संस्कृत व्याकरण पुरुष | परिभाषा, भेद एवं प्रयोग उदाहरण सहित

 

पुरुष

वक्ता उत्तम पुरुष, श्रोता ( सुननेवाला) मध्यम पुरुष तथा जिसके बारे में कहा जाए उसे प्रथम (अन्य ) पुरुष कहते हैं।

अर्थात्, 'अस्मद्' (मैं) शब्द उत्तम पुरुष (फस्ट पर्सन), 'युष्मद्' (तू) शब्द मध्यम पुरुष (सेकंड पर्सन) तथा इन दोनों के अतिरिक्त संसार के जितने शब्द हैं वे सब प्रथम (अन्य ) पुरुष (थर्ड पर्सन) कहलाते हैं।

यहाँ यह ध्यान रखना चाहिए कि संस्कृत का प्रथम पुरुष, जिसे अन्य पुरुष भी कहा जाता है, अँगरेजी का 'फस्ट पर्सन' नहीं है। शब्दार्थ साम्य से प्रायः ऐसा भ्रम उत्पन्न हो जाता है। नीचे इसे और भी स्पष्ट किया जा रहा है।

उत्तम पुरुष (फस्ट पर्सन) – 'अस्मद्' (मैं) शब्द के अहम्, आवाम्, वयम् से अस्मासु तक जितने रूप हैं, सब उत्तम पुरुष कहलाते हैं।

मध्यम पुरुष (सेकंड पर्सन) – 'युष्मद्' (तू) शब्द के त्वम्, युवाम्, यूयम् से युष्मासु तक जितने रूप हैं, मध्यम पुरुष कहलाते हैं।

प्रथम पुरुष (थर्ड पर्सन)  अस्मद् और - युष्मद् शब्दों को छोड़कर यह (इदम्), वह (तद्), राम, कृष्ण, देव, दानव, स्त्री, पुरुष, शिक्षक, छात्र, पुस्तक, पशु, पक्षी, कीट, पतंग, वृक्ष, पर्वत, नदी, उत्तम, नीच, पण्डित, मूर्ख आदि संसार के जितने शब्द हैं, प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष कहलाते हैं।

अभ्यास

1. पुरुष कितने हैं ?

2. प्रथम पुरुष और उत्तम पुरुष का एक-एक उदाहरण दें।

3. निम्नलिखित शब्दों में प्रथम पुरुष पर √ लगाएँ ।
वृक्ष, कृष्ण, अहम्, उत्तम, गुरु, यूयम्, नदी, भवान्, अस्मान्, हंस, शिष्य, मूर्ख

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