत्रपनत्व रखना”।
(8) जिन शब्दों के अंत में— नी, री, ति, त, ली, आहट, आवट, इया, ई, आस, आई आदि प्रत्यय लगे हों वे प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं । जैसे—
नी — शैतानी, हैरानी, मनमानी, चलनी, चटनी आदि ।
री — छतरी, पटरी, गठरी, कटोरी, कोठरी आदि।
ति — क्षति, पूर्ति, जाति, समिति, रीति, शक्ति आदि ।
त — रंगत, राहत, चाहत, हजामत, बगावत, अदालत आदि ।
ली — ओखली, तितली, टिकली, डफली, मूँगफली आदि।
आहट — चिल्लाहट, चिकनाहट, बुलाहट, घबराहट आदि ।
आवट — लिखावट, मिलावट, गिरावट, थकावट, सजावट आदि ।
इया — खटिया, डलिया, डिबिया, टिकिया आदि ।
ई — गगरी, गठरी, गोली, झोली, नाली, प्याली, गरीबी, अमीरी आदि ।
आस — खटास, मिठास, प्यास, साँस आदि ।
आई — भलाई, बुराई, रुलाई, हँसाई, महँगाई आदि ।
नोट : सूत्र याद रखें—“नीरी तितली आहट आवट इयाई आस आई" ।
ऊपर बताए गए नियमों के कुछ-न-कुछ अपवाद हैं । अतः आपको एक आसान नियम बतलाया जा रहा है, वह है— एकवचन से बहुवचन बनाने के विभिन्न नियमों को ध्यान में रखकर लिंग-निर्णय करना ।
वचन पर आधारित लिंग-निर्णय
वचन-अध्याय में इसकी विस्तृत चर्चा की जाएगी। यहाँ संक्षेप में इस बात को समझें । बहुवचन के दो रूप होते हैं— स्वाभाविक बहुवचन और अस्वाभाविक बहुवचन । जैसे—
स्वाभाविक बहुवचन — पैसे, कुएँ, मालाएँ, गाड़ियाँ आदि ।
अस्वाभाविक बहुवचन — पैसों, कुओं, मालाओं, गाड़ियों आदि ।
लिंग-निर्णय के समय आपको सिर्फ स्वाभाविक बहुवचन के रूप को ध्यान में रखना है । आप इस आधार पर पुंलिंग या स्त्रीलिंग शब्दों की पहचान कर सकते हैं। लेकिन, हाँ! नीचे जितने नियम बताए जा रहे हैं, वे सभी अप्राणिवाचक संज्ञाओं से संबंधित हैं । अतः इन्हीं संज्ञाओं को इन नियमों पर परखें—
सूत्र द्वारा पुंलिंग शब्दों की पहचान
(1) सूत्र : (आ → ए); (आँ → एँ) = पुंलिंग
बहुवचन बनाने पर यदि अप्राणिवाचक संज्ञाओं के 'आ' – 'ए' में और ‘आँ’—‘एँ’ में बदल जाएँ, तो वे संज्ञाएँ प्रायः पुंलिंग होंगी। जैसे—
एकवचन (पुं.) — कमरा, पहिया, रोआँ, कुआँ आदि ।
बहुवचन (पुं.) — कमरे, पहिए, रोएँ, कुएँ आदि ।
ऐसी पुंलिंग संज्ञाएँ हैं— मेला, केला, ठेला, ढेला, कपड़ा, खपड़ा, जाड़ा, तारा, जूता, छाता, रास्ता, कुरता, अँगूठा, पराँठा, छींटा, खर्राटा, ताला, मसाला, आँवला, घोंसला, आईना, खजाना, ठिकाना, झरना, परदा, फंदा, बंदा, कंधा, तकिया, धनिया (पौधा), धुआँ आदि ।
(2) सूत्रः (इ/ई = इ/ई); (अ = अ) = पुंलिंग
कुछ द्रव्यवाचक, जातिवाचक या अप्राणिवाचक संज्ञाएँ जिनका रूप बहुवचन में नहीं बदलता वे प्रायः पुंलिंग होती हैं। जैसे—
एकवचन (पुं.) — जलधि, गिरि, दही, मोती, नख, संसार आदि ।
बहुवचन (पुं.) — जलधि, गिरि, दही, मोती, नख, संसार आदि ।
ऐसी पुंलिंग संज्ञाएँ हैं— पानी, जी, घी, जल, फल, छल, सुख, दुःख, मुख, पक्ष, वक्ष, लक्ष्य, भूषण, पोषण, हरण, आकार, विकार, उपहार, बहाव, उतराव, चढ़ाव, विनय, परिणय, अनुनय, पुरुषत्व, नारीत्व, सतीत्व, न्याय, अध्याय, अभिप्राय, पत्र, पात्र, चित्र आदि ।
सूत्र द्वारा स्त्रीलिंग शब्दों की पहचान
(1) सूत्र : (अ → एँ); (आ → आएँ); (इ/ई → इयाँ); (य → याँ) = स्त्रीलिंग
बहुवचन बनाने पर यदि अप्राणिवाचक संज्ञाओं के ('अ' का—एँ), ('आ' - इयाँ) तथा ('या' का—याँ) हो जाए, तो वे का — आएँ), ('इ' या 'ई' कासंज्ञाएँ प्रायः स्त्रीलिंग होंगी । जैसे—
एकवचन (स्त्री.) — बात, माला, तिथि, गाड़ी, पुड़िया आदि ।
बहुवचन (स्त्री.) — बातें, मालाएँ, तिथियाँ, गाड़ियाँ, पुड़ियाँ आदि ।
ऐसी स्त्रीलिंग संज्ञाएँ हैं— मेज, सेज, डाल, खाल, मूँछ, पूँछ, फसल, गजल, जान, खान, आफत, आदत, बंदूक, संदूक, घटना, सूचना, इच्छा, शिक्षा, हवा, दवा, लता, कविता, साड़ी, नारी, पकौड़ी, कचौड़ी, लड़ाई, कठिनाई, रीति, नीति, डिबिया, गुड़िया आदि ।
(2) सूत्र : (आ = आ) = स्त्रीलिंग
कुछ भाववाचक संज्ञाओं के 'आ' का 'आ' ही रह जाता है। उनका प्रायः बहुवचन नहीं होता। ऐसी संज्ञाएँ प्रायः स्त्रीलिंग होती हैं । जैसे—
आशा, निराशा, करुणा, कल्पना, याचना, घृणा, मित्रता, शत्रुता, एकता, अनेकता, दया, माया, छाया, लालिमा, कालिमा आदि ।
पुंलिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम
पुंलिंग शब्दों को स्त्रीलिंग में बदलने के लिए कुछ प्रत्ययों का सहारा लेना पड़ता है। इन प्रत्ययों को 'स्त्रीलिंग प्रत्यय' कहते हैं। ये हैं—
आ, आइन, आनी, इका, इन, इया, ई, णी, त्री, नी, मती, वती आदि ।
उदाहरण :
आ : छात्र—छात्रा; पूज्य—पूज्या; श्याम—श्यामा आदि ।
आइन : बनिया-बनियाइन; लाला—ललाइन आदि ।
आनी : देवर—देवरानी ; मेहतर—मेहतरानी आदि ।
इन : चमार—चमारिन; धोबी—धोबिन आदि ।
इया : कुत्ता—कुतिया; चूहा—चुहिया; बंदर—बंदरिया आदि ।
ई : किशोर—किशोरी ; पुत्र—पुत्री; काका—काकी आदि ।
णी : अनुहारी—अनुहारिणी; अभिलाषी—अभिलाषिणी आदि ।
त्री : कर्ता—कर्त्री; दाता—दात्री; नेता—नेत्री आदि ।
मती : बुद्धिमान्—बुद्धिमती; श्रीमान्श्री—मती आदि ।
वती : बलवान्ब—लवती; धनवान्—धनवती आदि ।
लेकिन, कुछ जातिवाचक संज्ञाओं के स्त्रीलिंग रूप बिना प्रत्यय के बनाए जाते हैं। जैसे—
पुंलिंग स्त्रीलिंग
बाप माँ
पिता माता
नर मादा (नारी)
