पंचायती राज

 पंचायती राज

पंचायती राज

पंचायतों और नगरपालिकाओं की बात कुछ नई नहीं है। देश के अनेक राज्यों में पंचायत विषयक कानून थे। नगरपालिकाएं, जिला परिषदें आदि थीं। किंतु ये संस्थाएं अधिक समय तक सफलतापूर्वक नहीं चल पाती थीं जिसके अनेक कारण थे।
अब इन संस्थाओं को संवैधानिक प्रतिष्ठा और संरक्षण मिल गया है। संविधान में कहा गया है कि राज्यों के विधानमंडल पंचायतों और नगरपालिकाओं आदि के लिए अपने कानून बनाएंगे। हरेक राज्य में गांव तथा जिला और दोनों के बीच के स्तर पर पंचायतें स्थापित की जाएंगी। जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, उनमें बीच के स्तर पर पंचायतों की आवश्यकता नहीं होगी। सभी पंचायतों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण प्राप्त होगा। पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष होगा। उनका अपना बजट होगा, कर लगाने की शक्ति होगी तथा उनकी अपने विषय और अधिकार क्षेत्रों की सूची होगी। पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों के लिए आर्थिक विकास की योजनाएं बना सकेंगी और उन्हें कार्यान्वित कर सकेंगी। पंचायतों के चुनाव कराने के लिए प्रत्येक राज्य में एक राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति होगी तथा हर पांचवें वर्ष पंचायतों की आर्थिक स्थिति का जायजा लेने के लिए वित्त आयोग बैठाया जाएगा।
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