मर्द औरत
पुरुष स्त्री
ससुर सास
भाई बहन
महाराजा महारानी
राजा रानी
सम्राट् सम्राज्ञी
बैल गाय
वर वधू
प्रायः पुंलिंग शब्दों में प्रत्यय लगाने से स्त्रीलिंग शब्द बनते हैं । ऐसे शब्दों की एक सूची नीचे दी जा रही है—
पुंलिंग स्त्रीलिंग
अंबष्ट अंबष्टा
अग्रज अग्रजा
अछूता अछूती
अध्यापक अध्यापिका
अनदेखा अनदेखी
अनब्याहा अनब्याही
अनभिज्ञ अनभिज्ञा
अनुचर अनुचरी
अनुज अनुजा
अन्नदाता अन्नदात्री
अन्वेषक अन्वेषिका
अन्वेषण अन्वेषणा
अन्वेषी अन्वेषिणी
अपराधी अपराधिनी
अबल अबला
अभागा अभागिनी
अभिनेता अभिनेत्री
अभिमानी अभिमानिनी
अभियुक्त अभियुक्ता
अभिलाषी अभिलाषिणी
अयोग्य अयोग्या
अलबेला अलबेली
अवरोधक अवरोधिका
अवरोधी अवरोधिनी
अविचारी अविचारिणी
अविवाहित अविवाहिता
अहंकारी अहंकारिणी
आचारवान् आचारवती
आचार्य आचार्या
आज्ञाकारी आज्ञाकारिणी
आज्ञापालक आज्ञापालिका
आत्मज आत्मजा
आदरणीय आदरणीया
आयुष्मान् आयुष्मती
आराधक आराधिका
आलोचक आलोचिका
इकलौता इकलौती
ईश्वर ईश्वरी
उचक्का उचक्की
उतावला उतावली
उत्तरदाता उत्तरदात्री
उत्पादक उत्पादिका
उदासीन उदासीना
उदित उदिता
उपकारक उपकारिका
उपकारी उपकारिणी
उपदेशक उपदेशिका
उपनेता उपनेत्री
उपभोक्ता उपभोक्त्री
उपयोगी उपयोगिनी
उपाध्याय उपाध्याया
उपासक उपासिका
ऊँट ऊँटनी
एकरूपी एकरूपिणी
एकहरा एकहरी
ओछा ओछी
ओजस्वी ओजस्विनी
ओझा ओझाइन
औघड़ औघड़न
कलंकित कलंकिता
कलंकी कलंकिनी
कलहप्रिय कलहप्रिया
कवि कवयित्री
कसाई कसाइन
कसैला कसैली
कामी कामिनी
कामुक कामुका
किन्नर किन्नरी
किशोर किशोरी
कुँआरा कुँआरी
कुँजड़ा कुँजड़ी
कुंजर कुंजरी
कुँवर कुँवरि
कुँवारा कुँवारी
कुक्कुर कुक्कुरी
कुढंगा कुढंगी
कुबड़ा कुबड़ी
कुमार कुमारी
कुम्हार कुम्हारिन
कुरूप कुरूपा
कुलक्षण कुलक्षणा
कुलदेव कुलदेवी
कुलवंत कुलवंती
कुलवान् कुलवती
कुविचारी कुविचारिणी
कोढ़ी कोढ़िन
कोमल कोमला
कौआ/कौवा कौवी
कौरव कौरवी
क्रूर क्रूरा
क्रोधी क्रोधिनी
क्षत्रिय क्षत्राणी
खत्री खतरानी
खाला (नीचा) खाली
खिलाड़ी खिलाड़िन
गँवार गँवारिन
गठीला गठीली
गड़ेरिया गड़ेरिन
गधा गधी
गलत गलती
गाढ़ा गाढ़ी
गायक गायिका
गीला गीली
गुंडा गुंडी
गुणवान् गुणवती
गुरु गुरुआनी
गूँगा गूँगी
ग्राम्य ग्राम्या
घट घटिका
घमंडी घमंडिन
घातक घातिका
चंचल चंचला
चंडाल चंडालिन
चकवा चकई
चचा/चाचा चची/चाची
चटकीला चटकीली
चटपटा चटपटी
चतुर चतुरा
चमकीला चमकीली
चमार चमारिन
चरित्रवान् चरित्रवती
चर्मकार चर्मकारी
चांडाल चांडालिन
चिकना चिकनी
चुप्पा चुप्पी
चुलबुला चुलबुली
चेला चेलिन
चोट्टा चोट्टी
चौबे चौबाइन
चौरंगा चौरंगी
छात्र छात्रा
छिछला छिछली
छिछोरा छिछोरी
जनाना (मर्द) जनानी
जादूगर जादूगरनी
जूठा जूठी
जेठ जेठानी
टोकरा टोकरी
ठंडा ठंडी
ठग ठगिन
ठठेरा ठठेरिन
ठाकुर ठकुराइन
डब्बा डिब्बी
डिब्बा डिबिया
तनय तनया
तपस्वी तपस्विनी
तांत्रिक तांत्रिका
ताऊ ताई
तिमंजिला तिमंजिली
तेली तेलिन
थोथा थोथी
दंडनीय दंडनीया
दयावान् दयावती
दरिद्र दरिद्रा
दर्जी दर्जिन
दर्शनीय दर्शनीया
दलित दलिता
दादा दादी
दानव दानवी
दानी दानिनी
दास दासी
दहिना/दाहिना दाहिनी
दिव्य दिव्या
दीवाना दीवानी
दुकेला दुकेली
दुःखदायक दुःखदायिका
दुखियारा दुखियारी
दुःखी दुःखिनी
दुगना दुगनी
दुबला दुबली
दुबे दुबाइन
दुमंजिला दुमंजिली
दुलारा दुलारी
दुश्चरित्र दुश्चरित्रा
देव देवी
देवर देवरानी
दोगला दोगली
दोहरा दोहरी
द्विभाषी द्विभाषिणी
धनवान् धनवती
धीमा धीमी
धोबी धोबिन
नन्हा नन्ही
नर्तक नर्तकी
नाई नाइन
नाटा नाटी
नाती नातिन
नायक नायिका
निकम्मा निकम्मी
निराला निराली
नेता नेत्री
नौकर नौकरानी
न्यारा न्यारी
पंचम पंचमी
पंडा पंडाइन
पंडित पंडिताइन
पंडुक पँडुकी
पड़पोता पड़पोती
पड़ोसी पड़ोसिन
पति पत्नी
पतित पतिता
परदादा परदादी
पराया पराई
परिचारक परिचारिका
परीक्षक परीक्षिका
परेवा परेर्ड
पागल, पगला पगली
पापी पापिनी
पिछला पिछली
पितामह पितामही
पिशाच पिशाची
पुतला पुतली
पुत्र पुत्री
पुत्रवान् पुत्रवती
पुरोहित पुरोहितानी
पूजित पूजिता
पूज्य पूज्या
पौत्र पौत्री
प्यारा प्यारी
प्रचारक प्रचारिणी
प्रदर्शक प्रदर्शिका
प्रपुत्र प्रपुत्री
प्रपौत्र प्रपौत्री
प्रहारक प्रहारिका
प्राणनाथ प्राणनाथा
प्राणप्यारा प्राणप्यारी
प्राणप्रिय प्राणप्रिया
प्राणेश्वर प्राणेश्वरी
प्रार्थी प्रार्थिनी
प्रिय प्रिया
प्रियतम प्रियतमा
प्रौढ़ प्रौढ़ा
फकीर फकीरनी
फतिंगा फतिंगी
फुफेरा फुफेरी
फुरतीला फुरतीली
बकरा बकरी
बछड़ा बछड़ी
बनिया बनियाइन
बलवान् बलवती
बायाँ बायीं/बाईं
बारहवाँ बारहवीं
बिल्ला बिल्ली
बैरागी बैरागिन
ब्रह्मचारी ब्रह्मचारिणी
ब्राह्मण ब्राह्मणी
भगत भगतिन
भतीजा भतीजी
भवदीय भवदीया
भाग्यवान् भाग्यवती
भिक्षु भिक्षुणी
भिखारी भिखारिन
भील भीलनी
मंत्री मंत्रिणी
मजदूर मजदूरनी
मयूर मयूरी
मल्लाह मल्लाहिन
महबूब महबूबा
महाराजा महारानी
महोदय महोदया
मातामह मातामही
माननीय माननीया
मालिक मालिकिन
माली मालिन
मीठा मीठी
मुद्दई मुद्दइया
मुरगा (मुर्गा) मुरगी (मुर्गी)
मुसलमान मुसलमानी
मृग मृगी
मेधावी मेधाविनी
मेहतर मेहतरानी
मोची मोचिनि
मोर मोरनी
मौसा मौसी
यादव यादवी
युवराज युवराज्ञी
युवा युवती
रँगीला रँगीली
रचयिता रचयित्री
राजा राज्ञी (रानी)
रीछ रीछी
रूपवान् रूपवती
रोगी रोगिनी
लाड़ला लाडली
लाला ललाइन
लुहार लुहारिन
लेखक लेखिका
लोहार लोहारिन
लौंडा लौंडिया, लौंडी
वयस्क वयस्का
वरदाता वरदात्री
विजयी विजयिनी
विधाता विधात्री
विधायक विधायिका
विरोधी विरोधिनी
विवाहित विवाहिता
विश्वासी विश्वासिनी
शक्तिमत्त्व शक्तिमत्ता
शक्तिमान् शक्तिमती
शर्मीला शर्मीली
शायर शायरा
शासक शासिका
शाहजादा शाहजादी
शिक्षित शिक्षिता
शिष्य शिष्या
शुभाकांक्षी शुभाकांक्षिणी
शूद्र शूद्रा
शेर शेरनी
श्याम श्यामा
श्रीमान् श्रीमती
श्रेष्ठ श्रेष्ठा
संन्यासी संन्यासिनी
संस्थापक संस्थापिका
संहारक संहारका
सभापति सभानेत्री
सर्प सर्पिणी
सहायक सहायिका
सहोदर सहोदरा
साँवला साँवली
साथी साथिन
सारस सारसी
साहब साहिबा
सिंह सिंहनी
सुंदर सुंदरी
सुनार सुनारिन
सुशील सुशीला
सुहावना सुहावनी
सूअर सूअरी
सूर सूरी
सूर्य सूर्या
सेठ सेठानी
सेवक सेविका
सौभाग्यवान् सौभाग्यवती
स्याना स्यानी
स्वयंसेवक स्वयंसेविका
स्वर्गवासी स्वर्गवासिनी
स्वर्गीय स्वर्गीया
स्वामी स्वामिनी
स्वार्थी स्वार्थिनी
हंस हंसी
हत्यारा हत्यारिन
हरिण हरिणी
हरिन हरिनी
हाथी हथनी
वाक्य-प्रयोग द्वारा लिंग-निर्णय
वाक्य-प्रयोग द्वारा लिंग-निर्णय की चार विधियाँ हैं—
1. क्रिया द्वारा लिंग-निर्णय—
गाय खाती है । (खाती — स्त्रीलिंग)
बैल खाता है । (खाता — पुंलिंग)
ध्यान दें—‘खाती' क्रिया शब्द से गाय के स्त्रीलिंग एवं 'खाता' से बैल के पुंलिंग होने का बोध होता है।
2. विशेषण द्वारा लिंग-निर्णय—
गाय उजली है । (उजली — स्त्रीलिंग)
बैल उजला है। (उजला — पुंलिंग)
उसी प्रकार— 'उजली' विशेषण शब्द से गाय के स्त्रीलिंग एवं 'उजला’ से बैल के पुंलिंग होने का बोध होता है ।
3. सर्वनाम द्वारा लिंग-निर्णय—
गाय मेरी है। (मेरी — स्त्रीलिंग)
बैल मेरा है । (मेरा — पुंलिंग)
यहाँ भी— 'मेरी' सर्वनाम शब्द से गाय के स्त्रीलिंग एवं 'मेरा' से बैल के पुंलिंग होने का बोध होता है ।
4. संबंधकारक की विभक्ति द्वारा लिंग-निर्णय—
मोहन की गाय कहाँ है ? (की — स्त्रीलिंग)
मोहन का बैल कहाँ है ? (का — पुंलिंग)
फिर देखें— 'की' विभक्ति-चिह्न से गाय के स्त्रीलिंग एवं 'का' से बैल के पुंलिंग होने का बोध होता है।
नोट : लिंग-निर्णय में वाक्य छोटे एवं सरल रखें। दूसरी बात, ऐसा वाक्य न बनाएँ, जिससे लिंग निर्णय स्पष्ट न हो । जैसे—
यह एक गाय है । वह एक बैल है।
मैं गाय को पसंद करती हूँ । बैल का रंग उजला है ।
वाक्य की दृष्टि से उपर्युक्त सारे वाक्य शुद्ध हैं, लेकिन लिंग-निर्णय की दृष्टि से अशुद्ध । ऐसा इसलिए कि उपर्युक्त वाक्यों से गाय /बैल पुंलिंग है या स्त्रीलिंग, स्पष्ट नहीं होता । अतः लिंग-निर्णय की दृष्टि से कुछ और वाक्यों को देखें—
(क) सामान्य शब्दों का लिंग निर्णय
पुंलिंग
अँगूठा—उसका अँगूठा मोटा है।
अंगूर — कुछ अंगूर खट्टे होते हैं।
अकाल—अकाल पड़ गया है।
अक्षत— अक्षत पड़े।
अक्षर—उसके अक्षर सुंदर हैं ।
आँसू—आँसू निकल पड़े।
आईना—यह आईना पुराना है ।
इत्र—इत्र महँगा हो गया है ।
ईंधन — ईंधन महँगा है ।
उत्तर—इसका उत्तर दो ।
ओंठ—मेरे ओंठ खुले ।
औजार— औजार पुराना है ।
कंगन—वह कंगन तुम्हारा है
कब्ज— उसे कब्ज हो गया है ।
कल्याण— आपका कल्याण हो !
गीत — ये गीत पुराने हैं।
गुस्सा — उसे गुस्सा आ गया ।
ग्रन्थ— यह पुराना ग्रन्थ है ।
घटाव—इसका घटाव सही है ।
घोंसला—घोंसला गिर गया था।
चंदन—चंदन महक उठा ।
चमत्कार—चमत्कार हो गया ।
चाकू—उसका चाकू तेज है ।
चिह्न—यह किसका चिह्न है ?
चौक—यह चौक नया है ।
छिद्र—छिद्र बंद हो गया है ।
जख्म—मेरे जख्म भर गए ।
ज्वर—उसका ज्वर उतर गया।
जवाब—आपका जवाब नहीं !
जूता —तुम्हारे जूते पुराने हैं।
झगड़ा — झगड़ा समाप्त हो गया।
टापू—यह बड़ा टापू है ।
टैक्स —घर का टैक्स जमा है ।
डंक—उसे डंक लग गया है।
डाक — डाक आ गया है ।
ढक्कन—ढक्कन खुल गया है।
ढोल — सुनो, ढोल बज रहा है ।
त्याग— आपका त्याग रंग लाया ।
त्योहार—त्योहार समाप्त हो गया ।
थन—गाय का थन बड़ा है ।
थान—यह साड़ी का थान है ।
दंड—उसे दंड दिया गया ।
दरबार—दरबार लगा हुआ है ।
दर्शन—उनके दर्शन हुए।
दही—दही खट्टा हो गया है।
दुःख — उसका दुःख समाप्त हुआ ।
दुपट्टा—यह दुपट्टा पुराना है ।
धनी—वह बात का धनी है ।
धर्म—आपका क्या धर्म है ?
ध्यान— आपका ध्यान कहाँ है ?
नयन—आपके नयन सुन्दर हैं ।
नीबू — नीबू खट्टा होता है ।
न्याय— उसे न्याय मिला ।
पक्षी — पक्षी उड़ रहे हैं।
पदार्थ — यह कौन-सा पदार्थ है ?
परिचय—अपना परिचय दें ।
पुरस्कार – मुझे पुरस्कार मिला ।
पौधा—पौधा बढ़ रहा है ?
प्याज — प्याज बहुत सस्ता है ।
प्राण—उसके प्राण निकल गए ।
फर्श—फर्श टूट गया है।
फेन—यह साबुन का फेन है ।
बरतन—ये बरतन महँगे हैं।
बाल—आपके बाल झड़ रहे हैं।
बीज — यह धान का बीज है ।
बुखार — मुझे बुखार हो गया है।
भाग्य—आपका भाग्य अच्छा है ।
यश—उसका यश फैल रहा है।
रंग—इसका रंग पक्का है ।
रिवाज—यह रिवाज पुराना है ।
रूप— गीता का रूप मोहक है।
लेख—आपका लेख अच्छा लगा ।
लोभ—इसका लोभ मत करो ।
शुल्क — इसका शुल्क माफ न होगा ।
शोक— पुत्र-शोक जाता नहीं है ।
सिपाही — एक सिपाही आ रहा है ।
सुहाग — आपका सुहाग अमर हो !
सौदा—माल का सौदा हो गया ।
स्वप्न — मेरा स्वप्न साकार हुआ ।
स्वागत—आपका स्वागत है ।
हल्ला — बहुत हल्ला हो रहा है।
होंठ—उसके होंठ खुले ।
होश—आपके होश उड़ गए।
हौसला— मेरा हौसला बढ़ा है।
स्त्रीलिंग
अँतड़ी—अँतड़ी सड़ गई है ?
अक्ल—उनकी अक्ल मारी गई है।
अभिलाषा—मेरी अभिलाषा पूर्ण हुई।
आग—घर में आग लग गई थी।
आज्ञा—बड़ों की आज्ञा मानो ।
आदत—व्यायाम की आदत डालो।
ईद—ईद कब होगी ?
उँगली— उँगली कट गई ।
ऊँचाई—इसकी ऊँचाई कम है।
एकता—हमारी एकता बनी रहेगी ।
ऐनक—यह ऐनक पुरानी है ।
ओखली—यह ओखली मेरी है।
ओस—ओस गिर रही है ।
कीमत—इसकी कीमत कम है ?
खाई—यह गहरी खाई है ।
खाट — मेरी खाट टूट गई है।
खुजली —तुम्हें खुजली हो गई है।
गंध—यह कैसी गंध है ?
गरदन—उसकी गरदन में दर्द है ।
गुड्डी — मेरी गुड्डी उड़ रही है।
गोद—माँ की गोद में सो जाओ ।
घास— घास सूख गई है।
चट्टान—चट्टान टूट गई ।
चाँदी—चाँदी सस्ती हो गई है।
चाल—उसकी चाल ठीक है ।
चीख—एक चीख सुनाई पड़ी ।
चेचक — उसे चेचक हो गई ।
छत—छत कमजोर थी ।
छेनी—छेनी टेढ़ी हो गई ।
जंग—जंग समाप्त हो गई है ।
जमीन—यह मेरी जमीन है।
जान—उसकी जान बच गई।
जेली— जेली बहुत मीठी है ।
झील — यह गहरी झील है।
टाँग—उसकी टाँग टूट गई ।
टोकरी— मेरी टोकरी दे दो।
ठंढ—ठंढ बढ़ गई है।
डोर—पतंग की डोर छूट गई।
ढोलक—ढोलक बज रही है।
तलवार—मेरी तलवार नई है ।
त्वचा—आपकी त्वचा कोमल है ।
थकावट—मुझे थकावट हो रही है।
थाली—मेरी थाली पुरानी है ।
दिशा—यह कौन-सी दिशा है ?
दुनिया — दुनिया बहुत बड़ी है ।
दौलत — दौलत खत्म हो जाती है।
धातु — यह धातु महँगी है ।
नाक—उनकी नाक कट गई ।
नाभि — तुम्हारी नाभि में घाव है।
पटरी—पटरी उखड़ गई है।
पतंग — तुम्हारी पतंग नई है।
पायल — मेरी पायल पुरानी है ।
प्रार्थना — ईश्वर की प्रार्थना करो ।
फुलवारी — मेरी फुलवारी देखो।
बंदूक—उसकी बंदूक बिक गई ।
बदबू — इससे बदबू आ रही है।
बाढ़ — बाढ़ आ गई है।
बिजली—बिजली चली गई ।
भीड़—भीड़ बढ़ रही है ।
भौंह — आपकी भौंहें मोटी हैं।
मखमल—मखमल मुलायम होती है।
मृत्यु — उसकी मृत्यु नहीं हुई है।
मेहनत—आपकी मेहनत रंग लाई ।
यात्रा—आपकी यात्रा सुखद हो ।
रसीद — रसीद फट गई थी ।
लज्जा—तुम्हें लज्जा नहीं आई ?
लता—पेड़ की लता को मत तोड़ो।
लागत—इसकी क्या लागत है ?
लू—आज लू चल रही है।
विजय— मेरी विजय होगी ।
शर्म — तुम्हें शर्म नहीं आती है ?
संगति — बुरी संगति से दूर रहो ।
संतान — तुम मेरी संतान हो ।
सड़क—सड़क चौड़ी हो गई ।
सराय—सराय बंद हो चुकी है।
सेना — भारत की सेना बहुत मजबूत है ।
सौंफ—सौंफ लाभदायक होती है ।
हँसी — मुझे हँसी आ गई थी ।
हड़ताल—हड़ताल खत्म हो गई ?
हाट — हाट लगी है ।
(ख) सामासिक शब्दों का लिंग-निर्णय
पुंलिंग
बहन-बहनोई—मेरे बहन-बहनोई अच्छे हैं।
भाई-बहन—उसके भाई-बहन अब आ रहे हैं।
सीता-राम—सीता राम वन चले गए ।
चाल-चलन—उसके चाल-चलन बहुत अच्छे हैं।
राजा-रानी—राजा-रानी अच्छे थे।
गाय-बैल—गाय-बैल बिक गए ।
अन्न-जल—मेरे अन्न-जल ग्रहण करें ।
घर-द्वार—घर-द्वार बाढ़ में बह गए ।
नाक-कान—उसके नाक-कान कट गए ।
कपड़ा-लत्ता—उसके कपड़े-लत्ते गंदे हैं।
स्त्रीलिंग
दूध-रोटी—दूध-रोटी ठंडी हो गई।
चमक-दमक—जरा उसकी चमक-दमक तो देखो ।
राजकन्या—राजकन्या आ रही है ।
राजसत्ता—राजसत्ता चली गई ।
विधानसभा—विधानसभा भंग हो गई ।
लोकसभा—लोकसभा अब दो दिनों तक चलेगी।
धर्मशाला—यह धर्मशाला पुरानी है ।
राष्ट्रभाषा—हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी है ।
साहित्यपरिषद्—साहित्यपरिषद् अब बंद हो गई है।
खेल-समिति—खेल- समिति अब भंग हो गई है।
अपवाद:
(क) दल (पुं.) — आपके दल का क्या नाम है ?
दलदल (स्त्री.) — अरे! यह कैसी दलदल है ?
(ख) देन (स्त्री.) — मेरी प्रगति आपकी देन है ।
लेन-देन (पुं०) — आपका लेन-देन ठीक है ।
लिंग-कोश (पुंलिंग शब्द)
स्वर—अंक, अंकगणित, अंकुर, अंग, अंगुल, अँगूठा, अंगूर, अंजाम, अंडा, अंत, अंतरिक्ष, अंदाज, अंधकार, अंधड़, अंधापन, अँधेरा, अकाल, अक्षत, अक्षर, अखबार, अखरोट, अखाड़ा, अचार, अणु, अतिथि, अतीत, अत्याचार, अदरक, अधिकार, अध्ययन, अध्यापन, अनपच, अनर्थ, अनाज, अनादर, अनार, अनुताप, अनुनय, अनुमान, अनुवाद, अनुशासन, अनुसार, अन्न, अन्याय, अन्वेषण, अपमान, अपराध, अपवाद, अपहरण, अबरक, अबीर, अभाव, अभिनय, अभिमान, अभ्यास, अमर, अमरूद, अमृत, अम्ल, अर्थ, अवगुण, अवतार, अवसर, अशुभ, अश्रु, अस्त्र । आँगन, आँचल, आँव, आँवला, आँसू, आईना, आकलन, आकार, आकाश, आक्रोश, आग्नेयास्त्र, आग्रह, आघात, आचरण, आचार, आटा, आडंबर, आतंक, आदर, आदर्श, आदि, आदेश, आधार, ऑपरेशन, आभूषण, आम, आयात, आरंभ, आराम, आरोप, आलिंगन, आलू, आवारापन, आविष्कार, आवेदन, आशीर्वाद, आश्रय, आश्विन, आषाढ़, आसन, आसमान, आसरा, आहार, आह्लाद, आह्वान । इंच, इंजन, इंतकाल, इंतजाम, इंतजार, इंसाफ, इंस्पेक्टर, इकतारा (एकतारा), इतिहास, इत्र, इनकार, इनफ्लुएंजा, इनसान, इनाम, इम्तिहान, इरादा, इलजाम, इलाज, इशारा, इश्क, इसपात, इसलाम, इस्तीफा, इस्तेमाल । ईंधन, ईमान, ईश, ईश्वर, ईसा । उच्चारण, उजाला, उत्तर, उत्पात, उत्सव, उत्साह, उदय, उद्घाटन, उद्योग (उद्योग), उधार, उपचार, उपदेश, उपद्रव, उपन्यास, उपयोग, उपहार, उपाय, उबटन, उलटफेर, उल्लंघन, उल्लास, उल्लू। ऊँट, ऊख, ऊन, ऊसर । ऋग्वेद, ऋषभ, ऋषि । एकड़, एकवचन, एक्का, एहसान । ऐब, ऐश; ओंठ, ओज, ओल, ओला। औजार, औसत ।
क-वर्ग—कंकड़, कंगन, कंघा, कंठ, कंधा, कंबल, कक्ष, कचनार, कछार, कण, कत्था, कथन, कदम (कदंब ), कद्दू, कपट, कपड़ा, कपूर, कफ, कफन, कब्ज, कमल, कमाल, करेला, कर्म, कलंक, कलश, कलेजा, कष्ट, कागज, काजल, काजू, काठ, कान, कानून, काम, कारखाना, कारण, कारतूस, कार्य, कार्यक्रम, किनारा, कीट, कीड़ा, कुंडल, कुंदन, कुआँ, कुल, कुष्ठ, कूड़ा, कूल, केंचुआ, केंद्र, केश, केसर, कैदी, कोट, कोड़ा, कोढ़, कोना, कोयला, कोल्हू, कोस, कोहनूर, कौशल, क्रम, क्षण, क्षय, क्षार, क्षितिज, क्षेत्र । खंड, खँडहर, खग, खजाना, खजूर, खटमल, खड़, खत, खतरा, खपड़ा, खप्पर, खयाल, खरबूजा, खराद, खर्च, खानदान, खानपान, खीरा, खुर, खुलासा, खून, खेल, ख्वाब । गंगाजल, गजरा, गणित, गद्य (गद्य), गन्ना, गर्जन, गर्भ, गला, गलीज, गल्प, गान, गायन, गाल, गिलास, गीत, गुड़, गुण, गुब्बारा, गुलाम, गुस्सा, गूलर, गेहूँ, गोंद, गोदाम, गोबर, गोश्त, गौरव, ग्रह, ग्रहण । घटक, घटाव, घड़ियाल, घपला, घराना, घर्षण, घाघ, घाट, घाटा, घात, घाव, घी, घुंघरू, घुटना, घुन, घूँघट, घूँट, घेरा, घोंसला, घोटाला ।
च-वर्ग—चंगुल, चंदन, चंदा, चंद्र, चंद्रमा, चक्कर, चक्षु, चना, चप्पू, चबूतरा, चबेना, चमगादड़, चमड़ा, चम्मच, चयन, चरखा, चरण, चरित्र, चलचित्र, चश्मा, चाक, चाबुक, चारा, चावल, चिराग, चिह्न, चुंबक, चुंबन, चुनाव, चूतड़, चूना, चूरा, चूल्हा, चेहरा, चोकर, चौका । छक्का, छछूंदर, छज्जा, छत्ता, छर्रा, छल्ला, छार, छिड़काव, छिद्र, छिलका, छींका, छींटा, छोर। जंगल, जँगला, जंतु, जन्म, जबड़ा, जरदा, जल, जलपान, जलसा, जलावन, जवाब, जश्न, जहर, जहाज, जादू, जामुन, जाल, जिगर, जीरा, जीव, जीवन, जुआ, जुकाम, जुर्म, जुलूस, जुल्म, जूता, जूस, जेल, जोड़, जोर, जोश, जौ, ज्वार, ज्वारभाटा, ज्ञान। झंखाड़, झटका, झाग, झाडू, झींगा, झींगुर, झुंड, झुकाव, झुमका, झुरमुट, झूठ, झूमर, झूला, झोंका ।
ट-वर्ग—टका, टनाटन, टब, टमटम, टमाटर, टाइप, टाइपराइटर, टापू, टावर, टिकट, टिफिन, टीन, टेनिस, टेबुल, टेलीविजन, टैंक, टैक्स, टोप, ट्रंक । ठप्पा, ठाट, ठीका, ठूंठ, ठूंठ, ठेका, ठौर । डंक, डंका, डग, डमरू, डर, डाका, डाकू, डिब्बा, डेक, ड्रम, ड्रामा, ड्रेस । ढंग, ढकोसला, ढक्कन, ढर्रा, ढाँचा, ढाबा, ढिंढोरा, ढोंग, ढोल ।
त-वर्ग—तंबू, तकिया, तख्त, तट, तत्त्व, तन, तना, तप, तबला, तबादला, तमाकू, तमाचा, तमाशा, तरबूज, तराजू, तरीका, तल, तहलका, तापमान, तार, ताल, तालाब, तिकड़म, तिनका, तिरस्कार, तिल, तिलक, तिलकुट, तीर्थ, तूफान, तेजाब, तेल, त्राण, त्राता, त्रिभुज, त्रिशूल । थंब/ थंभ, थप्पड़, थर्मामीटर, थाक, थान, थाना, थापा, थियेटर, थूक, थूथन, थोक, थोबड़ा। दंगा, दंड, दफ्तर, दबाव, दम, दमा, दर, दरद/दर्द, दरबारी, दरवाजा, दर्जन, दर्पण, दर्शक, दलहन, दशक, दशमलव, दस्त, दस्ताना, दही, दहेज, दाँत, दाखिला, दान, दाना, दाम, दावा, दिमाग, दिवस, दीपक, दीया, दुःख, देहात, दोष, द्रव, द्रव्य, द्वंद्व (द्वंद्व), द्वार, द्वीप (द्वीप) । धंधा, धक्का, धड़ा, धतूरा, धन, धनिया (पौधा), धनुष, धन्यवाद, धब्बा, धमाका, धरातल, धर्म, धान, धाम, धिक्कार, धुआँ, धूमकेतु, धूम्रपान, धूलक, धैर्य, धोखा, ध्यान, ध्वज । नंबर, नकद/नक्द, नक्शा, नखरा, नग, नगर, नगीना, नफा, नमक, नमस्कार, नमूना, नयन, नरक, नर्म, नल, नवाब, नशा, नाखून, नाटक, नाद, नारियल, नाश, निकाह, निबंध, निमंत्रण, नियम, निर्माण, निवास, निवेदन, निशान, नीबू, नीम, नृत्य, नेत्र, नोट, न्याय, न्योता।
प-वर्ग—पंख, पंडाल, पट, पड़ोस, पतन, पता, पत्थर, पत्र, पथ, पद, पदार्थ, पपीता, परचा, परदा, पराग, परिचय, परिवार, परिश्रम, पर्व, पवन, पसीना, पाँव, पाचन, पाजामा, पाठ, पान, पापड़, पारा, पार्क, पार्सल, पिंजरा, पिल्लू, पीतल, पीपल, पुआ (पूआ), पुरस्कार, पुल, पुलाव, पुष्प, पृष्ठ, पेट, पेट्रोल, पेड़ा, पेपर, पैर, पोस्टकार्ड, पौधा, प्याज, प्यार, प्रकाश, प्रचार, प्रण, प्रताप, प्रदर्शन, प्रभाव, प्रमाण, प्रयत्न, प्रयास, प्रयोग, प्रवेश, प्रश्न, प्रसार, प्रस्ताव, प्रहार, प्रारंभ, प्रेम, प्रेस, प्लास्टर, प्लेग, प्लेट । फंदा, फगुआ, फन, फफोला, फरसा, फरेब, फर्ज, फर्श, फल, फागुन, फाटक, फार्म, फीता, फील्ड, फूल, फूलदान, फूस, फेन, फेफड़ा, फेल, फैशन, फैसला, फोटो, फ्राक, फ्रेम । बँटवारा, बंदरगाह, बगीचा, बगुला, बचपन, बचाव, बटोही, बड़प्पन, बदन, बम, बयान, बरगद, बराती, बलिदान, बस्ता, बहाव, बहुमत, बाँस, बाज, बाजरा, बाजा, बाजार, बादल, बादाम, बिंदु, बिछौना, बिस्कुट, बीज, बीमा, बुखार, बेर, बेल, बेलन, बोर्ड । भंडा, भंडार, भँवर, भजन, भत्ता, भय, भरोसा, भवन, भस्म, भाग, भाग्य, भाड़ा, भात, भार, भुजिया, भुवन, भूकंप, भूगोल, भूत, भेद, भोज, भोजन, भोर, भोलापन, भौंरा, भ्रम । मंजन, मंडप, मंत्र, मंदिर, मकबरा, मकान, मक्खन, मजा, मटर, मठ, मधु, मन, मरहम, मरीज, मलेरिया, मस्तक, महल, महीना, मांस, माघ, माथा, मार्ग, मास, मिस्तरी, मुँह, मुँहासा, मुकदमा, मुकुट, मुख, मुरब्बा, मुहावरा, मुहूर्त, मेघ, मेला, मैच, मैदान, मोम, मौका।
अन्तःस्थ—यंत्र, यकीन, यक्ष्मा, यजुर्वेद, यज्ञ, यतन, यम, यश, याक, यात्री, यान, युग, युद्ध, युद्धपोत, योग, योगफल, योगी, यौगिक, यौवन रंग, रक्त (रक्त), रक्षाबंधन, रथ, रफू, रबड़, रहस्य, राग, राज, राजतंत्र, राष्ट्र, रास्ता, रिश्ता, रुठ, रुपया, रूप, रेडियो, रेफ, रोंगटा । लंगूर, लंच, लंबोदर, लकवा, लगाव, लट्टू, लट्ठा, लड्डू, लतीफा, लवण, लहँगा, लहसुन, लाभ, लालच, लावारिस, लिंग, लिफाफा, लिवर, लीडर, लेख, लेखन, लेनदेन, लेप, लोभ, लोहिया । वंश, वकील, वक्त, वजन, वज्र, वतन, वदन, वध, वन, वरदान, वर्ग, वर्ण, वर्णन, वर्तन, वर्ष, वसंत, वस्त्र, वाक्य, वाण, वातावरण, वादा, वाद्य (वाद्य), वायुमंडल, वाहन, विकास, विचार, विज्ञान, विनाश, विमान, विवाद, विवाह, विश्राम, विश्वास, विष, विषय, विसर्जन, वृक्ष, वेग, वेतन, वोट, व्यय, व्यवहार, व्याज, व्यापार, व्यायाम ।
ऊष्म—शंख, शक, शकरकंद, शत्रु, शब्द, शरबत, शरीर, शलगम, शाप, शास्त्र, शिकार, शिखर, शिलान्यास, शिष्टाचार, शीर्षक, शीशम, शीशा, शुतुरमुर्ग, शुल्क, शेष, शोला, शौक, श्राद्ध, श्रृंगार, श्लोक, श्वेत; षंड, षटक, षट्चक्र, षडंग, षड्ज, षड्यंत्र, षड्स, षण्मुख, षाडव । संकेत, संकोच, संग, संगीत, संग्रह, संघटन, संतोष, संदेश, संदेह, संबंध, संवाद, सखुआ, सत्कार, सत्तू (सत्तू), सन्, सपना, सफर, सबक, समर्थन, समाचार, समारोह, सम्मेलन, सर्कस, सलाद, सवेरा, सहयोग, सहारा, सागर, साबुन, सारांश, सावन, साहस, सिंदूर, सिंधु, सिक्का, सितार, सिनेमा, सिर, सींग, सीप, सुख, सुत, सुबूत, सुहाग, सूप, सेतु, सेब, सेहरा, सोफा, सौंदर्य, स्कूल, स्टीमर, स्टेशन, स्थान, स्नान, स्मरण, स्वप्न, स्वर्ग, स्वागत, स्वाद, स्वास्थ्य | हंगामा, हंस, हक, हकदार, हजम, हजूम, हठ, हड्डा, हड़कंप, हथियार, हथौड़ा, हमला, हरज, हरिकीर्तन, हर्ष, हल, हलकापन, हलवा, हलाहल, हल्ला, हवन, हवाईजहाज, हस्तकौशल।
(स्त्रीलिंग शब्द)
स्वर—अँगड़ाई, अँगुली, अग्नि, अठन्नी, अड़चन, अदालत, अधीनता, अनबन, अनुमति, अपेक्षा, अफवाह, अफीम, अभिरुचि, अभिलाषा, अरहर, अलमारी, अवज्ञा, अवधि, अवनि, अवस्था, अशरफी/अशर्फी, अष्टमी, असभ्यता, असलियत, असुविधा, अस्थिरता, अहिंसा । आँख, आँड़ी, आँत, आँधी, आग, आजादी, आज्ञा, आतशबाजी, आत्मा, आदत, आनबान, आपत्ति, आफत, आबादी, आय, आरजू, आरी, आलपीन, आलोचना, आवश्यकता, आवाज, आशा, आसानी, आहट, आहुति । इंद्रा, इकन्नी, इकाई, इजाजत, इज्जत, इनसानियत, इमली, इमारत, इलायची, इस्तिरी । ईंट, ईर्षा । उँगली, उखली (ओखली), उछलकूद, उठान, उठा बैठी, उड़ान, उतराई, उथल-पुथल, उदारता, उदासीनता, उधेड़बुन, उन्नति, उपज, उपमा, उपयोगिता, उपलब्धि, उपस्थिति, उपाधि, उपेक्षा, उम्मीद, उम्र, उल्का, उस्तादी। ऊँचाई, ऊष्मा । ऋक्, ऋचा, ऋजुता, ऋतु । एँड़ी, एकता, एकन्नी, एकाग्रता, एड़ी। ऐंठ, ऐंठन, ऐनक, ऐयाशी । ओखली, ओझाई, ओट, ओढ़नी, ओर, ओषधि, ओस । औलाद, औषध ।
क-वर्ग—–कंघी, ककड़ी, कक्षा, कचकच, कचौड़ी /कचौरी, कटाई, कठिनाई, कठोरता, कड़ी, कढ़ी, कतार, कथा, कपास, कबड्डी, कब्जियत, कब्र, कमर, कमाई, कमीज, करतूत, करामात, कलम, कला, कलाई, कल्पना, कविता, कसम, कस्तूरी, कहानी, कहावत, काँख, काँच, काँटी, कॉपी, किताब, किरण, किशमिश, किश्ती, किस्मत, कीमत, कील, कुंजी, कुटी, कुदाल, कुलफी, कुल्हाड़ी, कुशल, कुशलता, कूँची, कृपा, कैंची, कैद, कोठरी, कोठी, कोशिश, क्यारी, क्रूरता, क्षमता । खटाई, खटिया, खड़ाऊँ, खपड़ी, खबर, खराबी, खरीद, खरोंच, खलबली, खाँसी, खाई, खाज, खाट, खाद, खाल, खिचड़ी, खिड़की, खीर, खील, खुजली, खुदकुशी, खुराक, खुशखबरी, खुशबू, खुशामद, खुशी, खूँटी, खूबसूरती, खूबी, खेती, खोज, खोट, खोपड़ी । गंगा, गंजी, गंध, गंधक, गठिया, गदा, गरमी, गरीबी, गलती, गली, गहराई, गाँठ, गाजर, गाली, गिनती, गिरफ्तारी, गुठली, गुड्डी, गुफा, गुमटी, गुलामी, गुल्ली, गूँज, गेंद, गोद, गोभी । घड़ी, घाटी, घास, घिन, घिरनी, घुँघनी, घुड़दौड़, घुड़साल, घुसपैठ, घूँटी, घूस, घृणा, घोषणा ।
च-वर्ग—चटनी, चटाई, चट्टान, चढ़ाई, चतुराई, चपाती, चप्पल, चमक, चमेली, चरबी, चर्चा, चलती, चवन्नी, चाँदनी, चाँदी, चाट, चादर, चाबी, चाय, चाल, चालाकी, चाशनी, चाह, चिंता, चिकनाई, चिकित्सा, चिट्ठी, चिड़िया, चिता, चिनगारी, चिमनी, चीज, चीनी, चुगली, चुटकी, चुनौती, चेचक, चेतावनी, चोंच, चोरी, चौकी। छछिया, छड़, छड़ी, छत, छतरी, छपाई, छमछम, छवि, छाँट, छाँह, छाती, छानबीन, छाप, छाया, छाली, छिपकली, छींक, छुआछूत, छुट्टी, छुरी, छूट, छेनी । जंग, जंजीर, जई, जगह, जटा, जड़ी, जनता, जनसंख्या, जबान, जमानत, जमीन, जम्हाई, जय, जलेबी, जल्दी, जवानी, जाँघ, जाजिम, जाति, जादूगरी, जान, जासूसी, जिंदगी, जिद, जिल्द, जिहवा (जिह्वा), जीत, जीभ, जीवनी, जीविका, जुड़पित्ती, जुदाई, जूँ, जूठन, जूही, जोंक, जोड़ी, जोत, ज्यादती, ज्योति, ज्वार (फसल), ज्वाला, ज्ञानेंद्रिय । झंझट, झड़प, झड़ी, झमक, झमझम, झरझर, झलक, झलझल, झाँकी, झाड़, झाड़न, झाड़ी, झालर, झिझक, झिड़की, झींसी, झील, झुग्गी, झोंपड़ी, झोली ।
ट-वर्ग—टँकाई, टंकी, टकटकी, टक्कर, टट्टी, टन, टनटन, टहनी, टहल, टाँक, टाँग, टाँय-टाँय, टाप, टाली, टिकली, टिकिया, टिड्डी, टिपकारी, टिप्पणी, टीप, टीपटाप, टुकड़ी, टेंट, टोकरी, टोपी, टोली, टोह, ट्राम। ठंड, ठंडक, ठकठक, ठगी, ठटरी, ठनठन, ठमक, ठसक, ठाकुरबाड़ी, ठान, ठुमकी, ठुमरी, ठेपी, ठेस, ठोकर । डंडी, डकार, डकैती, डगर, डपट, डफली, डलिया, डली, डाँट, डाक्टरी, डाढ़ी, डायरी, डाल, डाली, डाह, डिबिया, डींग, डीठ, डुगडुगी, डुबकी, डोंड़ी, डोर, डोरी, डोलची, डोली, ड्योढ़ी। ढकनी, ढलक, ढलाई, ढाल, ढिठाई, ढिबरी, ढिलाई, ढील, ढेंकी, ढेरी, ढोंढ़ी, ढोलक ।
त-वर्ग—तकदीर, तकली, तकलीफ, तबीयत, तमन्ना, तमीज, तरंग, तरकारी, तरकीब, तरक्की, तरफ, तरह, तलवार, तलाश, तलाशी, तश्तरी, तसवीर, तह, ताँत, ताकत, ताजगी, ताड़ी, तारीख, तारीफ, तालिका, तितली, तिथि, तिपाई, तिलौरी, तीली, तीव्रता, तुला, तैयारी, तोंद, तोप, तोशक, तौल, तौलिया, त्रयी, त्रुटि, त्वचा । थकान, थकावट, थपकी, थाप, थाली, थाह, थेंथरई, थैली । दगा, दया, दयालुता, दरार, दरिद्रता, दरी, दवा, दवात, दशा, दहाड़, दाढ़ी, दारू, दाल, दालमोठ, दावत, दिखावट, दिनचर्या, दिल्लगी, दिशा, दीवार, दीवाली, दुकान, दुनिया, दुर्गंध, दुर्घटना, दुर्दशा, दुर्बलता, दुविधा, दुश्मनी, दुष्टता, दूब, दूरबीन, दूरी, दृष्टि, देगची, देन, देर, देह, दोपहर, दोस्ती, दौड़, दौलत । धड़कन, धनतेरस, धमक, धमकी, धमनी, धरती, धाँधली, धाक, धातु, धारणा, धारा, धुंध, धुकधुकी, धुन, धुरी, धुलाई, धूमधाम, धूर्तता, धूल, धोखेबाजी, धोती, धौंस, ध्वजा, ध्वनि । नकल, नक्काशी, नग्नता, नजर, नत्थी, नथ, नदी, नपुंसकता, नफरत, नब्ज, नमाज, नमी, नर्मी, नली, नवाबी, नस, नहर, नाँद, नाक, नाड़ी, नाप, नाभि, नारंगी, नाली, नाव, नाशपाती, नासिका, निंदा, निगरानी, निगाह, निद्रा, निमकी, नियुक्ति, निराशा, निर्धनता, निष्ठा, नींद, नीचता, नीति, नीयत, नोक, नोक-झोंक, नौकरी, नौका ।
प-वर्ग—पंक्ति, पंचमी, पंचायत, पगड़ी, पट्टी, पढ़ाई, पतझड़, पतवार, पताका, पत्तल, पत्ती/पत्ती, पत्रिका, पनडुब्बी, पन्नी, पपड़ी, परछाईं, परत, परवाह, पराजय, परात, परिभाषा, परीक्षा, परेड, परेशानी, पलक, पसली, पहचान, पहुँच, पहेली, पाजेब, पाठशाला, पाबंदी, पायल, पार्टी, पालकी, पालिश, पीढ़ी, पीब, पीर, पुकार, पुचकार, पुतली, पुलिस, पुस्तक, पूँछ, पूँजी, पूजा, पूर्ति, पेचिश, पेटी, पेंसिल, पैदावार, पैरवी, पोशाक, पोस्ट, प्यास, प्रकृति, प्रगति, प्रजा, प्रतिज्ञा, प्रतिभा, प्रतियोगिता, प्रतिष्ठा, प्रतीक्षा, प्रथा, प्रदर्शनी, प्रधानता, प्रशंसा, प्रश्नोत्तरी, प्रसन्नता, प्राप्ति, प्रार्थना । फटकार, फफूँदी, फसल, फाँक, फाँसी, फाइल, फिक्र, फिटकिरी, फीस, फुंसी, फुनगी, फुफकार, फुरती, फुलझड़ी, फुलवारी, फुलौरी, फुस, फुहार, फूँक, फूट, फूलगोभी, फैक्टरी, फौज । बंडी, बंदगोभी, बंदूक, बकबक, बगल, बचत, बड़ाई, बदबू, बदहजमी, बधाई, बनावट, बयार, बरफी, बरबादी, बरसात, बरात, बर्फ, बवासीर, बस्ती, बहस, बहार, बहाली, बाँसुरी, बाँह, बाइबिल, बागबानी, बाजी, बाढ़, बात, बातचीत, बाधा, बारिश, बारी, बारूद, बिंदी, बिक्री, बिजली, बिदाई, बुकनी, बुद्धि, बुनाई, बुनावट, बुराई, बूँद बूँदी, बेंच, बैठक, बोतल, बोलचाल, बोली। भक्ति, भगदड़, भनक, भरती, भरमार, भलाई, भाँग, भाप, भाषा, भिंडी, भिक्षा, भिड़ंत, भुजा, भूख, भूमि, भूमिका, भूल, भेंट, भेड़, भौंह / भौं । मंजिल, मंजूरी, मखमल, मचान, मजबूरी, मटक, मदद, मदिरा, मधुरता, ममता, मरम्मत, मलमल, मशाल, मशीन, मसजिद, मस्ती, महक, महामारी, माँग, मात्रा, मारपीट, माला, मालिश, मिट्टी, मिठास, मिरगी, मिर्च, मिलावट, मीनार, मुलाकात, मुश्किल, मुसकराहट, मुसीबत, मूँग, मूँछ, मूठ, मूर्ति, मूली, मृत्यु, मेज, मेथी, मेहँदी, मेहनत, मैना, मोच, मोमबत्ती, मौत I
अन्तःस्थ—यमुना, यात्रा, याद, यादगार, याददाश्त, युक्ति, योग्यता, योजना । रंगत, रंजिश, रकम, रक्षा, रग, रगड़, रचना, रजाई, रसना, रसीद, राई, राख, रात, राशि, राह, रिपोर्ट, रिश्वत, रिहाई, रीढ़, रीति, रुई, रुकावट, रुचि, रूढ़ि, रूह, रेखा, रेजगी, रेती, रेल, रेवड़ी, रेस, रोक, रोकथाम, रोशनी, रौनक । लंका, लंबाई, लक्ष्मी, लगन, लगाम, लज्जा, लड़ाई, लत, लता, लथाड़, लपट, लपेट, ललकार, लहर, लाइट, लाइन, लात, लार, लालटेन, लालसा, लालिमा, लिखावट, लिपि, लीची, लीद, लीला, लुंगी, लुगदी, लुटिया, लू, लूट, लेई, लेखनी, लोटपोट, लोमड़ी, लौ। वंदना, वकालत, वनस्पति, वर्षा, वस्तु, वाणी, वायु, विजय, विदाई, विद्या, विद्युत्, विद्वता, विनती, विनय, विपत्ति, विभक्ति, विशेषता, वीणा, वीरता, वृद्धि, वृष्टि, वेदना, वेला (समय), वोटिंग, व्यवस्था, व्याख्या।
ऊष्म—शंका, शक्कर (शकर), शक्ति, शताब्दी, शत्रुता, शपथ, शरण, शराफत, शराब, शर्ट, शर्त, शहनाई, शांति, शाखा, शादी, शान, शाम, शिकायत, शिक्षा, शिष्टता, शीघ्रता, शीशी, शोभा, श्रद्धा, श्रेणी, श्रेष्ठता। षट्तिला (माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी), षट्पदी, षष्ठी, षोडश-कला, षोडशमातृका, षोडशी । संख्या, संज्ञा, संधि, संध्या, संपत्ति, संसद, सचाई, सजावट, सड़क, सफलता, सफाई, सफेदी, सब्जी, सभा, समस्या, समाधि, समानता, समाप्ति, सरकार, सरसों, सर्दी, सलाई, सलाह, सवारी, ससुराल, सहायता, साइकिल, साधना, सामग्री, सिंचाई, सिटकिनी, सीढ़ी, सीमा, सुंदरता, सुपारी, सुबह, सुरक्षा, सुराही, सूँड़, सूई, सूचना, सूरत, सेंध, सेना, सेम, सेवा, सैर, सोंठ, सौंफ, सौगंद, सौगंध, स्थापना । हँसी, हंसी, हड़ताल, हथकड़ी, हड्डी, हत्या, हथेली, हथौड़ी, हरियाली, हलचल, हलदी, हवा, हवालात, हाजत, हाट, हाथापाई, हानि, हालत, हिंसा, हिचक, हिचकी, हिम्मत, हींग, हेराफेरी, हैसियत, होड़, होली।
अभ्यास
1. हिन्दी में लिंग के कितने भेद हैं ? इन्हें उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें ।
2. इनमें से स्त्रीलिंग एवं पुंलिंग शब्दों को चुनकर लिखें—
कोयल, खटमल, गीदड़, गिलहरी, गिरगिट, गौरैया, घड़ियाल, चीता, छछूंदर, झींगुर, बटेर, बिच्छू, भालू, भेड़िया, मक्खी, मच्छर, मछली, मैना, लोमड़ी।
3. इनमें से स्त्रीलिंग एवं पुंलिंग शब्दों को चुनकर अलग-अलग लिखें—
अक्ल, अनाज, अवस्था, आँसू, इच्छा, इमारत, इत्र, उत्तर, उपज, एकता, ओंठ, ओस, कंघी, कंगन, खटिया, गंजी, घटा, चमक, जंग, जन्म, टमटम, टैक्स, ठूंठ, डकार, ढंग, ढाल, तन, थान, दंगल, दोष, पक्षी, फसल, बचपन, बंदूक, भौंह, भजन, मंच, रक्त, लता, लक्ष्य, शरीर, सुबह, हड़ताल।
4. निम्नांकित सामासिक शब्दों को पुंलिंग- स्त्रीलिंग श्रेणी में चुनकर लिखें—
माँ-बाप, अन्न-जल, दूध-रोटी, चमक-दमक, राजभवन, राजकन्या, शिवपार्वती, नाक-कान, कपड़ा-लत्ता, लेन-देन, चाल-चलन, राजपुत्र, राजमार्ग, राजसत्ता, राजसभा, दलदल, राधा-कृष्ण, इलायचीदाना, पूजाघर, राहखर्च, विद्यालय, लोकसभा, नीलमणि, नीरनिधि, धर्मशाला।
5. कोष्ठकों में से सही शब्द / शब्दों को चुनकर वाक्यों को पूरा करें—
(क) ...... बहन-बहनोई ...... हैं । (मेरा, मेरी, मेरे, लंबा, लंबी, लंबे)(ख) मेरे देश ....... राजा-रानी ....... हैं। (का, के, की, अच्छा, अच्छी, अच्छे) ।(ग) ...... नाक-कान कट ....... । (तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे, गया, गए, गई)(घ) मुझे दूध-रोटी ....... है। (अच्छा लगता, अच्छी लगती, अच्छे लगते)(ङ) राजकुमारी आ ...... ? I (रहा है, रही है, रहे हैं)(च) यह पाठशाला बहुत ....... है। (पुरानी, पुराने, पुराना)(छ) ...... नेत्र ...... । (मेरा, मेरी, मेरे, खुला, खुली, खुले)
6. इनमें से पुंलिंग और स्त्रीलिंग शब्दों को चुनकर लिखें—
किताब, ग्रन्थ, आँख, नेत्र, प्रातः, भोर, शरीर, काया, बाट, मार्ग, पवन, वायु, टाँग, पैर, दरिया, नदिया, आशिष, आशीर्वाद ।
7. किन्हीं पाँच स्त्रीलिंग प्रत्ययों को लिखें और उनके सहयोग से किन्हीं पाँच पुंलिंग शब्दों का परिवर्तन स्त्रीलिंग रूप में करें ।
8. निम्नांकित शब्दों के स्त्रीलिंग रूप लिखें—
अंबष्ट, अनुकर्ता, अनुरागी, अभिलाषी, आचार्य, आयुष्मान्, ईश्वर, उपदेशक, ओझा, औघड़, कुम्हार, खत्री, गायक, चहेता, चांडाल, छठा, जादूगर, टोकरा, ठठेरा, ठाकुर, दयावान्, नर्तक, पुरखा, फुफेरा, बछड़ा, भगत, भाट, युवराज, लाड़ला, लुहार, वनवासी, श्रेष्ठ, संस्थापक, सर्प, सुंदर, हरिण, हरिन ।
9. 'गाय' और 'बैल' शब्दों का लिंग निर्णय वाक्य प्रयोग द्वारा अलग-अलग—
क्रिया, विशेषण, सर्वनाम और संबंधकारक की विभक्ति द्वारा करें ।
10. निम्नांकित शब्दों का लिंग निर्णय वाक्य प्रयोग द्वारा अलग-अलग करें—
अँगूठा, अक्षत, अक्ल, कंगन, कथा, गीत, चाँदी, टमटम, तप, दौलत, पंक्ति, पक्षी, बदबू, बाल, भौंह, भँवर, मोम, यश, रंग, लू, लौंग, शर्म, सराय ।
11. निम्नांकित शब्दों का लिंग निर्णय वाक्य प्रयोग द्वारा अलग-अलग करें—
माँ-बाप, अन्न-जल, चाल-चलन, राजकन्या, ग्रन्थ, पुस्तक, नेत्र, आँख, पैर, टाँग, पवन, वायु ।
12. इन शब्दों के विपरीत लिंग लिखकर वाक्य में अलग-अलग प्रयोग करें—
(क) पिता, पुत्री, बेटा, नेत्री, गायक, मालिन, पुरुष, घोड़ी, वर, नागिन ।(ख) झींगुर, कोयल, चीता, मैना, बटेर, लोमड़ी, मच्छर, मक्खी, गिलहरी ।(ग) अभिनेत्री, उजाली, ओझा, कुम्हारिन, क्षत्रिय, चंचला, ताई, दास, मृग।
13. लिंग-निर्णय की दृष्टि से निम्नांकित वाक्य अशुद्ध हैं, इन्हें शुद्ध करें—
(क) उसे कब्ज हो गई हैं। यह झूठा बात है ।(ख) ईंधन महँगी है। ईद कब होगा ?(ग) उँगली कट गया है। इसकी उत्तर दो ।(घ) इसका क्या कीमत है । वह कंगन तुम्हारी है ।(ङ) तुम्हें खुजली हो गया है। ये गीत पुरानी है ।(च) चमत्कार हो गई। छत कमजोर था ।(छ) जंग समाप्त हो गया है । झगड़ा समाप्त हो गई है।(ज) यह गहरा झील है । मेरा टोकरी दे दो ।(झ) दुनिया बहुत बड़ा है । मेरा स्वप्न साकार हुआ।(ञ) मेरी बहन-बहनोई लम्बी है। विधानसभा भंग हो गई है ।
14. वाक्यों में रेखांकित शब्दों के विपरीत लिंग लिखकर वाक्य बनाएँ—
(क) मेरे पिताजी एक शिक्षक हैं ।(ख) उसका भाई एक सरकारी सेवक है ।(ग) यह मादा चीता सात महीने की है।(घ) लड़का लड़की बन गया था ।(ङ) इस कुतिया से वह बिल्ली बहुत डरती है।
15. 'कवि' का स्त्रीलिंग रूप होगा—
(i) कवियत्री(ii) कवियानी(iii) कवियित्री(iv) कवयित्री
16. निम्न में कौन-सा पुंलिंग है ?
(i) छात्रा(ii) शिष्या(iii) चौधरी(iv) बहन
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